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6 साल बाद UPI पर फिर MDR की तैयारी! बड़े कारोबारियों से वसूली जा सकती है Payment Fee

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अगर आप रोजाना UPI से Payment करते हैं तो यह खबर आपके लिए काफी अहम है। देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके बाद आने वाले समय में कुछ ट्रांजैक्शन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होने का रास्ता खुल सकता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी UPI पर कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। वित्त मंत्रालय ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकार के पास कुछ डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की व्यवस्था करने का विकल्प होगा।

2020 में खत्म कर दिया गया था MDR

UPI को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने साल 2020 में UPI के जरिए होने वाले Merchant Payments पर MDR को खत्म कर दिया था। इसका सीधा फायदा दुकानदारों और कारोबारियों को मिला और डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने में मदद मिली।

धीरे-धीरे UPI छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े Shopping Platforms तक पहुंच गया। आज चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक QR Code से Payment करना आम बात हो चुकी है।

लेकिन इस पूरी व्यवस्था के पीछे बैंक और Payment Companies लगातार टेक्नोलॉजी, सर्वर, नेटवर्क और साइबर सिक्योरिटी पर खर्च कर रहे हैं। इसी वजह से लंबे समय से UPI के लिए एक स्थायी Revenue Model की जरूरत पर चर्चा होती रही है।

Payment Act में बदलाव क्यों जरूरी माना जा रहा है?

वित्त मंत्रालय ने कानून के मौजूदा प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट से जुड़े शुल्क के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को बदलना है।

अगर संशोधन को मंजूरी मिल जाती है तो सरकार आगे यह तय कर सकती है कि किन पेमेंट सिस्टम, कारोबारियों या ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जाए।

यानी अभी सरकार ने यह नहीं कहा है कि हर UPI Payment पर शुल्क लगेगा। फिलहाल मामला कानूनी बदलाव के प्रस्ताव तक सीमित है।

क्या आम UPI Users को देना होगा पैसा?

यही सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आम लोगों के सामान्य UPI Payments पर सीधे शुल्क लगाने की कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।

संभावना यह जताई जा रही है कि अगर MDR लागू किया जाता है तो इसका फोकस मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों या कुछ खास तरह के Merchant Transactions पर हो सकता है।

इसका मतलब है कि किसी दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को Payment करना या रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करना फिलहाल शुल्क के दायरे में आने की पुष्टि नहीं हुई है।

बड़े कारोबारियों पर क्यों हो सकता है असर?

UPI का इस्तेमाल अब बड़े E-commerce Platforms, Food Delivery Apps, Travel Companies और दूसरे बड़े कारोबारों में भी बड़े पैमाने पर होता है। इन कंपनियों के जरिए रोजाना बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान किए जाते हैं।

ऐसे में अगर सरकार बड़े कारोबारियों के कुछ UPI Transactions पर MDR लागू करती है तो सबसे पहले इसका असर इसी वर्ग पर पड़ सकता है।

हालांकि, अंतिम नियम आने के बाद ही पता चलेगा कि किस Merchant को कितना MDR देना होगा और इसकी दर क्या होगी।

छोटे दुकानदारों के लिए क्या बदलेगा?

छोटे व्यापारियों के लिए UPI लंबे समय से एक आसान और कम लागत वाला Payment Option रहा है। इसलिए सरकार के सामने यह चुनौती भी होगी कि MDR की व्यवस्था बनाते समय छोटे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

अगर भविष्य में शुल्क सिर्फ बड़े कारोबारियों और निर्धारित श्रेणी के Transactions तक सीमित रखा जाता है तो छोटे दुकानदारों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रह सकता है।

UPI Users के लिए अभी क्या समझना जरूरी है?

इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं भी हो सकती हैं कि अब हर UPI Payment पर Fee लगेगी। लेकिन फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा।

अभी UPI Payment पर नई अनिवार्य फीस लागू नहीं हुई है। सरकार ने सिर्फ कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। आगे संसद की प्रक्रिया, सरकार के नियम और संबंधित Notification के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।

UPI के Future के लिए बड़ा फैसला

UPI ने भारत में Payment करने का तरीका ही बदल दिया है। छोटी रकम से लेकर लाखों रुपये के Business Transactions तक इसका इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में MDR की संभावित वापसी सिर्फ फीस से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत के पूरे Digital Payment Ecosystem के भविष्य से जुड़ा फैसला है।

सरकार के सामने दो बड़ी जरूरतें हैं—एक तरफ आम लोगों के लिए UPI को आसान और किफायती बनाए रखना और दूसरी तरफ इस पूरे सिस्टम को चलाने वाले बैंकों और Payment Companies के लिए टिकाऊ Revenue Model तैयार करना।

फिलहाल नजर सरकार के अगले कदम पर है। अगर प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि UPI पर MDR किन लोगों और किन Transactions पर लागू होगा।

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Yukta

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Gold

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Doctors vs Government in Maharashtra: CCMP Issue पर बढ़ा विवाद

महाराष्ट्र में Doctors Strike अब बड़ा मुद्दा बन गई है। CCMP (Certificate Course in Modern Pharmacology) को लेकर राज्यभर के डॉक्टरों ने विरोध तेज कर दिया है। डॉक्टर हाथों में ‘No CCMP’ लिखी तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस बीच कोर्ट ने भी मामले पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेते हुए हस्तक्षेप किया है। क्या है Maharashtra CCMP Controversy? महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, जिसमें CCMP कोर्स पूरा करने वाले कुछ होम्योपैथी डॉक्टरों को आधुनिक चिकित्सा (Modern Medicine/Allopathy) से जुड़ी दवाओं के इस्तेमाल और पंजीकरण की अनुमति देने का रास्ता खुलता है। विरोध कर रहे MBBS डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों का कहना है कि एलोपैथिक इलाज के लिए लंबी और गहन मेडिकल ट्रेनिंग जरूरी होती है। उनका तर्क है कि सीमित अवधि के कोर्स के आधार पर आधुनिक चिकित्सा की अनुमति देने से मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो सकते हैं। Doctors ने क्यों शुरू की Indefinite Strike? CCMP के खिलाफ डॉक्टर संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया है। कई अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में डॉक्टरों ने प्रदर्शन करते हुए “No CCMP” के नारे लगाए। डॉक्टरों का कहना है कि यह केवल एक कोर्स या पंजीकरण का मामला नहीं है, बल्कि यह patient safety और healthcare quality से जुड़ा मुद्दा है। उनके अनुसार चिकित्सा क्षेत्र में अलग-अलग प्रणालियों के बीच स्पष्ट नियम और जिम्मेदारियां तय होना जरूरी है। डॉक्टरों की मांग क्या है? प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि CCMP के आधार पर होम्योपैथी चिकित्सकों को एलोपैथिक प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी जाए। डॉक्टर संगठनों का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इलाज करने के लिए MBBS और उसके बाद की विशेषज्ञ ट्रेनिंग जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने या दोबारा समीक्षा करने की मांग की है। सरकार का पक्ष क्या है? दूसरी ओर, CCMP व्यवस्था के समर्थकों का कहना है कि महाराष्ट्र के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकता है। सरकार का उद्देश्य उन क्षेत्रों में मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराना बताया जा रहा है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या कम है। Court ने लिया Suo Motu Cognizance इस विवाद के बीच अदालत की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बाद अब नजर इस बात पर है कि अदालत इस पूरे विवाद में क्या दिशा-निर्देश देती है और सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। Maharashtra Healthcare System पर असर लंबी चलने वाली डॉक्टरों की हड़ताल से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखने की बात कही जा रही है, लेकिन अगर विवाद जल्द नहीं सुलझा तो मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद? महाराष्ट्र का CCMP विवाद केवल डॉक्टरों और सरकार के बीच का मतभेद नहीं है। यह देश में medical education, healthcare regulation और patient safety से जुड़े बड़े सवालों को सामने ला रहा है। अब सभी की नजर सरकार, डॉक्टर संगठनों और कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि महाराष्ट्र में CCMP व्यवस्था को लेकर क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Atiq Ahmed Son Accident: भाई से मुलाकात के लिए निकले अबान की रास्ते में मौत

उत्तर प्रदेश से एक बड़ी खबर सामने आई है। माफिया-राजनेता अतीक अहमद (Atiq Ahmed) के बेटे अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, अबान अपने बड़े भाई से मिलने झांसी जेल जा रहा था, इसी दौरान रास्ते में उसकी कार बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसा इतना गंभीर था कि अबान ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटना की जांच शुरू कर दी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, कार की रफ्तार अधिक होने या अचानक नियंत्रण बिगड़ने के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल पाएगा। Jhansi Road Accident: भाई से मिलने जा रहा था अबान बताया जा रहा है कि अबान अहमद झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई से मुलाकात करने के लिए निकला था। सफर के दौरान अचानक कार अनियंत्रित हो गई और सड़क के बीच बने डिवाइडर से जा टकराई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। Atiq Ahmed Family: लगातार चर्चा में रहा परिवार अतीक अहमद का परिवार पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध से जुड़ी खबरों में रहा है। अतीक अहमद के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं और उसकी गतिविधियों को लेकर लंबे समय तक जांच एजेंसियां सक्रिय रहीं। अतीक अहमद के बड़े बेटे अली अहमद भी जेल में बंद हैं। वहीं, इससे पहले अतीक के बेटे असद अहमद की झांसी में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मौत हुई थी। असद उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी था। सड़क हादसे के बाद उठे कई सवाल अबान अहमद की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर कार किस वजह से अनियंत्रित हुई। क्या वाहन की गति अधिक थी या फिर किसी अन्य कारण से दुर्घटना हुई, इसकी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस हादसे के बाद अतीक अहमद परिवार से जुड़ी चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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