बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की फायर सेफ्टी व्यवस्था में कार्यरत फायर फाइटर्स ने ठेका बदलने के बाद छंटनी किए जाने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना पूर्व सूचना के कई लोगों को काम से हटा दिया गया, जिससे उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने कर्मचारियों के आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि अनुबंध के अनुसार पर्याप्त कर्मचारी कार्यरत हैं और नियुक्ति या हटाने का अधिकार ठेकेदार के पास है।
वर्षों से कर रहे थे सेवा
कर्मचारियों के अनुसार, चकरभाठा क्षेत्र के धमनी, कड़ार, सेंवार, हिरी और आसपास के गांवों के कई युवक पिछले 3 से 13 वर्षों से हाईकोर्ट में फायर फाइटर के रूप में कार्यरत थे। उनका कहना है कि वे अलग-अलग शिफ्टों में नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे थे।
उनके मुताबिक, फायर सेफ्टी सिस्टम का ठेका बदलने के बाद नए ठेकेदार ने कई पुराने कर्मचारियों को काम से हटा दिया।
निर्धारित संख्या से कम कर्मचारियों से काम कराने का आरोप
फायर फाइटर्स का आरोप है कि अनुबंध के अनुसार कुशल और अकुशल मिलाकर 28 कर्मचारियों की नियुक्ति होनी चाहिए। उनका दावा है कि पहले केवल 16 कर्मचारियों से काम लिया गया और बाद में उनमें से भी आठ कर्मचारियों को हटा दिया गया। कर्मचारियों के अनुसार, वर्तमान में तीन शिफ्टों में केवल आठ फायर फाइटर्स से काम कराया जा रहा है।
वेतन, ईपीएफ और सुरक्षा सुविधाओं पर भी सवाल
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें कलेक्टर दर के अनुसार मजदूरी नहीं मिल रही है और उनका मासिक वेतन केवल 8 से 10 हजार रुपये तक सीमित है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
इसके अलावा कर्मचारियों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपकरण भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जाते, जिससे कार्य के दौरान जोखिम बढ़ जाता है।
कंपनी के पंजीकरण पर भी उठाए सवाल
फायर फाइटर्स ने आरोप लगाया कि संबंधित कंपनी का पंजीकरण 25 मई 2026 को समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद उसी कंपनी से काम कराया जा रहा है। कर्मचारियों ने पूरे मामले की जांच कराने और श्रम कानूनों के पालन की मांग की है।
विभाग ने आरोपों से किया इनकार
लोक निर्माण विभाग के एसडीओ बिंद्रा प्रसाद ने कर्मचारियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट में अनुबंध के अनुसार 28 कर्मचारी कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा कि किसी कर्मचारी को नियुक्त करना या हटाना पूरी तरह ठेकेदार का अधिकार है। विभाग की जिम्मेदारी केवल अनुबंध के तहत कार्यों की निगरानी करना है और कर्मचारियों की नियुक्ति या हटाने के निर्णय में विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं होता।
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