दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक Satya Niketan PG Building Collapse के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। हादसे में सात लोगों की मौत के बाद अब पुलिस ने उस PG संचालक को भी गिरफ्तार कर लिया है, जिसने हादसे वाली बिल्डिंग लीज पर ली थी। इस गिरफ्तारी के साथ मामले में अब तक पांच लोगों को पकड़ा जा चुका है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर जिस इमारत में छात्र रह रहे थे, उसकी हालत इतनी खराब होने के बावजूद वहां PG का संचालन कैसे होता रहा। हादसे से पहले बिल्डिंग में चल रहे निर्माण और मरम्मत के काम को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं।
लीज पर लेकर चला रहा था PG
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार PG संचालक सुधांशु अपने पार्टनर शुभम त्यागी के साथ मिलकर ‘Hostel Days’ नाम से PG चला रहा था। दोनों ने यह इमारत लीज पर ली थी। पुलिस के मुताबिक शुभम त्यागी अभी फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।
हादसे के बाद जांच एजेंसियां बिल्डिंग के निर्माण, मरम्मत, स्ट्रक्चरल स्थिति और PG संचालन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों की कोशिश यह समझने की है कि हादसे के पीछे लापरवाही की कितनी बड़ी भूमिका रही।
27 घंटे तक चला Rescue Operation
इमारत गिरने के बाद मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव टीमों ने लंबे समय तक काम किया। करीब 27 घंटे चले Rescue Operation के दौरान मलबे को सावधानी से हटाया गया।
हादसे में सात लोगों की जान चली गई। घटना के बाद इलाके में रहने वाले छात्रों और उनके परिवारों के बीच भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
MCD के अधिकारियों पर भी कार्रवाई
हादसे के बाद सिर्फ PG संचालकों पर ही सवाल नहीं उठे, बल्कि सरकारी निगरानी व्यवस्था भी जांच के घेरे में आ गई। दिल्ली नगर निगम ने दक्षिण जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है।
अब यह जांच की जा रही है कि इमारत की स्थिति और वहां चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी संबंधित विभागों को थी या नहीं। अगर नियमों का उल्लंघन हुआ था तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह भी जांच का अहम हिस्सा है।
जर्जर इमारतों पर शुरू हुआ Bulldozer Action
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में जर्जर और अवैध निर्माण वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। MCD ने कई ऐसी संपत्तियों को निशाने पर लिया है, जिनकी स्थिति लोगों के लिए खतरा मानी जा रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक कार्रवाई के दौरान 17 इमारतों को गिराया गया और पांच संपत्तियों को सील किया गया। प्रशासन का कहना है कि खतरनाक इमारतों की पहचान कर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
इस कार्रवाई का मकसद सिर्फ हादसे के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि उन इमारतों की पहले से पहचान करना है जो भविष्य में बड़ा खतरा बन सकती हैं।
Delhi PG System पर उठे गंभीर सवाल
सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली के PG और निजी हॉस्टल सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पढ़ाई और नौकरी की तैयारी के लिए देशभर से दिल्ली आने वाले युवा बड़ी संख्या में PG में रहते हैं। ऐसे में सिर्फ कमरा और किराया देखना पर्याप्त नहीं है। बिल्डिंग की मजबूती, Fire Safety और जरूरी मंजूरियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
हादसे के बाद दिल्ली सरकार PG और निजी हॉस्टलों के लिए नियमों को ज्यादा सख्त करने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में लाइसेंस, Police Verification, Structural Safety और Fire Safety जैसे पहलुओं को शामिल किया जा सकता है।
आगे क्या होगा?
अब पुलिस की जांच के साथ प्रशासन की कार्रवाई भी अहम होगी। एक तरफ हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय की जा रही है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में दूसरी जर्जर इमारतों की पहचान का काम भी शुरू हो गया है।
सत्य निकेतन हादसे ने यह सवाल जरूर सामने ला दिया है कि किसी इमारत में लोगों को रहने की अनुमति देने से पहले उसकी सुरक्षा की जांच कितनी गंभीरता से की जाती है। अब जरूरत सिर्फ कार्रवाई की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिससे किसी परिवार को दोबारा इसी तरह के हादसे का दर्द न झेलना पड़े।
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