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Manipur Violence: 7 दिनों से बाजार और स्कूल बंद, जरूरी सामान के दाम बढ़े; 40 मौतों की खबर

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मणिपुर (Manipur) में हिंसा और तनाव का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ नजर आ रहा है। राज्य के कई इलाकों में लगातार सात दिनों से स्कूल और बाजार बंद हैं। इसका असर पढ़ाई, कारोबार और जरूरी सामान की सप्लाई पर पड़ा है। हालात ऐसे हैं कि कुछ जगहों पर चीनी की कीमत ₹450 प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है।

इसी बीच पिछले चार दिनों में छह हत्याओं की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अब तक हिंसा से जुड़ी घटनाओं में करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार बने तनाव के कारण कई इलाकों में सामान्य जनजीवन अभी भी प्रभावित है।

7 दिन से स्कूल और बाजार बंद

हिंसा के चलते कई इलाकों में स्कूलों पर ताला लगा हुआ है। बाजार बंद होने से व्यापारियों के साथ उन परिवारों की मुश्किल भी बढ़ी है, जिनकी रोज की जरूरतें स्थानीय बाजारों पर निर्भर हैं।

लंबे समय तक बाजार बंद रहने का असर सामान की आवाजाही पर भी पड़ रहा है। जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित होने से कुछ चीजों के दाम बढ़ने की जानकारी सामने आई है।

चीनी के दाम ने बढ़ाई परेशानी

मणिपुर के कुछ हिस्सों में चीनी की कीमत ₹450 किलो तक पहुंचने की खबर है। सामान्य दिनों की तुलना में यह काफी ज्यादा है। सप्लाई और परिवहन में आई रुकावट को इसकी एक वजह बताया जा रहा है।

बाजार बंद रहने के बीच आम परिवारों के लिए महंगे दाम पर जरूरी सामान खरीदना एक अलग चुनौती बन गया है। हालांकि, अलग-अलग इलाकों में कीमतें अलग हो सकती हैं।

4 दिन में 6 हत्याओं से चिंता बढ़ी

राज्य में पिछले चार दिनों के दौरान छह हत्याओं की घटनाएं सामने आने के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हिंसा की लगातार घटनाओं ने प्रशासन और सुरक्षा बलों के सामने हालात सामान्य करने की चुनौती खड़ी कर दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में अब तक करीब 40 लोगों की मौत हिंसा से जुड़ी घटनाओं में हो चुकी है। ऐसे में शांति व्यवस्था कायम करना प्रशासन के लिए बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

पढ़ाई से कारोबार तक, हर जगह असर

मणिपुर में मौजूदा हालात का असर समाज के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ रहा है। स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई रुक गई है, जबकि बाजार बंद होने से दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

दूसरी तरफ जरूरी सामान की कीमतों में बढ़ोतरी ने परिवारों का बजट भी प्रभावित किया है। लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि हालात कब सामान्य होंगे और बाजार व स्कूल कब दोबारा खुलेंगे।

लोगों को शांति और सामान्य हालात का इंतजार

लगातार हिंसा के बीच मणिपुर में आम लोग जल्द से जल्द सामान्य जिंदगी लौटने का इंतजार कर रहे हैं। स्कूलों की बहाली, बाजारों का खुलना और जरूरी सामान की सप्लाई सामान्य होना लोगों के लिए बड़ी राहत होगी।

फिलहाल राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और शांति बहाली पर सबकी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में हालात किस तरह बदलते हैं, यह प्रशासन की कार्रवाई और जमीनी स्थिति पर निर्भर करेगा।

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Yukta

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MP में 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर पेट्रोल पंप डीलर्स का बड़ा फैसला, 16 अक्टूबर से नहीं लेंगे पेमेंट

मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने 2,000 रुपये से अधिक के बिलों का भुगतान UPI के जरिए स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन के मुताबिक, यह व्यवस्था 16 अक्टूबर से लागू की जाएगी। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश में करीब 4,700 पेट्रोल पंप हैं। UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने से प्रत्येक पेट्रोल पंप संचालक पर हर महीने लगभग 17,400 रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेन-देन पर MDR अजय सिंह के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेन-देन पर MDR लागू होने के बाद एसोसिएशन ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि ईंधन को रियायती श्रेणी में रखा गया है और 2,000 रुपये की सीमा से अधिक प्रत्येक लेन-देन पर 5 रुपये का समान MDR लागू है। 18 प्रतिशत GST जोड़ने के बाद प्रति लेन-देन लागत लगभग 5.90 रुपये हो जाती है। हर महीने 8.17 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च का दावा अजय सिंह ने बताया कि प्रत्येक पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन औसतन 100 ऐसे लेन-देन होते हैं, जिनकी राशि 2,000 रुपये से अधिक होती है। उनके मुताबिक, इससे प्रतिदिन लगभग 590 रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। महीने के हिसाब से यह राशि करीब 17,400 रुपये तक पहुंच जाती है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के सभी 4,700 पेट्रोल पंपों को मिलाकर हर महीने लगभग 8.17 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। अजय सिंह ने कहा कि पेट्रोल पंप का कारोबार पहले से ही कम मार्जिन वाला है, इसलिए इस अतिरिक्त खर्च को सहन करना मुश्किल है। नोट लेने पर नहीं, डिजिटल भुगतान पर फैसला मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि किसी भी प्रकार की मुद्रा स्वीकार करने से इनकार करना कानूनी रूप से गलत हो सकता है। हालांकि, डिजिटल भुगतान को लेकर किसी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बृजेंद्र सिंह रघुवंशी ने कहा कि पेट्रोल पंप संचालकों के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। कर्मचारियों की सैलरी, बिजली बिल और अन्य खर्चों के बाद मुनाफा सीमित रह जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि MDR के रूप में अतिरिक्त राशि देनी पड़ेगी, तो पेट्रोल पंप संचालकों के पास क्या बचेगा। उन्होंने यह राशि तेल कंपनियों से वसूल किए जाने की मांग की। कंपनियों के नियमों से परेशान होने का आरोप बृजेंद्र सिंह रघुवंशी ने कहा कि पेट्रोल पंप संचालक कारोबार बंद करना चाहते हैं, लेकिन कंपनियों के नियमों के कारण ऐसा करना आसान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियों की नीतियों और बढ़ते खर्चों के कारण पेट्रोल पंप चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम पर सियासत, कांग्रेस ने खर्च और टेंडर को लेकर उठाए सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 सितंबर को छत्तीसगढ़ में ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदेशभर में 1.50 करोड़ से अधिक दीये जलाने का दावा किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को जनता की स्वस्फूर्त भागीदारी बताया। वहीं, कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने आयोजन में इस्तेमाल किए गए दीयों और तेल की खरीद को लेकर सवाल उठाए हैं। CM साय बोले- लोगों ने स्वस्फूर्त होकर जलाए दीये मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम में लोगों ने स्वस्फूर्त होकर हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन, सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति लोगों ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। दैनिक भास्कर से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देशवासियों की सेवा कर रहे हैं और लोग सड़कों पर उतरकर दीये जलाते हुए उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को जनभागीदारी का कार्यक्रम बताया। कांग्रेस ने खर्च को लेकर पूछे सवाल कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम में हुए खर्च को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि प्रदेशभर में इतने दीयों और तेल की खरीद के लिए पैसा कहां से आया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या दीयों और तेल की खरीद के लिए कोई टेंडर जारी किया गया था। कांग्रेस की ओर से आयोजन में सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं और खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की गई है। खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग कांग्रेस नेता ने कार्यक्रम में इस्तेमाल हुए संसाधनों और उनकी खरीद प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग की है। हालांकि, आयोजन पर हुए कुल खर्च, खरीद प्रक्रिया और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेताओं के बयानों के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रदेश की प्रमुख खबरों के लिए Desh Har Pal वेबसाइट पढ़ते रहें।
TMC

West Bengal By-Election: TMC के दोनों गुटों को मिले नए नाम और Symbols, 6 अक्टूबर को होगा चुनाव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को लेकर चल रही खींचतान अब चुनावी मैदान में भी नजर आएगी। पार्टी के दोनों गुटों के बीच नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद के बाद चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनाव के लिए नई पहचान तय कर दी है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम दिया गया है। इस गुट को Football Player का चुनाव चिन्ह मिला है। वहीं, दूसरे गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम दिया गया है और उसके लिए Envelope Symbol आवंटित किया गया है। 6 अक्टूबर के उपचुनाव में नए नाम से उतरेंगे गुट आयोग के फैसले के बाद दोनों गुट 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में अपनी नई पहचान के साथ मैदान में उतरेंगे। यानी इस चुनाव में मतदाताओं को TMC से जुड़े दो अलग नाम और अलग-अलग चुनाव चिन्ह दिखाई देंगे। यह बदलाव उस समय हुआ है जब पार्टी के नाम और पुराने चुनाव चिन्ह को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने फिलहाल पुराने नाम और Symbol को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक दोनों गुटों को नई पहचान के साथ चुनाव लड़ने का रास्ता दिया है। ममता गुट को मिला Football Player Symbol ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए Football Player चुनाव चिन्ह खास तौर पर चर्चा में है। पश्चिम बंगाल में फुटबॉल की लोकप्रियता को देखते हुए यह Symbol लोगों का ध्यान खींच सकता है। हालांकि, चुनाव चिन्ह का आवंटन चुनाव आयोग की प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका इस्तेमाल संबंधित उम्मीदवारों को चुनाव नियमों के तहत करना होगा। बागी गुट का नाम Democratic Trinamool Congress दूसरे गुट को Democratic Trinamool Congress नाम दिया गया है। इस गुट के लिए Envelope चुनाव चिन्ह तय किया गया है। नाम और Symbol में बदलाव के बाद दोनों पक्ष अब अपनी-अपनी राजनीतिक पहचान के साथ मतदाताओं के बीच जाएंगे। इससे आने वाला उपचुनाव TMC विवाद के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो गया है। पुराने TMC नाम और Symbol पर क्या हुआ? विवाद के केंद्र में All India Trinamool Congress का नाम और पार्टी का पारंपरिक फूल और घास वाला चुनाव चिन्ह है। दोनों पक्षों के बीच संगठनात्मक अधिकार और पार्टी की पहचान को लेकर विवाद के चलते इस नाम और Symbol को लेकर फिलहाल स्थिति बदली गई है। चुनाव आयोग का यह कदम तत्काल होने वाले उपचुनाव को लेकर है। पार्टी के नाम और पुराने चुनाव चिन्ह पर अंतिम स्थिति विवाद की आगे की प्रक्रिया और आयोग के फैसलों पर निर्भर करेगी। चुनावी मैदान में बदली दिखेगी TMC की पहचान अब 6 अक्टूबर के उपचुनाव में मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं होगा, बल्कि मतदाताओं के सामने TMC से जुड़े दो अलग नाम और Symbol भी होंगे। ममता बनर्जी के गुट के सामने Football Player, जबकि दूसरे गुट के सामने Envelope चुनाव चिन्ह होगा। पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC का प्रभाव लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में पार्टी के नाम और Symbol में आया यह बदलाव आगामी उपचुनाव को और ज्यादा चर्चा में ला रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

कूनो में प्रोजेक्ट चीता की बड़ी उपलब्धि, भारत में जन्मी मादा चीता ने दिए 4 शावकों को जन्म

प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के एक दिन बाद, 18 सितंबर को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से अच्छी खबर सामने आई है। भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार शावकों को जन्म दिया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह चीता संरक्षण की दिशा में भारत की बढ़ती सफलता और संकल्प का प्रतीक है। मंत्री ने इस अवसर को ‘चार साल, चार नए जीवन’ बताया। नए शावकों के जन्म के बाद कूनो में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 54 हो गई है, जिनमें 37 चीते भारत में जन्मे हैं। कूनो में बढ़ेगी चीतों की संख्या मादा चीता KGP12 का भारत में जन्म लेना और अब कूनो में शावकों को जन्म देना प्रोजेक्ट चीता के लिए विशेष महत्व रखता है। इससे भारत में जन्मे चीतों के प्राकृतिक प्रजनन की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और उनकी संख्या बढ़ाने के प्रयासों के बीच चार नए शावकों का जन्म वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी बड़ी खबर है। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान की टीम और प्रोजेक्ट चीता से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। इस संबंध में सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने भी जानकारी साझा की है। चार महीने पहले इसी मादा चीता के शावकों की हुई थी मौत 12 मई 2026 को इसी मादा चीता KGP12 के चार शावकों की कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मौत हो गई थी। इन शावकों का जन्म 11 अप्रैल 2026 को हुआ था और वे लगभग एक महीने के थे। वन विभाग के अनुसार, टीम ने शावकों को 11 मई की शाम आखिरी बार जीवित देखा था। अगले दिन उनके शव आंशिक रूप से खाए हुए मिले थे। विभाग ने किसी जंगली जानवर के हमले या शिकार की आशंका जताई थी। हालांकि, मादा चीता पूरी तरह सुरक्षित थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जताई खुशी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चार नए शावकों के जन्म पर खुशी जताई। उन्होंने इसे मध्य प्रदेश और प्रोजेक्ट चीता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान की टीम और चीता संरक्षण अभियान से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चार साल पहले शुरू हुआ प्रोजेक्ट चीता लगातार आगे बढ़ रहा है। वन्यजीव, पर्यावरण और मध्य प्रदेश की प्रमुख खबरों के लिए Desh Har Pal वेबसाइट पढ़ते रहें।

मोहन भागवत ने उज्जैन में युवा धर्म संसद को किया संबोधित, बोले- धर्म पूजा नहीं, जीवन का अनुशासन है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद को संबोधित किया। उन्होंने धर्म, पर्यावरण, युवाओं के आचरण और भारत के पड़ोसी देश के रवैये सहित कई विषयों पर विचार रखे। भागवत ने युवाओं से धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित न रखने और इसे अपने दैनिक जीवन व आचरण में उतारने की अपील की। उन्होंने कहा कि धर्म केवल रिलिजन नहीं, बल्कि जीवन जीने का अनुशासन है। किसी इच्छा की पूर्ति, भय, लालच या जान बचाने के लिए भी धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। सुख-दुख और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन धर्म स्थायी रहता है। कर्मकांड धर्म का हिस्सा, लेकिन पूरा धर्म नहीं मोहन भागवत ने कहा कि धर्म को लेकर भ्रम का एक कारण अपनी भाषा और धर्म के वास्तविक अर्थ को भूल जाना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह कुश्ती सीखने के लिए अखाड़े में दंड-बैठक जरूरी होती है, उसी तरह धर्म के कर्मकांड और अनुशासन उसके अभ्यास का हिस्सा हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मकांड धर्म का एक अंग है, लेकिन पूरा धर्म नहीं है। कचरा न करना और ट्रैफिक नियमों का पालन भी धर्म भागवत ने कहा कि धर्म केवल पूजा और धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। खाना खाने के बाद कचरा न करना और ट्रैफिक नियमों का पालन करना भी धर्म का हिस्सा है। उन्होंने युवाओं से अपनी उपासना-पद्धति, परंपरा और गुरु का सम्मान करने के साथ-साथ दूसरों की उपासना-पद्धतियों का भी सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी को कन्वर्ट नहीं करना और सभी की आस्थाओं का सम्मान करना भी धर्म का हिस्सा है। पाकिस्तान का नाम लिए बिना पड़ोसी देश पर टिप्पणी संघ प्रमुख ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना पश्चिम दिशा के पड़ोसी देश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक पड़ोसी देश बिना कारण विवाद करता है और बार-बार भारत को परेशानी देता है। उनके अनुसार, भारत ने कई बार उसे सबक सिखाया, लेकिन इसके बावजूद भारत ने दूसरे देशों के साथ व्यवहार में अपनी मानवीय दृष्टि नहीं छोड़ी। भागवत ने कहा कि भारत में अलग-अलग विचारधाराओं की सरकारें रही हैं, लेकिन देश ने दुनिया के संघर्षों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर भारत ने उन लोगों की भी मदद की, जिन्होंने पहले भारत को नुकसान पहुंचाया था। युवाओं के धर्म पर विचार करने से जताई खुशी मोहन भागवत ने कहा कि उन्हें खुशी है कि युवा धर्म के बारे में विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजकल धर्म को कई लोग बुढ़ापे या रिटायरमेंट से जोड़कर देखते हैं, जबकि गीता और रामायण जैसे ग्रंथों का अध्ययन जीवन के हर चरण में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्ति के अस्तित्व की शुरुआत से अंत तक बना रहता है। व्यक्ति उसे माने या न माने, धर्म जीवन में मौजूद रहता है। अहंकार से पैदा होती है गलतफहमी भागवत ने युवाओं को अहंकार से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति यह मानने लगता है कि हर चीज उसके नियंत्रण में है और सब कुछ उसकी इच्छा के अनुसार होना चाहिए, तो गलतफहमी पैदा होती है। उन्होंने युवाओं से धर्म के सिद्धांतों को समझने और उन्हें अपने व्यवहार में उतारने का आह्वान किया। युवा धर्म संसद में 1,700 छात्र-छात्राएं शामिल उज्जैन के गीता भवन में 17 से 19 सितंबर तक सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से युवा धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में देशभर से करीब 1,700 युवा छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा लगभग 300 विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी कार्यक्रम का हिस्सा बन रहे हैं। आयोजन सिद्धपीठ हनुमत निवास अयोध्या के पीठाधीश्वर एवं संरक्षक आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और कांचीपुरम के बाद यह युवा धर्म संसद का छठा संस्करण है। अगले वर्ष इसका आयोजन द्वारका में किया जाएगा। AI और सूचना-विचार संघर्ष पर भी होगा संवाद कार्यक्रम में धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा पर व्याख्यान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सूचना-विचार संघर्ष पर संवाद तथा देशभर से चयनित युवाओं के विशेष उद्बोधन सत्र आयोजित किए जाएंगे। व्याख्यान सत्र में अवधेशानंद गिरि जी महाराज, मनोज मुंतशिर, प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, स्मृति अनंतलक्ष्मी और जे. नंद कुमार सहित कई वक्ता युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे। सह-मीडिया प्रमुख बादल सिंह के अनुसार, इस बार कार्यक्रम में 25 राज्यों से युवा शामिल हो रहे हैं। इससे पहले आयोजित पांच संस्करणों में करीब 7,100 प्रतिभागी हिस्सा ले चुके हैं।

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