राजस्थान में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डाक-पार्सल ले जा रहे एक कंटेनर से 3 क्विंटल 83 किलो डोडा-चूरा बरामद किया है। पुलिस ने कंटेनर चालक को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी अतिरिक्त कमाई के लालच में पिछले कई महीनों से मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा था।
पुलिस को देखकर भागा, पीछा कर दबोचा
आईजीपी विकास कुमार के अनुसार ANTF को सूचना मिली थी कि उदयपुर से भीलवाड़ा जा रहे एक डाक-पार्सल कंटेनर में मादक पदार्थ छिपाकर ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर नाकाबंदी की गई। पुलिस ने कंटेनर को रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक वाहन लेकर भाग निकला। पीछा कर सदर थाना क्षेत्र में कंटेनर को रोक लिया गया।
तलाशी के दौरान कंटेनर से 3.83 क्विंटल डोडा-चूरा बरामद हुआ। इसके बाद कंटेनर जब्त कर चालक लाल शंकर (29) को गिरफ्तार कर लिया गया।
मजदूरी से ड्राइवर और फिर तस्कर बना
गिरफ्तार आरोपी डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। उसने तीसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। पहले मजदूरी की, फिर ट्रकों में खलासी का काम किया और बाद में ड्राइविंग सीखकर कंटेनर चालक बन गया।
दिल्ली की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में नौकरी के दौरान उसकी पहचान मादक पदार्थ तस्करों से हुई। पुलिस के मुताबिक, पिछले 7-8 महीनों से वह अहमदाबाद, दिल्ली और अन्य राज्यों के बीच कंटेनर चलाते हुए तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा बन गया।
प्रति किलो 200 रुपए के लालच में करता था तस्करी
जांच में सामने आया कि एक तस्कर ने आरोपी को कंटेनर में डोडा-चूरा छिपाकर तय स्थान तक पहुंचाने के बदले प्रति किलो 200 रुपए अतिरिक्त देने का लालच दिया था। शुरुआत में उसने छोटी खेप पहुंचाई, लेकिन भरोसा बनने के बाद बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ भी उसी के जरिए भेजे जाने लगे।
डाक-पार्सल कंटेनर इसलिए चुना
पुलिस का कहना है कि तस्करों ने डाक-पार्सल और कूरियर कंटेनरों का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि ऐसे वाहनों पर सामान्यतः कम संदेह किया जाता है। पार्सलों के बीच डोडा-चूरा छिपाकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाया जाता था।
फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं, मादक पदार्थ कहां से लोड किया गया था, इसे कहां पहुंचाया जाना था और कंटेनर मालिक की क्या भूमिका रही।


