भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में सोमवार, 12 अक्टूबर को कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली। एक समय बाजार में तेजी की उम्मीद नजर आ रही थी, लेकिन कुछ ही देर में बिकवाली बढ़ गई। सेंसेक्स करीब 500 अंक टूटकर 71,900 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 150 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर IT और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। बाजार में अचानक आई इस कमजोरी से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार संभलता है या गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रहता है। Sensex Today: 71,900 के आसपास पहुंचा बाजार सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी दिखाई दी, लेकिन बाद में बिकवाली हावी हो गई। सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा गिरकर करीब 71,900 के स्तर पर कारोबार करने लगा। वहीं, निफ्टी भी लगभग 150 अंक नीचे आ गया। बाजार में इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक सावधानी बरतते नजर आए। जिन निवेशकों को सुबह बाजार में तेजी की उम्मीद थी, उनके लिए अचानक आई गिरावट ने चिंता बढ़ा दी। IT और Banking Stocks में सबसे ज्यादा बिकवाली सोमवार के कारोबार में IT और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। टेक महिंद्रा समेत कुछ आईटी शेयरों में कमजोरी रही। वहीं, SBI, ICICI Bank और Axis Bank जैसे प्रमुख बैंकिंग शेयरों में भी बिकवाली का असर दिखाई दिया। इन सेक्टरों के बड़े शेयरों में गिरावट आने से प्रमुख बाजार सूचकांकों पर दबाव बढ़ा। हालांकि, सभी शेयरों में एक जैसी कमजोरी नहीं रही। ऑटो सेक्टर के कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी अलग-अलग रहा। Stock Market में गिरावट की क्या है वजह? Stock Market में गिरावट के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण हो सकते हैं। निवेशक इस समय वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर खास नजर रख रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली होने पर बाजार के प्रमुख शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल भी प्रभावित होती है। कच्चे तेल की कीमतें: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। वैश्विक बाजारों का असर: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसे कारक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार में मुनाफावसूली: तेजी के बाद निवेशकों की ओर से शेयर बेचकर मुनाफा निकालना भी गिरावट की एक वजह हो सकता है। हालांकि, किसी एक कारोबारी सत्र की गिरावट को केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। रुपये और कच्चे तेल पर भी निवेशकों की नजर शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये की चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। रुपये में कमजोरी आने से आयात महंगा हो सकता है, जिसका असर कंपनियों की लागत पर पड़ता है। वहीं, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसी वजह से निवेशक केवल शेयरों की कीमतों पर ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया से जुड़े आर्थिक संकेतों पर भी नजर बनाए हुए हैं। निवेशकों को अब क्या करना चाहिए? सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के बीच निवेशकों के लिए धैर्य रखना जरूरी है। बाजार में हर गिरावट का मतलब यह नहीं होता कि सभी शेयरों में लंबे समय तक कमजोरी बनी रहेगी। इसी तरह, थोड़ी तेजी आने पर यह मान लेना भी ठीक नहीं कि बाजार पूरी तरह संभल गया है। निवेश का फैसला लेते समय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की गिरावट देखकर जल्दबाजी में शेयर खरीदने या बेचने से बचना बेहतर है। आगे कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? आने वाले दिनों में बाजार की दिशा विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से प्रभावित हो सकती है। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि सेंसेक्स 71,900 के आसपास खुद को संभाल पाता है या बाजार में दबाव बना रहता है। कुल मिलाकर, सोमवार को सेंसेक्स में करीब 500 अंकों और निफ्टी में लगभग 150 अंकों की गिरावट ने बाजार के माहौल को कमजोर किया। IT और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली इसका प्रमुख हिस्सा रही। फिलहाल निवेशकों के लिए बाजार की चाल पर नजर रखना और सोच-समझकर फैसले लेना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!