मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में जनजातीय कार्य विभाग से रिटायर हुए संतोष शुक्ला अब गंभीर विवादों में घिर गए हैं। ट्रांसफर-पोस्टिंग में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद उनके द्वारा जारी आदेशों को निरस्त कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है।
61 ट्रांसफर आदेश रद्द, जांच शुरू
प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के हस्तक्षेप के बाद शुक्ला द्वारा जारी सभी 61 ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एक आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई है। शिकायतों में लेन-देन, अवैध वसूली और नियमों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, शुक्ला ने सभी आरोपों को गलत बताते हुए अपने फैसलों को नियमों के तहत बताया है।
रिटायरमेंट से पहले बनाया “प्लान”
सूत्रों के मुताबिक, संतोष शुक्ला ने रिटायरमेंट के अंतिम दिनों में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश जारी किए। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने बाद किसे जिम्मेदारी मिलेगी, इसका भी प्लान तैयार कर लिया था।
बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने एक चहेते शिक्षक को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज दिलाने के लिए नोटशीट तक बढ़ाई थी।
कलेक्टर ने बदला फैसला
यह मामला जब कलेक्टर ऋषव गुप्ता के पास पहुंचा, तो उन्होंने सीनियरिटी के आधार पर नीरज पाराशर का नाम आगे बढ़ाया।
लेकिन शुक्ला और पाराशर के बीच पहले से विवाद था। शुक्ला नहीं चाहते थे कि पाराशर को चार्ज मिले। इसके बाद मामला मंत्री विजय शाह तक पहुंचा।
आखिरकार विवाद बढ़ने पर कलेक्टर ने तीसरे विकल्प के रूप में डिप्टी कलेक्टर बजरंग बहादुर को असिस्टेंट कमिश्नर का प्रभार सौंप दिया।

एक शिक्षक पर 4-4 पदों की जिम्मेदारी
जिस शिक्षक नारायणसिंह को आगे बढ़ाया गया था, वह पहले से ही तीन स्कूलों के प्राचार्य और बीईओ (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।
- शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आशापुर के प्राचार्य
- माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर रजूर
- माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर आशापुर
- साथ ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी का प्रभार
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक व्यक्ति एक साथ चार-चार जिम्मेदारियां कैसे निभा सकता है।
जांच अधिकारी को ही मिला प्रभार!
दिलचस्प बात यह भी है कि जिन्हें असिस्टेंट कमिश्नर का प्रभार दिया गया, वही पहले विभागीय शिकायतों की जांच कमेटी का नेतृत्व कर चुके हैं। उनकी पुरानी जांच रिपोर्ट अभी तक लंबित है, जिससे नए फैसले पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब क्या आगे?
पूरा मामला अब जांच के दायरे में है। रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि आरोप कितने सही हैं और संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी।
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