भारत के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के अधिकारों और धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) से जुड़े एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोग ही SC का दर्जा और उससे जुड़े लाभ (Reservation और Benefits) का दावा कर सकते हैं।
मुख्य बातें: धर्म परिवर्तन और SC Status
- SC दर्जा केवल Hindu, Sikh और Buddhist तक सीमित
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनुसूचित जाति का दर्जा उन लोगों तक ही सीमित है जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म का पालन करते हैं। यह संविधान (Scheduled Castes) आदेश, 1950 पर आधारित है। - धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) करने वाले खो देंगे SC Status
अगर कोई व्यक्ति, जो पहले SC समुदाय का सदस्य था, ईसाई धर्म, इस्लाम या किसी अन्य धर्म में परिवर्तित होता है, तो उसका SC दर्जा स्वतः समाप्त हो जाएगा। इसका मतलब है कि अब कोई भी धर्म बदलकर SC के लाभ का दावा नहीं कर सकता। - SC दर्जा पाने की शर्त
अनुसूचित जाति का दर्जा पाने के लिए व्यक्ति को हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म का पालन करना अनिवार्य है। अन्य धर्म अपनाने पर SC दर्जा नहीं मिलेगा।
कानूनी और सामाजिक पृष्ठभूमि
- संविधान (Scheduled Castes) आदेश, 1950 में अनुसूचित जाति का दर्जा हिंदू धर्म से जुड़े सामाजिक उत्पीड़न के आधार पर तय किया गया था।
- 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म के अनुयायियों को भी इसमें शामिल किया गया।
- अन्य धर्म में धर्मांतरण करने वाले लोग SC दर्जा के दावे के योग्य नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट का तर्क
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय उन याचिकाओं के खिलाफ सुनाया, जिनमें धर्म परिवर्तन करने वाले लोग SC/ST एक्ट के तहत आरक्षण और सुरक्षा के लाभ लेने का प्रयास कर रहे थे। कोर्ट ने कहा कि SC दर्जा ऐतिहासिक और संविधानिक आधार पर ही दिया गया है, और धर्म परिवर्तन करने से यह स्वतः समाप्त हो जाता है।
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