शेयर बाजार (Stock Market) में गिरावट देखकर परेशान निवेशकों को गुरुवार को राहत मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के ब्याज दरों पर फैसले के बाद भारतीय बाजार में खरीदारी लौट आई। सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। बाजार में अचानक आई इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर खींचा है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा?
US Fed Decision: अमेरिका में क्या हुआ, जिसका दिखा असर?
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने 28 अक्टूबर को अपनी प्रमुख ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया। दरों को स्थिर रखने के फैसले के बाद वैश्विक बाजारों में निवेशकों ने राहत महसूस की।
दरअसल, अमेरिका में ब्याज दरों का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ता है। जब वहां ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक अपने निवेश को लेकर सतर्क हो जाते हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि, फेड के फैसले का मतलब यह नहीं है कि वैश्विक बाजारों की सभी चिंताएं खत्म हो गई हैं। महंगाई और आगे ब्याज दरों में संभावित बदलाव पर अभी भी नजर बनी हुई है।
Sensex Today: 600 अंक से ज्यादा चढ़ा बाजार
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान खरीदारी बढ़ी। इसके बाद सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा उछल गया। वहीं, निफ्टी 50 में भी तेजी देखने को मिली और इंडेक्स 22,900 के करीब पहुंच गया।
पिछले कारोबारी सत्र में बाजार पर बिकवाली का दबाव था। ऐसे में अगले दिन आई तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी। बाजार के प्रमुख शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को सहारा मिला।
हालांकि, शुरुआती कारोबार में दर्ज की गई तेजी पूरे दिन बरकरार रहे, यह जरूरी नहीं है। शेयर बाजार में कीमतें लगातार बदलती रहती हैं।
Share Market Rally: बाजार में तेजी की क्या हैं बड़ी वजहें?
1. US Fed ने ब्याज दरें नहीं बढ़ाईं
अमेरिकी फेड के फैसले से निवेशकों को तत्काल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंता से कुछ राहत मिली। इससे वैश्विक बाजारों की धारणा को सहारा मिला। हालांकि, आगे ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।
2. विदेशी निवेशकों ने की खरीदारी
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की खरीदारी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत रही। 28 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 872 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।
लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में खरीदारी होने से बाजार को समर्थन मिला। हालांकि, विदेशी निवेशकों के कुल रुख में स्थायी बदलाव हुआ है या नहीं, यह आने वाले सत्रों में स्पष्ट होगा।
3. बड़े शेयरों में बढ़ी खरीदारी
बाजार की तेजी में दिग्गज कंपनियों के शेयरों की अहम भूमिका रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी पोर्ट्स और पावर ग्रिड जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। IT कंपनियों के शेयरों में भी कुछ जगहों पर मजबूती दर्ज की गई।
जब बड़ी कंपनियों के शेयर चढ़ते हैं, तो सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स को भी सहारा मिलता है।
4. टैक्स राहत की उम्मीदों पर नजर
शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को लेकर संभावित राहत की चर्चा भी निवेशकों के बीच बनी हुई है। हालांकि, किसी आधिकारिक घोषणा के बिना इसे सरकार का तय फैसला नहीं माना जा सकता।
किन शेयरों में दिखी तेजी?
गुरुवार के शुरुआती कारोबार में Adani Ports, Power Grid और Reliance Industries जैसे शेयरों पर निवेशकों की नजर रही। कुछ IT शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली।
दूसरी ओर, सभी शेयरों में तेजी नहीं थी। Trent सहित कुछ कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इससे साफ है कि बाजार के प्रमुख इंडेक्स में बढ़त के बावजूद अलग-अलग कंपनियों का प्रदर्शन अलग रह सकता है।
Crude Oil Price: कच्चा तेल बना बाजार की चिंता
शेयर बाजार में तेजी के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। 29 अक्टूबर की सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर रुपये, महंगाई और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।
अगर तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो बाजार की तेजी पर दबाव आ सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी की चाल देखना ही पर्याप्त नहीं होगा।
पिछले दिन बाजार में क्यों आई थी गिरावट?
28 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1,000 अंकों के करीब गिर गया था और बाद में कुछ सुधार के बावजूद गिरावट के साथ बंद हुआ।
IT शेयरों में बिकवाली, प्रमुख कंपनियों के शेयरों में कमजोरी और वैश्विक संकेतों को लेकर चिंता ने बाजार पर दबाव बनाया था। अमेरिकी फेड के फैसले से पहले निवेशक भी सतर्क नजर आ रहे थे।
इसके बाद 29 अक्टूबर को खरीदारी लौटने से बाजार को राहत मिली। लेकिन एक कारोबारी दिन की तेजी से बाजार की लंबी अवधि की दिशा तय नहीं होती।
आगे Share Market में क्या होगा?
अब निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
जो निवेशक शेयर बाजार में पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें। केवल एक दिन की तेजी देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।
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