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Assembly Elections 2026 BJP ने Piyush Goyal और Baijayant Panda को बनाया चुनाव प्रभारी

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी Assembly Elections 2026 को लेकर अपनी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने तमिलनाडु और असम विधानसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण चुनाव प्रभारी (Election In-Charge) नियुक्त किए हैं, जो राज्य में अभियान और संगठनात्मक रणनीति की जिम्मेदारी संभालेंगे।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026

बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का मुख्य प्रभारी (Chief Election In-Charge) नियुक्त किया है। उन्हें पार्टी के चुनाव अभियान की योजना बनाने और स्थानीय संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है।
सह-प्रभारी के रूप में Arjun Ram Meghwal और Murlidhar Mohol भी नियुक्त किए गए हैं।
तमिलनाडु में लंबे समय से द्रविड़ीय पार्टियों का दबदबा रहा है, इसलिए BJP के लिए यह चुनौतीपूर्ण राज्य है। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि पार्टी यहाँ अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी तैयारी में है।

असम विधानसभा चुनाव 2026

असम के लिए BJP ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सांसद Baijayant Panda को मुख्य चुनाव प्रभारी बनाया है। वे राज्य में पार्टी के चुनाव अभियान और संगठनात्मक गतिविधियों का नेतृत्व करेंगे।
सह-प्रभारी के रूप में Sunil Kumar Sharma और Darshana Jardosh को भी जिम्मेदारी दी गई है।
हालांकि असम में BJP सत्ता में है, लेकिन विपक्षी दलों की चुनौती लगातार बढ़ रही है। Baijayant Panda की नियुक्ति से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी चुनावी रणनीति को और मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नियुक्तियां

BJP की यह रणनीति बताती है कि पार्टी आगामी चुनावों के लिए संगठन और रणनीति दोनों को लेकर गंभीर है।

  • तमिलनाडु में पार्टी का लक्ष्य स्थानीय राजनीति और द्रविड़ीय पार्टियों से मुकाबला करना है।
  • असम में सत्ता में रहते हुए भी विपक्षी गठबंधन की चुनौती को ध्यान में रखते हुए चुनाव अभियान चलाना होगा।

इन नियुक्तियों से साफ है कि BJP अपने प्रमुख नेताओं के अनुभव और नेतृत्व का फायदा उठाकर चुनावों में पूरी ताकत के साथ उतरना चाहती है।

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Yukta

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BRICS

BRICS में Digital Payment का बड़ा प्लान, MSME कारोबारियों को मिलेगा Global Market का फायदा

दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह BRICS में कारोबार और भुगतान व्यवस्था को लेकर एक नई पहल पर काम चल रहा है। सदस्य देशों के बीच Digital Currency यानी CBDC और Fast Payment Systems को आपस में जोड़ने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। अगर यह व्यवस्था आगे बढ़ती है तो भारत समेत BRICS देशों के कारोबारियों के लिए दूसरे देशों में पैसा भेजना और प्राप्त करना पहले से आसान हो सकता है। सबसे ज्यादा उम्मीद छोटे कारोबारियों और MSME Exporters को लेकर है। सीमा पार व्यापार में भुगतान की जटिल प्रक्रिया और Finance की कमी छोटे कारोबारियों के लिए लंबे समय से बड़ी चुनौती रही है। नई व्यवस्था का मकसद इन्हीं अड़चनों को कम करना है। BRICS में Digital Payment को लेकर क्या तैयारी है? BRICS देशों के बीच फिलहाल किसी एक साझा Digital Currency को लॉन्च करने का फैसला नहीं हुआ है। इसके बजाय अलग-अलग देशों की Central Bank Digital Currencies (CBDCs) और उनके Fast Payment Networks को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक BRICS के सदस्य देशों के बीच Cross-Border Payments को सस्ता और तेज बनाने के विकल्पों पर काम किया जा रहा है। इसके लिए Payment Systems की Interoperability को लेकर भी चर्चा चल रही है। भारत के लिए इस पूरी व्यवस्था में UPI और Digital Rupee अहम भूमिका निभा सकते हैं। छोटे कारोबारियों को क्यों होगा फायदा? अंतरराष्ट्रीय कारोबार सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। देश के हजारों छोटे कारोबारी भी Export के जरिए दूसरे देशों में अपना सामान बेचते हैं। लेकिन छोटे कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल अक्सर Finance की होती है। कई बार बैंक से Loan लेने के लिए पर्याप्त संपत्ति या Collateral उपलब्ध नहीं होता। BRICS के Trade Agenda में MSME के लिए Credit Assessment को ज्यादा व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया है। इसमें कारोबारी की सिर्फ संपत्ति देखने के बजाय उसके Cash Flow, कारोबार की क्षमता और भुगतान रिकॉर्ड जैसे पहलुओं को भी महत्व देने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर कारोबारी को बिना किसी जांच के Loan मिल जाएगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि छोटे कारोबार की वास्तविक क्षमता को Credit Assessment में ज्यादा महत्व देने की कोशिश हो रही है। Invoice के बदले मिल सकता है Working Capital छोटे Exporters के लिए Invoice Discounting भी एक उपयोगी विकल्प बन सकता है। इसमें कारोबारी अपने बकाया Invoice के आधार पर Working Capital जुटा सकता है। मसलन, किसी छोटे Exporter ने विदेशी ग्राहक को माल भेज दिया लेकिन भुगतान 30 या 60 दिन बाद मिलना है। इस दौरान कारोबार चलाने के लिए पैसों की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे मामलों में Invoice आधारित Finance कारोबार के Cash Flow को बनाए रखने में मदद कर सकता है। UPI और Digital Rupee पर रहेंगी नजरें भारत ने Digital Payments के क्षेत्र में UPI के जरिए पहले ही मजबूत पहचान बनाई है। अब Digital Rupee (e₹) को भी धीरे-धीरे विकसित किया जा रहा है। ऐसे में अगर BRICS देशों के Fast Payment Systems और CBDCs के बीच बेहतर Connectivity बनती है, तो भविष्य में Cross-Border Transactions में मौजूदा जटिलताओं को कम किया जा सकता है। कारोबारियों के लिए इसका सीधा मतलब होगा—कम समय, कम लागत और भुगतान की बेहतर सुविधा। हालांकि यह बदलाव एक दिन में नहीं होगा। अलग-अलग देशों के Banking Rules, Currency Regulations, Data Protection और Cybersecurity Standards में काफी अंतर है। इन्हें एक-दूसरे के साथ जोड़ना बड़ी चुनौती होगी। Local Currency में Trade को भी बढ़ावा BRICS देशों में केवल Digital Payment ही चर्चा का विषय नहीं है। सदस्य देश Local Currency Settlement के विकल्पों को भी बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। भारत और रूस के बीच रुपये और रूबल में व्यापारिक भुगतान बढ़ना इसी दिशा में एक उदाहरण है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कारोबार में किसी एक प्रमुख मुद्रा पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना और सीधे भुगतान के विकल्प बढ़ाना है। हालांकि BRICS की अपनी कोई Common Currency अभी अस्तित्व में नहीं है। क्या BRICS की Common Digital Currency आएगी? यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर BRICS की कोई एक साझा Digital Currency लागू नहीं हुई है। मौजूदा कोशिश ज्यादा व्यावहारिक नजर आती है—अलग-अलग देशों की CBDC और Fast Payment Systems को जोड़ना, ताकि Cross-Border Payments आसान हो सकें। अगर यह मॉडल सफल होता है तो भविष्य में एक भारतीय कारोबारी BRICS के किसी दूसरे सदस्य देश के ग्राहक से भुगतान ज्यादा तेजी से हासिल कर सकता है। इससे छोटे Exporters के लिए नए बाजारों तक पहुंच बनाना आसान हो सकता है। MSME के लिए बदल सकता है कारोबार का तरीका BRICS देशों के Trade Agenda में MSME Finance और Global Value Chains को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। भारत के लिए यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि छोटे और मध्यम कारोबारी देश की Export Economy में बड़ी भूमिका निभाते हैं। बेहतर Credit Access, Invoice Finance और आसान Digital Payments अगर एक साथ आगे बढ़ते हैं तो छोटे कारोबारियों के सामने खड़ी कई वित्तीय बाधाएं कम हो सकती हैं। यानी आने वाले समय में किसी छोटे कारोबारी के लिए विदेश में कारोबार करने का मतलब सिर्फ बड़ा Investment या भारी संपत्ति दिखाना नहीं रह जाएगा। उसकी कमाई, Cash Flow और वास्तविक कारोबारी क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है। अभी इंतजार बाकी है BRICS की Digital Payment पहल निश्चित रूप से छोटे कारोबारियों के लिए उम्मीद जगाती है, लेकिन इसे लेकर अभी कई चरण पूरे होने बाकी हैं। तकनीकी ढांचे से लेकर देशों के नियमों तक कई मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। फिलहाल इतना साफ है कि BRICS देश Cross-Border Payments को आसान बनाने, Local Currency Trade बढ़ाने और MSME को बेहतर Financial Access देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अगर इन योजनाओं को जमीन पर सही तरीके से लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में छोटे भारतीय कारोबारियों के लिए BRICS देशों का बाजार पहले से कहीं ज्यादा सुलभ हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gondia

Maharashtra के Gondia में बड़ा Road Accident, गैस कटर से निकाले गए शव

महाराष्ट्र के गोंदिया (Gondia) जिले से मंगलवार को एक बेहद दर्दनाक Road Accident की खबर सामने आई है। गोंदिया-बालाघाट नेशनल हाईवे पर नागरा के पास तेज रफ्तार ट्रक और बोलेरो की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बोलेरो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। आमने-सामने हुई ट्रक और बोलेरो की टक्कर प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक ट्रक गोंदिया से बालाघाट की तरफ जा रहा था। इसी दौरान अमोरा के पास सामने से आ रही बोलेरो से उसकी जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोग मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंच गए। हादसे की तस्वीरें देखकर टक्कर की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। बोलेरो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। वाहन में फंसे लोगों को निकालने के लिए राहत-बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। गैस कटर की मदद से निकाले गए शव और घायल हादसे के बाद क्षतिग्रस्त बोलेरो में लोग फंस गए थे। उन्हें बाहर निकालने के लिए गैस कटर की मदद ली गई। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को वाहन से बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। मृतकों में बालाघाट के लोग शामिल प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोग मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इस खबर के सामने आने के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा है। हालांकि मृतकों की विस्तृत पहचान और अन्य जानकारी पुलिस की ओर से जांच के बाद स्पष्ट की जाएगी। Police ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू कराया। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर दोनों वाहनों की भिड़ंत किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल शुरुआती जानकारी में तेज रफ्तार को हादसे की एक वजह माना जा रहा है, लेकिन दुर्घटना का वास्तविक कारण पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। हादसे ने फिर उठाए Road Safety पर सवाल गोंदिया-बालाघाट मार्ग पर हुआ यह हादसा एक बार फिर हाईवे पर Road Safety को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने का खामियाजा कई बार सड़क पर मौजूद लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ता है। इस हादसे में भी कई परिवारों ने अपनों को खो दिया, जबकि घायल लोग अस्पताल में जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kota

Kota में 40 फीट ऊंचे पेड़ पर Leopard का Drama, 5 फायर के बाद हुआ सफल Rescue

राजस्थान के कोटा (Kota) में उस वक्त लोगों की नजरें एक पेड़ पर टिक गईं, जब करीब 40 फीट ऊंचे पेड़ पर Leopard (तेंदुआ) जा फंसा। तेंदुए को देखने के लिए मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित नीचे उतारने के लिए Rescue Operation शुरू किया। 40 फीट की ऊंचाई पर था तेंदुआ तेंदुआ काफी ऊंचाई पर पेड़ की शाखाओं के बीच बैठा था। ऐसे में उसे सामान्य तरीके से नीचे उतारना मुश्किल था। किसी अनहोनी से बचने के लिए वन विभाग की टीम ने पूरे इलाके को निगरानी में लिया और तेंदुए को सुरक्षित तरीके से काबू करने की तैयारी शुरू की। ट्रैंकुलाइज करने के लिए किए गए 5 प्रयास तेंदुए को शांत करने और सुरक्षित रेस्क्यू के लिए टीम ने Tranquilizer Gun का इस्तेमाल किया। नीचे से कुल 5 फायर किए गए। शुरुआती प्रयासों के बाद आखिरकार एक फायर तेंदुए को लग गया और उसका असर शुरू हुआ। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने बेहद सावधानी के साथ आगे की कार्रवाई की। तेंदुए को नियंत्रित करने के बाद उसे पेड़ से सुरक्षित नीचे उतारा गया। करीब 4 घंटे चला Rescue Operation तेंदुए को रेस्क्यू करने की पूरी प्रक्रिया में लगभग चार घंटे लगे। इस दौरान वन विभाग की टीम लगातार मौके पर मौजूद रही। ऑपरेशन के दौरान लोगों को भी सुरक्षित दूरी पर रखा गया, ताकि तेंदुआ घबराकर कोई अप्रत्याशित हरकत न करे। काफी इंतजार और मशक्कत के बाद आखिरकार रेस्क्यू टीम को सफलता मिली। तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। इसके साथ ही इलाके के लोगों ने भी राहत की सांस ली। लोगों में बना रहा कौतूहल 40 फीट ऊंचे पेड़ पर तेंदुए को देखने के लिए आसपास के लोग काफी देर तक मौके पर मौजूद रहे। वन विभाग की टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रेस्क्यू करना था। करीब चार घंटे की मेहनत के बाद टीम ने यह ऑपरेशन पूरा किया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi in Vadodara: Gen-Z के बीच पहुंचे पीएम मोदी, 6 हजार Young Professionals की मौजूदगी

PM Modi मंगलवार को गुजरात के वडोदरा पहुंचे, जहां उनका कार्यक्रम इस बार सामान्य राजनीतिक सभा से कुछ अलग नजर आया। यहां प्रधानमंत्री ने बड़ी संख्या में युवाओं और Young Professionals के साथ सीधा संवाद किया। कार्यक्रम में करीब 6 हजार युवा प्रोफेशनल्स और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। ‘NaMo for Viksit Bharat’ कार्यक्रम का केंद्र युवा रहे। Gen-Z से सीधे जुड़ने की कोशिश के साथ प्रधानमंत्री ने देश के विकास, नए अवसरों और युवाओं की भागीदारी जैसे मुद्दों पर बातचीत की। Youth के बीच PM Modi का अलग अंदाज वडोदरा के कार्यक्रम में युवाओं की मौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। यहां छात्र, स्टार्टअप से जुड़े युवा, प्रोफेशनल्स, उद्यमी, डॉक्टर, शिक्षक और दूसरे क्षेत्रों के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का माहौल किसी पारंपरिक रैली जैसा नहीं रखा गया। मंच और बैठने की व्यवस्था से लेकर प्रवेश तक में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। युवाओं को ध्यान में रखते हुए पूरा आयोजन ज्यादा इंटरैक्टिव रखने की कोशिश की गई। Digital Registration से लेकर QR Entry तक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई थी। प्रवेश को व्यवस्थित बनाने के लिए QR Code आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। रजिस्ट्रेशन को लेकर युवाओं में काफी उत्साह देखने को मिला। रिपोर्टों के मुताबिक, सीटें तेजी से भर गईं और बड़ी संख्या में लोगों को वेटिंग लिस्ट में जगह मिली। Viksit Bharat@2047 में Youth की भूमिका पर जोर प्रधानमंत्री मोदी के इस कार्यक्रम का एक बड़ा संदेश Viksit Bharat@2047 के लक्ष्य से जुड़ा है। देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में युवाओं की भूमिका को अहम माना जा रहा है। Gen-Z के साथ संवाद के दौरान टेक्नोलॉजी, Innovation, Startups, रोजगार और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को प्रमुखता मिलने की उम्मीद है। सरकार की योजनाओं और भविष्य की चुनौतियों के बीच युवा किस तरह अपनी भूमिका निभा सकते हैं, यह भी कार्यक्रम के केंद्र में रहा। ₹35 हजार करोड़ से ज्यादा के Projects भी अहम प्रधानमंत्री मोदी का गुजरात दौरा केवल युवा संवाद तक सीमित नहीं है। वडोदरा में कार्यक्रम के साथ गुजरात में ₹35 हजार करोड़ से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास भी प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में रेलवे, हाईवे और Western Dedicated Freight Corridor से जुड़े काम शामिल हैं। इनसे गुजरात में कनेक्टिविटी और माल ढुलाई के नेटवर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है। High-Tech अंदाज में तैयार हुआ कार्यक्रम कार्यक्रम को हाई-टेक बनाने पर भी खास ध्यान दिया गया। 4K कैमरों, लाइव प्रोडक्शन और आधुनिक विजुअल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। मंच की डिजाइन और कार्यक्रम की प्रस्तुति में भी युवाओं को ध्यान में रखा गया। यही वजह है कि वडोदरा का यह आयोजन सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम न होकर Youth Connect और Development Vision को साथ रखने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। वडोदरा के बाद नवसारी और मुंबई का दौरा प्रधानमंत्री के गुजरात दौरे में वडोदरा के अलावा नवसारी का कार्यक्रम भी शामिल है। इसके बाद वह मुंबई जाएंगे, जहां Global Fintech Fest 2026 में हिस्सा लेने का कार्यक्रम है। यानी प्रधानमंत्री का यह दौरा एक तरफ बड़े Infrastructure Projects से जुड़ा है, तो दूसरी तरफ युवाओं और नई अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों पर भी फोकस करता है। क्यों खास है Vadodara का ये कार्यक्रम? वडोदरा में Gen-Z और Young Professionals के साथ प्रधानमंत्री मोदी का सीधा संवाद इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि देश की युवा आबादी को विकास की अगली कहानी से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि प्रधानमंत्री युवाओं से बातचीत में किन मुद्दों को उठाते हैं और Viksit Bharat के लक्ष्य में Gen-Z के लिए किस तरह की भूमिका और अवसरों का खाका सामने रखते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi

Delhi PG Collapse के बाद सख्ती, 28 लाख Buildings के Survey पर उठे सवाल; MCD ने मांगी नई Report

दिल्ली (Delhi) के सत्य निकेतन में PG इमारत गिरने से हुए हादसे ने एक बार फिर राजधानी में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हादसे में 7 लोगों की मौत के बाद अब दिल्ली नगर निगम (MCD) ने शहर की इमारतों की Safety को लेकर सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। राजधानी में इमारतों की जांच कराई जाएगी और अधिकारियों से महज तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। इस फैसले के बाद दिल्ली के उन इलाकों पर खास नजर रहेगी, जहां बड़ी संख्या में PG, हॉस्टल और किराये के मकानों में लोग रहते हैं। प्रशासन का मकसद ऐसी इमारतों की पहचान करना है, जिनमें निर्माण या संरचना से जुड़ी कोई गंभीर समस्या हो सकती है। MCD ने अधिकारियों को दिए जांच के निर्देश सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने अपने सभी जोन के अधिकारियों को भवनों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र की इमारतों की स्थिति की जानकारी जुटाकर तीन दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपनी होगी। जांच के दौरान पुराने भवनों, अतिरिक्त निर्माण और ऐसी इमारतों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है, जहां बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं। अगर किसी भवन में गंभीर खामी मिलती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। 28 लाख Buildings के Survey पर उठे सवाल दिल्ली में पहले किए गए Building Survey के आंकड़े भी इस मामले को और गंभीर बनाते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 28 लाख इमारतों का सर्वे किया गया था, लेकिन इनमें केवल 19 Buildings को खतरनाक घोषित किया गया था। अब सत्य निकेतन हादसे के बाद इस सर्वे की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर इतनी बड़ी संख्या में इमारतों की जांच के बावजूद जोखिम वाली इमारतों की पहचान कितनी प्रभावी तरीके से हुई? यही सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय है। हालांकि, सामान्य भवन सर्वे और विस्तृत Structural Audit अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। किसी इमारत की मजबूती का सही आकलन करने के लिए कई मामलों में तकनीकी और विस्तृत जांच की जरूरत होती है। PG और Hostel Buildings भी रहेंगी Focus में दिल्ली में हजारों छात्र और नौकरीपेशा लोग PG और हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे में इन इमारतों की Safety सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो गई है। नई जांच में यह भी देखा जा सकता है कि भवन का निर्माण नियमों के मुताबिक हुआ है या नहीं, उसमें बाद में कोई अनधिकृत बदलाव तो नहीं किया गया और रहने वाले लोगों के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। Delhi High Court में भी मामला पहुंचा सत्य निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों और एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। PG में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और भवनों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी जवाब मांगा गया है। हादसे के बाद यह बहस तेज हो गई है कि प्रशासन को किसी इमारत के कमजोर होने का इंतजार करने के बजाय पहले ही उसकी खामियों को पहचानकर जरूरी कदम उठाने चाहिए। नई Report से सामने आएगी असली तस्वीर MCD की ओर से कराई जा रही नई जांच की रिपोर्ट अब बेहद अहम मानी जा रही है। तीन दिन में मिलने वाली रिपोर्ट से यह पता चल सकता है कि राजधानी में कितनी इमारतों को लेकर अतिरिक्त जांच या कार्रवाई की जरूरत है। सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली को एक जरूरी सवाल के सामने खड़ा कर दिया है—क्या शहर की लाखों इमारतों की Safety जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है, या जमीन पर भी उसकी सही निगरानी हो रही है? अब लोगों की नजर MCD की नई रिपोर्ट पर है। उम्मीद यही है कि इस बार जांच केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि जिन इमारतों में वास्तविक खतरा है, वहां समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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