छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी इलाके से बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में पकड़े गए 23 लोगों में से 18 भारतीय नागरिक पाए गए हैं। मुर्शिदाबाद और संबंधित थाना क्षेत्रों से दस्तावेजों व पहचान का सत्यापन होने के बाद इन सभी को रायपुर स्थित होल्डिंग/डिटेंशन सेंटर से 15 दिन के भीतर रिहा कर दिया गया।
अब पुलिस बचे हुए 5 लोगों के दस्तावेजों की जांच कर रही है। इनके अतिरिक्त दस्तावेज भी मंगाए गए हैं। कुछ दस्तावेजों में कमियां सामने आई हैं, जबकि कुछ लोगों के नाम एसआईआर से हटाए जाने की जानकारी भी मिली है। पुलिस सत्यापन पूरा होने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।
4 सितंबर को 23 लोगों को रायपुर भेजा गया था
दरअसल, बिलासपुर पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स गठित कर सिरगिट्टी इलाके में अभियान चलाया था। इस दौरान 23 लोगों को संदिग्ध मानकर पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, करीब दो महीने तक चले अभियान में जिले में 1,162 लोगों की जांच की गई थी। इनमें 23 लोगों के दस्तावेज और पहचान संदिग्ध पाए गए थे।
इसके बाद पुलिस टीम मुर्शिदाबाद, जंगीपुर और आसपास के संबंधित थाना क्षेत्रों में पहुंची। संदिग्धों द्वारा बताए गए पते और दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। शुरुआती जांच के बाद 4 सितंबर को सभी 23 लोगों को पहचान और दस्तावेजों के अंतिम सत्यापन तक रायपुर के होल्डिंग/डिटेंशन सेंटर भेजा गया था।
पिता की जगह ससुर का नाम मिलने से बढ़ा संदेह
पुलिस की शुरुआती जांच में कुछ लोगों के दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे थे। बताया गया कि कुछ दस्तावेजों में पिता की जगह ससुर का नाम दर्ज था। इसके अलावा मूल निवास और पहचान से जुड़े कागजात में भी कमियां मिली थीं।
इन्हीं आधारों पर पुलिस ने इन लोगों को संदिग्ध मानकर जांच आगे बढ़ाई थी। हालांकि, सत्यापन के बाद 18 लोगों के भारतीय नागरिक होने की पुष्टि हुई है।
बाल के बदले बर्तन और टेंट-पंडाल का करते थे काम
जांच के दौरान पुलिस को पता चला था कि इनमें से अधिकांश लोग सिरगिट्टी क्षेत्र में रहकर अलग-अलग छोटे-मोटे काम करते थे। कुछ लोग बाल के बदले बर्तन देने का काम करते थे, जबकि कुछ टेंट-पंडाल लगाने सहित अन्य कार्यों से जुड़े थे।
पुलिस ने इनके पश्चिम बंगाल स्थित बताए गए पते और स्थानीय दस्तावेजों से संबंधित जानकारी भी जुटाई थी।
अब 5 लोगों के दस्तावेजों की जांच जारी
18 लोगों के सत्यापन के बाद पुलिस का फोकस अब बचे हुए 5 लोगों पर है। पुलिस इनके अतिरिक्त दस्तावेज और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड मंगा रही है।
जिन लोगों के दस्तावेज अधूरे या संदिग्ध पाए गए हैं, उनका सत्यापन संबंधित थानों और स्थानीय रिकॉर्ड के आधार पर कराया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई तय करेगी।

