तेहरान। ईरान में विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने की चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ सांसद उनके खिलाफ आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य जुटाने में लगे हैं। हालांकि, अभी तक महाभियोग की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई है।
एक वरिष्ठ सांसद के हवाले से कहा गया है कि उचित समय आने पर विदेश मंत्री के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जाएगा।
राष्ट्रपति की भूमिका सीमित होने का दावा
इजराइली मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े अहम मामलों में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की भूमिका सीमित कर दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका के साथ संभावित वार्ता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर अहमद वाहिदी की भूमिका अधिक प्रभावी हो सकती है। हालांकि, इस दावे की ईरानी अधिकारियों की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अमेरिका-ईरान वार्ता पर अभी फैसला नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर अभी तक न तो तारीख तय हुई है और न ही स्थान। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान और कतर संभावित मेजबान देशों के रूप में चर्चा में हैं और दोनों देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।
ईरान की रणनीति में बदलाव का दावा
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अब सीधे सैन्य टकराव के बजाय समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों पर दबाव बनाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों की रणनीतिक लागत बढ़ाने की नीति पर काम कर सकता है।
रीपर ड्रोन मार गिराने का दावा
ईरान की IRGC ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ रहे MQ-9 रीपर ड्रोन को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया। हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह ड्रोन किस देश का था और इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है।
अमेरिका भी नए विकल्पों पर कर रहा विचार
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपने सैन्य विश्लेषकों से ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए नए रणनीतिक विकल्पों पर सुझाव मांगे हैं। इसे क्षेत्रीय तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हूती धमकी के बाद बदला जहाजों का रूट
यमन के हूती विद्रोहियों की धमकियों के बाद छह सऊदी सुपरटैंकरों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब मार्ग की बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा समुद्री रास्ता अपनाया है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
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