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Kanpur Lamborghini Accident नकली ड्राइवर पेश करने की कोशिश नाकाम, आरोपी गिरफ्तार

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कानपुर (Kanpur) में हुए चर्चित Lamborghini Accident ने पूरे देश को झकझोर दिया है। रफ्तार, रसूख और जिम्मेदारी—इन तीन शब्दों के बीच फंसा यह मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है। वायरल वीडियो, नकली ड्राइवर पेश करने का आरोप और आखिरकार गिरफ्तारी… कानपुर लैंबोर्गिनी कांड लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

क्या है Kanpur Lamborghini Accident पूरा मामला?

8 फरवरी 2026 को कानपुर की वीआईपी रोड पर एक लग्जरी Lamborghini सुपरकार तेज रफ्तार में अनियंत्रित होकर कई वाहनों और राहगीरों से टकरा गई। हादसे में कम से कम छह लोग घायल हुए। स्थानीय लोगों के मुताबिक कार की रफ्तार बेहद तेज थी और टक्कर इतनी अचानक हुई कि संभलने का मौका ही नहीं मिला।

घायलों में कुछ लोग काम से लौट रहे थे, तो कुछ सड़क किनारे खड़े थे। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि शहर की सड़कों पर रफ्तार का रोमांच किस कीमत पर लिया जा रहा है?

वीडियो वायरल: कहानी ने लिया नया मोड़

हादसे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो तेजी से वायरल हुए। इन फुटेज में देखा गया कि:

  • एक युवक ड्राइविंग सीट पर मौजूद था।
  • हादसे के बाद कुछ लोग उसे कार से बाहर निकालते दिखाई दिए।
  • एक वीडियो में नंबर प्लेट हटाने की कोशिश जैसी गतिविधि भी नजर आई।

इन वीडियो के सामने आने के बाद मामला सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं रहा, बल्कि जांच और जवाबदेही का मुद्दा बन गया।

अरबपति का बेटा गिरफ्तार

जांच के दौरान सामने आया कि कार एक बड़े कारोबारी परिवार से जुड़ी है। आरोप है कि हादसे के समय कारोबारी का बेटा शिवम मिश्रा खुद गाड़ी चला रहा था। घटना के बाद वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आया, जिससे कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

करीब चार दिन बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मेडिकल जांच के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और लोगों को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया है।

नकली ड्राइवर पेश करने का आरोप

मामले में सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब परिवार की ओर से कहा गया कि हादसे के समय कार शिवम नहीं, बल्कि उनका ड्राइवर चला रहा था। एक व्यक्ति ने खुद को ड्राइवर बताते हुए जिम्मेदारी लेने की बात भी कही।

हालांकि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर इस दावे को खारिज कर दिया। जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध प्रमाणों के अनुसार ड्राइविंग सीट पर शिवम ही था।

बीमारी का दावा भी चर्चा में

परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि शिवम को मिर्गी (Epilepsy) की समस्या है और संभव है कि अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण हादसा हुआ हो। पुलिस ने इस दावे की भी जांच शुरू की है, लेकिन अभी तक इसे हादसे का आधिकारिक कारण नहीं माना गया है।

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Imran Khan

Imran Khan भारत छोड़ने के नोटिस पर विवाद, Akshay Kumar और Adnan Sami की Citizenship भी चर्चा में

बॉलीवुड में किसी अभिनेता की फिल्म हिट हो या फ्लॉप, उससे जुड़ी खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं। लेकिन जब बात नागरिकता की आती है, तो मामला थोड़ा अलग हो जाता है। अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस मिलने के बाद एक बार फिर अक्षय कुमार, अदनान सामी, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ की नागरिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। किसी कलाकार का भारत में जन्म लेना, यहां रहना या हिंदी फिल्मों में काम करना उसे अपने आप भारतीय नागरिक नहीं बना देता। वहीं, विदेशी नागरिकता रखने वाले व्यक्ति के भारत में रहने और काम करने के भी कुछ नियम हैं। ऐसे में समझना जरूरी है कि इमरान खान के मामले में क्या सामने आया है और भारत में Citizenship Rules आखिर क्या कहते हैं। Imran Khan को क्यों मिला भारत छोड़ने का नोटिस? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता इमरान खान (Imran Khan) को मुंबई पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का नोटिस दिया है। इमरान खान अमेरिकी नागरिक हैं और उनकी नागरिकता को लेकर यह मामला चर्चा में आया है। यह विवाद 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए गए थे। इस आंदोलन में इमरान खान की भागीदारी के बाद भाजपा नेता किरीट सोमैया ने उनकी विदेशी नागरिकता का हवाला देते हुए अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद इमरान खान को नोटिस जारी किए जाने की खबर सामने आई। हालांकि, किसी व्यक्ति को नोटिस मिलना और उसके खिलाफ किसी आरोप का अंतिम रूप से साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। इस मामले में नोटिस के आधार और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखना जरूरी होगा। भारत में Citizenship Rules क्या कहते हैं? नागरिकता मुख्य रूप से Citizenship Act, 1955 के तहत तय होती है। कानून में जन्म, वंश, पंजीकरण और देशीयकरण यानी Naturalisation के जरिए नागरिकता प्राप्त करने के प्रावधान हैं। हर रास्ते के लिए अलग-अलग शर्तें निर्धारित हैं। भारत की नागरिकता से जुड़े 5 जरूरी नियम: नागरिकता से जुड़े नियमों की आधिकारिक जानकारी भारत सरकार के Indian Citizenship Online Portal पर उपलब्ध है। OCI Card क्या है और इसके धारकों को कौन-से अधिकार मिलते हैं? OCI का पूरा नाम Overseas Citizen of India है। कई लोग इसे दोहरी नागरिकता समझ लेते हैं, लेकिन यह भारतीय नागरिकता नहीं है। OCI कार्डधारक विदेशी नागरिक ही रहते हैं और उनके पास किसी दूसरे देश का पासपोर्ट होता है। कार्ड के जरिए पात्र लोगों को भारत आने-जाने और रहने सहित कई सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि, वे भारतीय नागरिकों की तरह चुनाव में मतदान नहीं कर सकते और न ही संसद या राज्य विधानसभाओं का चुनाव लड़ सकते हैं। कार्डधारकों पर विदेशी नागरिकों और इमिग्रेशन से जुड़े लागू नियम भी प्रभाव डालते हैं। किसी व्यक्ति के मामले में कार्रवाई की वैधता संबंधित कानून और परिस्थितियों के आधार पर तय होती है। क्या विदेशी नागरिक भारत में Protest कर सकते हैं? इमरान खान के मामले के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विदेशी नागरिक या OCI कार्डधारक भारत में राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने जैसे अधिकार भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं, जो कानून के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं। विदेशी नागरिकों को ये अधिकार उसी रूप में प्राप्त नहीं हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी प्रदर्शन में विदेशी नागरिक की मौजूदगी अपने आप गैरकानूनी हो जाती है। मामले की परिस्थितियां, लागू इमिग्रेशन नियम, संबंधित गतिविधि और प्रशासन की कार्रवाई के आधार को समझना जरूरी है। इमरान खान के मामले में भी नोटिस जारी करने का आधार और आगे की कानूनी प्रक्रिया अहम होगी। Citizenship Controversy: इन मामलों से क्या समझें? इमरान खान, अक्षय कुमार, अदनान सामी, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ की नागरिकता से जुड़े मामले अलग-अलग हैं। इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस मिलने की खबर सामने आई है, अक्षय कुमार को 2023 में भारतीय नागरिकता मिली, जबकि अदनान सामी ने 2016 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। दूसरी ओर, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ के पास ब्रिटिश नागरिकता है। इन सभी मामलों में एक बात समान है—किसी व्यक्ति की लोकप्रियता, जन्मस्थान या भारत में काम करने से उसकी नागरिकता अपने आप तय नहीं होती। इसके लिए कानूनी प्रावधान और आधिकारिक दस्तावेज मायने रखते हैं। इसलिए नागरिकता से जुड़े किसी भी विवाद को समझते समय सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बजाय तथ्यों, आधिकारिक जानकारी और लागू कानूनों पर भरोसा करना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 1400 अंक उछला, 74 हजार के पार; Nifty में भी तूफानी तेजी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में आज 15 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 1,400 अंक उछलकर 74,000 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 400 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों के बीच उत्साह देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और IT व Auto सेक्टर के शेयरों में खरीदारी को इस उछाल की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच आई इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, बाजार की यह बढ़त आगे कितनी टिकती है, इस पर घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों का असर बना रहेगा। Sensex Today: 74 हजार के पार पहुंचा सेंसेक्स शेयर बाजार में खरीदारी बढ़ने से सेंसेक्स में करीब 1,400 अंकों की तेजी आई और यह 74,000 के स्तर के पार निकल गया। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली। वहीं, निफ्टी भी लगभग 400 अंक चढ़ गया। शेयर बाजार में इस तरह की तेजी निवेशकों की धारणा में सुधार का संकेत दे सकती है। हालांकि, बाजार की वास्तविक स्थिति समझने के लिए यह देखना भी जरूरी है कि तेजी कितने शेयरों में रही और कारोबार के अंत तक बाजार अपनी बढ़त बनाए रखता है या नहीं। Crude Oil Price: कच्चा तेल सस्ता होने से क्यों मिली राहत? कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने से देश के आयात खर्च पर दबाव कम हो सकता है। इसका फायदा परिवहन, विमानन और तेल पर निर्भर दूसरे कारोबारों को भी मिल सकता है। साथ ही, तेल की कीमतों में लंबे समय तक नरमी रहने पर महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर तुरंत सभी कंपनियों या आम लोगों तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं है। इसका प्रभाव रुपये की विनिमय दर, सरकारी करों और घरेलू कीमतों जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। IT और Auto Stocks में खरीदारी से बाजार को सपोर्ट आज की तेजी में IT और Auto सेक्टर के शेयरों में खरीदारी अहम रही। इन सेक्टरों की बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़त का असर सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों पर पड़ सकता है। आईटी सेक्टर पर निवेशकों की नजर वैश्विक मांग, अमेरिकी बाजारों और कंपनियों के वित्तीय नतीजों के कारण रहती है। वहीं, ऑटो सेक्टर में बिक्री, त्योहारी मांग, कच्चे माल की लागत और ब्याज दरें कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। इन सेक्टरों में आई खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, लेकिन निवेशकों को किसी भी कंपनी का शेयर चुनने से पहले उसके कारोबार और वित्तीय स्थिति का आकलन करना चाहिए। Share Market में तेजी के बाद निवेशक क्या करें? सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी तेजी देखकर निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बाजार में निवेश करने का सही समय आ गया है। लेकिन केवल एक दिन की तेजी के आधार पर फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले इन बातों पर ध्यान देना उपयोगी रहेगा: आगे कैसी रहेगी Stock Market की चाल? आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा कई कारकों से प्रभावित हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली और कंपनियों के तिमाही नतीजे इसमें अहम भूमिका निभाएंगे। अगर सकारात्मक संकेत बने रहते हैं, तो बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर किसी प्रतिकूल घटनाक्रम या निवेशकों की मुनाफावसूली से बाजार में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, 15 अक्टूबर को सेंसेक्स में करीब 1,400 अंकों और निफ्टी में लगभग 400 अंकों की तेजी शेयर बाजार के लिए बड़ा उछाल है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और IT व Auto शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि यह तेजी आगे भी जारी रहती है या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव शुरू होता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJI Surya Kant

CJI Surya Kant राहुल गांधी के मार्च पर बोले- कोर्ट के बाहर क्या हो रहा, सब पता है

राहुल गांधी के मार्च और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अदालत को बाहर दिए जा रहे बयानों और अंदर चल रही कार्यवाही, दोनों की जानकारी है। न्यायपालिका किसी दबाव में काम नहीं करती। राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की ओर से 12 अक्टूबर को निकाले गए मार्च के बाद यह मामला चर्चा में है। दूसरी ओर, SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग से लगातार सवाल पूछ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों से वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर सबकी नजर है। CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान क्या कहा? सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को किसी तरह के दबाव या धमकी से प्रभावित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अदालत को पता है कि बाहर क्या कहा जा रहा है और कोर्ट के भीतर क्या हो रहा है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब सुप्रीम कोर्ट के बाहर हुए राजनीतिक मार्च और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विवाद जारी है। अदालत ने इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। हालांकि, नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी नेता के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं। अंतिम निर्णय सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा। Rahul Gandhi March: 12 अक्टूबर को क्या हुआ था? 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। इस दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विरोध जताया गया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से नहीं हटना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी अपनी मांगें रखीं। विपक्ष इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया को चुनाव व्यवस्था का जरूरी हिस्सा बताया जाता है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की CJI से मुलाकात क्यों नहीं हुई? मार्च से पहले राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CJI सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। वे SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखना चाहते थे। हालांकि, CJI ने मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने संकेत दिया कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उचित कानूनी माध्यम से अदालत के सामने रखा जाना चाहिए। इसका मतलब यह है कि यदि किसी पक्ष को चुनाव प्रक्रिया या मतदाता सूची को लेकर शिकायत है, तो वह संबंधित नियमों के तहत याचिका दाखिल कर सकता है। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है। SIR Controversy: मतदाता सूची से नाम हटाने पर क्यों है विवाद? SIR को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता सूची को अपडेट करते समय वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। विपक्ष का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित और अन्य कारणों से अपात्र हो चुके मतदाताओं के रिकॉर्ड को अपडेट करना है। ऐसे में पारदर्शिता, उचित सत्यापन और शिकायतों के समय पर समाधान की भूमिका अहम हो जाती है। किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं होने पर उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है, इसलिए इस प्रक्रिया में सावधानी बरतना जरूरी है। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट में SIR से संबंधित याचिकाओं पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले पर विचार करेगी। राहुल गांधी के मार्च से जुड़े विवाद में भी अदालत की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, अदालत की गरिमा और मतदाता सूची की पारदर्शिता इस पूरे मामले के प्रमुख पहलू बने हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में कमजोर मानसून से जल संकट का खतरा, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज

इंदौर। मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून के कारण आने वाले महीनों में जल संकट की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार अब तक केवल 23 इंच वर्षा दर्ज की गई है। हालात को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने की मांग की है। जल संकट से निपटने की रणनीति तैयार करने के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और इंदौर नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की जा रही है। 40 लाख आबादी, रोजाना 750 से 800 एमएलडी पानी की मांग इंदौर की आबादी करीब 40 लाख है। शहर में घरेलू जरूरतों के लिए प्रतिदिन लगभग 620 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है। औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य उपयोगों को शामिल करने पर कुल मांग बढ़कर 750 से 800 एमएलडी तक पहुंच जाती है। वर्ष 2008 में भी शहर में करीब 20 इंच बारिश हुई थी, जिसके कारण जल संकट की स्थिति बनी थी। अब 18 साल बाद कम बारिश ने एक बार फिर गर्मियों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। डीमार्ट के पास नर्मदा की पाइपलाइन फूटी, अंडरपास बंद कम बारिश के बीच पानी की बर्बादी से जुड़ी समस्या भी सामने आई है। गुरुवार सुबह बंगाली चौराहे से बायपास के बीच डीमार्ट के पास नर्मदा जलापूर्ति की पाइपलाइन फूट गई। पाइपलाइन से तेज दबाव के साथ पानी निकलने लगा, जिससे सड़क पर जाम लग गया। पानी भरने के कारण अंडरपास भी बंद करना पड़ा। भूजल दोहन 90 प्रतिशत के करीब विशेषज्ञों के मुताबिक, इंदौर की बड़ी आबादी नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर है। इसके जरिए शहर को प्रतिदिन करीब 440 एमएलडी पानी मिलता है। हालांकि, लीकेज और अन्य कारणों से लगभग 22 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल हैं। इसके अलावा नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल और हाइड्रेंट भी हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखे जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत है। इसमें और वृद्धि होने पर जल संकट की स्थिति गंभीर हो सकती है। पिछली गर्मियों में 700 टैंकरों से पहुंचाना पड़ा था पानी पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगभग 700 टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति करनी पड़ी थी। इस बार तालाबों में कम जलभराव, भूजल का लगातार दोहन और जलापूर्ति नेटवर्क में पानी की बर्बादी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियां बन सकती हैं। ऐसे में शहर की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहतर जल प्रबंधन, लीकेज पर नियंत्रण और उपलब्ध जल स्रोतों का प्रभावी उपयोग अहम होगा।
Punjab

Punjab Protest: झोटा हत्याकांड पर सड़कों पर उतरे लोग, SHO सस्पेंड; DSP पर कार्रवाई की मांग

Punjab में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद लोगों में गुस्सा है। इसी के विरोध में गुरुवार, 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया। राज्य के कई शहरों में बाजार बंद रहे और कुछ जगहों पर स्कूल-कॉलेज भी नहीं खुले। बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर प्रदर्शनकारियों ने जाम लगाया। वहीं, झोटा का परिवार न्याय की मांग पर अड़ा है और उसने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। दूसरी ओर, संबंधित SHO को सस्पेंड किए जाने की खबर सामने आई है। परिवार और प्रदर्शनकारी अब मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और नशे के अवैध कारोबार पर सख्ती की मांग कर रहे हैं। Punjab Bandh Today: बाजार बंद, सड़कों पर उतरे लोग परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने 15 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक पंजाब बंद का आह्वान किया था। इस बंद को विभिन्न राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिला। मानसा, बठिंडा, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर समेत कई शहरों में बंद का असर देखने को मिला। कई बाजारों में दुकानें नहीं खुलीं, जबकि कुछ इलाकों में निजी स्कूल और कॉलेज भी बंद रहे। बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं को चालू रखने की अपील की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करने और जांच में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की। बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर जाम, यातायात प्रभावित पंजाब बंद के दौरान बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित हुआ। कई जगहों पर लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। कुछ अन्य मार्गों पर भी जाम की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक परिवार को न्याय का भरोसा नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है। बंद के कारण आम लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार करने से किया इनकार परविंदर सिंह झोटा का शव मानसा के सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। परिवार ने मांग की है कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। इसके साथ ही पोस्टमॉर्टम PGIMER चंडीगढ़ में कराने की मांग भी उठाई गई है। झोटा के पिता भीम सिंह का कहना है कि परिवार को न्याय चाहिए और हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के DGP गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। परिवार का विरोध केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। वह यह जानना चाहता है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी थी। फिलहाल अंतिम संस्कार को लेकर परिवार का रुख सख्त बना हुआ है। Parvinder Singh Jhota Murder Case: मुख्य आरोपी गिरफ्तार परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह नशे के खिलाफ अभियान चलाते थे और कथित तौर पर मेडिकल स्टोरों पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के मुद्दे उठाते थे। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, घटना से पहले झोटा का मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार के साथ विवाद हुआ था। इसी दौरान गोली चलने से झोटा की मौत हो गई। घटना के समय वह कथित तौर पर फेसबुक लाइव भी कर रहे थे। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। अब पुलिस हत्या के पीछे की परिस्थितियों और विवाद के कारणों की जांच कर रही है। मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका होने या साजिश से जुड़े पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। SHO सस्पेंड, DSP पर कार्रवाई की मांग हत्या के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में मानसा की संबंधित SHO बिएंत कौर को सस्पेंड किए जाने की खबर सामने आई है। वहीं, DSP और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। परिवार और प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच हो और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। DSP के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश और अन्य विभागीय कदमों की अंतिम स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। फिलहाल इस मामले में पुलिस की जवाबदेही भी विरोध का एक प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। आरोपी की दुकान में तोड़फोड़, घर के हिस्से पर बुलडोजर कार्रवाई झोटा की हत्या के बाद मानसा में आक्रोशित लोगों ने आरोपी की मेडिकल दुकान में तोड़फोड़ की। इसके बाद दुकान को नुकसान पहुंचने और आग लगाए जाने की खबरें सामने आईं। प्रशासन ने आरोपी के घर के एक हिस्से को भी गिराया। इन घटनाओं के बीच इलाके में तनाव बढ़ गया और पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी पड़ी। प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने की चुनौती है। CM भगवंत मान ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं को देखा जाएगा और जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, विपक्षी दलों ने राज्य में कानून-व्यवस्था और नशे के अवैध कारोबार को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। झोटा हत्याकांड ने पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी फिर चर्चा में ला दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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