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Russia Oil पर US का बड़ा दबाव: भारत पर 100% Tariff का खतरा, Export से लेकर Trade तक असर

Table of Content

अमेरिका और भारत के बीच रूस से तेल खरीदने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक ऐसा Russia Sanctions Bill आगे बढ़ा है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक अतिरिक्त Tariff लगाने का रास्ता खुल सकता है। भारत भी इस प्रस्ताव के दायरे में आने वाले देशों में शामिल है।

हालांकि, अभी इसे लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है। फिलहाल अमेरिकी संसद में बिल को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अगर आगे चलकर यह प्रावधान कानून बनता है और इसका इस्तेमाल किया जाता है, तभी भारत के कारोबार पर सीधा असर देखने को मिलेगा।

Russia Oil को लेकर क्यों बढ़ा तनाव?

भारत पिछले कुछ वर्षों में रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। रूस से मिलने वाला Crude Oil भारतीय कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण source बन चुका है। यही खरीद अमेरिका के साथ बातचीत में बार-बार बड़ा मुद्दा बनती रही है।

अमेरिका रूस की Energy Earnings को कम करने के लिए उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है। इसी कड़ी में रूस से Oil और Gas खरीदने वाले देशों पर Secondary Tariff लगाने का प्रस्ताव सामने आया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित कानून में 100% तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान रखा गया है। इसका मतलब यह है कि अगर अमेरिकी प्रशासन इस शक्ति का इस्तेमाल करता है, तो संबंधित देशों से अमेरिका आने वाले कुछ सामान पर भारी अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।

भारत ने रूस से कितना Crude Oil खरीदा?

भारत के लिए Russian Oil की अहमियत आंकड़ों से भी समझी जा सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रूस से करीब 40.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा। यह भारत के कुल Crude Oil Imports का लगभग 30 फीसदी हिस्सा बताया गया है।

यानी रूस से तेल खरीदना भारत की Energy Strategy का एक बड़ा हिस्सा है। ऐसे में अचानक इस सप्लाई में बड़ा बदलाव करना आसान नहीं होगा।

अगर 100% Tariff लगा तो भारत पर क्या असर पड़ेगा?

अगर अमेरिकी प्रशासन भविष्य में भारत पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो इसका सबसे सीधा असर Indian Exporters पर पड़ सकता है।

अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो सकता है। इससे वहां भारतीय कंपनियों की Price Competitiveness प्रभावित हो सकती है। Exporters को या तो कीमत बढ़ाने, या अपने Profit Margin को कम करने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

खासकर वे कारोबारी क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं, जिनका अमेरिकी बाजार में बड़ा कारोबार है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम कानून में किन Products और किन परिस्थितियों पर टैरिफ लागू किया जाता है।

क्या भारत को Russia Oil खरीदना कम करना पड़ेगा?

अगर अमेरिका की ओर से दबाव काफी बढ़ता है, तो भारत के सामने Energy और Trade दोनों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती हो सकती है।

रूस से मिलने वाले तेल की जगह भारत को दूसरे देशों से Crude Oil खरीदना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में Oil की कीमत, Shipping Cost, Insurance और Global Supply जैसे factors महत्वपूर्ण होंगे।

लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि भारत तुरंत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। कोई भी फैसला भारत की Energy Security, कीमत और राष्ट्रीय हित जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

India-US Trade पर भी पड़ सकता है असर

भारत और अमेरिका के बीच अरबों डॉलर का व्यापार है। ऐसे में अगर 100% अतिरिक्त टैरिफ वास्तव में लागू होता है, तो इसका असर केवल Oil तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देशों के बीच चल रहे Trade Relations पर भी इसका असर पड़ सकता है।

भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका एक बड़ा Export Market है। इसलिए किसी भी बड़े अतिरिक्त शुल्क से व्यापार की लागत और बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।

US का Russia पर दबाव बढ़ाने का प्लान

अमेरिकी प्रस्ताव का बड़ा उद्देश्य रूस की Economy और Energy Sector पर दबाव बढ़ाना है। रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई को कम करने के लिए अमेरिका लंबे समय से अलग-अलग Sanctions और Trade Restrictions का इस्तेमाल करता रहा है।

प्रस्तावित कानून में रूस से जुड़े Energy Trade और प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क पर भी कार्रवाई के प्रावधान बताए गए हैं। इसी संदर्भ में रूस की कथित Shadow Fleet भी अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में आ सकती है।

अभी भारत के लिए क्या स्थिति है?

फिलहाल भारत के लिए स्थिति Wait and Watch वाली है। 100% Tariff का खतरा चर्चा में जरूर है, लेकिन इसे अभी लागू शुल्क समझना सही नहीं होगा।

आगे अमेरिकी संसद में Bill की प्रक्रिया और उसके बाद अमेरिकी प्रशासन के फैसले से तस्वीर साफ होगी। भारत भी इस पूरे मामले पर अपनी Energy जरूरतों और Trade Interests को ध्यान में रखते हुए प्रतिक्रिया दे सकता है।

अगर भविष्य में 100% Tariff लागू होता है, तो इसका असर भारतीय Exporters, अमेरिका के साथ व्यापार और रूस से होने वाली Oil Purchases—तीनों पर पड़ सकता है। फिलहाल इस पूरे मामले में अगले अमेरिकी फैसले पर नजर बनी हुई है।

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Yukta

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रिंकू सिंह ने बताया क्यों हैं मैनचेस्टर यूनाइटेड के फैन, नीतीश राणा से जुड़ा फुटबॉल कनेक्शन

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी रिंकू सिंह फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड के फैन हैं। हाल ही में वह पहली बार लाइव फुटबॉल मैच देखने के लिए मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम पहुंचे। जियोस्टार से बातचीत में रिंकू ने फुटबॉल के प्रति अपनी दिलचस्पी और पसंदीदा खिलाड़ियों के बारे में बताया। नीतीश राणा ने फुटबॉल से जोड़ा रिंकू सिंह ने बताया कि क्रिकेटर नीतीश राणा की वजह से उनकी फुटबॉल में रुचि बढ़ी। उन्होंने कहा कि वह नीतीश के साथ समय बिताते थे और उन्हें फुटबॉल मैच देखते हुए इस खेल को समझने का मौका मिला। रिंकू के मुताबिक, नीतीश राणा फुटबॉल देखते थे और उनके साथ रहते-रहते रिंकू की भी इस खेल में दिलचस्पी बढ़ने लगी। मैनचेस्टर सिटी के मैच को किया याद रिंकू सिंह ने मैनचेस्टर सिटी और मैनचेस्टर यूनाइटेड के बीच खेले गए मुकाबले को याद करते हुए कहा कि टीवी पर मैच देखने और स्टेडियम में लाइव मैच देखने का अनुभव बिल्कुल अलग होता है। उन्होंने बताया कि उस मुकाबले के दौरान उन्होंने मैनचेस्टर सिटी को भी सपोर्ट किया था, क्योंकि उस समय यूनाइटेड अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थी, जबकि सिटी बेहतर खेल रही थी। मार्कस रैशफोर्ड हैं रिंकू के पसंदीदा खिलाड़ी रिंकू सिंह ने मार्कस रैशफोर्ड को अपना पसंदीदा फुटबॉल खिलाड़ी बताया। उन्होंने कहा कि वह रैशफोर्ड को काफी फॉलो करते हैं। इसके अलावा, रिंकू को मैनचेस्टर यूनाइटेड के कप्तान ब्रूनो फर्नांडिस का मैदान पर शांत रहने वाला अंदाज भी पसंद है। 20 सितंबर को फुलहम से भिड़ेगी मैनचेस्टर यूनाइटेड मैनचेस्टर यूनाइटेड का अगला मुकाबला प्रीमियर लीग के 2026-27 सीजन में फुलहम के खिलाफ 20 सितंबर को होगा। यह मैच रात 9 बजे से जियोस्टार और स्टार स्पोर्ट्स पर लाइव देखा जा सकेगा। क्या KKR के कप्तान बन सकते हैं रिंकू सिंह? आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी करने वाले अजिंक्य रहाणे ने 30 जुलाई को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया था। इसके बाद KKR को नए कप्तान की तलाश है। रिंकू सिंह का नाम संभावित कप्तानों में चर्चा में है। वह 2018 से कोलकाता नाइट राइडर्स का हिस्सा हैं। हालांकि, टीम की कप्तानी को लेकर फ्रेंचाइजी की ओर से अंतिम घोषणा का इंतजार है।

नंदीग्राम उपचुनाव में बड़ा बदलाव, ममता गुट की उम्मीदवार ने नामांकन वापस लिया; कांग्रेस को समर्थन

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम में बड़ा बदलाव हुआ है। ममता बनर्जी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया। संचिता ने नामांकन वापस लेने से पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। हालांकि, उनके नामांकन वापस लेने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ममता ने 13 सितंबर को घोषित किए थे उम्मीदवार ममता बनर्जी गुट ने 13 सितंबर को नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया था। संचिता के नाम वापस लेने के बाद नंदीग्राम में ममता गुट का कोई उम्मीदवार नहीं रहेगा। वहीं, रेजीनगर सीट से रबीउल आलम चौधरी चुनाव मैदान में बने रहेंगे। कांग्रेस ने नंदीग्राम से मिलन प्रधान को उम्मीदवार बनाया है। ममता बनर्जी ने अब कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा की है। 6 अक्टूबर को मतदान, 9 अक्टूबर को आएगा रिजल्ट नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। वहीं, रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई। दोनों विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को की जाएगी। नामांकन वापस लेने के बाद क्या होगा? 7 सवाल-जवाब सवाल 1: उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद अगला कदम क्या होगा? जवाब: नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर चुनाव मैदान में बचे उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी करेगा। सवाल 2: क्या नाम वापस लेने वाला उम्मीदवार अपना फैसला बदल सकता है? जवाब: नहीं। नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवार उसी चुनाव में दोबारा अपना नामांकन बहाल नहीं करा सकता। सवाल 3: अगर एक सीट पर कई उम्मीदवार मैदान में बचे हैं तो क्या होगा? जवाब: सभी वैध उम्मीदवारों के नाम अंतिम सूची में शामिल किए जाएंगे और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान होगा। सवाल 4: अगर नाम वापसी के बाद सिर्फ एक उम्मीदवार बचता है तो क्या होगा? जवाब: ऐसी स्थिति में चुनाव निर्विरोध हो सकता है। निर्वाचन नियमों के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर संबंधित उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित कर सकता है। सवाल 5: क्या नाम वापसी के बाद नया उम्मीदवार खड़ा किया जा सकता है? जवाब: नामांकन दाखिल करने की समय-सीमा समाप्त होने के बाद किसी नए उम्मीदवार को उसी चुनाव में नामांकन दाखिल करने का अवसर नहीं मिलता। सवाल 6: संचिता के नाम वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने क्या फैसला लिया? जवाब: ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने विपक्षी एकजुटता और INDIA गठबंधन के साथ खड़े होने की बात भी कही। सवाल 7: क्या ममता के समर्थन से चुनाव परिणाम का अनुमान लगाया जा सकता है? जवाब: केवल समर्थन की घोषणा के आधार पर चुनाव परिणाम का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। नतीजे मतदाताओं के मतदान, उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों और अन्य चुनावी परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे। पिछले चुनाव के वोट शेयर को सीधे उपचुनाव के परिणाम का संकेत मानना भी उचित नहीं होगा। TMC के दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को अलग-अलग पार्टी नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। यह व्यवस्था अंतरिम है। मूल पार्टी नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। नंदीग्राम सीट क्यों है महत्वपूर्ण? नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण विधानसभा सीट मानी जाती है। वर्ष 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक पहचान को मजबूत करने में भूमिका निभाई थी। 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था। दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी, जिससे यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।
Pakistan

Pakistan Terror Attack: जुमे की नमाज के वक्त Suicide Blast, 16 लोगों की गई जान

Pakistan के खैबर पख्तूनख्वा में शुक्रवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब जुमे की नमाज के दौरान एक मस्जिद के पास जोरदार धमाका हुआ। यह हमला कोहाट इलाके में पुलिस परिसर के पास हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। हमले के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई। पुलिस और राहत टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया। घटना के बाद पूरे इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। Explosive से भरी गाड़ी लेकर पहुंचा हमलावर स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, हमलावर विस्फोटक से भरी गाड़ी लेकर पुलिस परिसर के गेट तक पहुंचा। इसके बाद गाड़ी को टक्कर मारकर जोरदार धमाका किया गया। धमाका इतना तेज था कि आसपास की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। हमले के बाद सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच गोलीबारी की भी सूचना सामने आई। सुरक्षाबलों ने इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया। 5 पुलिसकर्मी समेत 16 लोगों की मौत इस हमले में अब तक 16 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है। मृतकों में 5 पुलिसकर्मी और 11 आम नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं, 50 से ज्यादा लोग घायल हैं। घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद स्थानीय अस्पतालों में Emergency घोषित कर दी गई। बड़ी संख्या में घायलों के पहुंचने के कारण मेडिकल टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया। मस्जिद और आसपास की इमारतों को नुकसान धमाके की चपेट में मस्जिद के अलावा आसपास की कुछ इमारतें भी आईं। राहत और बचाव दल मलबे की जांच में जुटे रहे। पुलिस ने पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि हमले की पूरी साजिश क्या थी और इसमें कितने लोग शामिल थे। किस Terrorist Group ने किया हमला? हमले की जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में एक आतंकी संगठन द्वारा जिम्मेदारी लेने की बात कही गई है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पिछले कुछ समय से आतंकी गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों को लगातार निशाना बनाया जाता रहा है। 2026 में Pakistan में बढ़ी आतंकी हिंसा कोहाट का यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़ी हिंसा और सुरक्षा अभियानों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। PICSS के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के पहले सात महीनों में आतंकी हिंसा और उसके खिलाफ चलाए गए सुरक्षा अभियानों से जुड़ी 2,786 मौतें दर्ज की गईं। इन आंकड़ों में आतंकियों, नागरिकों और सुरक्षा बलों के जवानों की मौतें शामिल हैं। इसलिए इसे केवल आतंकी हमलों में हुई मौतों का आंकड़ा नहीं माना जा सकता। सरकार ने की हमले की निंदा हमले के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से घटना की निंदा की गई। अधिकारियों को घटना की जांच करने और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल कोहाट में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। जांच एजेंसियां हमले से जुड़े सुराग जुटा रही हैं। आने वाले समय में जांच के आधार पर हमले के पीछे की साजिश और जिम्मेदार लोगों को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nandigram

West Bengal Politics: Nandigram से ममता की उम्मीदवार ने नाम वापस लिया, अब Congress को समर्थन

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव (Nandigram Bypoll) से जुड़ी सियासत में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ममता बनर्जी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने चुनावी मैदान से अपना नाम वापस ले लिया है। खास बात यह है कि नामांकन वापस लेने से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके इस फैसले ने बंगाल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। संचिता के नाम वापस लेने के बाद ममता बनर्जी गुट ने नंदीग्राम में अपना उम्मीदवार नहीं रखने का फैसला किया है। अब गुट ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की है। वहीं, बीजेपी ने इस सीट से हसिरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद लिया फैसला रिपोर्ट के मुताबिक, संचिता प्रधान डे शुक्रवार को अपने पति के साथ राज्य सचिवालय नबन्ना पहुंचीं। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इस बैठक के बाद उन्होंने नंदीग्राम उपचुनाव से अपना नामांकन वापस ले लिया। हालांकि, नामांकन वापस लेने की वजह को लेकर उनकी ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं जरूर शुरू हो गई हैं। ममता गुट ने Congress को दिया समर्थन उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद ममता बनर्जी गुट ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला किया है। यानी अब इस सीट पर ममता गुट सीधे चुनाव नहीं लड़ेगा। नंदीग्राम की राजनीति पहले से ही पश्चिम बंगाल में खास महत्व रखती है। ऐसे में इस फैसले के बाद यहां का चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। TMC के नाम और Symbol को लेकर भी विवाद नंदीग्राम उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न (Election Symbol) को लेकर भी विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और प्रतीक दिए हैं। ममता बनर्जी गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और Football Player चुनाव चिह्न मिला है। वहीं दूसरे गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और Envelope चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। इस बदलाव का असर आने वाले उपचुनावों में पार्टी की पहचान और प्रचार पर भी दिखाई दे सकता है। BJP ने हसिरानी रथ को बनाया उम्मीदवार नंदीग्राम सीट से बीजेपी ने हसिरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है। वह दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जिन्हें शुभेंदु अधिकारी का सहयोगी बताया जाता था। दूसरी ओर कांग्रेस ने मिलन प्रधान को मैदान में उतारा है। अब ममता गुट के कांग्रेस को समर्थन देने के बाद नंदीग्राम का चुनावी समीकरण पहले की तुलना में अलग नजर आ रहा है। 6 अक्टूबर को होगी Voting नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती की जाएगी। यह उपचुनाव शुभेंदु अधिकारी द्वारा नंदीग्राम सीट खाली किए जाने के बाद हो रहा है। ऐसे में नंदीग्राम में होने वाला यह मुकाबला पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नंदीग्राम में बदला चुनावी समीकरण एक उम्मीदवार के अचानक नामांकन वापस लेने और उसके बाद कांग्रेस को समर्थन देने से नंदीग्राम उपचुनाव की तस्वीर बदल गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि 6 अक्टूबर को मतदाता किस तरह अपना फैसला सुनाते हैं और 9 अक्टूबर को आने वाला परिणाम किस राजनीतिक समीकरण को मजबूत करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मोदी के जन्मदिन पर कांग्रेस का हमला, 43 सवालों के साथ केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार को घेरा

रायपुर/बिलासपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। रायपुर और बिलासपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल को लेकर रोजगार, महंगाई और आर्थिक नीतियों से जुड़े सवाल उठाए। कांग्रेस ने ‘सेवा संकल्प’ अभियान के बजाय बेरोजगारी, महंगाई और अधूरे वादों पर सरकार से जवाब मांगा। पार्टी ने केंद्र सरकार के सामने कुल 43 सवालों का आरोप पत्र भी रखा। रोजगार और महंगाई को लेकर सवाल प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि 2014 के बाद केंद्र सरकार रोजगार, महंगाई और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई वादों को पूरा नहीं कर सकी है। कांग्रेस ने हर साल 2 करोड़ रोजगार देने और महंगाई कम करने के वादे पर सरकार से जवाब मांगा। इसके अलावा नोटबंदी, जीएसटी और बड़े कारोबारियों के कर्ज माफ किए जाने जैसे मुद्दों को भी उठाया गया। पार्टी नेताओं ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और रुपये की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आम जनता को महंगाई से राहत देने के बजाय उस पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। 43 सवालों के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना कांग्रेस के आरोप पत्र में 15 लाख रुपये के कथित वादे, नोटबंदी के परिणाम और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े सवाल शामिल हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और चुनावी वादों का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। ‘मोदी की गारंटी’ पर भी कांग्रेस के सवाल छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने ‘मोदी की गारंटी’ को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा। पार्टी नेताओं ने एक लाख सरकारी नौकरियों, 500 रुपये में गैस सिलेंडर और अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण जैसे वादों पर सवाल उठाए। इसके अलावा महतारी वंदन योजना के लाभ और गोठान योजना बंद किए जाने को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा। जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ उपलब्धियों का हिसाब मांगने की बात कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री और शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने में कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उनके 12 साल के कार्यकाल की उपलब्धियों और वादों का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रमों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दीप प्रज्ज्वलन से उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकारी एजेंसियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए जाएंगे।

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