कमजोर मानसून के कारण मध्य प्रदेश में नर्मदा बेसिन के करीब 15 जिलों में इस बार कम बारिश हुई है। इसका असर नदी के बहाव क्षेत्र में बने बांधों के जल भंडारण पर पड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस साल बांधों में करीब 1,000 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) यानी एक लाख करोड़ लीटर पानी कम जमा हुआ है। यह मात्रा कुल जल संग्रहण क्षमता का लगभग 10 प्रतिशत बताई जा रही है।
नर्मदा बेसिन में पानी की उपलब्धता 25% तक घटने का अनुमान
नर्मदा बेसिन में उपयोग योग्य पानी की उपलब्धता में भी 21.4 से 25 प्रतिशत तक कमी आने का अनुमान है। सामान्य तौर पर बेसिन क्षेत्र में हर साल नर्मदा नदी से करीब 28 मिलियन एकड़ फीट पानी का उपयोग होता है।
इस बार कैचमेंट एरिया में 40 प्रतिशत तक कम बारिश होने के कारण उपलब्ध पानी की मात्रा घटकर 21 से 22 मिलियन एकड़ फीट रहने का अनुमान है। इससे सिंचाई और बिजली उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मालवा क्षेत्र में जल संकट की स्थिति को गंभीर होने से रोकने के लिए इंदिरा सागर बांध से गुजरात को दिए जाने वाले 800 MCM पानी की मात्रा कम करने के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए।
इंदौर की जरूरत के हिसाब से 5 साल 8 महीने का पानी
एक हजार MCM पानी करीब एक लाख करोड़ लीटर के बराबर होता है। यदि इंदौर की आबादी 35 लाख मानकर प्रति व्यक्ति रोजाना 135 लीटर पानी की खपत का हिसाब लगाया जाए, तो इतनी मात्रा शहर की जरूरत के लिए लगभग 5 साल 8 महीने तक पर्याप्त हो सकती है।
हालांकि, यह गणना केवल अनुमानित आबादी और प्रति व्यक्ति खपत पर आधारित है। वास्तविक जरूरत और पानी की उपलब्धता समय के साथ बदल सकती है।
प्रदेश को नर्मदा से मिलती है करीब 2,400 मेगावाट बिजली
नर्मदा नदी की कुल लंबाई करीब 1,312 किलोमीटर है। इसमें लगभग 1,112 किलोमीटर हिस्सा मध्य प्रदेश से होकर गुजरता है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, नर्मदापुरम और देवास सहित कई शहरों में नर्मदा से जलापूर्ति होती है।
नदी पर बरगी, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर और सरदार सरोवर जैसे बड़े बांध बने हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं से जुड़े बिजली उत्पादन का विवरण इस प्रकार है:
- इंदिरा सागर बांध: 1,000 मेगावाट
- ओंकारेश्वर बांध: 540 मेगावाट
- सरदार सरोवर परियोजना: 840 मेगावाट
इन तीनों परियोजनाओं की बताई गई क्षमता का कुल योग 2,380 मेगावाट है, जिसे करीब 2,400 मेगावाट बताया गया है।
जल प्रबंधन की चुनौती बढ़ने की आशंका
नर्मदा बेसिन में पानी की उपलब्धता कम होने से पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में बांधों में उपलब्ध जल भंडार और अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर जल वितरण की योजना बनाना जरूरी होगा।
फिलहाल गुजरात को दिए जाने वाले पानी की मात्रा घटाने को लेकर विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है। इस संबंध में किसी अंतिम निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।






































