पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ते असंतोष की चर्चा जोरों पर है। पार्टी से दो विधायकों को बाहर किए जाने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में नई पार्टी या अलग गुट के गठन की अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा यहां तक पहुंच गई है कि कुछ नाराज नेता “असली तृणमूल” (Asli Trinamool) के नाम से नया राजनीतिक मंच तैयार कर सकते हैं।
हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
दो विधायकों के निष्कासन से बढ़ी हलचल
TMC ने हाल ही में अपने विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया। पार्टी का कहना है कि दोनों नेता संगठनात्मक अनुशासन का पालन नहीं कर रहे थे और लगातार ऐसे कदम उठा रहे थे जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा था।
वहीं निष्कासित नेताओं का आरोप है कि पार्टी के भीतर अपनी बात रखने की गुंजाइश लगातार कम होती जा रही है। उनका कहना है कि कुछ मुद्दों पर सवाल उठाने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया।
Signature Forgery Case बना विवाद की जड़
पूरे मामले की शुरुआत कथित सिग्नेचर फोर्जरी (Signature Forgery) विवाद से मानी जा रही है। विधानसभा से जुड़े कुछ दस्तावेजों में हस्ताक्षरों की कथित गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए गए थे। इस मामले ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया।
जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं और राजनीतिक हलकों में इसे TMC के अंदरूनी संघर्ष का बड़ा कारण माना जा रहा है।
‘Asli Trinamool’ की चर्चा ने बढ़ाई बेचैनी
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से नाराज कुछ नेता और कार्यकर्ता एक नए मंच के गठन पर विचार कर रहे हैं। इसी वजह से “असली तृणमूल” नाम चर्चा में आया है।
हालांकि किसी भी नेता ने सार्वजनिक रूप से नई पार्टी बनाने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और बयानबाजी ने अटकलों को और मजबूत कर दिया है। यदि ऐसा होता है तो यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।
ममता बनर्जी ने दिया स्पष्ट संदेश
बढ़ती अटकलों के बीच ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि पार्टी अनुशासन से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि TMC की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता हैं और संगठन किसी भी व्यक्ति से बड़ा है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि कुछ नेताओं की नाराजगी से संगठन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा और TMC पहले की तरह मजबूती से काम करती रहेगी।
2026 चुनाव से पहले बढ़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर कई स्तरों पर असंतोष सामने आया है। ऐसे में यदि यह नाराजगी बढ़ती है तो आने वाले चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल TMC में औपचारिक टूट की स्थिति नहीं है, लेकिन जिस तरह से घटनाक्रम आगे बढ़ रहे हैं, उसने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है।
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