आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में RSS की तीन दिवसीय बैठक शुरू, मोहन भागवत समेत 408 पदाधिकारी संगठन के विस्तार पर करेंगे मंथन◆BREAKINGदेश-हरपलRajasthan Accident: झुंझुनूं में बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से 8 मजदूरों की मौत◆BREAKINGदेश-हरपलOmar Abdullah Government: मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज 25 विधायक, समर्थन वापसी की दी चेतावनी◆BREAKINGदेश-हरपलMaharashtra Politics: अमित शाह से मिले NCP के 6 बड़े नेता, सुनेत्रा पवार के लिए Finance Ministry की मांग◆BREAKINGबिज़नेसSensex-Nifty Today: निवेशकों की हुई चांदी, सेंसेक्स 75,000 के पार; बैंकिंग और Auto Stocks में खरीदारी◆BREAKINGमध्य प्रदेशसागर में बटनदार चाकू लेकर घूम रहा युवक गिरफ्तार, पहले से दर्ज हैं 3 आपराधिक मामले◆BREAKINGBreaking NewsPunjab Politics: AAP को बड़ा झटका, तीन नेताओं ने BJP जॉइन की; दिल्ली में ली पार्टी की सदस्यता◆BREAKINGप्रदेशFlorida Plane Crash: आसमान से तेजी से नीचे गिरा प्राइवेट जेट, 9 लोगों की मौत; आखिरी पलों का VIDEO आया सामने◆BREAKINGमध्य प्रदेशइंदौर में RSS की तीन दिवसीय बैठक शुरू, मोहन भागवत समेत 408 पदाधिकारी संगठन के विस्तार पर करेंगे मंथन◆BREAKINGदेश-हरपलRajasthan Accident: झुंझुनूं में बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से 8 मजदूरों की मौत◆BREAKINGदेश-हरपलOmar Abdullah Government: मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज 25 विधायक, समर्थन वापसी की दी चेतावनी◆BREAKINGदेश-हरपलMaharashtra Politics: अमित शाह से मिले NCP के 6 बड़े नेता, सुनेत्रा पवार के लिए Finance Ministry की मांग◆BREAKINGबिज़नेसSensex-Nifty Today: निवेशकों की हुई चांदी, सेंसेक्स 75,000 के पार; बैंकिंग और Auto Stocks में खरीदारी◆BREAKINGमध्य प्रदेशसागर में बटनदार चाकू लेकर घूम रहा युवक गिरफ्तार, पहले से दर्ज हैं 3 आपराधिक मामले◆BREAKINGBreaking NewsPunjab Politics: AAP को बड़ा झटका, तीन नेताओं ने BJP जॉइन की; दिल्ली में ली पार्टी की सदस्यता◆BREAKINGप्रदेशFlorida Plane Crash: आसमान से तेजी से नीचे गिरा प्राइवेट जेट, 9 लोगों की मौत; आखिरी पलों का VIDEO आया सामने◆

PAL-PAL KI KHABAR HAR PAL

[category_slider]

NE

News Elementor

What's Hot

Banner

Omar Abdullah Government: मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज 25 विधायक, समर्थन वापसी की दी चेतावनी

Table of Content

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इन दिनों कुछ भी सामान्य नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) की अपनी ही पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के करीब 25 विधायक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने और सरकार के कामकाज से नाराज बताए जा रहे हैं। इन विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर इस दौरान मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे सरकार से समर्थन वापस लेने का कदम उठा सकते हैं।

इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ विधायकों की नाराजगी है तो दूसरी तरफ सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी नेतृत्व से मतभेद भी सामने आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उमर अब्दुल्ला अपनी ही पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध को शांत कर पाएंगे?

25 विधायकों की नाराजगी, 14 दिन में फैसला लेने की मांग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट विधायकों ने बैठक कर पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी रखी। बताया जा रहा है कि इस समूह में करीब 25 विधायक शामिल हैं। इनमें से कुछ विधायक बैठक में व्यक्तिगत रूप से पहुंचे, जबकि अन्य ने ऑनलाइन अपनी बात रखी।

विधायकों की शिकायत है कि सरकार में महत्वपूर्ण फैसले लेने के दौरान सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को बराबर महत्व नहीं दिया जा रहा है। उनका मानना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को सरकार के कामकाज में ज्यादा भागीदारी मिलनी चाहिए।

इसी नाराजगी के बीच विधायकों ने नेतृत्व को 14 दिन का समय दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर राजभवन जाकर समर्थन वापसी की चेतावनी दी गई है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

Cabinet Expansion के बाद क्यों बिगड़ा मामला?

दरअसल, 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इस दौरान चार नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिली। इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी शामिल हैं।

कैबिनेट विस्तार के बाद कई विधायकों को उम्मीद थी कि उन्हें भी मंत्री पद या सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं होने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आने लगीं।

नए मंत्रियों को विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद भी विवाद थमा नहीं। नाराज विधायकों का मानना है कि मंत्रिमंडल के गठन और विभागों के बंटवारे में सभी विधायकों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई।

नाराज विधायकों ने रखीं ये बड़ी मांगें

असंतुष्ट विधायकों की मांग सिर्फ मंत्री पद तक सीमित नहीं बताई जा रही है। वे सरकार और पार्टी के कामकाज में बड़े बदलाव चाहते हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगें हैं:

  • मौजूदा मंत्रिमंडल में बदलाव कर नई कैबिनेट बनाई जाए।
  • सभी मंत्रियों के विभागों की समीक्षा की जाए।
  • मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाया जाए।
  • मंत्रियों के चयन में सभी विधायकों की राय ली जाए।
  • पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र और पारदर्शिता को मजबूत किया जाए।
  • जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार के सामने मुद्दा मजबूती से उठाया जाए।
  • अनुच्छेद 370 और 35A को लेकर पार्टी के चुनावी वादों पर गंभीरता से काम किया जाए।

इन मांगों पर पार्टी नेतृत्व क्या फैसला लेता है, इस पर अब सबकी नजर है।

Aga Syed Ruhullah के रुख से भी बढ़ी मुश्किल

नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए परेशानी का एक और कारण श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी नेतृत्व से मतभेद है। उन्होंने पार्टी की कार्यशैली और चुनाव के दौरान किए गए वादों को लेकर सवाल उठाए हैं।

रिपोर्ट्स में उनके 3 नवंबर को पार्टी और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के ऐलान का भी जिक्र है। उनका विरोध मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक मुद्दों और अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर पार्टी के रुख से जुड़ा बताया जा रहा है।

हालांकि, इस्तीफे के ऐलान और उसके औपचारिक रूप से स्वीकार होने की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को और चर्चा में ला दिया है।

Jammu Kashmir Assembly में क्या है बहुमत का गणित?

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 निर्वाचित सीटें हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। इसके अलावा कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार को समर्थन दिया था।

अगर 25 विधायक वास्तव में सरकार से समर्थन वापस लेने के फैसले पर कायम रहते हैं तो उमर अब्दुल्ला सरकार के सामने बहुमत का सवाल खड़ा हो सकता है।

हालांकि, फिलहाल इसे सरकार गिरने की स्थिति नहीं कहा जा सकता। इसके लिए विधायकों का औपचारिक फैसला, विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या और बहुमत की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

अब उमर अब्दुल्ला क्या करेंगे?

इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती है। नाराज विधायकों को मनाना, कैबिनेट विस्तार पर उठे सवालों का जवाब देना और पार्टी के चुनावी वादों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना नेतृत्व के लिए अहम होगा।

फिलहाल 14 दिन का अल्टीमेटम इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व बातचीत से मामला सुलझाता है या फिर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में समर्थन वापसी को लेकर कोई नया मोड़ आता है।

आने वाले दिनों में नेशनल कॉन्फ्रेंस का फैसला न सिर्फ उमर अब्दुल्ला सरकार बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति की दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

Yukta

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

इंदौर में RSS की तीन दिवसीय बैठक शुरू, मोहन भागवत समेत 408 पदाधिकारी संगठन के विस्तार पर करेंगे मंथन

इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय बैठक सोमवार को डेली कॉलेज में शुरू हो गई। बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी छह सह सरकार्यवाह सहित देशभर के करीब 408 प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए हैं। 4 नवंबर तक चलने वाली इस बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही संगठन विस्तार और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा होगी। संघ के मुताबिक, पिछले एक साल में देशभर में 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं शुरू हुई हैं और 65 हजार से ज्यादा हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए हैं। 1.01 लाख से ज्यादा दैनिक शाखाएं अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक में संघ के 11 क्षेत्र और 46 प्रांतों से संघचालक, सह संघचालक, कार्यवाह, सह कार्यवाह, प्रचारक और सह प्रचारक शामिल हुए हैं। अंतिम दिन विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी और आंकड़े साझा किए जाएंगे। आंबेकर के अनुसार, देशभर में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1 लाख 1 हजार 151 हो गई है। साप्ताहिक और मासिक मिलन को मिलाकर संघ का काम अब 1 लाख 10 हजार 849 स्थानों तक पहुंच गया है। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में शताब्दी वर्ष के दौरान 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं जुड़ी हैं। बैठक में शाखाओं के साथ साप्ताहिक और मासिक मिलन की गतिविधियों को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। देशभर में 65,660 हिंदू सम्मेलन आयोजित शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65 हजार 660 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। सुनील आंबेकर के मुताबिक, शहरों में बस्ती स्तर पर और ग्रामीण क्षेत्रों में आठ-दस गांवों को मिलाकर बनाए गए मंडल स्तर पर सम्मेलन हुए। कई जगह दो-तीन मंडलों को मिलाकर भी आयोजन किए गए। उन्होंने बताया कि इन सम्मेलनों में कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा और समाज की ओर से समर्थन मिला। कई लोगों ने संघ की शाखाओं से जुड़ने की इच्छा जताई। सामाजिक संस्थाओं और संगठनों ने भी अपने कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों के अनुभवों का सहयोग लेने की इच्छा व्यक्त की है। बैठक में इन आयोजनों से मिले अनुभवों और सामाजिक सहभागिता की समीक्षा होगी। महिलाओं और युवाओं को जोड़ने पर चर्चा शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी भी रही। अब इस अनुभव के आधार पर महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए नए कार्यक्रमों और उपक्रमों पर विचार किया जाएगा। युवाओं को जोड़ने के लिए शहरों, गांवों और कॉलेज परिसरों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अन्य युवाओं ने हिस्सा लिया। बैठक में इन प्रयासों को आगे बढ़ाने की योजनाओं पर चर्चा होगी। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान संघ की पिछली दो-तीन बैठकों में नशीली दवाओं के बढ़ते चलन पर चिंता जताई गई थी। इस बार भी यह विषय बैठक के एजेंडे में शामिल है। आंबेकर ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। युवाओं को नशीली दवाओं से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर विचार होगा। इसके लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से काम करने की योजना बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछली समन्वय बैठक में संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों ने भी अपने क्षेत्रों में नशे के खिलाफ अभियान शुरू करने की जानकारी दी थी। पंच परिवर्तन के पांच विषयों पर बनेगी कार्ययोजना शताब्दी वर्ष में संघ ने पंच परिवर्तन के पांच विषय समाज के सामने रखे हैं। इनमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्व का भाव और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। इन विषयों को समाज तक पहुंचाने के लिए गृह संपर्क अभियान, सम्मेलन और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। बैठक में इन पांचों विषयों के आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी। अलग-अलग प्रांतों के पदाधिकारी अपने क्षेत्रों में हुए कार्यों और आगामी योजनाओं की जानकारी देंगे। सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर नए अभियान चलाने पर भी विचार होगा। सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर जन-जागरण की तैयारी बैठक में सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर जन-जागरण को लेकर भी चर्चा होगी। सुनील आंबेकर के मुताबिक, संघ का प्रयास रहेगा कि समाज के सभी वर्गों तक तथ्यात्मक जानकारी सही परिप्रेक्ष्य में पहुंचे। इसके लिए उचित दृष्टिकोण और जानकारी लोगों तक पहुंचाने के तरीकों पर विचार किया जाएगा।
Rajasthan

Rajasthan Accident: झुंझुनूं में बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से 8 मजदूरों की मौत

राजस्थान (Rajasthan) के झुंझुनूं जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में सड़क निर्माण के दौरान हुए हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि सड़क बनाने के काम में लगी एक मशीन अचानक 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। मशीन में करंट फैलते ही आसपास काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। जिन परिवारों के सदस्य रोजी-रोटी कमाने के लिए काम पर निकले थे, उनके घरों में मातम छा गया। वहीं, घटना से नाराज ग्रामीणों ने मौके पर धरना शुरू कर दिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। Jhunjhunu Accident: सड़क निर्माण के दौरान कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में कदम कुंड की ओर जाने वाली सड़क का निर्माण कार्य चल रहा था। सोमवार को भी मजदूर सड़क बनाने के काम में जुटे हुए थे। इसी दौरान निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली रोड़ी और बजरी मिलाने की मशीन ऊपर से गुजर रही 11 KV हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। बिजली के तार से संपर्क होते ही मशीन में करंट फैल गया। आसपास काम कर रहे मजदूर भी इसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग मदद के लिए पहुंचे। शुरुआती खबरों में पांच मजदूरों की मौत और तीन लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, बाद की रिपोर्ट में मृतकों की संख्या बढ़कर आठ बताई गई। घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स में भी अंतर सामने आया है। 8 मजदूरों की मौत से गांव में पसरा मातम इस हादसे में आठ मजदूरों की जान चली गई। वहीं, करंट की चपेट में आए अन्य लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। एक साथ इतने मजदूरों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। स्थानीय लोगों के बीच घटना को लेकर गहरा दुख और नाराजगी है। फिलहाल घायलों के इलाज और मृतकों के परिवारों को मिलने वाली सहायता पर सबकी नजर बनी हुई है। ग्रामीणों का गुस्सा, धरने पर बैठे लोग हादसे के बाद छापोली गांव के ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए धरना शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि जब निर्माण स्थल के ऊपर से हाईटेंशन बिजली लाइन गुजर रही थी, तो वहां मशीन से काम कराने से पहले सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि आखिर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही कैसे हुई। लोग चाहते हैं कि घटना की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। CM भजनलाल शर्मा ने लिया हादसे का संज्ञान झुंझुनूं में हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी घटना पर दुख जताया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की ओर से घटना की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई है। अब प्रशासनिक जांच के जरिए हादसे की असली वजह और जिम्मेदारी तय होने का इंतजार है। अशोक गहलोत ने उठाई जांच और मुआवजे की मांग राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी हादसे पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने घटना की जांच कराने और मृतक मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई। गहलोत का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में निर्माण कार्यों के दौरान मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। Construction Safety पर फिर उठे सवाल झुंझुनूं का यह हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। सड़क, पुल और अन्य निर्माण कार्यों के दौरान कई बार मजदूरों को बिजली की हाईटेंशन लाइनों के आसपास काम करना पड़ता है। ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि छापोली गांव में सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे और मशीन हाईटेंशन लाइन के संपर्क में कैसे आई? प्रशासन की जांच से ही इन सवालों के जवाब सामने आ सकेंगे। फिलहाल आठ मजदूरों की मौत से गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीण धरने पर बैठे हैं और पीड़ित परिवारों को न्याय तथा उचित सहायता मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Omar Abdullah

Omar Abdullah Government: मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज 25 विधायक, समर्थन वापसी की दी चेतावनी

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इन दिनों कुछ भी सामान्य नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) की अपनी ही पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के करीब 25 विधायक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने और सरकार के कामकाज से नाराज बताए जा रहे हैं। इन विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर इस दौरान मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे सरकार से समर्थन वापस लेने का कदम उठा सकते हैं। इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ विधायकों की नाराजगी है तो दूसरी तरफ सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी नेतृत्व से मतभेद भी सामने आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उमर अब्दुल्ला अपनी ही पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध को शांत कर पाएंगे? 25 विधायकों की नाराजगी, 14 दिन में फैसला लेने की मांग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट विधायकों ने बैठक कर पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी रखी। बताया जा रहा है कि इस समूह में करीब 25 विधायक शामिल हैं। इनमें से कुछ विधायक बैठक में व्यक्तिगत रूप से पहुंचे, जबकि अन्य ने ऑनलाइन अपनी बात रखी। विधायकों की शिकायत है कि सरकार में महत्वपूर्ण फैसले लेने के दौरान सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को बराबर महत्व नहीं दिया जा रहा है। उनका मानना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को सरकार के कामकाज में ज्यादा भागीदारी मिलनी चाहिए। इसी नाराजगी के बीच विधायकों ने नेतृत्व को 14 दिन का समय दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर राजभवन जाकर समर्थन वापसी की चेतावनी दी गई है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। Cabinet Expansion के बाद क्यों बिगड़ा मामला? दरअसल, 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इस दौरान चार नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिली। इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी शामिल हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद कई विधायकों को उम्मीद थी कि उन्हें भी मंत्री पद या सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं होने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आने लगीं। नए मंत्रियों को विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद भी विवाद थमा नहीं। नाराज विधायकों का मानना है कि मंत्रिमंडल के गठन और विभागों के बंटवारे में सभी विधायकों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। नाराज विधायकों ने रखीं ये बड़ी मांगें असंतुष्ट विधायकों की मांग सिर्फ मंत्री पद तक सीमित नहीं बताई जा रही है। वे सरकार और पार्टी के कामकाज में बड़े बदलाव चाहते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगें हैं: इन मांगों पर पार्टी नेतृत्व क्या फैसला लेता है, इस पर अब सबकी नजर है। Aga Syed Ruhullah के रुख से भी बढ़ी मुश्किल नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए परेशानी का एक और कारण श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी नेतृत्व से मतभेद है। उन्होंने पार्टी की कार्यशैली और चुनाव के दौरान किए गए वादों को लेकर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट्स में उनके 3 नवंबर को पार्टी और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के ऐलान का भी जिक्र है। उनका विरोध मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक मुद्दों और अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर पार्टी के रुख से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, इस्तीफे के ऐलान और उसके औपचारिक रूप से स्वीकार होने की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को और चर्चा में ला दिया है। Jammu Kashmir Assembly में क्या है बहुमत का गणित? जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 निर्वाचित सीटें हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। इसके अलावा कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार को समर्थन दिया था। अगर 25 विधायक वास्तव में सरकार से समर्थन वापस लेने के फैसले पर कायम रहते हैं तो उमर अब्दुल्ला सरकार के सामने बहुमत का सवाल खड़ा हो सकता है। हालांकि, फिलहाल इसे सरकार गिरने की स्थिति नहीं कहा जा सकता। इसके लिए विधायकों का औपचारिक फैसला, विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या और बहुमत की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। अब उमर अब्दुल्ला क्या करेंगे? इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती है। नाराज विधायकों को मनाना, कैबिनेट विस्तार पर उठे सवालों का जवाब देना और पार्टी के चुनावी वादों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना नेतृत्व के लिए अहम होगा। फिलहाल 14 दिन का अल्टीमेटम इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व बातचीत से मामला सुलझाता है या फिर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में समर्थन वापसी को लेकर कोई नया मोड़ आता है। आने वाले दिनों में नेशनल कॉन्फ्रेंस का फैसला न सिर्फ उमर अब्दुल्ला सरकार बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति की दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
अमित शाह

Maharashtra Politics: अमित शाह से मिले NCP के 6 बड़े नेता, सुनेत्रा पवार के लिए Finance Ministry की मांग

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के छह वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद सबसे ज्यादा चर्चा महाराष्ट्र सरकार के वित्त मंत्रालय को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि NCP चाहती है कि अजित पवार के पास रहा Finance Ministry का विभाग अब पार्टी को वापस मिल जाए। खास बात यह है कि इस बैठक में NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार तथा पार्थ पवार शामिल नहीं हुए। ऐसे में अमित शाह के साथ पार्टी के छह बड़े नेताओं की इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। Amit Shah से मिलने पहुंचे NCP के 6 बड़े नेता मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमित शाह से मुलाकात करने वाले NCP नेताओं में सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे, हसन मुश्रीफ और दिलीप वळसे पाटिल शामिल थे। बताया जा रहा है कि बैठक में महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी NCP को वापस देने का मुद्दा उठाया गया। हालांकि, अमित शाह के साथ बातचीत में क्या सहमति बनी और इस पर केंद्र की ओर से क्या रुख अपनाया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। Ajit Pawar के निधन के बाद Devendra Fadnavis संभाल रहे Finance Ministry दरअसल, जनवरी 2026 में महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी अपने पास रख ली थी। अजित पवार महायुति सरकार में वित्त मंत्री थे। उनके पास यह विभाग होने के कारण NCP की ओर से इसे पार्टी का महत्वपूर्ण विभाग माना जाता रहा है। अब पार्टी चाहती है कि वित्त मंत्रालय फिर से उसके हिस्से में आए और सुनेत्रा पवार को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाए। वित्त मंत्रालय राज्य के बजट, सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और फंड आवंटन से जुड़े फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही वजह है कि इस विभाग को लेकर NCP लगातार अपनी मांग उठा रही है। सुनेत्रा पवार पहले भी कर चुकी हैं फडणवीस से मुलाकात वित्त मंत्रालय को लेकर NCP की मांग पहले भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने रखी जा चुकी है। 25 अक्टूबर को सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री से उनके सरकारी आवास वर्षा में मुलाकात की थी। इस बैठक में छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ और धनंजय मुंडे समेत कई नेता मौजूद थे। मुलाकात के बाद छगन भुजबल ने बताया था कि मुख्यमंत्री ने मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि राज्य की आर्थिक स्थिति, सूखा राहत, किसानों की मदद और कर्जमाफी जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाएगा। NCP को उम्मीद थी कि शीतकालीन सत्र से पहले इस मामले में कोई रास्ता निकल सकता है। सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा अमित शाह के साथ हुई बैठक में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं का सीधे दिल्ली पहुंचकर गृह मंत्री से मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, बैठक में दोनों नेताओं के शामिल नहीं होने का मतलब पार्टी में मतभेद होना नहीं है। सुनेत्रा पवार पहले भी NCP में अंदरूनी कलह की खबरों को खारिज कर चुकी हैं। फिलहाल इस मुलाकात को वित्त मंत्रालय की मांग के संदर्भ में देखा जा रहा है। NCP के सामने चुनावी और संगठनात्मक चुनौतियां भी महाराष्ट्र में NCP को हाल के दिनों में कुछ राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। विधान परिषद चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार सतीश चव्हाण को छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से हार मिली थी। इसके बाद पार्टी की चुनावी रणनीति और संगठन को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। 31 अक्टूबर को सुनेत्रा पवार ने पार्टी में मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि राजनीति में जीत और हार होती रहती है। हार के बाद आत्ममंथन करना जरूरी है। NCP विलय और Cabinet Expansion पर भी नजर महाराष्ट्र की राजनीति में NCP के दोनों गुटों के संभावित विलय और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, छगन भुजबल ने दोनों गुटों के विलय की खबरों को खारिज किया था। वहीं, महायुति सरकार में NCP के कोटे से खाली मंत्री पद को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में वित्त मंत्रालय की मांग के साथ-साथ पार्टी के सामने संगठन और सरकार में अपनी भूमिका को लेकर कई अहम मुद्दे हैं। Maharashtra Politics में अब आगे क्या होगा? अमित शाह से NCP के छह वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात के बाद अब सबकी नजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अगले कदम पर है। पार्टी चाहती है कि वित्त मंत्रालय दोबारा उसके पास आए और सुनेत्रा पवार को यह जिम्मेदारी मिले। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि महायुति सरकार में विभागों के बंटवारे को लेकर क्या फैसला लिया जाता है और NCP की मांग को कितनी प्राथमिकता मिलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sensex

Sensex-Nifty Today: निवेशकों की हुई चांदी, सेंसेक्स 75,000 के पार; बैंकिंग और Auto Stocks में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 2 नवंबर को हफ्ते की शुरुआत शानदार रही। सुबह से ही बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला और Sensex करीब 1,000 अंक उछलकर 75,000 के पार पहुंच गया। वहीं Nifty 50 ने भी 23,300 का अहम स्तर पार कर लिया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में कुछ ही समय में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इस तेजी के पीछे Reliance Industries के मजबूत तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जैसे बड़े कारण रहे। इसके अलावा ऑटो, बैंकिंग, मेटल और Oil & Gas सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। Sensex-Nifty Today: बाजार में 1% से ज्यादा की तेजी सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही Sensex और Nifty में तेजी दिखाई देने लगी। सुबह करीब 11:16 बजे BSE Sensex 1,006.58 अंक यानी 1.35% की बढ़त के साथ 75,466.11 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसने 75,557.06 का ऊपरी स्तर भी छुआ। वहीं NSE Nifty 50 करीब 284.60 अंक यानी 1.23% चढ़कर 23,337.70 पर पहुंच गया। कारोबारी सत्र में Nifty ने 23,360.50 का स्तर भी छुआ। बाजार में तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि BSE पर बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों की संख्या गिरावट वाले शेयरों से काफी ज्यादा रही। शुरुआती कारोबार में 2,730 शेयर हरे निशान में थे, जबकि 1,299 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा शेयर बाजार में आई तेजी का सीधा फायदा निवेशकों को मिला। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब 480.76 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। कारोबार के शुरुआती एक घंटे में ही निवेशकों की संपत्ति में लगभग 5.42 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। Reliance के शेयरों में 6-8% तक उछाल सोमवार की तेजी में Reliance Industries सबसे ज्यादा चर्चा में रही। कंपनी के सितंबर तिमाही के शानदार नतीजों के बाद शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। Reliance का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में करीब 29,550 करोड़ रुपये रहा। वहीं कंपनी के मालिकों के हिस्से का नेट प्रॉफिट करीब 25,548 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। मजबूत नतीजों के बाद Reliance के शेयरों में कारोबार के दौरान करीब 6-8% तक की तेजी देखने को मिली। कंपनी के शेयरों में आई इस बढ़त ने Sensex और Nifty दोनों को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। बाजार में तेजी के 5 बड़े कारण 1. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत लेकर आई। Brent Crude की कीमत शुक्रवार को करीब 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, लेकिन सोमवार को यह गिरकर लगभग 110-111 डॉलर के आसपास आ गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद से तेल की कीमतों में गिरावट आई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए कीमतों में नरमी से अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है। 2. विदेशी निवेशकों की खरीदारी विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की खरीदारी से भी बाजार को मजबूती मिली। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 3,598.54 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। विदेशी निवेशकों की यह वापसी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। 3. एशियाई बाजारों में मजबूती सोमवार को जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया समेत कई एशियाई बाजारों में बढ़त देखने को मिली। इसका असर भारतीय बाजार के सेंटीमेंट पर भी पड़ा और निवेशकों ने खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई। 4. कंपनियों के मजबूत Quarterly Results सितंबर तिमाही के नतीजों का सीजन बाजार के लिए अहम बना हुआ है। Reliance Industries समेत कई बड़ी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। सोमवार को भी करीब 203 कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे आने वाले थे। इनमें ITC, Marico, National Aluminium Company और UPL जैसी कंपनियां शामिल थीं। 5. बैंकिंग और मेटल शेयरों में खरीदारी बैंकिंग, मेटल और Oil & Gas सेक्टर में खरीदारी ने बाजार को अतिरिक्त मजबूती दी। ऑटो कंपनियों के शेयरों में भी तेजी रही। इससे बाजार की बढ़त को व्यापक समर्थन मिला। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सोमवार को कारोबार के दौरान कई कंपनियों के शेयर निवेशकों के रडार पर रहे। दूसरी तरफ Sun Pharma, Trent, Titan और कुछ IT शेयरों में दबाव देखने को मिला। आगे कहां जा सकता है Nifty? मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Nifty के लिए 23,300 का स्तर अहम बना हुआ है। अगर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो 23,500 का स्तर अगला महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकता है। वहीं गिरावट की स्थिति में 23,000 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। बाजार की आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए क्या है जरूरी बात? सोमवार की तेजी ने बाजार में सकारात्मक माहौल जरूर बनाया है, लेकिन निवेशकों को यह समझना होगा कि शेयर बाजार में हर दिन एक जैसा प्रदर्शन नहीं रहता। अंतरराष्ट्रीय तनाव, महंगाई और कंपनियों के नतीजे बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। इसलिए केवल बाजार की तेजी देखकर निवेश का फैसला करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और जोखिम को समझना जरूरी है। कुल मिलाकर, नवंबर की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए मजबूत रही। Reliance की तेजी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को नई रफ्तार दी है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि Sensex और Nifty आने वाले कारोबारी दिनों में इस बढ़त को बरकरार रख पाते हैं या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

You might have missed

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.