देश की बड़ी IT कंपनी TCS से जुड़े कथित धर्मांतरण मामले ने अब नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया है। मामले की पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उस पर धीरे-धीरे मानसिक दबाव बनाया गया और धर्म बदलने के लिए लगातार समझाया गया।
पीड़िता का दावा है कि उसे पाकिस्तान के मौलवियों के वीडियो दिखाए जाते थे और कहा जाता था कि “भजन सुनना और मंदिर जाना छोड़ दो, अल्लाह सारे गुनाह माफ कर देंगे।” इस बयान के सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।
दोस्ती से शुरू हुई बात, फिर बदलने लगा व्यवहार
पीड़िता के मुताबिक शुरुआत में सबकुछ सामान्य था। बातचीत दोस्ती से शुरू हुई, लेकिन कुछ समय बाद धार्मिक बातें ज्यादा होने लगीं।
उसने बताया कि उसे इस्लाम से जुड़े वीडियो, भाषण और मैसेज भेजे जाते थे। धीरे-धीरे उसे हिंदू परंपराओं से दूरी बनाने की सलाह दी जाने लगी। पीड़िता का कहना है कि यह सब लगातार इस तरह किया गया कि वह मानसिक रूप से दबाव महसूस करने लगी।
‘मंदिर मत जाओ’ जैसी बातें कही गईं
पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे कई बार कहा गया कि मंदिर जाना और भजन सुनना गलत है। उसे समझाया गया कि अगर वह इस्लाम अपनाती है तो उसके सारे गुनाह माफ हो जाएंगे।
उसके अनुसार, धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने के लिए कुछ विदेशी मौलवियों के वीडियो भी दिखाए गए। यही वजह है कि अब यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि बड़े सामाजिक मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस जुटी डिजिटल सबूत खंगालने में
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया मैसेज और वीडियो लिंक की जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से मामले की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले डिजिटल सबूतों और दोनों पक्षों के बयान को ध्यान से जांचा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस केस को लेकर इंटरनेट पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक कट्टरता से जोड़ रहे हैं, जबकि कई यूजर्स निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो चुकी है। कई नेताओं ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
धर्मांतरण कानून पर फिर उठे सवाल
घटना के बाद एक बार फिर देश में धर्मांतरण कानून और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति पर धर्म बदलने के लिए दबाव बनाया जाता है, तो यह कानून के दायरे में अपराध माना जा सकता है।
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