कर्नाटक की राजनीति में आज बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य की कांग्रेस सरकार में लंबे समय से अटका Cabinet Expansion अब होने जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 20 नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के साथ सरकार में खाली पड़े मंत्री पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
इस विस्तार को लेकर कांग्रेस के भीतर काफी समय से चर्चा चल रही थी। मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आखिरकार मंत्रियों के नामों पर सहमति बनी है। ऐसे में आज होने वाला शपथ ग्रहण समारोह कर्नाटक कांग्रेस के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
20 नेताओं को मिल सकती है मंत्री पद की जिम्मेदारी
मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 20 नेताओं के नाम सामने आए हैं। इनमें कुछ अनुभवी चेहरे हैं तो कई ऐसे नेता भी हैं जिन्हें पहली बार सरकार में अहम जिम्मेदारी मिलने जा रही है।
बताई जा रही सूची में पीएम नरेंद्रस्वामी, शिवराज तंगडागी, रुद्रप्पा लमाणी, केएस बसवन्तप्पा, बी. नागेंद्र, टी. रघुमूर्ति, बीजेड जमीर अहमद खान, रिजवान अरशद, संतोष लाड, मधु बंगारप्पा, पुत्तरंगशेट्टी, मंकाला वैद्य, डॉ. अजय सिंह, एन. चालुवराय स्वामी, केएम शिवलिंगे गौड़ा, एचसी बालकृष्ण, गायत्री शांतिगौड़ा, बसवराज रायरेड्डी, विजय आनंद काशप्पनावर और लक्ष्मण सावदी के नाम शामिल हैं।
इन नामों से साफ है कि पार्टी ने मंत्रिमंडल में अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी पार्टी ने एक नाम शामिल किया है।
विधानसभा Speaker को लेकर भी तस्वीर साफ
कैबिनेट विस्तार के साथ कर्नाटक विधानसभा के Speaker पद को लेकर भी बड़ा फैसला सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार जी.एस. पाटिल को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं ए.एस. पोन्नन्ना को विधानसभा उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है।
विधानसभा अध्यक्ष का पद खाली होने के बाद से ही नए नाम को लेकर अटकलें चल रही थीं। अब सरकार ने विधानसभा के आगामी सत्र से पहले इस पद को लेकर भी तस्वीर साफ करने की तैयारी कर ली है।
Congress के लिए क्यों अहम है Cabinet Expansion?
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के लिए यह सिर्फ मंत्रियों की संख्या बढ़ाने का फैसला नहीं है। इसके पीछे कई राजनीतिक समीकरण भी जुड़े हैं। लंबे समय से मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे विधायकों को जगह देना पार्टी के लिए जरूरी था।
मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने से पार्टी के अंदर असंतोष कम करने की कोशिश भी मानी जा रही है। साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर संगठनात्मक संतुलन बनाने पर भी जोर दिया गया है।
विधानसभा सत्र से पहले बड़ा फैसला
कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र भी जल्द शुरू होने वाला है। ऐसे में उससे पहले मंत्रिमंडल का विस्तार सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण है। नए मंत्रियों के आने के बाद विभागों का बंटवारा भी बड़ा मुद्दा होगा।
शपथ ग्रहण के बाद सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि किस नेता को कौन-सा मंत्रालय मिलता है। Portfolio Allocation से यह भी साफ होगा कि सरकार किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देने जा रही है।
अब आगे क्या?
कैबिनेट विस्तार के बाद कर्नाटक सरकार का फोकस आगामी विधानसभा सत्र और प्रशासनिक कामकाज पर रहेगा। 20 नए मंत्रियों के शामिल होने से सरकार को अपने कामकाज को और गति देने की उम्मीद है।
फिलहाल कर्नाटक की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि नए मंत्रियों को कौन-कौन से विभाग मिलेंगे। शपथ ग्रहण के बाद विभागों के बंटवारे से सरकार की आगे की राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति की तस्वीर और साफ हो जाएगी।
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