भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में बुधवार को एक बार फिर कमजोरी देखने को मिली। कारोबार शुरू होने के बाद से ही बाजार पर बिकवाली का दबाव बना रहा और BSE Sensex करीब 700 अंक गिरकर 76,700 के स्तर के आसपास पहुंच गया। वहीं Nifty 50 में भी लगभग 200 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों के बीच चिंता का माहौल देखने को मिला।
शेयर बाजार में गिरावट का सबसे ज्यादा असर Banking और Pharma सेक्टर पर पड़ा। इन दोनों सेक्टर के कई प्रमुख शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसके कारण बाजार के प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
कमजोर ग्लोबल संकेतों और मुनाफावसूली से टूटा बाजार
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और घरेलू स्तर पर निवेशकों की सतर्कता ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। पिछले कुछ समय में तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिसका असर सेंसेक्स और निफ्टी पर दिखाई दिया।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। निवेशक अब आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं।
Banking और Pharma Shares में सबसे ज्यादा गिरावट
बुधवार के कारोबारी सत्र में बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। बैंकिंग इंडेक्स के कई बड़े शेयरों में गिरावट रही, जिससे बाजार की कमजोरी और बढ़ गई।
वहीं फार्मा सेक्टर के शेयरों में भी निवेशकों ने खरीदारी से दूरी बनाई। बाजार में जोखिम बढ़ने के कारण निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों पर ध्यान दे रहे हैं।
Stock Market में उतार-चढ़ाव जारी, निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
छोटे समय में बाजार पर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की चाल का असर बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय सोच-समझकर निवेश करने की जरूरत है।
आज के बाजार की बड़ी बातें
- Sensex करीब 700 अंक गिरा
- Sensex 76,700 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा
- Nifty 50 में करीब 200 अंकों की गिरावट
- Banking और Pharma Stocks में सबसे ज्यादा दबाव
- निवेशकों ने की मुनाफावसूली
फिलहाल शेयर बाजार की नजर वैश्विक संकेतों, कंपनियों के नतीजों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन्हीं फैक्टर्स से बाजार की दिशा तय होगी।
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