CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल से रिहा हुए अभी एक दिन भी नहीं बीता था कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन्हें पूछताछ के लिए बुला लिया। बुधवार शाम, 21 अक्टूबर को जेल से बाहर आए दोनों नेताओं को गुरुवार, 22 अक्टूबर को क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने के लिए समन जारी किया गया। इस मामले में पार्टी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे का नाम भी सामने आया है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामलों की जांच अब क्राइम ब्रांच कर रही है। ऐसे में दोनों नेताओं की रिहाई के तुरंत बाद आया समन इस पूरे घटनाक्रम का नया मोड़ माना जा रहा है।
रिहाई के अगले दिन Police का Summon
सौरव दास और आशुतोष रांका को करीब सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर की शाम रिहा किया गया था। रिहाई के लिए दोनों को निजी मुचलके और जमानतदारों से जुड़े बॉन्ड की शर्तें पूरी करनी पड़ीं।
रिहाई के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को पूछताछ के लिए बुलाया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में 22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे पहुंचने के लिए कहा गया था।
पुलिस जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामलों में घटनाक्रम और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि, समन जारी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं।
Jantar Mantar Protest से कैसे शुरू हुआ विवाद?
CJP नेताओं ने 13 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। पार्टी की मांग थी कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर उठे सवालों पर जवाब दिया जाए।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित प्रदर्शन क्षेत्र से बाहर जाने वाले प्रतिबंधित हिस्से में प्रवेश करने की कोशिश की और बैरिकेड पार किए।
इस घटनाक्रम के बाद सौरव दास, आशुतोष रांका और अन्य CJP सदस्यों को हिरासत में लिया गया। बाद में दोनों प्रमुख नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
CJP की ओर से इस प्रदर्शन को चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने की कोशिश के रूप में पेश किया गया। वहीं, पुलिस ने कानून-व्यवस्था और निर्धारित प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़े पहलुओं पर कार्रवाई की। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी।
दो FIR की जांच कर रही है Crime Branch
जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े दो मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। ये मामले कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़े बताए गए हैं।
जांच में कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश, सरकारी आदेशों की अवहेलना और पुलिस के काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल हैं।
क्राइम ब्रांच अब इन घटनाओं से जुड़े तथ्यों और संबंधित लोगों के बयान की जांच कर रही है। सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पूछताछ के लिए बुलाए जाने की खबर इसी जांच से जुड़ी है।
सात दिन बाद कैसे मिली जेल से रिहाई?
दोनों नेताओं को 14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई। इसके बाद रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी।
21 अक्टूबर को दोनों नेताओं की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट का भी रुख किया गया था। बाद में उनकी याचिका वापस लिए जाने की खबर सामने आई। इसके बाद विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने बॉन्ड और लिखित आश्वासन से जुड़ी शर्तें पूरी होने पर उनकी रिहाई का आदेश दिया।
रिहाई के दौरान दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदारों से जुड़े बॉन्ड की शर्तें पूरी करनी पड़ीं। उन्होंने शांति बनाए रखने और कानून के दायरे में रहकर प्रदर्शन करने का आश्वासन भी दिया।
उन्हें जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करने की शर्त से भी जोड़ा गया। रिहाई का अर्थ यह नहीं है कि प्रदर्शन से जुड़े सभी मामले समाप्त हो गए हैं।
Abhijeet Dipke का बयान भी चर्चा में
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए दोनों नेताओं की तारीफ की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि दोनों उनसे बड़े नेता हैं और वह उनका अनुसरण करते हैं।
दीपके के इस बयान को पार्टी के भीतर दोनों नेताओं के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। जेल से रिहाई के बाद अब क्राइम ब्रांच का समन मिलने से दोनों नेताओं से जुड़ा मामला फिर चर्चा में आ गया है।
अब आगे क्या होगा?
22 अक्टूबर को पूछताछ के लिए जारी समन के बाद अब नजर क्राइम ब्रांच की जांच पर है। पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम और दर्ज मामलों से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने की कोशिश करेगी।
आगे की कार्रवाई पूछताछ में सामने आने वाली जानकारी और जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, मामले में किसी भी आरोप को अंतिम रूप से साबित हुआ नहीं माना जा सकता।
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