कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार को एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने कहा है कि यदि CEC इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा कि आंदोलन को शहर-शहर तक ले जाया जाएगा।
CJP ने गुरुवार को ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे की समय-सीमा दी थी। पार्टी ने SIR के जरिए 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया है। यह CJP का दावा है; इसे चुनाव आयोग द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं पेश किया गया है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी हुआ हंगामा
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक पोस्टर लेकर सदन में पहुंचे। पोस्टरों पर CEC से इस्तीफा देने की मांग लिखी थी।
कांग्रेस भी देशभर में चुनाव कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित कर चुकी है।
महाराष्ट्र SIR के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में 2 याचिकाएं
महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें SIR की संवैधानिक वैधता, प्रक्रिया और इसे लागू करने के तरीके को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद SIR से जुड़े 14 प्रशासनिक आदेश जारी किए गए। याचिकाओं में इन आदेशों को रद्द करने और दर्ज आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
पहली याचिका में क्या मांग?
महाराष्ट्र के चार मतदाताओं की ओर से वकील असीम सरोदे के माध्यम से दायर याचिका में SIR के तहत जारी 14 आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है।
इसके अलावा हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और नाम हटाने की प्रक्रिया की जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक समिति बनाने की मांग की गई है। याचिका में SIR से जुड़े फैसलों, बूथ संबंधी नियमों और ECI-NET की तकनीकी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी शामिल है।
याचिका में नई वोटर लिस्ट तैयार होने तक संबंधित विधानसभा चुनावों को स्थगित करने की मांग भी की गई है।
दूसरी याचिका में ASDD वोटर्स का मुद्दा
दूसरी याचिका मुंबई के दो निवासियों ने वकील हितेंद्र गांधी के माध्यम से दायर की है। इसमें ASDD वोटर्स के नाम हटाने की प्रक्रिया और SIR के दौरान दस्तावेज जमा करने से जुड़े नियमों पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने SIR और ASDD से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने, अप्रैल 2026 में दिए गए प्रतिनिधित्व पर कार्रवाई करने और महाराष्ट्र से जुड़े SIR निर्देशों को रद्द करने की मांग की है।
10 महीने में 14 लिखित आपत्तियों का दावा
यह विवाद 23 सितंबर को प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद और बढ़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इनमें चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपने संज्ञान के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए थे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि इस तरह की आंतरिक चर्चाएं सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR समेत अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
यूपी में CEC के दो कार्यक्रम स्थगित
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े दो युवा मतदाता जागरूकता कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं। इनमें पहला कार्यक्रम मेरठ में और दूसरा वाराणसी में प्रस्तावित था।
EC के एक अधिकारी के मुताबिक, दोनों कार्यक्रम 21 सितंबर को ही स्थगित किए गए थे और इसका मौजूदा विवाद से कोई संबंध नहीं है।
SIR को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
SIR को लेकर मुख्य विवाद वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने के तरीके से जुड़ा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है, जबकि चुनाव आयोग ने अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है।
फिलहाल CJP की आंदोलन की चेतावनी, विपक्ष की राजनीतिक मांगों और SIR से जुड़ी याचिकाओं के बीच यह मामला न्यायिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है।



