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Monsoon 2026: Satellite तस्वीरों में गायब हुए मानसूनी बादल, MP-राजस्थान समेत 16 राज्यों में बारिश का इंतजार

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Monsoon 2026 : देशभर में लोग भीषण गर्मी और उमस से परेशान हैं, लेकिन मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ती नजर आ रही है। सैटेलाइट तस्वीरों में भारत के ऊपर मानसूनी बादल काफी कम दिखाई दे रहे हैं, जिससे कई राज्यों में बारिश का इंतजार लंबा हो गया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 4 जून से 15 जून के बीच देश में सामान्य से करीब 64% कम बारिश दर्ज की गई है।

मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ समेत करीब 16 राज्यों में लोग बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कई इलाकों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और उमस भरी गर्मी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।

क्यों कमजोर पड़ा मानसून?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में फिलहाल कोई मजबूत सिस्टम सक्रिय नहीं है। इसी वजह से मानसूनी हवाओं की गति धीमी हो गई है। सैटेलाइट इमेज में भी देश के बड़े हिस्से में बादलों की कमी साफ नजर आ रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मौसम में बदलाव हो सकता है। यदि समुद्र में नया सिस्टम बनता है तो मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है और कई राज्यों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

Manya

manyajadoun42@gmail.com

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CJP

SIR Controversy जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे CJP नेता, आशुतोष रांका और सौरव दास हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर मंगलवार, 13 अक्टूबर को एक बार फिर तनाव की स्थिति बनी। CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। दोनों नेता वहां प्रदर्शन करने पहुंचे थे। खास बात यह है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर पाबंदियां लागू होने के बावजूद CJP नेताओं ने पीछे हटने के बजाय इसी जगह पर अपनी बात रखने का फैसला किया। यह पूरा मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विरोध से जुड़ा है। CJP के नेताओं का कहना है कि वे अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से उठाना चाहते हैं। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन से संबंधित आदेशों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक जानकारी जरूरी है। जंतर-मंतर पहुंचे CJP नेता, पुलिस ने लिया हिरासत में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आशुतोष रांका और सौरव दास मंगलवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। यहां प्रदर्शन की अनुमति को लेकर पाबंदियां लागू थीं। इसी दौरान पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया। CJP नेताओं का रुख है कि वे अपनी मांगों को लेकर इसी जगह पर प्रदर्शन करना चाहते हैं। पार्टी की ओर से विरोध जारी रखने की बात कही गई है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और सार्वजनिक स्थानों पर विरोध दर्ज कराने के अधिकार से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, हिरासत में लिए गए नेताओं की मौजूदा स्थिति और पुलिस की आगे की कार्रवाई को लेकर ताजा आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। Jantar Mantar पर Protest Ban क्यों बना मुद्दा? जंतर-मंतर दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का एक जाना-पहचाना केंद्र रहा है। यहां अलग-अलग राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने कई मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई है। इसलिए इस जगह पर प्रदर्शन से जुड़ी पाबंदियां लगने की खबर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। CJP नेताओं ने पाबंदियों के बीच भी जंतर-मंतर पर पहुंचकर प्रदर्शन करने का फैसला किया। दूसरी ओर, पुलिस की कार्रवाई के पीछे अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़े नियम बताए जा रहे हैं। इस मामले में यह जानना अहम है कि संबंधित आदेश किस तारीख से लागू हुआ, उसमें किन गतिविधियों पर रोक लगाई गई और क्या किसी तरह की अनुमति का विकल्प उपलब्ध है। इन सवालों का जवाब संबंधित सरकारी आदेश और प्रशासन के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट होगा। Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग, SIR पर क्या है विवाद? CJP का विरोध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। पार्टी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) यानी SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। प्रदर्शनकारियों की चिंता है कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी मुद्दे पर विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया के दौरान नाम हटने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इसलिए इस मुद्दे पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों, संबंधित आदेशों और आपत्तियों की स्थिति को देखना जरूरी है। पहले भी हिरासत में लिए गए थे CJP नेता जंतर-मंतर पर ताजा कार्रवाई से पहले भी CJP नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर आई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ आशुतोष रांका और सौरव दास को भी हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उनकी रिहाई की खबर सामने आई। अब एक बार फिर आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लिए जाने से CJP के प्रदर्शन और प्रशासन के बीच टकराव का मुद्दा चर्चा में है। आगे क्या होगा? फिलहाल, इस मामले में तीन बातें अहम हैं—हिरासत में लिए गए नेताओं की स्थिति, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर लागू आदेश और CJP की आगे की रणनीति। एक तरफ प्रशासन को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमों का पालन कराना होता है, तो दूसरी तरफ शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

भोपाल में गरबा महोत्सव के दौरान बदलेगा ट्रैफिक, 13 से 17 अक्टूबर तक लागू रहेंगे डायवर्जन

भेल दशहरा मैदान में 13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव को लेकर शहर की यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। नगरीय यातायात पुलिस ने कार्यक्रम में आने वाले लोगों और आम वाहन चालकों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए हैं। यह व्यवस्था प्रतिदिन शाम 6 बजे से यातायात के दबाव के अनुसार लागू होगी। इन रास्तों से गुजर सकेंगे वाहन 1. महात्मा गांधी चौराहे से ISBT जाने के लिए महात्मा गांधी चौराहे से कैरियर कॉलेज की ओर आने वाले वाहन गेट नंबर-6, गुलाब उद्यान तिराहा और कस्तूरबा अस्पताल के रास्ते ISBT व चेतक ब्रिज की ओर जा सकेंगे। 2. MP नगर से अवधपुरी जाने के लिए MP नगर थाना चौराहे से डॉ. भीमराव आंबेडकर फ्लाईओवर, RRL तिराहा और एम्स अस्पताल के सामने से होते हुए चार लेन सड़क के रास्ते अवधपुरी की ओर आवागमन किया जा सकेगा। 3. चेतक ब्रिज से महात्मा गांधी चौराहे जाने के लिए गोविंदपुरा टर्निंग से महात्मा गांधी चौराहे की ओर जाने वाले वाहन सांची डेयरी कट पॉइंट, कस्तूरबा अस्पताल के आगे, गुलाब उद्यान रोड, गेट नंबर-6 और बरखेड़ा मार्केट से होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। 4. ITI तिराहे से चेतक ब्रिज और ISBT जाने के लिए ITI तिराहे से कैरियर कॉलेज तिराहा होकर चेतक ब्रिज और ISBT जाने वाले वाहन सिक्योरिटी लाइन चौराहे से सांविका पेट्रोल पंप तिराहा होते हुए आगे जा सकेंगे। 5. बसों और व्यावसायिक वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग सभी प्रकार की बसें और व्यावसायिक वाहन पटेल नगर से 11 मील होते हुए बागसेवनिया के रास्ते ISBT की ओर आ-जा सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस की वाहन चालकों से अपील नगरीय यातायात पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे गरबा महोत्सव के दौरान निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें और यातायात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें। इससे कार्यक्रम स्थल के आसपास जाम की स्थिति से बचने में मदद मिलेगी। ट्रैफिक संबंधी परेशानी पर यहां करें संपर्क यातायात संबंधी समस्या होने पर इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है:
PM Modi

PM Modi Statement: पीएम मोदी बोले- भारत ने दुनिया को दी सस्ती दवाएं, बदले में Royalty भी नहीं ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने भारत के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि देश ने दुनिया को सस्ती दवाएं और प्रतिभाशाली लोग दिए हैं। भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता का इस्तेमाल लोगों की मदद और विकास के लिए किया है। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत पहली बार Bloomberg New Economy Forum की मेजबानी कर रहा है। 13 से 15 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित हो रहे इस फोरम में दुनियाभर के कारोबारी नेता, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। यहां वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, व्यापार और भविष्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है। PM Modi ने सस्ती दवाओं और भारतीय टैलेंट का किया जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में भारत की उस भूमिका पर जोर दिया, जिसके तहत देश ने दुनिया को किफायती दवाएं और कुशल प्रतिभाएं उपलब्ध कराई हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने इस योगदान के बदले क्रेडिट और रॉयल्टी लेने पर जोर नहीं दिया। भारत का फार्मास्युटिकल सेक्टर लंबे समय से दुनिया के कई देशों को सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध करा रहा है। खासकर उन देशों के लिए ये दवाएं महत्वपूर्ण हैं, जहां महंगे इलाज का खर्च उठाना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है। भारतीय दवा कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी रखती हैं। वहीं, भारतीय डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और IT प्रोफेशनल्स भी दुनियाभर में अपनी विशेषज्ञता के जरिए योगदान दे रहे हैं। यही वजह है कि भारत की पहचान केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि प्रतिभा, तकनीक और दवा उत्पादन के अहम केंद्र के तौर पर भी बनी है। भारत की फार्मा इंडस्ट्री दुनिया के लिए क्यों अहम है? भारत को दुनिया के प्रमुख जेनेरिक दवा उत्पादक देशों में गिना जाता है। देश की दवा कंपनियां कई तरह की दवाओं का उत्पादन करती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी आपूर्ति करती हैं। किफायती दवाओं की उपलब्धता से मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं को मदद मिलती है। भारत की दवा इंडस्ट्री ने खास तौर पर जेनेरिक मेडिसिन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री के बयान में इस योगदान का जिक्र भारत की उस भूमिका को सामने लाता है, जिसमें देश अपने उत्पादन और विशेषज्ञता के जरिए दूसरे देशों की जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है। Bloomberg New Economy Forum की पहली बार भारत में मेजबानी नई दिल्ली में आयोजित Bloomberg New Economy Forum भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन है। 13 से 15 अक्टूबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा और बदलते कारोबारी माहौल पर चर्चा की जा रही है। इस फोरम की थीम A World in Play: Defining the New Levers of Power है। इसमें दुनिया के 500 से अधिक प्रमुख कारोबारी और सार्वजनिक क्षेत्र के नेता हिस्सा ले रहे हैं। चर्चा के प्रमुख विषयों में ग्लोबल ट्रेड, निवेश, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), तकनीकी बदलाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियां शामिल हैं। भारत में इस आयोजन का होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश वैश्विक कारोबार, डिजिटल सेवाओं और तकनीकी विकास में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। Technology और Innovation से बदल रही दुनिया आज दुनिया तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। AI, डिजिटल सेवाएं, सेमीकंडक्टर और नई तकनीकें कारोबार करने के तरीकों को बदल रही हैं। ऐसे में भारत के सामने अपनी तकनीकी क्षमता को मजबूत करने और नए निवेश के अवसर तैयार करने की चुनौती भी है। तकनीक का लाभ समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना भी जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में लोगों को सशक्त बनाने और विकास के अवसर उपलब्ध कराने के विचार को महत्व दिया। भारत की डिजिटल सेवाओं और तकनीकी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह मुद्दा वैश्विक चर्चा का हिस्सा बना हुआ है। भारत के लिए क्यों खास है यह अंतरराष्ट्रीय मंच? Bloomberg New Economy Forum में दुनिया के अलग-अलग देशों के कारोबारी और नीति-निर्माता एक साथ आते हैं। ऐसे आयोजनों में निवेश, व्यापार और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान होता है। भारत के लिए यह अपनी आर्थिक क्षमता और कारोबारी संभावनाओं को सामने रखने का अवसर है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों के साथ सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा का रास्ता भी खुलता है। हालांकि, किसी अंतरराष्ट्रीय आयोजन की सफलता का वास्तविक आकलन केवल भाषणों से नहीं, बल्कि उसके बाद सामने आने वाले ठोस समझौतों, निवेश और सहयोग के परिणामों से भी किया जाता है। पीएम मोदी के बयान का क्या है संदेश? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का मुख्य संदेश भारत के वैश्विक योगदान को सामने लाना है। सस्ती दवाओं से लेकर भारतीय प्रतिभा तक, देश कई ऐसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका निभा रहा है, जिनका असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है। Bloomberg New Economy Forum की मेजबानी के बीच यह बयान भारत की आर्थिक और तकनीकी पहचान को लेकर चल रही व्यापक चर्चा से जुड़ता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस मंच पर होने वाली चर्चाएं भारत के लिए नए कारोबारी अवसरों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में किस तरह बदलती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मां चंद्रघंटा

Navratri 2026: तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका स्वरूप साहस, शक्ति और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का प्रतीक माना जाता है। मां चंद्रघंटा की कथा पौराणिक मान्यताओं में मां चंद्रघंटा को देवी दुर्गा का युद्ध के लिए तत्पर स्वरूप बताया गया है। मान्यता है कि वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और दुष्ट शक्तियों का सामना करती हैं। उनका स्वरूप यह संदेश देता है कि शक्ति के साथ विवेक और साहस भी जरूरी हैं। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः। भोग: मां को दूध से बनी मिठाई या खीर अर्पित करने की परंपरा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Jantar Mantar

Jantar Mantar Ban: 1993 से विरोध की आवाज बना जंतर-मंतर, अब प्रदर्शन के नियमों में बदलाव

दिल्ली का जंतर-मंतर (Jantar Mantar) सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि देशभर के लोगों की आवाज उठाने का एक बड़ा मंच रहा है। जब भी किसी मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचना होता था, लोग यहां धरना देने पहुंच जाते थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का आंदोलन हो या भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन, जंतर-मंतर ने कई बड़े आंदोलनों को करीब से देखा है। लेकिन अब यहां धरना-प्रदर्शन को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। दिल्ली पुलिस के ताजा फैसले के बाद जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची में शामिल नहीं है। इसकी जगह दिल्ली में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए तय किया गया है। इस फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर जिस जगह पर पिछले करीब 33 साल से लोग अपनी मांगें उठाते रहे, वहां प्रदर्शन की व्यवस्था क्यों बदली गई? Jantar Mantar Protest Ban: क्या है पूरा मामला? Jantar Mantar पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव को लेकर 12 अक्टूबर 2026 को चर्चा तेज हुई। दिल्ली पुलिस के आदेश के अनुसार, गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों में बदलाव किया गया है। अब प्रदर्शन के लिए तीन जगहों को तय किया गया है। इनमें सेंट्रल दिल्ली का रामलीला मैदान, नॉर्थ दिल्ली का बुराड़ी मैदान और ईस्ट दिल्ली का CBD ग्राउंड शामिल हैं। इस फैसले से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और दूसरे समूहों के लिए अपनी रणनीति बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार खत्म हो गया है। प्रदर्शन के लिए तय नियमों और अनुमति की प्रक्रिया का पालन करना जरूरी रहेगा। 1993 से विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा जंतर-मंतर जंतर-मंतर को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की प्रमुख जगह के रूप में पहचान 1993 के आसपास मिली। इससे पहले दिल्ली के बोट क्लब इलाके में बड़े धरने और सभाएं हुआ करती थीं। अक्टूबर 1988 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान बोट क्लब पर जुटे थे। इसके बाद वहां प्रदर्शनों पर पाबंदियां लगने लगीं और दूसरे स्थान की जरूरत महसूस हुई। धीरे-धीरे जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों के लिए एक प्रमुख ठिकाना बन गया। संसद के नजदीक होने के कारण यहां होने वाले प्रदर्शनों पर मीडिया और राजनीतिक दलों का ध्यान भी आसानी से जाता था। यही वजह रही कि अगले कई दशकों तक यह जगह अलग-अलग आंदोलनों का गवाह बनी। Anna Hazare Movement: अन्ना आंदोलन से देशभर में चर्चा साल 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने जंतर-मंतर को देशभर में सुर्खियों में ला दिया था। 5 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे ने लोकपाल कानून की मांग को लेकर अनशन शुरू किया। इस आंदोलन को बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिला। अरविंद केजरीवाल समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता भी इससे जुड़े थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी इस आवाज ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस शुरू कर दी और आगे चलकर आम आदमी पार्टी के गठन का रास्ता भी बना। उस दौर में जंतर-मंतर पर जुटने वाली भीड़ ने दिखाया कि किसी मुद्दे को लेकर लोगों का शांतिपूर्ण विरोध किस तरह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। Farmers Protest: तमिलनाडु के किसानों ने भी उठाई आवाज 2017 में तमिलनाडु के किसानों ने कर्ज, सूखे और आर्थिक परेशानियों को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया था। किसानों की मांगों में कर्ज राहत, सूखा राहत पैकेज और कावेरी जल विवाद से जुड़े मुद्दे शामिल थे। किसानों का यह प्रदर्शन लंबे समय तक चर्चा में रहा। जंतर-मंतर पर जुटे किसानों ने अपनी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की। इस आंदोलन ने खेती-किसानी से जुड़े संकट और किसानों की मांगों पर एक बार फिर ध्यान खींचा। Wrestlers Protest: पहलवानों के धरने ने खींचा देश का ध्यान साल 2023 में जंतर-मंतर पर भारतीय कुश्ती जगत से जुड़े पहलवानों का प्रदर्शन भी काफी चर्चा में रहा। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया समेत कई पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। पहलवानों के इस धरने ने खेल जगत के साथ-साथ राजनीति में भी बहस छेड़ दी। प्रदर्शन के दौरान खिलाड़ियों ने अपनी शिकायतों की जांच और जवाबदेही की मांग उठाई। इस आंदोलन ने एक बार फिर जंतर-मंतर को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन भी चर्चा में अक्टूबर 2026 में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी विवाद सामने आया। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, संगठन ने 7 अक्टूबर को अनुमति के लिए आवेदन किया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामान्य तौर पर कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करना होता है। इसके बाद जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला भी चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, किसी भी प्रदर्शन की अनुमति उसके आवेदन, सुरक्षा व्यवस्था और लागू नियमों के आधार पर तय की जाती है। Jantar Mantar पर पहले भी लग चुकी हैं पाबंदियां जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन को लेकर विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। साल 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने स्थानीय निवासियों की शिकायतों के बाद यहां प्रदर्शनों को लेकर प्रतिबंधात्मक निर्देश दिए थे। शिकायतों में शोर, गंदगी और आसपास के लोगों को होने वाली परेशानी जैसे मुद्दे शामिल थे। बाद में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर और बोट क्लब क्षेत्र में प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध के मामले पर सुनवाई की। अदालत ने शांतिपूर्ण विरोध को नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा माना, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित नियम लागू किए जा सकते हैं। इससे साफ है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर बहस केवल किसी एक आंदोलन तक सीमित नहीं रही है। इसमें नागरिकों के अधिकार, स्थानीय लोगों की परेशानी और सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई पहलू शामिल रहे हैं। अब कहां कर सकेंगे लोग धरना-प्रदर्शन? दिल्ली पुलिस के ताजा आदेश के...

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