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UP Politics Big Shock: सपा-बसपा को झटका, 51 Leaders ने छोड़ी Party और Join किया SBSP

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य की प्रमुख पार्टियों—Samajwadi Party और Bahujan Samaj Party—को उस समय तगड़ा झटका लगा जब 51 नेताओं ने एक साथ दोनों दलों से इस्तीफा देकर Suheldev Bharatiya Samaj Party का दामन थाम लिया

आखिर क्यों हुआ इतना बड़ा दल-बदल?

सूत्रों के अनुसार, कई जिलों से जुड़े सपा और बसपा के स्थानीय नेता लंबे समय से संगठनात्मक फैसलों और टिकट बंटवारे को लेकर असंतुष्ट थे। धीरे-धीरे यह नाराजगी बढ़ती गई और आखिरकार एक साथ 51 नेताओं ने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया।

इसके बाद सभी नेताओं ने SBSP में शामिल होकर नई राजनीतिक शुरुआत की।

SBSP को मिला बड़ा फायदा

इस सामूहिक शामिल होने को SBSP के लिए एक बड़ी राजनीतिक बढ़त माना जा रहा है। खासकर ग्रामीण और जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

सपा-बसपा के लिए क्या संदेश?

इस घटनाक्रम को राजनीतिक विश्लेषक एक “वेक-अप कॉल” के रूप में देख रहे हैं:

  • जमीनी स्तर पर संगठन कमजोर होने के संकेत
  • स्थानीय नेताओं में बढ़ती नाराजगी
  • चुनाव से पहले नेतृत्व पर दबाव
  • वोट बैंक पर संभावित असर

यूपी की सियासत में नया समीकरण

उत्तर प्रदेश में पहले से ही राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते रहे हैं। ऐसे में 51 नेताओं का एक साथ दल बदलना आने वाले चुनावों में नई रणनीतियों और गठबंधनों का संकेत भी माना जा रहा है।

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Yukta

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भोपाल में कांग्रेस का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान: जीतू पटवारी ने पेपर लीक और भर्ती घोटालों पर सरकार को घेरा

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में पार्टी नेताओं ने पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और विधायक आरिफ मसूद सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इंदौर से शुरू हुई कांग्रेस की साइक्लोथॉन का समापन भोपाल में सभा के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। जीतू पटवारी ने पेपर लीक को लेकर सरकार पर साधा निशाना पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में 90 बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले से लेकर लोक सेवा आयोग (PSC) की परीक्षाओं तक कई विवाद सामने आए और ऐसा कोई बड़ा परीक्षा आयोजन नहीं हुआ जो पूरी तरह विवादों से मुक्त रहा हो। पटवारी ने दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा किए गए अध्ययन में यह सामने आया कि पेपर लीक मामलों के पीछे भाजपा से जुड़े लोगों की भूमिका रही है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं के बावजूद उन्होंने अब तक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है। आरिफ मसूद का RSS पर हमला कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर कई छात्रों ने अपने भविष्य के लिए संघर्ष किया और कुछ ने अपनी जान भी गंवाई। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. भीमराव आंबेडकर की शिक्षा और विचारधारा से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को शुरू से ही असहजता रही है। हरीश चौधरी बोले- शिक्षा संस्थाओं पर दबाव कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं और राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि CBSE, NEET और अन्य शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक प्रभाव पड़ा है। साथ ही उन्होंने परीक्षा प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं का भी आरोप लगाया। उमंग सिंघार ने युवाओं से किया बदलाव का आह्वान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि किसी भी देश में परिवर्तन लाने में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। सिंघार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार नियमित सरकारी भर्तियों के बजाय आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में सरकारी भर्तियों का वार्षिक कैलेंडर जारी करने की मांग उठाएगी। साइक्लोथॉन के समापन पर ट्रैफिक जाम इंदौर से भोपाल पहुंची लगभग 200 किलोमीटर लंबी साइक्लोथॉन के समापन पर हमीदिया अस्पताल के सामने सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम के दौरान रॉयल मार्केट रोड पर यातायात प्रभावित रहा और बैरिकेडिंग के कारण कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बनी। इस दौरान एक एम्बुलेंस भी ट्रैफिक में फंस गई, जबकि दूसरी एम्बुलेंस को अस्पताल परिसर में प्रवेश के लिए कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा। बाद में पुलिस ने रास्ता खुलवाकर एम्बुलेंस को अस्पताल तक पहुंचाया। नमाज के दौरान पटवारी ने रोका भाषण सभा के दौरान पास की मस्जिद में नमाज अदा की जा रही थी। नमाज की आवाज सुनकर जीतू पटवारी ने कुछ देर के लिए अपना संबोधन रोक दिया। नमाज समाप्त होने के बाद उन्होंने फिर से भाषण शुरू किया। इसके बाद पटवारी ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि कार्यक्रम की अनुमति अस्पताल के समीप जानबूझकर दी गई, जबकि पहले ऐसे आयोजन अन्य स्थानों पर कराए जाते रहे हैं। कार्यक्रम में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह नहीं पहुंचे सभा में उमंग सिंघार, हरीश चौधरी, आरिफ मसूद सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं ने नारेबाजी की। हालांकि, मीडिया द्वारा जब कुछ प्रतिभागियों से नीट परीक्षा और साइक्लोथॉन के उद्देश्य को लेकर सवाल पूछे गए, तो कई प्रतिभागी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस दौरान विधायक आरिफ मसूद कार्यकर्ताओं से शांत और व्यवस्थित रहने की अपील करते भी नजर आए। नोट: कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर कई आरोप लगाए। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मध्य प्रदेश और देश की राजनीति से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

खंडवा में 8.43 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन, मंच पर महापौर के स्वागत को लेकर दिखी भाजपा की गुटबाजी

खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में बुधवार को 8 करोड़ 43 लाख रुपये की लागत से होने वाले विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया। ये सभी कार्य विधायक के लिए आरक्षित विशेष मुख्यमंत्री अधोसंरचना मद से स्वीकृत किए गए हैं। इनमें रामेश्वर कुंड और पदमकुंड के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण सहित कुल 11 विकास परियोजनाएं शामिल हैं। हालांकि, कार्यक्रम विकास कार्यों से अधिक मंच पर हुई राजनीतिक हलचल को लेकर चर्चा में रहा। नगर निगम के मंच पर शुरुआत में महापौर अमृता यादव का स्वागत नहीं किए जाने पर एमआईसी सदस्य ने विरोध जताया, जिसके बाद उन्हें बुके देकर सम्मानित किया गया। विकास कार्यों के श्रेय को लेकर अलग-अलग दावे कार्यक्रम के दौरान महापौर अमृता यादव ने विकास कार्यों का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को दिया। वहीं, विधायक कंचन तनवे ने कहा कि 8.43 करोड़ रुपये के इन कार्यों को उनकी विशेष निधि से स्वीकृति दिलाई गई, जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूरी प्रदान की। इस दौरान मंच पर जिले के प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, कैबिनेट मंत्री विजय शाह सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में भाजपा के भीतर गुटबाजी की चर्चा भी देखने को मिली। इन विकास कार्यों का हुआ भूमिपूजन भूमिपूजन किए गए प्रमुख कार्यों में शामिल हैं— सांसद समर्थक पार्षद के वार्ड में हुआ आयोजन जिस रामेश्वर वार्ड में कार्यक्रम आयोजित किया गया, वहां भाजपा पार्षद काजल यादव निर्वाचित हैं। उनके प्रतिनिधि प्रदीप यादव भाजपा मंडल अध्यक्ष होने के साथ-साथ सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के समर्थक माने जाते हैं। कार्यक्रम के दौरान सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने मुकेश तनवे की सराहना करते हुए उन्हें “सुपर विधायक” बताया। महापौर के स्वागत को लेकर बना चर्चा का विषय कार्यक्रम के दौरान जब मंच पर महापौर अमृता यादव का स्वागत नहीं किया गया, तो एमआईसी सदस्य वरुण बावरे ने इसका विरोध जताया। इसके बाद भाजपा पार्षद डिंपल चौरसिया ने महापौर का बुके देकर स्वागत किया। यह घटनाक्रम पूरे कार्यक्रम में चर्चा का विषय बना रहा। मध्य प्रदेश और देश की ताजा राजनीतिक एवं विकास संबंधी खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

ICC ने बदला वनडे और टी-20 वर्ल्ड कप का फॉर्मेट, 2027 ODI और 2028 T20 वर्ल्ड कप नए प्रारूप में होंगे

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 2027 वनडे वर्ल्ड कप और 2028 टी-20 वर्ल्ड कप के प्रारूप (Format) में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। अब वनडे वर्ल्ड कप थ्री-स्टेज फॉर्मेट में खेला जाएगा, जबकि टी-20 वर्ल्ड कप में सुपर-8 की जगह सुपर-10 चरण होगा। इसके अलावा टी-20 वर्ल्ड कप के लिए नया क्वालिफिकेशन सिस्टम भी लागू किया गया है। इन बदलावों को एडिनबर्ग में आयोजित ICC की वार्षिक आम बैठक (AGM) में मंजूरी दी गई। 2027 वनडे वर्ल्ड कप में रहेगा नया थ्री-स्टेज फॉर्मेट 2027 वनडे वर्ल्ड कप में 14 टीमें हिस्सा लेंगी, लेकिन टूर्नामेंट का प्रारूप पूरी तरह बदला जाएगा। पहला चरण: सुपर सीरीज टूर्नामेंट की शुरुआत में रैंकिंग में 12वें, 13वें और 14वें स्थान पर रहने वाली तीन टीमें राउंड-रॉबिन मुकाबले खेलेंगी। इनमें से केवल एक टीम अगले चरण में पहुंचेगी। दूसरा चरण: ग्रुप स्टेज इसके बाद कुल 12 टीमें दो समूहों (6-6 टीमों) में बांटी जाएंगी। इस चरण में 30 मुकाबले खेले जाएंगे। दोनों ग्रुप से शीर्ष तीन-तीन टीमें और चौथे स्थान पर रहने वाली दोनों टीमों में से बेहतर प्रदर्शन करने वाली एक टीम अगले दौर में पहुंचेगी। तीसरा चरण: सुपर-7 इस चरण में कुल 7 टीमें राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में एक-दूसरे के खिलाफ 21 मुकाबले खेलेंगी। इसके बाद शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। दोनों विजेता टीमें फाइनल खेलेंगी। 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए टीमें कैसे होंगी तय? कुल 14 टीमों में शामिल होंगी— हालांकि तीसरे मेजबान नामीबिया को भी सीधे प्रवेश नहीं मिलेगा और उसे क्वालिफायर खेलना होगा। पुराने फॉर्मेट से क्या बदला? पहले वर्ल्ड कप में 7-7 टीमों के दो ग्रुप होते थे। दोनों ग्रुप की शीर्ष तीन टीमें सुपर सिक्स में पहुंचती थीं और वहीं से सेमीफाइनलिस्ट तय होते थे। अब सुपर सिक्स की जगह सुपर-7 चरण खेला जाएगा, जहां सातों टीमें एक-दूसरे से मुकाबला करेंगी। 2028 टी-20 वर्ल्ड कप में होगा सुपर-10 ICC ने टी-20 वर्ल्ड कप के प्रारूप में भी बड़ा बदलाव किया है। ग्रुप स्टेज हर ग्रुप की शीर्ष दो टीमें अगले चरण में पहुंचेंगी। सुपर-10 दूसरे चरण में 10 टीमें दो समूहों (5-5 टीमों) में खेलेंगी। इस चरण में कुल 20 मुकाबले होंगे। सेमीफाइनल की नई राह दोनों ग्रुप की शीर्ष टीम सीधे सेमीफाइनल में पहुंचेगी। बाकी दो स्थानों के लिए दो एलिमिनेटर मुकाबले खेले जाएंगे— दोनों एलिमिनेटर के विजेता सेमीफाइनल में पहुंचेंगे। इसके बाद विजेता टीमें फाइनल खेलेंगी। पहले क्या था फॉर्मेट? अब तक टी-20 वर्ल्ड कप में 5-5 टीमों के चार ग्रुप होते थे। हर ग्रुप की शीर्ष दो टीमें सुपर-8 में पहुंचती थीं। वहां से दो समूह बनते थे और शीर्ष दो-दो टीमें सीधे सेमीफाइनल में पहुंच जाती थीं। 2028 टी-20 वर्ल्ड कप का नया क्वालिफिकेशन सिस्टम ICC ने 2028 टी-20 वर्ल्ड कप के लिए नया क्वालिफिकेशन ढांचा भी तय किया है। ICC का मानना है कि नए प्रारूप से टूर्नामेंट अधिक प्रतिस्पर्धी होगा और नॉकआउट चरण तक पहुंचने की लड़ाई और रोमांचक बनेगी। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक होने का दावा, संवेदनशील डेटा डार्क वेब पर होने की आशंका

नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक होने का दावा सामने आया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ‘वर्ल्ड लीक्स’ (World Leaks) नामक हैकर समूह ने डार्क वेब पर इस परियोजना से जुड़े बड़ी संख्या में दस्तावेज अपलोड करने का दावा किया है। दावा किए गए दस्तावेजों में प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की सूची, कंट्रोल रूम से संबंधित जानकारी, निरीक्षण रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी दस्तावेज शामिल हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित सर्वर मई 2026 में हैक हुआ था और जून में डेटा लीक होने का दावा किया गया। यह मामला अब सार्वजनिक रूप से सामने आया है। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने स्वीकार किया है कि उसके ठेके से जुड़े कुछ डेटा जिस थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा (Yotta) के सर्वर पर संग्रहीत थे, उसमें साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटना हुई है। कंपनी ने इसकी जानकारी संबंधित सरकारी एजेंसियों को दे दी है। कैसे हुआ कथित डेटा लीक? उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटनाक्रम इस प्रकार है— फिलहाल न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) इस पूरे मामले की जांच और समीक्षा कर रहे हैं। कितना गंभीर हो सकता है यह मामला? परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डार्क वेब पर साझा किए गए दस्तावेज वास्तविक और प्रमाणिक हैं, तो इनके जरिए कोई भी हमलावर प्लांट के सपोर्ट सिस्टम, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जानकारी हासिल कर सकता है। इससे भविष्य में साइबर हमलों या अन्य सुरक्षा जोखिमों की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, अभी तक संबंधित एजेंसियों ने सार्वजनिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि लीक हुए सभी दस्तावेज वास्तविक हैं या नहीं। 2019 में भी हुआ था साइबर हमला यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट साइबर हमले की खबरों में आया हो। वर्ष 2019 में भी प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। उस समय NPCIL ने स्पष्ट किया था कि संयंत्र की संचालन प्रणाली (Operational System) प्रभावित नहीं हुई थी। जानिए इस मामले से जुड़े अहम सवाल और जवाब डार्क वेब क्या है? डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे सामान्य ब्राउज़र जैसे Chrome, Edge या Safari से एक्सेस नहीं किया जा सकता। इसे देखने के लिए विशेष ब्राउज़र, जैसे Tor Browser, की आवश्यकता होती है। सप्लाई चेन अटैक क्या होता है? जब साइबर अपराधी किसी संस्था पर सीधे हमला करने के बजाय उसके ठेकेदार, सॉफ्टवेयर प्रदाता या डेटा सेंटर को निशाना बनाते हैं, तो इसे सप्लाई चेन अटैक कहा जाता है। इसके जरिए मुख्य संस्था तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। हैकर्स डेटा डार्क वेब पर क्यों डालते हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे फिरौती मांगना, डेटा बेचना, जासूसी करना, अपनी हैकिंग क्षमता का प्रदर्शन करना या भविष्य के साइबर हमलों के लिए जानकारी साझा करना जैसे उद्देश्य हो सकते हैं। कंट्रोल रूम का लेआउट लीक होने से क्या खतरा है? यदि किसी संवेदनशील संस्थान के कंट्रोल रूम या तकनीकी ढांचे की जानकारी सार्वजनिक हो जाए, तो संभावित हमलावर सुरक्षा व्यवस्था और महत्वपूर्ण प्रणालियों की बेहतर समझ हासिल कर सकते हैं। इससे भविष्य में साइबर हमलों या घुसपैठ की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। भारत में न्यूक्लियर प्लांट की साइबर सुरक्षा कौन देखता है? भारत में परमाणु संयंत्रों की साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी NPCIL, CERT-In, NCIIPC और AERB जैसी संस्थाओं के पास होती है, जो समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और निगरानी करती हैं। नोट: फिलहाल दस्तावेजों के लीक होने और उनकी प्रामाणिकता को लेकर जांच जारी है। संबंधित एजेंसियों ने मामले की समीक्षा शुरू कर दी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। देश-दुनिया, तकनीक और सुरक्षा से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें: deshharpal.com
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रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की बड़ी तैयारी, भारत-चीन समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव

डेस्क | देशहरपल अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट में एक नया बिल पेश किया गया है, जिसमें भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस बिल का उद्देश्य रूस की तेल आय को कम करना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आर्थिक क्षमता को कमजोर करना बताया गया है। बिल के तहत केवल टैरिफ ही नहीं, बल्कि रूस के ऊर्जा, वित्तीय और रक्षा क्षेत्र पर भी नए प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ का सुझाव था, जिसे बाद में घटाकर 100% कर दिया गया। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर बढ़ेगा दबाव यदि यह बिल कानून बन जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा क्योंकि वह रूस से तेल खरीद रहा है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि इससे रूस की कमाई घटेगी और उस पर युद्ध रोकने का दबाव बढ़ेगा। यूरोपीय देशों को मिलेगी राहत बिल में 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट देने का प्रावधान है। अमेरिका का कहना है कि ये देश रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और लगातार अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उन देशों के लिए है जो अभी भी रूस के ऊर्जा कारोबार को आर्थिक सहारा दे रहे हैं। दोनों दलों का समर्थन इस प्रस्ताव को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों का समर्थन मिला है। अमेरिकी राजनीति में ऐसे विधेयक को बाइपार्टिसन बिल कहा जाता है। हालांकि, इसे कानून बनने के लिए अभी सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) से मंजूरी और फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर जरूरी होंगे। ग्राहम की पहल, ट्रम्प का समर्थन यह बिल सबसे पहले रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अप्रैल 2025 में पेश किया था। 11 जुलाई को ग्राहम के निधन से पहले उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बिल को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। व्हाइट हाउस में ट्रम्प ने भी कहा कि यह ग्राहम के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है और इसके कानून बनने की अच्छी संभावना है। अमेरिका रूस पर इतना सख्त क्यों? अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com

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