भारतीय सेना के नेतृत्व में मंगलवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी अपने कार्यकाल के पूरा होने के बाद सेवानिवृत्त हो गए। विदाई समारोह में उन्होंने देश की सुरक्षा में सेना की भूमिका, जवानों के समर्पण और हाल के सैन्य अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेना ने हर चुनौती का पूरी तैयारी और जिम्मेदारी के साथ सामना किया है।
अपने संबोधन में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता और मजबूत रणनीति का प्रतीक बताया। वहीं, अब सेना की कमान जनरल धीरज सेठ संभालेंगे, जो मंगलवार को नए Chief of Army Staff के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे।
“हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया”
विदाई समारोह के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि सेना की असली ताकत उसके जवान और अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा से लेकर हर संवेदनशील अभियान तक, भारतीय सेना ने हमेशा अपने कर्तव्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
उन्होंने सैनिकों की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि बदलते सुरक्षा हालात के बीच भी सेना ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरी दक्षता और अनुशासन के साथ निभाया। उनके अनुसार, यह सामूहिक प्रयास ही भारतीय सेना की सबसे बड़ी पहचान है।
Operation Sindoor को बताया सेना की क्षमता का प्रमाण
अपने भाषण में जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने यह साबित किया कि भारतीय सेना किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में तेज़, सटीक और प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है।
उन्होंने इसे केवल एक सफल सैन्य अभियान नहीं, बल्कि सेना के बेहतर समन्वय, आधुनिक रणनीति और जवानों के साहस का उदाहरण बताया।
आज जनरल धीरज सेठ के हाथों में होगी कमान
जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के नए प्रमुख के रूप में पदभार संभालेंगे। उनके सामने सेना के आधुनिकीकरण, सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने, नई रक्षा तकनीकों को अपनाने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप सैन्य तैयारियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि नए नेतृत्व में भारतीय सेना तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनने के साथ-साथ आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली को भी नई गति दे सकती है।
उपलब्धियों से भरा रहा जनरल द्विवेदी का कार्यकाल
जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कार्यकाल में भारतीय सेना ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, सैन्य प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने और नई तकनीकों को अपनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा सेना ने कई बड़े सैन्य अभ्यासों और रणनीतिक अभियानों के जरिए अपनी परिचालन क्षमता को भी मजबूत किया।
उनके नेतृत्व में सेना ने बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के अनुसार खुद को लगातार तैयार रखा और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
नए नेतृत्व से बढ़ीं उम्मीदें
जनरल धीरज सेठ के सेना प्रमुख बनने के साथ भारतीय सेना एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। रक्षा विशेषज्ञों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में सेना आधुनिकीकरण की रफ्तार तेज करेगी, नई सैन्य तकनीकों को अपनाएगी और सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी की विदाई केवल एक कार्यकाल का अंत नहीं है, बल्कि भारतीय सेना के लिए नए नेतृत्व और नई जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है। देश की सुरक्षा के प्रति सेना की प्रतिबद्धता पहले की तरह मजबूत रहेगी और यही विश्वास देशवासियों के मन में भी कायम है।
