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West Bengal Deport Plan: कोर्ट नहीं अब सीधे BSF के हवाले होंगे अवैध प्रवासी, जानें पूरी डिटेल

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West Bengal में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को लेकर राज्य सरकार की कार्रवाई एक बार फिर सुर्खियों में है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार ने अवैध घुसपैठियों की पहचान और उनके डिपोर्टेशन (deportation) की प्रक्रिया को तेज करने के लिए नई रणनीति लागू की है, जिसे “Detect, Delete, Deport” अभियान के नाम से जाना जा रहा है।

यह कदम राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया को और सख्त बनाने के उद्देश्य से उठाया गया बताया जा रहा है।

क्या है नया सिस्टम?

नई व्यवस्था के तहत अगर राज्य में कोई संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी या रोहिंग्या नागरिक पकड़ा जाता है, तो:

  • उसे लंबी कोर्ट प्रक्रिया में भेजने के बजाय
  • सीधे Border Security Force (BSF) को सौंपा जाएगा
  • BSF उसे भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित आउटपोस्ट के जरिए वापस भेजने की प्रक्रिया संभालेगा

सरकार का कहना है कि इससे डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पहले से काफी तेज और सरल हो जाएगी।

“Detect, Delete, Deport” अभियान का मतलब

राज्य सरकार की इस पूरी रणनीति को तीन हिस्सों में समझा जा रहा है:

Detect (पहचान)

अवैध प्रवासियों की पहचान करना और रिकॉर्ड तैयार करना।

Delete (हटाना)

उनके नाम सरकारी और संबंधित रिकॉर्ड्स से हटाना।

Deport (वापस भेजना)

उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत देश से बाहर भेजना।

प्रक्रिया में क्या बड़ा बदलाव हुआ?

नई व्यवस्था के बाद:

  • पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सीधे संदिग्ध लोगों को BSF को सौंप रही हैं
  • कोर्ट में लंबी सुनवाई की प्रक्रिया को कम करने पर जोर दिया गया है
  • BSF उन्हें बॉर्डर के जरिए बांग्लादेश वापस भेजने की जिम्मेदारी निभाएगा

इस बदलाव को प्रशासनिक स्तर पर “फास्ट ट्रैक डिपोर्टेशन मॉडल” भी कहा जा रहा है।

सरकार का पक्ष क्या है?

राज्य सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य:

  • अवैध घुसपैठ पर सख्त नियंत्रण
  • सीमा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना
  • कोर्ट और जेलों पर बढ़ते बोझ को कम करना
  • डिपोर्टेशन प्रक्रिया को तेजी से पूरा करना

सरकार इसे एक जरूरी सुरक्षा सुधार के रूप में देख रही है।

राजनीतिक बहस भी तेज

इस नीति को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी बहस छिड़ गई है।

  • समर्थन करने वाले इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं
  • जबकि आलोचक इसे मानवाधिकार और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा मुद्दा मान रहे हैं
  • “होल्डिंग सेंटर” और हिरासत व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं

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Yukta

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Sapna Choudhary

Sapna Choudhary घरेलू विवाद के बाद सपना चौधरी ने छोड़ा ससुराल, Court ने वीर साहू पर लगाई रोक

हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री की चर्चित डांसर और सिंगर सपना चौधरी (Sapna Choudhary) एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर खबरों में हैं। इस बार मामला उनके और पति वीर साहू के रिश्ते में बढ़ते विवाद का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सपना चौधरी ने पति पर घरेलू हिंसा और मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला दिल्ली की द्वारका महिला कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने सपना को अंतरिम सुरक्षा देते हुए वीर साहू के उनसे मिलने और संपर्क करने पर रोक लगा दी है। शादी के कुछ साल बाद रिश्ते में आई दरार सपना चौधरी और वीर साहू ने साल 2020 में लव मैरिज की थी। दोनों ने काफी समय तक अपनी शादी को निजी रखा था। बाद में बेटे के जन्म के बाद उन्होंने अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया। फैंस के बीच यह जोड़ी काफी लोकप्रिय मानी जाती थी, लेकिन अब दोनों के रिश्ते में तनाव खुलकर सामने आ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार सपना ने कोर्ट में बताया कि पिछले कुछ समय से उनके साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना हो रही थी। कई बार बहस और विवाद इतने बढ़ गए कि उन्हें अपने बच्चों के साथ ससुराल छोड़कर अलग रहना पड़ा। कोर्ट ने वीर साहू को दिया सख्त निर्देश द्वारका महिला कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वीर साहू को सपना चौधरी से किसी भी तरह संपर्क करने से मना किया है। अदालत ने यह भी कहा है कि वे सपना के घर, शूटिंग लोकेशन और कार्यस्थल के आसपास नहीं जाएंगे। कोर्ट ने स्थानीय पुलिस और प्रोटेक्शन ऑफिसर को भी सपना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि सपना की तरफ से मेडिकल रिपोर्ट, तस्वीरें और कुछ रिकॉर्डिंग्स भी अदालत में पेश की गईं, जिनके आधार पर कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश जारी किया। फिल्म रिलीज से पहले बढ़ा विवाद यह पूरा विवाद उस समय सामने आया है जब सपना चौधरी अपनी अपकमिंग फिल्म ‘मोमाकू’ को लेकर चर्चा में हैं। उनके वकील ने अदालत में आशंका जताई थी कि सार्वजनिक कार्यक्रमों या फिल्म प्रीमियर के दौरान कोई विवाद हो सकता है। इसके बाद कोर्ट ने तुरंत सुरक्षा आदेश जारी किया। सोशल मीडिया पर फैंस हुए हैरान सपना चौधरी और वीर साहू की जोड़ी को सोशल Media पर काफी पसंद किया जाता था। ऐसे में इस खबर के सामने आने के बाद फैंस भी हैरान हैं। कई लोग सपना के समर्थन में नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे मामले में अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार करने की बात कह रहे हैं। फिलहाल यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है और अगली सुनवाई जुलाई में हो सकती है। अब सभी की नजरें इस हाई-प्रोफाइल केस पर टिकी हुई हैं।
Sensex

Sensex-Nifty Today: बाजार में हरियाली, IT और FMCG शेयरों ने पकड़ी रफ्तार

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शानदार तेजी देखने को मिली। सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स (Sensex) करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 74,400 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी (Nifty) भी लगभग 150 अंक मजबूत होकर कारोबार करता नजर आया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत हुआ है। आज सबसे ज्यादा खरीदारी IT और FMCG सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली। ग्लोबल मार्केट से मिले पॉजिटिव संकेतों और विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को मजबूती देने का काम किया। IT Stocks में लौटी रौनक बीते कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव झेल रहे IT शेयरों में आज अच्छी तेजी दर्ज की गई। कई बड़ी टेक कंपनियों के शेयर हरे निशान में खुले और दिनभर मजबूती के साथ कारोबार करते रहे। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिकी बाजारों में मजबूती और टेक सेक्टर में बेहतर ग्रोथ की उम्मीद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। यही वजह रही कि IT शेयरों में जमकर खरीदारी देखने को मिली। FMCG कंपनियों को भी मिला सपोर्ट IT के अलावा FMCG सेक्टर ने भी बाजार को मजबूत सहारा दिया। घरेलू मांग में सुधार और आने वाले फेस्टिव सीजन को देखते हुए निवेशकों ने FMCG कंपनियों में पैसा लगाया। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में बढ़ती खपत और महंगाई में थोड़ी राहत FMCG सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में भी तेजी बाजार की इस रैली में बैंकिंग और ऑटो शेयरों ने भी योगदान दिया। हालांकि मेटल और फार्मा सेक्टर में कारोबार थोड़ा मिला-जुला रहा। शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक विदेशी निवेशकों का भरोसा बना रहा तो आने वाले दिनों में बाजार और मजबूती दिखा सकता है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल बाजार का सेंटीमेंट पॉजिटिव बना हुआ है, लेकिन निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर ग्लोबल मार्केट का सपोर्ट जारी रहता है तो आने वाले कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
कांग्रेस

Bhopal Protest चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर RSS Dress टांगकर कांग्रेस का विरोध

राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है। कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने पर बड़ा सवाल उठाया है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती गई और विपक्षी उम्मीदवारों को जानबूझकर निशाना बनाया गया। इसी मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल आज केंद्रीय चुनाव आयोग (CEC) से मुलाकात करने वाला है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में चुनाव सबसे अहम प्रक्रिया होती है, लेकिन अगर उसी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगें तो लोगों का भरोसा कमजोर होता है। पार्टी अब चुनाव आयोग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेगी। Bhopal में विरोध प्रदर्शन से बढ़ा राजनीतिक माहौल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भी इस मुद्दे को लेकर जोरदार विरोध देखने को मिला। चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और वहां RSS की ड्रेस टांगकर अपना विरोध जताया। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज हो गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाया जा रहा है। वहीं भाजपा ने इस प्रदर्शन को गलत बताते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक हार को छिपाने के लिए अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है। नामांकन खारिज होने पर कांग्रेस के सवाल कांग्रेस का दावा है कि तकनीकी कारणों का हवाला देकर उनके उम्मीदवारों के नामांकन रद्द किए गए, जबकि दूसरी तरफ कुछ मामलों में नियमों को नजरअंदाज किया गया। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे चुनाव आयोग को सभी जरूरी दस्तावेज और तथ्यों के साथ अपनी शिकायत सौंपेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर चुनाव आयोग इस मामले में हस्तक्षेप करता है तो राज्यसभा चुनाव की तस्वीर बदल सकती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा असर डाल सकता है। चुनाव आयोग की बैठक पर टिकी निगाहें अब सभी की नजर कांग्रेस नेताओं और CEC के बीच होने वाली बैठक पर है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद चुनाव आयोग की तरफ से कोई बड़ा फैसला या प्रतिक्रिया सामने आ सकती है। राज्यसभा चुनाव का यह विवाद फिलहाल सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि निष्पक्ष चुनाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi

Delhi Hotel Fire Mystery: कर्मचारी के नाम License, मालिक पर बढ़ा Suspense

Delhi में हुए होटल आग हादसे की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब पता चला है कि जिस होटल में आग लगी, उसका लाइसेंस असली मालिक के नाम पर नहीं बल्कि एक कर्मचारी के नाम पर जारी किया गया था। इस जानकारी के सामने आते ही पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हादसे के बाद पुलिस, फायर विभाग और नगर निगम लगातार होटल से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। वहीं होटल के अकाउंटेंट के बयान ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। अकाउंटेंट बोला- आग में जल गए सारे जरूरी कागजात जांच के दौरान होटल के अकाउंटेंट ने दावा किया कि आग लगने के बाद होटल से जुड़े सभी अहम दस्तावेज जलकर राख हो गए। उसने पुलिस को बताया कि घटना के समय वह होटल में मौजूद नहीं था और मेट्रो से दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में घूम रहा था। हालांकि पुलिस सिर्फ बयान पर भरोसा नहीं कर रही। अधिकारियों ने उसकी मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। जांच टीम को शक है कि कुछ जरूरी दस्तावेज पहले ही हटाए जा चुके थे। License कर्मचारी के नाम, असली मालिक कौन? सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर होटल का संचालन कौन कर रहा था। जांच में सामने आया कि होटल का आधिकारिक लाइसेंस एक कर्मचारी के नाम पर था। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि कानूनी जिम्मेदारियों और कार्रवाई से बचने के लिए यह तरीका अपनाया गया हो सकता है। अब पुलिस होटल के वास्तविक मालिक और उससे जुड़े कारोबारियों की पहचान करने में जुटी है। कई वित्तीय रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। Fire Safety को लेकर भी बड़ा खुलासा हादसे के बाद होटल की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि होटल में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था। कई जगहों पर आपातकालीन निकास और सुरक्षा उपकरणों की कमी पाई गई। फायर विभाग अब होटल की फायर एनओसी, सुरक्षा प्रमाणपत्र और अन्य सरकारी मंजूरियों की जांच कर रहा है। अगर लापरवाही साबित होती है तो होटल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। दिल्ली में शुरू हुआ बड़ा Checking Campaign इस घटना के बाद दिल्ली प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। राजधानी के कई होटल, गेस्ट हाउस और कमर्शियल बिल्डिंग्स की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जिन संस्थानों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी मिलेगी, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होगी। दिल्ली होटल आग कांड अब सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम में मौजूद लापरवाही और नियमों की अनदेखी की बड़ी कहानी बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस केस में और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sushmita Dev

Mamata Banerjee को एक और झटका, Rajya Sabha सांसद Sushmita Dev ने छोड़ा पद

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद और ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सुष्मिता देव (Sushmita Dev) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने न सिर्फ पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की चर्चाओं को हवा दी है, बल्कि विपक्ष को भी TMC पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। बीते कुछ दिनों से पार्टी के अंदर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। ऐसे में सुष्मिता देव का इस्तीफा TMC के लिए एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। लगातार इस्तीफों से बढ़ी TMC की परेशानी सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय भी TMC से दूरी बना चुके हैं। एक हफ्ते के भीतर दो बड़े नेताओं का पार्टी छोड़ना ममता बनर्जी के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव और संगठनात्मक बदलावों के बाद पार्टी के अंदर कई नेताओं में नाराजगी बढ़ी है। हालांकि पार्टी की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। कांग्रेस से TMC तक का सफर सुष्मिता देव लंबे समय तक कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रही हैं। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष मोहन देव की बेटी हैं और असम की राजनीति में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। साल 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर TMC जॉइन की थी। पार्टी ने उन्हें पूर्वोत्तर राज्यों में संगठन मजबूत करने की अहम जिम्मेदारी भी दी थी। राज्यसभा में भी वह TMC की सक्रिय और मुखर सांसदों में शामिल थीं। इस्तीफे के पीछे क्या है वजह? हालांकि सुष्मिता देव ने अपने इस्तीफे की स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के अंदर बढ़ती गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर असहमति इसके पीछे की बड़ी वजह हो सकती है। कुछ राजनीतिक जानकार इसे आने वाले समय में TMC के अंदर बड़े बदलावों का संकेत भी मान रहे हैं। विपक्ष को मिला हमला बोलने का मौका सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद भाजपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने TMC पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा और यही वजह है कि नेता लगातार किनारा कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सुष्मिता देव आगे कौन-सा राजनीतिक कदम उठाती हैं और TMC इस बढ़ते संकट से कैसे निपटती है। बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल सुष्मिता देव का इस्तीफा सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर से जोड़कर भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और ज्यादा चर्चा में रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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