CM Mohan Yadav ने मध्य प्रदेश के निगम, बोर्ड और मंडल अध्यक्षों को साफ संदेश दिया है कि सरकारी कामकाज में फिजूलखर्ची बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने सभी पदाधिकारियों से सादगी, अनुशासन और सेवा भावना के साथ काम करने की अपील की है।
भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सीएम मोहन यादव ने कहा कि जनता के पैसे का सही इस्तेमाल होना चाहिए और अनावश्यक खर्चों पर कड़ा नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने कहा कि पद प्रतिष्ठा दिखाने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की सेवा का जिम्मा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी अध्यक्ष और पदाधिकारी आत्मानुशासन अपनाएं और सरकारी संसाधनों का उपयोग जिम्मेदारी से करें। हाल के दिनों में प्रदेश में VIP कल्चर और बड़ी वाहन रैलियों को लेकर सरकार पहले ही सख्त रुख दिखा चुकी है।
सरकार का मानना है कि सादगीपूर्ण कार्यशैली से जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाता है और प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ती है। यही वजह है कि अब निगम, मंडल और बोर्डों में भी खर्चों की समीक्षा और जवाबदेही पर जोर दिया जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव की “सख्त प्रशासन और अनुशासन” वाली कार्यशैली के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार चाहती है कि जनता से जुड़े सभी संस्थानों में दिखावे की राजनीति के बजाय विकास और जनसेवा को प्राथमिकता मिले।
मध्य प्रदेश में हाल ही में कई निगम और मंडलों में नई नियुक्तियां हुई हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह संदेश नए पदाधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि सरकार सादगी और जवाबदेही के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी।
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