रायपुर/बिलासपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। रायपुर और बिलासपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल को लेकर रोजगार, महंगाई और आर्थिक नीतियों से जुड़े सवाल उठाए।
कांग्रेस ने ‘सेवा संकल्प’ अभियान के बजाय बेरोजगारी, महंगाई और अधूरे वादों पर सरकार से जवाब मांगा। पार्टी ने केंद्र सरकार के सामने कुल 43 सवालों का आरोप पत्र भी रखा।
रोजगार और महंगाई को लेकर सवाल
प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि 2014 के बाद केंद्र सरकार रोजगार, महंगाई और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई वादों को पूरा नहीं कर सकी है।
कांग्रेस ने हर साल 2 करोड़ रोजगार देने और महंगाई कम करने के वादे पर सरकार से जवाब मांगा। इसके अलावा नोटबंदी, जीएसटी और बड़े कारोबारियों के कर्ज माफ किए जाने जैसे मुद्दों को भी उठाया गया।
पार्टी नेताओं ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और रुपये की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आम जनता को महंगाई से राहत देने के बजाय उस पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।
43 सवालों के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना
कांग्रेस के आरोप पत्र में 15 लाख रुपये के कथित वादे, नोटबंदी के परिणाम और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े सवाल शामिल हैं।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और चुनावी वादों का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।
‘मोदी की गारंटी’ पर भी कांग्रेस के सवाल
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने ‘मोदी की गारंटी’ को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा। पार्टी नेताओं ने एक लाख सरकारी नौकरियों, 500 रुपये में गैस सिलेंडर और अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण जैसे वादों पर सवाल उठाए।
इसके अलावा महतारी वंदन योजना के लाभ और गोठान योजना बंद किए जाने को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा।
जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ उपलब्धियों का हिसाब मांगने की बात
कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री और शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने में कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उनके 12 साल के कार्यकाल की उपलब्धियों और वादों का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रमों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दीप प्रज्ज्वलन से उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकारी एजेंसियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए जाएंगे।


