नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विदेश में पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन (ATF) बेचने पर लगने वाले एक्सपोर्ट टैक्स के नियमों में बदलाव किया है। नए फैसले के तहत पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली 2.50 रुपए प्रति लीटर की ड्यूटी खत्म कर दी गई है। वहीं, डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 3 रुपए और ATF पर 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई गई है।
बदलाव के बाद डीजल के निर्यात पर 11.50 रुपए और जेट फ्यूल पर 11 रुपए प्रति लीटर की ड्यूटी लगेगी। सरकार का यह कदम मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच देश में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
डीजल और जेट फ्यूल के निर्यात पर बढ़ा टैक्स
नए नियमों के तहत पेट्रोल के निर्यात पर अब कोई एक्सपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी। दूसरी ओर, डीजल और हवाई ईंधन के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया गया है।
- पेट्रोल: 2.50 रुपए प्रति लीटर की ड्यूटी खत्म।
- डीजल: ड्यूटी 3 रुपए बढ़कर 11.50 रुपए प्रति लीटर हुई।
- ATF (जेट फ्यूल): ड्यूटी 50 पैसे बढ़कर 11 रुपए प्रति लीटर हुई।
सरकार चाहती है कि तेल कंपनियां विदेशों में बिक्री को प्राथमिकता देने के बजाय घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करें, ताकि देश में ईंधन की सप्लाई प्रभावित न हो।
आम जनता को राहत, पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर
मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर रखे हैं।
एक्सपोर्ट टैक्स में किए गए बदलाव का उद्देश्य घरेलू बाजार में तेल की उपलब्धता बनाए रखना है। सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय कीमतों की समीक्षा के आधार पर इन शुल्कों को तय करती है।
मार्च में लागू किए गए थे एक्सपोर्ट लेवी के नियम
मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर भारतीय तेल कंपनियों के लिए विदेशों में पेट्रोल-डीजल बेचना अधिक मुनाफे वाला हो गया था। ऐसे में घरेलू बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के लिए सरकार ने मार्च में एक्सपोर्ट टैक्स लगाया था।
इसका उद्देश्य कंपनियों को घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करना था।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते सप्लाई पर खतरा
युद्ध से पहले भारत अपनी जरूरत का करीब 45% कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज समुद्री मार्ग से आयात करता था। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया।
सप्लाई में रुकावट से बचने के लिए भारत ने अन्य देशों से भी कच्चा तेल मंगाने के विकल्पों पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य तेल की उपलब्धता के लिए किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम करना है।
क्या होता है विंडफॉल टैक्स?
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं, तो तेल कंपनियों को अप्रत्याशित रूप से ज्यादा मुनाफा हो सकता है। खासकर तब, जब वे घरेलू बाजार के बजाय विदेशों में तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेचकर अधिक कमाई करती हैं।
ऐसे असाधारण मुनाफे के एक हिस्से पर सरकार जो विशेष कर लगाती है, उसे विंडफॉल टैक्स कहा जाता है। इसका उद्देश्य अप्रत्याशित लाभ पर कर लगाना और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद करना है।
