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School में Hijab पहनने पर Allahabad HC का फैसला, मुस्लिम छात्रा को नहीं मिली राहत

Table of Content

स्कूल की यूनिफॉर्म और हिजाब (Hijab) को लेकर चल रही बहस के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रयागराज के एक निजी स्कूल की मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज कर दी। छात्रा ने स्कूल की तय यूनिफॉर्म के साथ Headscarf यानी हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने कहा कि याचिका में ऐसा पर्याप्त आधार नहीं दिया गया, जिससे यह साबित हो कि स्कूल में हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा है।

क्या है Hijab और School Uniform का पूरा मामला?

मामला प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल से जुड़ा है। छात्रा ने अपनी मां के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसका कहना था कि वह कक्षा 6 से 10 तक इसी स्कूल में पढ़ी और इस दौरान हेडस्कार्फ पहनती रही। उस समय स्कूल की ओर से इस पर आपत्ति नहीं जताई गई थी।

कक्षा 11 में पहुंचने के बाद स्कूल के ड्रेस कोड को लेकर विवाद सामने आया। छात्रा चाहती थी कि उसे निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति दी जाए। मामला बढ़ने के बाद परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

School का क्या था पक्ष?

स्कूल की ओर से कहा गया कि संस्थान में सभी विद्यार्थियों के लिए एक समान Dress Code लागू है। स्कूल एक निजी और CBSE से संबद्ध संस्थान है और उसकी यूनिफॉर्म नीति सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होती है।

स्कूल ने यह भी तर्क दिया कि ड्रेस कोड का मकसद विद्यार्थियों के बीच समानता और अनुशासन बनाए रखना है। किसी एक विद्यार्थी के लिए अलग नियम बनाने से यूनिफॉर्म की एकरूपता प्रभावित हो सकती है।

Allahabad High Court ने क्या फैसला दिया?

जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिविजन बेंच ने छात्रा की याचिका खारिज कर दी।

अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या स्कूल में हेडस्कार्फ पहनना ऐसी Essential Religious Practice है, जिसके आधार पर छात्रा को स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म से अलग पहनावे की अनुमति दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने माना कि छात्रा की ओर से इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश नहीं की गई। इसी आधार पर अदालत ने स्कूल के ड्रेस कोड में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

पहले हिजाब पहनती थी छात्रा, फिर विवाद क्यों हुआ?

मामले में छात्रा की ओर से यह महत्वपूर्ण दलील दी गई कि वह कई सालों से स्कूल में हेडस्कार्फ पहनती आ रही थी। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अतीत में स्कूल की ओर से किसी नियम पर आपत्ति नहीं जताए जाने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में भी उसी व्यवस्था को जारी रखना छात्रा का स्थायी कानूनी अधिकार बन जाता है।

यानी स्कूल अगर बाद में अपने तय Uniform Rules को लागू करता है, तो केवल पुरानी व्यवस्था के आधार पर उसे रोकना जरूरी नहीं है।

Court ने Uniform को लेकर क्या कहा?

हाईकोर्ट ने स्कूल के यूनिफॉर्म नियम को भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा माना। अदालत के अनुसार, यदि ड्रेस कोड सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होता है और उसके पीछे अनुशासन तथा संस्थान की पहचान जैसे उद्देश्य हैं, तो केवल व्यक्तिगत पसंद के आधार पर उसमें बदलाव की मांग स्वीकार करना जरूरी नहीं है।

यही वजह रही कि इस मामले में कोर्ट ने स्कूल प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया।

Karnataka Hijab Case का भी हुआ जिक्र

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक हिजाब केस का भी संदर्भ दिया। 2022 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा मानने से इनकार किया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उसके सामने ऐसा पर्याप्त आधार नहीं रखा गया है, जिसके चलते वह उस दृष्टिकोण से अलग निष्कर्ष पर पहुंचे।

हालांकि हिजाब और धार्मिक स्वतंत्रता का संवैधानिक मुद्दा व्यापक है और अलग परिस्थितियों में अदालतों के सामने इसके अलग पहलू उठ सकते हैं।

क्या हर स्कूल में अब हिजाब पर रोक लग गई?

नहीं। इस फैसले को इस तरह समझना सही नहीं होगा कि देश के सभी स्कूलों में हिजाब पर एक समान रोक लगा दी गई है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला एक विशेष स्कूल की यूनिफॉर्म नीति और उसके सामने रखे गए तथ्यों से जुड़ा है। इसलिए अलग स्कूल, अलग ड्रेस कोड या अलग परिस्थितियों में कानूनी स्थिति अलग हो सकती है।

Hijab vs Uniform: क्यों अहम है यह फैसला?

इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर Religious Freedom और School Dress Code के बीच संतुलन की बहस को चर्चा में ला दिया है। एक तरफ धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अधिकारों का सवाल है, तो दूसरी तरफ स्कूल की यूनिफॉर्म, अनुशासन और समानता का मुद्दा है।

फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट ने छात्रा को स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। फैसला आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।

Yukta

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TMC

TMC vs Rebel MPs: 20 सांसदों की Disqualification पर Supreme Court का बड़ा कदम

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। पार्टी की ओर से दायर याचिका पर शीर्ष अदालत ने संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। मामला केवल सांसदों की सदस्यता तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में दल-बदल कानून, लोकसभा स्पीकर के अधिकार और अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में हो रही देरी जैसे अहम सवाल भी हैं। 20 सांसदों की Disqualification का क्या है मामला? TMC का आरोप है कि उसके टिकट पर चुनाव जीतने वाले 20 सांसदों ने बाद में पार्टी से अलग रुख अपनाया और दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जाने की कोशिश की। पार्टी ने इसे संविधान की दसवीं अनुसूची यानी Anti-Defection Law के तहत कार्रवाई योग्य बताया है। TMC की ओर से इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग करते हुए लोकसभा स्पीकर के समक्ष अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की गई थीं। पार्टी का कहना है कि इन याचिकाओं पर अपेक्षित तेजी से फैसला नहीं हुआ। हालांकि, बागी सांसदों की ओर से अलग दलील रखी गई है। उनका कहना है कि उनका कदम कानूनी राजनीतिक विलय के दायरे में आता है और इसलिए उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। Abhishek Banerjee ने उठाया मामला इस मामले को लेकर TMC के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने पहले लोकसभा स्पीकर से भी जल्द फैसला लेने की मांग की थी। पार्टी की ओर से कहा गया कि अयोग्यता याचिकाओं को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है। जब मामला आगे नहीं बढ़ा तो TMC ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पार्टी की प्रमुख मांग है कि अयोग्यता याचिकाओं पर Time-Bound Decision लिया जाए। SC के Notice से क्या बदलेगा? सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी होना फिलहाल यह नहीं बताता कि 20 सांसदों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अदालत अब संबंधित पक्षों का जवाब सुनकर मामले की कानूनी स्थिति पर विचार करेगी। यही वजह है कि इस मामले में अगली सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है। अदालत के सामने यह सवाल भी रहेगा कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी की स्थिति में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा क्या हो सकती है। Anti-Defection Law पर भी नजर भारत में दल-बदल रोकने के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची में प्रावधान किए गए हैं। किसी सांसद के पार्टी बदलने या पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाने की स्थिति में अयोग्यता का सवाल उठ सकता है। हालांकि, कानून में कुछ अपवाद भी मौजूद हैं। TMC और बागी सांसदों के बीच विवाद इसी कानूनी ढांचे की अलग-अलग व्याख्या से जुड़ा हुआ है। इसलिए मामला सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि संसदीय कानून के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बन गया है। आगे क्या होगा? अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। 20 बागी सांसदों को नोटिस मिलने के बाद मामले में सभी पक्षों की दलीलें सामने आएंगी। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि अयोग्यता याचिकाओं को लेकर आगे किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाए। फिलहाल इतना साफ है कि TMC के 20 Rebel MPs का Disqualification Case अब संसद से निकलकर देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले का राजनीतिक असर जितना महत्वपूर्ण होगा, उतना ही इसकी कानूनी दिशा पर भी नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
America

America vs Iran: ईरान की कमाई पर बड़ा हमला, इन 5 Sectors में कारोबार पर बढ़ा खतरा

अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) के खिलाफ आर्थिक दबाव को एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। ट्रंप प्रशासन ने “Operation Economic Outcast” नाम से एक नई मुहिम शुरू की है, जिसके तहत ईरान की अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच अहम सेक्टरों पर Secondary Sanctions का खतरा बढ़ाया गया है। इनमें Digital Assets, Technology, Gold, Aviation और Shipping शामिल हैं। इस फैसले की खास बात यह है कि अमेरिका का निशाना सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। जो विदेशी कंपनियां या संस्थाएं ईरान से जुड़े इन क्षेत्रों में कारोबार या सेवाएं जारी रखेंगी, उनके खिलाफ भी अमेरिकी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले हर देश पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया गया है। अमेरिका ने कई मामलों में पहले चेतावनी और कार्रवाई के लिए समयसीमा तय करने की बात कही है। अमेरिका ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम? अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक इस अभियान का मकसद ईरान की उन आर्थिक “lifelines” को काटना है, जिनसे उसे अंतरराष्ट्रीय कारोबार और राजस्व हासिल होता है। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि ईरान तेल की बिक्री, प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क और दूसरे वित्तीय रास्तों के जरिए अपनी गतिविधियों को जारी रखता है। नई रणनीति में अमेरिका ईरान से जुड़े कारोबारी नेटवर्क के साथ-साथ उन विदेशी संस्थाओं पर भी दबाव बनाना चाहता है, जो इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं। Gold और Digital Assets पर खास नजर नई कार्रवाई में Gold और Digital Assets को भी प्रमुखता दी गई है। अमेरिकी ट्रेजरी का कहना है कि ईरान अपनी कमजोर होती औपचारिक वित्तीय व्यवस्था के बीच सोने का इस्तेमाल अपनी मुद्रा को सहारा देने और महंगाई के असर से बचने के लिए कर रहा है। वहीं, Digital Assets यानी क्रिप्टो से जुड़े नेटवर्क को भी प्रतिबंधों से बचने और वित्तीय लेनदेन के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई गई है। Technology सेक्टर भी अमेरिकी निशाने पर ईरान को उन्नत तकनीक तक पहुंच से रोकना भी इस अभियान का अहम हिस्सा है। अमेरिका का दावा है कि ईरान ऐसी तकनीक और उपकरण हासिल करने की कोशिश करता है, जिनका इस्तेमाल उसके मिसाइल और अन्य संवेदनशील कार्यक्रमों में हो सकता है। इसी वजह से नई कार्रवाई में Technology से जुड़े नेटवर्क और खरीद गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। Aviation और Shipping पर भी शिकंजा ईरान की Aviation और Shipping गतिविधियां भी इस अभियान के केंद्र में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक कुछ ईरानी एयरलाइंस और शिपिंग नेटवर्क का इस्तेमाल संवेदनशील सामान, तकनीक और तेल की आवाजाही के लिए किया जाता है। Shipping के मामले में अमेरिका ने ईरान से जुड़े Shadow Fleet नेटवर्क पर विशेष कार्रवाई की है। ट्रेजरी ने अलग-अलग देशों में मौजूद ब्रोकरों, कंपनियों और जहाजों पर कार्रवाई करते हुए ईरानी तेल की ढुलाई और उससे होने वाली कमाई के नेटवर्क को निशाना बनाया है। करीब 60 Entities, Individuals और Vessels पर कार्रवाई अमेरिका ने इस अभियान के शुरुआती चरण में करीब 60 Entities, Individuals और Vessels को प्रतिबंधों के दायरे में लिया है। इनमें कथित तेल नेटवर्क, तकनीकी खरीद, साइबर गतिविधियों और अन्य वित्तीय चैनलों से जुड़े लोग और संस्थाएं शामिल हैं। अमेरिकी कार्रवाई का नेटवर्क काफी बड़ा है और इसमें UAE, Hong Kong, China, Singapore, Switzerland और यूरोप जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी नेटवर्क शामिल बताए गए हैं। दूसरे देशों के लिए क्यों बढ़ी चिंता? अमेरिका का यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि Secondary Sanctions का असर ईरान की सीमाओं से बाहर भी पड़ सकता है। अगर कोई विदेशी संस्था ईरान से जुड़े ऐसे कारोबार में शामिल होती है जिसे अमेरिका प्रतिबंधों के दायरे में लाता है, तो उस संस्था के अमेरिकी वित्तीय सिस्टम तक पहुंच पर खतरा बढ़ सकता है। यानी अब ईरान के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों को सिर्फ तेहरान के साथ अपने रिश्ते नहीं देखने होंगे, बल्कि अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित असर को भी ध्यान में रखना पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

रायपुर में पुरानी रंजिश को लेकर युवक से मारपीट, बाइक लूटने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर में पुरानी रंजिश को लेकर एक युवक से मारपीट कर उसकी बाइक लूटने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि बदमाशों ने युवक को घेरकर गाली-गलौज की, हाथ-मुक्कों से मारपीट की और जान से मारने की धमकी देने के बाद उसकी दोपहिया लेकर फरार हो गए। मामले में एक आरोपी अभी फरार है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल दो बाइक और एक स्कूटी भी जब्त की है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राज मिश्रा, यश मिश्रा उर्फ रोहन मिश्रा और अभिषेक पटेल उर्फ सोनू के रूप में हुई है। मंदिर के पास युवक को घेरकर की मारपीट पुलिस के अनुसार, बलराम साहू (38) ने 23 अगस्त को डीडीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 19 अगस्त की सुबह करीब 4 बजे वह मोटरसाइकिल से रायपुरा स्थित हटकेश्वरनाथ मंदिर, महादेव घाट गए थे। मंदिर के गेट के पास बाइक खड़ी करने के बाद जब वह वापस लौटे, तभी कुछ युवकों ने उन्हें घेर लिया। आरोपियों ने पुरानी रंजिश को लेकर उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर हाथ-मुक्कों से मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। मारपीट में नाक और पैर में आई चोट हमले के दौरान बलराम साहू के नाक और दाहिने पैर में चोट आई। इसके बाद आरोपी उनकी बाइक लेकर मौके से फरार हो गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने 3 आरोपियों को पकड़ा डीडीनगर थाना पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद राज मिश्रा (22), यश मिश्रा उर्फ रोहन मिश्रा (22) और अभिषेक पटेल उर्फ सोनू (20) को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल दो बाइक और एक स्कूटी बरामद की है। तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस मामले में फरार चौथे आरोपी की तलाश कर रही है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।
Sri Lanka vs India

Sri Lanka vs India: 503 रन के पहाड़ के सामने श्रीलंका की जुझारू पारी, Pasindu और Kamindu का कमाल

India vs Sri Lanka 2nd Test: कोलंबो टेस्ट में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर खड़ा कर श्रीलंका पर दबाव बना दिया है। भारत ने अपनी पहली पारी 503 रन पर 9 विकेट के स्कोर पर घोषित की। इसके बाद श्रीलंका की शुरुआत लड़खड़ाई, लेकिन अब पसिंदु सूरियाबंदरारा और कामिंदु मेंडिस की साझेदारी ने मेजबान टीम को थोड़ी राहत दी है। भारत ने खड़ा किया 503 रन का पहाड़ भारत की पहली पारी की कहानी कई शानदार बल्लेबाजी पारियों से बनी। देवदत्त पडिक्कल ने 117 रन की बेहतरीन पारी खेलकर टीम को मजबूत आधार दिया। इसके बाद ध्रुव जुरेल ने नाबाद 115 रन बनाकर पारी को शानदार अंदाज में आगे बढ़ाया। जुरेल का यह टेस्ट क्रिकेट में दूसरा शतक और विदेश में पहला टेस्ट शतक है। वहीं ऋषभ पंत ने 63 रन की तेज पारी खेलकर भारतीय स्कोर को रफ्तार दी। कप्तान शुभमन गिल ने भी 50 रन बनाए। इन पारियों के दम पर भारत 500 रन के आंकड़े को पार करने में सफल रहा। जुरेल का शतक बना बड़ी कहानी ध्रुव जुरेल की बल्लेबाजी इस पारी की सबसे खास बात रही। वह मुश्किल परिस्थितियों में भी लगातार धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते रहे। बारिश और खराब रोशनी के कारण मुकाबला कई बार रुका, लेकिन जुरेल ने अपना फोकस नहीं खोया। जुरेल ने 115 रन की नाबाद पारी में नौ चौके और दो छक्के लगाए। उनकी इस पारी ने भारत को निचले क्रम में एक मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। श्रीलंका की शुरुआत रही खराब 503 रन के विशाल स्कोर का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम को शुरुआत में ही झटके लगे। प्रसिद्ध कृष्णा और मानव सुथार ने शुरुआती विकेट लेकर मेजबान टीम पर दबाव बना दिया। दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका 8/2 पर था और भारत से 495 रन पीछे था। हालांकि तीसरे दिन श्रीलंका ने अपनी पारी को संभालने की कोशिश की। मौजूदा स्थिति में पसिंदु सूरियाबंदरारा और कामिंदु मेंडिस क्रीज पर टिके हुए हैं। दोनों के बीच अर्धशतकीय साझेदारी ने श्रीलंका को शुरुआती संकट से बाहर निकलने का मौका दिया है। भारत की नजर बड़े दबाव पर भारत के पास अभी भी बड़ी बढ़त है। 503 रन का स्कोर श्रीलंका के सामने बड़ी चुनौती है और भारतीय गेंदबाज लगातार दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। अगर टीम इंडिया जल्दी विकेट निकालने में सफल रहती है तो श्रीलंका पर फॉलोऑन का खतरा भी बढ़ सकता है। बारिश से प्रभावित इस टेस्ट में मौसम भी अहम भूमिका निभा रहा है। इसके बावजूद भारतीय टीम ने अब तक मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत रखी है। सीरीज में भारत पहले ही 1-0 से आगे है, इसलिए दूसरे टेस्ट में भी टीम की नजर जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने पर होगी। IND vs SL 2nd Test की मौजूदा तस्वीर साफ है—भारत के पास 503 रन का मजबूत स्कोर है, जबकि श्रीलंका को अब पसिंदु और कामिंदु की साझेदारी से बड़ी पारी की उम्मीद है। मुकाबला जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, यह साझेदारी श्रीलंका के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gurugram

Gurugram में बारिश बनी आफत! Waterlogging से सड़कें जाम, School-Office पर बड़ा फैसला

गुरुग्राम (Gurugram) में सोमवार को हुई तेज बारिश ने एक बार फिर शहर की तैयारियों की पोल खोल दी। कुछ घंटों की बारिश के बाद ही कई इलाकों में पानी भर गया। सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगीं और कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। हालात ऐसे बने कि लोगों को घंटों ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ा। बारिश और जलभराव को देखते हुए प्रशासन ने मंगलवार, 25 अगस्त को स्कूलों में Online Classes चलाने और सरकारी व निजी संस्थानों के कर्मचारियों को Work From Home (WFH) की सलाह दी। तेज बारिश के बाद सड़कें बनीं जलमग्न गुरुग्राम में बारिश के बाद राजीव चौक, IFFCO चौक, रेलवे रोड, ओल्ड दिल्ली रोड, मेहरौली रोड, बसई रोड और नरसिंहपुर समेत कई इलाकों में जलभराव की शिकायतें सामने आईं। कुछ अंडरपास और निचले इलाकों में भी पानी जमा होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे समेत कई व्यस्त सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ऑफिस से लौट रहे लोगों और जरूरी काम से बाहर निकले लोगों को काफी समय तक जाम का सामना करना पड़ा। School Buses फंसीं, Parents की बढ़ी चिंता बारिश का सबसे ज्यादा असर उस समय दिखाई दिया जब कई स्कूल बसें जलभराव वाले रास्तों में फंस गईं। बच्चों के देर से घर पहुंचने की खबरों के बाद अभिभावकों की चिंता बढ़ गई। ऐसे हालात को देखते हुए अगले दिन स्कूलों में ऑफलाइन पढ़ाई के बजाय Online Classes कराने का फैसला लिया गया। इससे बच्चों और शिक्षकों को जलभराव वाले रास्तों से आने-जाने की परेशानी से बचाने की कोशिश की गई। Offices के लिए WFH Advisory गुरुग्राम प्रशासन ने 25 अगस्त के लिए Work From Home Advisory जारी की। कॉरपोरेट, सरकारी और निजी संस्थानों से कर्मचारियों को संभव हो तो घर से काम कराने की अपील की गई। इस फैसले का मकसद सिर्फ कर्मचारियों की परेशानी कम करना नहीं है। प्रशासन के मुताबिक, अगर कम लोग सड़कों पर निकलेंगे तो ट्रैफिक का दबाव घटेगा और जलभराव वाले इलाकों में राहत एवं निकासी का काम तेजी से किया जा सकेगा। बारिश ने फिर उठाए Drainage System पर सवाल गुरुग्राम देश के बड़े कॉरपोरेट और IT हब में गिना जाता है। यहां रोजाना हजारों लोग काम के लिए अलग-अलग इलाकों से आते-जाते हैं। ऐसे में बारिश के बाद सड़कों पर पानी भरना और ट्रैफिक व्यवस्था का बिगड़ना सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि शहर के Urban Infrastructure के लिए भी बड़ी चुनौती है। हर साल मानसून के दौरान जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद एक सवाल बार-बार उठता है—क्या गुरुग्राम का Drainage System तेज बारिश का सामना करने के लिए पर्याप्त है? Delhi-NCR में भी बारिश का असर गुरुग्राम के अलावा दिल्ली-NCR के कई इलाकों में भी भारी बारिश का असर देखने को मिला। कई जगह जलभराव और ट्रैफिक की समस्या सामने आई। मौसम विभाग ने भी क्षेत्र में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया था। फिलहाल प्रशासन की कोशिश जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने, ट्रैफिक को नियंत्रित करने और लोगों को सुरक्षित रखने की है। Gurugram Rain से लोगों को मिला एक और सबक गुरुग्राम में कुछ घंटों की बारिश ने शहर की चमकती तस्वीर के पीछे की एक पुरानी समस्या फिर सामने ला दी। सड़कें डूबने के बाद स्कूलों को Online और कर्मचारियों को WFH करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि बारिश थमने के बाद प्रशासन सिर्फ पानी निकालने तक सीमित रहता है या अगले मानसून से पहले Drainage System को मजबूत करने की ठोस तैयारी भी होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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