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Maharashtra Politics: अमित शाह से मिले NCP के 6 बड़े नेता, सुनेत्रा पवार के लिए Finance Ministry की मांग

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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के छह वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद सबसे ज्यादा चर्चा महाराष्ट्र सरकार के वित्त मंत्रालय को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि NCP चाहती है कि अजित पवार के पास रहा Finance Ministry का विभाग अब पार्टी को वापस मिल जाए।

खास बात यह है कि इस बैठक में NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार तथा पार्थ पवार शामिल नहीं हुए। ऐसे में अमित शाह के साथ पार्टी के छह बड़े नेताओं की इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है।

Amit Shah से मिलने पहुंचे NCP के 6 बड़े नेता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमित शाह से मुलाकात करने वाले NCP नेताओं में सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे, हसन मुश्रीफ और दिलीप वळसे पाटिल शामिल थे।

बताया जा रहा है कि बैठक में महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी NCP को वापस देने का मुद्दा उठाया गया। हालांकि, अमित शाह के साथ बातचीत में क्या सहमति बनी और इस पर केंद्र की ओर से क्या रुख अपनाया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

Ajit Pawar के निधन के बाद Devendra Fadnavis संभाल रहे Finance Ministry

दरअसल, जनवरी 2026 में महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी अपने पास रख ली थी।

अजित पवार महायुति सरकार में वित्त मंत्री थे। उनके पास यह विभाग होने के कारण NCP की ओर से इसे पार्टी का महत्वपूर्ण विभाग माना जाता रहा है। अब पार्टी चाहती है कि वित्त मंत्रालय फिर से उसके हिस्से में आए और सुनेत्रा पवार को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाए।

वित्त मंत्रालय राज्य के बजट, सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और फंड आवंटन से जुड़े फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही वजह है कि इस विभाग को लेकर NCP लगातार अपनी मांग उठा रही है।

सुनेत्रा पवार पहले भी कर चुकी हैं फडणवीस से मुलाकात

वित्त मंत्रालय को लेकर NCP की मांग पहले भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने रखी जा चुकी है। 25 अक्टूबर को सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री से उनके सरकारी आवास वर्षा में मुलाकात की थी।

इस बैठक में छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ और धनंजय मुंडे समेत कई नेता मौजूद थे। मुलाकात के बाद छगन भुजबल ने बताया था कि मुख्यमंत्री ने मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि राज्य की आर्थिक स्थिति, सूखा राहत, किसानों की मदद और कर्जमाफी जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाएगा। NCP को उम्मीद थी कि शीतकालीन सत्र से पहले इस मामले में कोई रास्ता निकल सकता है।

सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा

अमित शाह के साथ हुई बैठक में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं का सीधे दिल्ली पहुंचकर गृह मंत्री से मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है।

हालांकि, बैठक में दोनों नेताओं के शामिल नहीं होने का मतलब पार्टी में मतभेद होना नहीं है। सुनेत्रा पवार पहले भी NCP में अंदरूनी कलह की खबरों को खारिज कर चुकी हैं।

फिलहाल इस मुलाकात को वित्त मंत्रालय की मांग के संदर्भ में देखा जा रहा है।

NCP के सामने चुनावी और संगठनात्मक चुनौतियां भी

महाराष्ट्र में NCP को हाल के दिनों में कुछ राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। विधान परिषद चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार सतीश चव्हाण को छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से हार मिली थी।

इसके बाद पार्टी की चुनावी रणनीति और संगठन को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। 31 अक्टूबर को सुनेत्रा पवार ने पार्टी में मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि राजनीति में जीत और हार होती रहती है। हार के बाद आत्ममंथन करना जरूरी है।

NCP विलय और Cabinet Expansion पर भी नजर

महाराष्ट्र की राजनीति में NCP के दोनों गुटों के संभावित विलय और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, छगन भुजबल ने दोनों गुटों के विलय की खबरों को खारिज किया था।

वहीं, महायुति सरकार में NCP के कोटे से खाली मंत्री पद को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में वित्त मंत्रालय की मांग के साथ-साथ पार्टी के सामने संगठन और सरकार में अपनी भूमिका को लेकर कई अहम मुद्दे हैं।

Maharashtra Politics में अब आगे क्या होगा?

अमित शाह से NCP के छह वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात के बाद अब सबकी नजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अगले कदम पर है। पार्टी चाहती है कि वित्त मंत्रालय दोबारा उसके पास आए और सुनेत्रा पवार को यह जिम्मेदारी मिले।

हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि महायुति सरकार में विभागों के बंटवारे को लेकर क्या फैसला लिया जाता है और NCP की मांग को कितनी प्राथमिकता मिलती है।

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Yukta

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Omar Abdullah

Omar Abdullah Government: मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज 25 विधायक, समर्थन वापसी की दी चेतावनी

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इन दिनों कुछ भी सामान्य नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) की अपनी ही पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के करीब 25 विधायक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने और सरकार के कामकाज से नाराज बताए जा रहे हैं। इन विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर इस दौरान मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे सरकार से समर्थन वापस लेने का कदम उठा सकते हैं। इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ विधायकों की नाराजगी है तो दूसरी तरफ सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी नेतृत्व से मतभेद भी सामने आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उमर अब्दुल्ला अपनी ही पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध को शांत कर पाएंगे? 25 विधायकों की नाराजगी, 14 दिन में फैसला लेने की मांग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट विधायकों ने बैठक कर पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी रखी। बताया जा रहा है कि इस समूह में करीब 25 विधायक शामिल हैं। इनमें से कुछ विधायक बैठक में व्यक्तिगत रूप से पहुंचे, जबकि अन्य ने ऑनलाइन अपनी बात रखी। विधायकों की शिकायत है कि सरकार में महत्वपूर्ण फैसले लेने के दौरान सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को बराबर महत्व नहीं दिया जा रहा है। उनका मानना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को सरकार के कामकाज में ज्यादा भागीदारी मिलनी चाहिए। इसी नाराजगी के बीच विधायकों ने नेतृत्व को 14 दिन का समय दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर राजभवन जाकर समर्थन वापसी की चेतावनी दी गई है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। Cabinet Expansion के बाद क्यों बिगड़ा मामला? दरअसल, 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इस दौरान चार नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिली। इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी शामिल हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद कई विधायकों को उम्मीद थी कि उन्हें भी मंत्री पद या सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं होने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आने लगीं। नए मंत्रियों को विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद भी विवाद थमा नहीं। नाराज विधायकों का मानना है कि मंत्रिमंडल के गठन और विभागों के बंटवारे में सभी विधायकों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। नाराज विधायकों ने रखीं ये बड़ी मांगें असंतुष्ट विधायकों की मांग सिर्फ मंत्री पद तक सीमित नहीं बताई जा रही है। वे सरकार और पार्टी के कामकाज में बड़े बदलाव चाहते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगें हैं: इन मांगों पर पार्टी नेतृत्व क्या फैसला लेता है, इस पर अब सबकी नजर है। Aga Syed Ruhullah के रुख से भी बढ़ी मुश्किल नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए परेशानी का एक और कारण श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी नेतृत्व से मतभेद है। उन्होंने पार्टी की कार्यशैली और चुनाव के दौरान किए गए वादों को लेकर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट्स में उनके 3 नवंबर को पार्टी और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के ऐलान का भी जिक्र है। उनका विरोध मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक मुद्दों और अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर पार्टी के रुख से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, इस्तीफे के ऐलान और उसके औपचारिक रूप से स्वीकार होने की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को और चर्चा में ला दिया है। Jammu Kashmir Assembly में क्या है बहुमत का गणित? जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 निर्वाचित सीटें हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। इसके अलावा कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार को समर्थन दिया था। अगर 25 विधायक वास्तव में सरकार से समर्थन वापस लेने के फैसले पर कायम रहते हैं तो उमर अब्दुल्ला सरकार के सामने बहुमत का सवाल खड़ा हो सकता है। हालांकि, फिलहाल इसे सरकार गिरने की स्थिति नहीं कहा जा सकता। इसके लिए विधायकों का औपचारिक फैसला, विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या और बहुमत की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। अब उमर अब्दुल्ला क्या करेंगे? इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती है। नाराज विधायकों को मनाना, कैबिनेट विस्तार पर उठे सवालों का जवाब देना और पार्टी के चुनावी वादों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना नेतृत्व के लिए अहम होगा। फिलहाल 14 दिन का अल्टीमेटम इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व बातचीत से मामला सुलझाता है या फिर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में समर्थन वापसी को लेकर कोई नया मोड़ आता है। आने वाले दिनों में नेशनल कॉन्फ्रेंस का फैसला न सिर्फ उमर अब्दुल्ला सरकार बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति की दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
अमित शाह

Maharashtra Politics: अमित शाह से मिले NCP के 6 बड़े नेता, सुनेत्रा पवार के लिए Finance Ministry की मांग

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के छह वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद सबसे ज्यादा चर्चा महाराष्ट्र सरकार के वित्त मंत्रालय को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि NCP चाहती है कि अजित पवार के पास रहा Finance Ministry का विभाग अब पार्टी को वापस मिल जाए। खास बात यह है कि इस बैठक में NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार तथा पार्थ पवार शामिल नहीं हुए। ऐसे में अमित शाह के साथ पार्टी के छह बड़े नेताओं की इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। Amit Shah से मिलने पहुंचे NCP के 6 बड़े नेता मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमित शाह से मुलाकात करने वाले NCP नेताओं में सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे, हसन मुश्रीफ और दिलीप वळसे पाटिल शामिल थे। बताया जा रहा है कि बैठक में महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी NCP को वापस देने का मुद्दा उठाया गया। हालांकि, अमित शाह के साथ बातचीत में क्या सहमति बनी और इस पर केंद्र की ओर से क्या रुख अपनाया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। Ajit Pawar के निधन के बाद Devendra Fadnavis संभाल रहे Finance Ministry दरअसल, जनवरी 2026 में महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी अपने पास रख ली थी। अजित पवार महायुति सरकार में वित्त मंत्री थे। उनके पास यह विभाग होने के कारण NCP की ओर से इसे पार्टी का महत्वपूर्ण विभाग माना जाता रहा है। अब पार्टी चाहती है कि वित्त मंत्रालय फिर से उसके हिस्से में आए और सुनेत्रा पवार को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाए। वित्त मंत्रालय राज्य के बजट, सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और फंड आवंटन से जुड़े फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही वजह है कि इस विभाग को लेकर NCP लगातार अपनी मांग उठा रही है। सुनेत्रा पवार पहले भी कर चुकी हैं फडणवीस से मुलाकात वित्त मंत्रालय को लेकर NCP की मांग पहले भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने रखी जा चुकी है। 25 अक्टूबर को सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री से उनके सरकारी आवास वर्षा में मुलाकात की थी। इस बैठक में छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ और धनंजय मुंडे समेत कई नेता मौजूद थे। मुलाकात के बाद छगन भुजबल ने बताया था कि मुख्यमंत्री ने मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि राज्य की आर्थिक स्थिति, सूखा राहत, किसानों की मदद और कर्जमाफी जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाएगा। NCP को उम्मीद थी कि शीतकालीन सत्र से पहले इस मामले में कोई रास्ता निकल सकता है। सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा अमित शाह के साथ हुई बैठक में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं का सीधे दिल्ली पहुंचकर गृह मंत्री से मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, बैठक में दोनों नेताओं के शामिल नहीं होने का मतलब पार्टी में मतभेद होना नहीं है। सुनेत्रा पवार पहले भी NCP में अंदरूनी कलह की खबरों को खारिज कर चुकी हैं। फिलहाल इस मुलाकात को वित्त मंत्रालय की मांग के संदर्भ में देखा जा रहा है। NCP के सामने चुनावी और संगठनात्मक चुनौतियां भी महाराष्ट्र में NCP को हाल के दिनों में कुछ राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। विधान परिषद चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार सतीश चव्हाण को छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से हार मिली थी। इसके बाद पार्टी की चुनावी रणनीति और संगठन को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। 31 अक्टूबर को सुनेत्रा पवार ने पार्टी में मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि राजनीति में जीत और हार होती रहती है। हार के बाद आत्ममंथन करना जरूरी है। NCP विलय और Cabinet Expansion पर भी नजर महाराष्ट्र की राजनीति में NCP के दोनों गुटों के संभावित विलय और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, छगन भुजबल ने दोनों गुटों के विलय की खबरों को खारिज किया था। वहीं, महायुति सरकार में NCP के कोटे से खाली मंत्री पद को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में वित्त मंत्रालय की मांग के साथ-साथ पार्टी के सामने संगठन और सरकार में अपनी भूमिका को लेकर कई अहम मुद्दे हैं। Maharashtra Politics में अब आगे क्या होगा? अमित शाह से NCP के छह वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात के बाद अब सबकी नजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अगले कदम पर है। पार्टी चाहती है कि वित्त मंत्रालय दोबारा उसके पास आए और सुनेत्रा पवार को यह जिम्मेदारी मिले। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि महायुति सरकार में विभागों के बंटवारे को लेकर क्या फैसला लिया जाता है और NCP की मांग को कितनी प्राथमिकता मिलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sensex

Sensex-Nifty Today: निवेशकों की हुई चांदी, सेंसेक्स 75,000 के पार; बैंकिंग और Auto Stocks में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 2 नवंबर को हफ्ते की शुरुआत शानदार रही। सुबह से ही बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला और Sensex करीब 1,000 अंक उछलकर 75,000 के पार पहुंच गया। वहीं Nifty 50 ने भी 23,300 का अहम स्तर पार कर लिया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में कुछ ही समय में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इस तेजी के पीछे Reliance Industries के मजबूत तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जैसे बड़े कारण रहे। इसके अलावा ऑटो, बैंकिंग, मेटल और Oil & Gas सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। Sensex-Nifty Today: बाजार में 1% से ज्यादा की तेजी सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही Sensex और Nifty में तेजी दिखाई देने लगी। सुबह करीब 11:16 बजे BSE Sensex 1,006.58 अंक यानी 1.35% की बढ़त के साथ 75,466.11 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसने 75,557.06 का ऊपरी स्तर भी छुआ। वहीं NSE Nifty 50 करीब 284.60 अंक यानी 1.23% चढ़कर 23,337.70 पर पहुंच गया। कारोबारी सत्र में Nifty ने 23,360.50 का स्तर भी छुआ। बाजार में तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि BSE पर बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों की संख्या गिरावट वाले शेयरों से काफी ज्यादा रही। शुरुआती कारोबार में 2,730 शेयर हरे निशान में थे, जबकि 1,299 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा शेयर बाजार में आई तेजी का सीधा फायदा निवेशकों को मिला। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब 480.76 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। कारोबार के शुरुआती एक घंटे में ही निवेशकों की संपत्ति में लगभग 5.42 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। Reliance के शेयरों में 6-8% तक उछाल सोमवार की तेजी में Reliance Industries सबसे ज्यादा चर्चा में रही। कंपनी के सितंबर तिमाही के शानदार नतीजों के बाद शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। Reliance का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में करीब 29,550 करोड़ रुपये रहा। वहीं कंपनी के मालिकों के हिस्से का नेट प्रॉफिट करीब 25,548 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। मजबूत नतीजों के बाद Reliance के शेयरों में कारोबार के दौरान करीब 6-8% तक की तेजी देखने को मिली। कंपनी के शेयरों में आई इस बढ़त ने Sensex और Nifty दोनों को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। बाजार में तेजी के 5 बड़े कारण 1. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत लेकर आई। Brent Crude की कीमत शुक्रवार को करीब 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, लेकिन सोमवार को यह गिरकर लगभग 110-111 डॉलर के आसपास आ गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद से तेल की कीमतों में गिरावट आई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए कीमतों में नरमी से अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है। 2. विदेशी निवेशकों की खरीदारी विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की खरीदारी से भी बाजार को मजबूती मिली। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 3,598.54 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। विदेशी निवेशकों की यह वापसी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। 3. एशियाई बाजारों में मजबूती सोमवार को जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया समेत कई एशियाई बाजारों में बढ़त देखने को मिली। इसका असर भारतीय बाजार के सेंटीमेंट पर भी पड़ा और निवेशकों ने खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई। 4. कंपनियों के मजबूत Quarterly Results सितंबर तिमाही के नतीजों का सीजन बाजार के लिए अहम बना हुआ है। Reliance Industries समेत कई बड़ी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। सोमवार को भी करीब 203 कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे आने वाले थे। इनमें ITC, Marico, National Aluminium Company और UPL जैसी कंपनियां शामिल थीं। 5. बैंकिंग और मेटल शेयरों में खरीदारी बैंकिंग, मेटल और Oil & Gas सेक्टर में खरीदारी ने बाजार को अतिरिक्त मजबूती दी। ऑटो कंपनियों के शेयरों में भी तेजी रही। इससे बाजार की बढ़त को व्यापक समर्थन मिला। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सोमवार को कारोबार के दौरान कई कंपनियों के शेयर निवेशकों के रडार पर रहे। दूसरी तरफ Sun Pharma, Trent, Titan और कुछ IT शेयरों में दबाव देखने को मिला। आगे कहां जा सकता है Nifty? मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Nifty के लिए 23,300 का स्तर अहम बना हुआ है। अगर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो 23,500 का स्तर अगला महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकता है। वहीं गिरावट की स्थिति में 23,000 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। बाजार की आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए क्या है जरूरी बात? सोमवार की तेजी ने बाजार में सकारात्मक माहौल जरूर बनाया है, लेकिन निवेशकों को यह समझना होगा कि शेयर बाजार में हर दिन एक जैसा प्रदर्शन नहीं रहता। अंतरराष्ट्रीय तनाव, महंगाई और कंपनियों के नतीजे बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। इसलिए केवल बाजार की तेजी देखकर निवेश का फैसला करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और जोखिम को समझना जरूरी है। कुल मिलाकर, नवंबर की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए मजबूत रही। Reliance की तेजी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को नई रफ्तार दी है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि Sensex और Nifty आने वाले कारोबारी दिनों में इस बढ़त को बरकरार रख पाते हैं या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

सागर में बटनदार चाकू लेकर घूम रहा युवक गिरफ्तार, पहले से दर्ज हैं 3 आपराधिक मामले

सागर। गोपालगंज थाना पुलिस ने अवैध रूप से धारदार चाकू लेकर घूम रहे 20 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी तिली बाघराज वार्ड क्षेत्र में चाकू लेकर घूम रहा था और दहशत फैलाने की फिराक में था। सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला के पास घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान करन पिता लोकमन पटेल (20), निवासी तिली वार्ड के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से लोहे का बटनदार धारदार चाकू बरामद किया है। पुलिस को देखकर भागने लगा आरोपी पुलिस के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिली थी कि तिली बाघराज वार्ड में एक व्यक्ति अवैध धारदार चाकू लेकर घूम रहा है। सूचना पर पुलिस टीम एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला के पास पहुंची। पुलिस को देखकर संदिग्ध व्यक्ति भागने लगा। टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम करन पटेल बताया। जींस की जेब से मिला बटनदार चाकू पुलिस ने आरोपी की तलाशी ली तो उसकी जींस की दाहिनी जेब से लोहे का बटनदार धारदार चाकू मिला। पुलिस ने चाकू जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर थाने ले आई। गोपालगंज थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा ने बताया कि आरोपी को चाकू के साथ गिरफ्तार किया गया है। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पहले से दर्ज हैं 3 आपराधिक प्रकरण पुलिस के मुताबिक, आरोपी करन पटेल के खिलाफ गोपालगंज और सिविल लाइन थानों में पहले से तीन आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस अब मामले में आगे की जांच कर रही है।
AAP

Punjab Politics: AAP को बड़ा झटका, तीन नेताओं ने BJP जॉइन की; दिल्ली में ली पार्टी की सदस्यता

पंजाब (Punjab) की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी छोड़ने वाले तीन नेताओं ने सोमवार, 2 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय में तीनों नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इनमें हरमीत सिंह पठानमाजरा, चेतन सिंह जौड़ामाजरा और कुंवर विजय प्रताप सिंह शामिल हैं। खास बात यह है कि इन नेताओं के पार्टी छोड़ने का घटनाक्रम महज दो दिनों के भीतर सामने आया। दो विधायकों ने पहले AAP से इस्तीफा दिया और इसके बाद BJP में शामिल हो गए। वहीं, पूर्व IPS अधिकारी और विधायक रहे कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी पार्टी से दूरी बना ली। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब में 2027 के चुनाव को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। दिल्ली में BJP मुख्यालय पहुंचे तीनों नेता AAP छोड़ने के बाद हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा सोमवार को दिल्ली पहुंचे। यहां BJP नेताओं की मौजूदगी में दोनों ने पार्टी की सदस्यता ली। उनके साथ कुंवर विजय प्रताप सिंह भी BJP में शामिल हुए। तीनों नेताओं का BJP में जाना पंजाब की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी उन्हें क्या जिम्मेदारी देती है, इस पर अभी सबकी नजरें टिकी हैं। टिकट बंटवारे के बीच AAP में शुरू हुई नाराजगी इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत AAP की ओर से पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के बाद हुई। सूची जारी होने के अगले दिन हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं की नाराजगी के पीछे टिकट को लेकर अनिश्चितता और संगठन में हुए बदलाव को भी एक वजह माना जा रहा है। AAP ने सनौर विधानसभा क्षेत्र में रंजोध सिंह हडाना और समाना में सुरजीत सिंह रखड़ा को हल्का इंचार्ज की जिम्मेदारी दी थी। इन नियुक्तियों के बाद दोनों मौजूदा विधायकों के राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे। हरमीत सिंह पठानमाजरा ने सरकार पर उठाए सवाल सनौर विधानसभा सीट से विधायक रहे हरमीत सिंह पठानमाजरा ने AAP छोड़ते समय पंजाब सरकार के कामकाज पर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए मंजूर करीब 17 करोड़ रुपये जारी नहीं किए गए। इसके अलावा उन्होंने पानी की समस्या और राज्य के बढ़ते कर्ज को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। पठानमाजरा का कहना था कि विधानसभा में जनता से जुड़े मुद्दे उठाने के बावजूद उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनके इन आरोपों पर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी छोड़ी AAP समाना से विधायक रहे चेतन सिंह जौड़ामाजरा भी AAP छोड़कर BJP में शामिल हो गए हैं। वह भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। सितंबर 2024 में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने पंजाब में नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि राज्य में नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर किए जा रहे दावों के बावजूद जमीन पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी बदला राजनीतिक रास्ता तीसरा बड़ा नाम कुंवर विजय प्रताप सिंह का है। वह पंजाब पुलिस में IG रैंक के अधिकारी रह चुके हैं और 2022 के विधानसभा चुनाव में अमृतसर नॉर्थ सीट से AAP के टिकट पर विधायक बने थे। 2 नवंबर को उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को अपना इस्तीफा भेजने की जानकारी दी। इसके बाद उनके BJP में शामिल होने की खबर सामने आई। कुंवर विजय प्रताप सिंह जून 2025 में AAP से पांच साल के लिए निलंबित किए गए थे। पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद पहले भी सार्वजनिक हो चुके थे। उन्होंने पंजाब में नशे, गैंगस्टरवाद, जबरन वसूली और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर चिंता जताई थी। AAP ने BJP पर लगाया नेताओं को तोड़ने का आरोप तीनों नेताओं के BJP में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर निशाना साधा। पंजाब AAP अध्यक्ष अमन अरोड़ा और पार्टी के अन्य नेताओं ने BJP की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए। AAP नेताओं का आरोप है कि BJP दूसरी पार्टियों से अलग हुए नेताओं को अपने साथ जोड़कर पंजाब में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, BJP में शामिल हुए नेताओं ने पंजाब के विकास और राज्य के मुद्दों पर काम करने की बात कही है। Punjab Election 2027 से पहले बढ़ेगी राजनीतिक हलचल? पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में चुनाव से पहले AAP के तीन नेताओं का BJP में शामिल होना राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। AAP पहले ही उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर चुनावी तैयारियां शुरू कर चुकी है। अब पार्टी के भीतर सामने आई नाराजगी और नेताओं के दल-बदल से चुनावी समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि BJP इन तीनों नेताओं को आगामी चुनाव में क्या जिम्मेदारी देती है और AAP इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अपनी रणनीति में क्या बदलाव करती है। पंजाब की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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