ट्रंप (Trump) की तुर्किये से ब्रिटेन वापसी को लेकर एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से जुड़े संभावित खतरे को देखते हुए ट्रंप की वापसी के लिए बेहद गोपनीय प्लान तैयार किया गया था। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे राष्ट्रपति की यात्रा का पूरा तरीका बदल दिया गया।
ट्रंप पहले Air Force One में सवार होते हुए नजर आए। वहां मौजूद लोगों और पत्रकारों को भी यही लगा कि राष्ट्रपति इसी विमान से आगे की यात्रा करेंगे। लेकिन कुछ समय बाद ट्रंप को एयरपोर्ट पर इस्तेमाल होने वाली एक Catering Truck के जरिए चुपचाप दूसरे विमान तक ले जाया गया।
Air Force One बना ‘Decoy’
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की वास्तविक यात्रा को छिपाने के लिए Air Force One को एक तरह के Decoy यानी भ्रम पैदा करने वाले विमान के रूप में इस्तेमाल किया गया। इसका मकसद यह था कि ट्रंप की असली लोकेशन और उनके विमान की जानकारी आसानी से सार्वजनिक न हो।
बताया गया कि ट्रंप को बाद में एक छोटे अमेरिकी सैन्य विमान C-32A तक पहुंचाया गया। इसके बाद उन्होंने इसी विमान से ब्रिटेन के लिए उड़ान भरी।
पत्रकारों को भी नहीं थी पूरी जानकारी
इस पूरे ऑपरेशन की सबसे खास बात इसकी गोपनीयता थी। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति के साथ यात्रा कर रहे कुछ पत्रकारों को भी विमान बदलने की जानकारी पहले से नहीं थी।
एयरपोर्ट पर भी सुरक्षा और मूवमेंट इस तरह रखा गया कि ट्रंप के वास्तविक विमान की पहचान करना आसान न हो। यही वजह है कि कुछ समय तक यह भ्रम बना रहा कि राष्ट्रपति Air Force One से ही ब्रिटेन जा रहे हैं।
Iran Threat को लेकर बढ़ी चिंता
ट्रंप की इस Secret Flight को ईरान से जुड़े संभावित खतरे से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क रही हैं।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ट्रंप की तुर्किये से वापसी को लेकर सुरक्षा अधिकारियों ने अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी थी। इसी वजह से यात्रा के अंतिम चरण में अचानक बदलाव किया गया।
हालांकि, इस पूरे ऑपरेशन के हर विवरण की आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक तौर पर नहीं हुई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ट्रंप पर तत्काल किसी हमले की पुष्टि हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे संभावित सुरक्षा खतरे से जोड़कर बताया गया है।
C-32A से ब्रिटेन पहुंचे ट्रंप
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप C-32A विमान से ब्रिटेन पहुंचे। वहीं Air Force One को भी आगे भेजा गया। इस तरह राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा और Air Force One की गतिविधि को अलग रखा गया।
सुरक्षा के लिहाज से यह तरीका काफी असामान्य माना जा रहा है। आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं, लेकिन इस बार विमान बदलने की जानकारी को भी बेहद सीमित रखा गया।
कतर के विमान को लेकर भी चर्चा
ट्रंप की तुर्किये यात्रा के दौरान कतर से मिले Boeing 747 विमान को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। यह विमान भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल किए जाने की योजना का हिस्सा है।
हालांकि, वापसी के दौरान पुराने Air Force One का इस्तेमाल किया गया। इसके पीछे सुरक्षा और विमान की तैयारी से जुड़ी चिंताओं को वजह बताया गया है।
आखिर क्यों इतना बड़ा Secret Operation?
राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़ी जानकारी अगर पहले से सार्वजनिक हो जाए तो सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में विमान बदलने और वास्तविक यात्रा को कुछ समय के लिए छिपाने जैसी रणनीति का इस्तेमाल किया जा सकता है।
ट्रंप के मामले में भी यही वजह सबसे अहम मानी जा रही है। Air Force One को सामने रखकर और राष्ट्रपति को दूसरे विमान से रवाना कर सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी वास्तविक लोकेशन को ज्यादा समय तक गोपनीय रखने की कोशिश की।
Trump की Secret Flight ने बढ़ाई चर्चा
ट्रंप की तुर्किये से यह गुप्त उड़ान अब अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। खासकर ईरान के साथ तनाव के बीच इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था ने कई सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है और ऑपरेशन से जुड़े कई सुरक्षा विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। लेकिन इतना साफ है कि ट्रंप की वापसी सामान्य यात्रा जैसी नहीं थी। Air Force One में दिखाई देने से लेकर Catering Truck के जरिए दूसरे विमान तक पहुंचने तक पूरी कहानी में सुरक्षा और गोपनीयता सबसे अहम रही।
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