Maharashtra Politics में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने महाराष्ट्र विधान परिषद के Deputy Chairman (उपसभापति) पद के लिए भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।
राजनीतिक जानकार इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की बदलती सियासत का अहम मोड़ मान रहे हैं। इससे न सिर्फ शिंदे गुट की ताकत बढ़ी है, बल्कि उद्धव ठाकरे खेमे के सामने नई राजनीतिक चुनौती भी खड़ी हो गई है।
शिंदे गुट को मिला अनुभवी चेहरा
सचिन अहीर महाराष्ट्र की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वे लंबे समय तक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़े रहे और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। साल 2019 में उन्होंने एनसीपी छोड़कर उद्धव ठाकरे की शिवसेना का साथ चुना था। अब करीब सात साल बाद उनका शिंदे गुट में जाना महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है।
उनके शिंदे सेना में शामिल होने को महायुति सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे विधान परिषद में सत्ता पक्ष की स्थिति पहले से अधिक मजबूत होगी।
Deputy Chairman चुनाव पर टिकी निगाहें
शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के Deputy Chairman पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। यह कदम साफ संकेत देता है कि सत्तारूढ़ महायुति अपने संख्याबल को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अहीर इस चुनाव में जीत हासिल करते हैं तो यह केवल एक संवैधानिक पद की जीत नहीं होगी, बल्कि शिंदे गुट की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करने वाला संदेश भी होगा।
उद्धव ठाकरे के लिए क्यों अहम है यह झटका?
पिछले कुछ वर्षों में शिवसेना (UBT) के कई नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। ऐसे में सचिन अहीर जैसे वरिष्ठ नेता का जाना उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विधानसभा और विधान परिषद दोनों स्तरों पर पार्टी को मजबूत बनाए रखने के लिए उद्धव ठाकरे को अब संगठनात्मक रणनीति पर अधिक ध्यान देना होगा। लगातार हो रहे दल-बदल से विपक्षी खेमे की चिंता भी बढ़ी है।
विपक्ष ने साधा निशाना
इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने राज्य की राजनीति में लगातार हो रहे दल-बदल पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सत्ता पक्ष अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर राजनीतिक समीकरण बदल रहा है। वहीं, शिंदे गुट का कहना है कि उनकी सरकार के कामकाज और नेतृत्व से प्रभावित होकर नेता स्वेच्छा से उनके साथ जुड़ रहे हैं।
आगे क्या?
अब सभी की नजरें महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के चुनाव पर हैं। चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि विधान परिषद में महायुति की पकड़ कितनी मजबूत होती है। साथ ही यह भी साफ होगा कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
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