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Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

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दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी।

दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई।

INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल

रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए।

रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा

विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया।

भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा।

JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था।

नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही।

उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की।

राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब

भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई।

इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले।

राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है।

खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई

रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।

खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है।

हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।

अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल

विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए।

वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद?

31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा।

इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है।

भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी।

Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने

दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की, जबकि भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस को घेरा।

एक तरफ विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा कांग्रेस से 1984 की हिंसा को लेकर जवाब मांग रही है।

फिलहाल दिल्ली की राजनीति में दोनों मुद्दों पर बयानबाजी जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि विपक्ष की मांगों और भाजपा के सवालों पर राजनीतिक दलों की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi का बड़ा दावा: 12 साल में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, 13.4 करोड़ रोजगार बढ़े

देश में गरीबी और रोजगार को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने वर्ल्ड बैंक की नई रिपोर्ट के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर आए हैं। वहीं, पिछले 6 साल में देश में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या में 13.4 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। PM Modi ने इसे देश की बदलती आर्थिक तस्वीर बताया। उनका कहना है कि गरीबी कम करना सरकार के लिए केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है। इस रिपोर्ट में गरीबी के स्तर में गिरावट के साथ रोजगार, महिलाओं की भागीदारी और आर्थिक असमानता से जुड़े कई अहम आंकड़े भी सामने आए हैं। 12 साल में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर वर्ल्ड बैंक की अक्टूबर 2026 की ‘India Poverty and Equity Brief’ रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011 से 2023 के बीच भारत में गरीबी के स्तर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 4.20 डॉलर प्रतिदिन (2021 PPP) वाली गरीबी रेखा के आधार पर गरीब आबादी का अनुपात 2011 में 57.7 प्रतिशत था, जो 2023 में घटकर 16.1 प्रतिशत रह गया। इस दौरान करीब 49.6 करोड़ लोग इस गरीबी रेखा से ऊपर आए। वहीं, अत्यधिक गरीबी के मामले में भी सुधार देखने को मिला। 3 डॉलर प्रतिदिन वाले मानक के आधार पर अत्यधिक गरीबी का स्तर 27.1 प्रतिशत से घटकर 2.6 प्रतिशत पर पहुंच गया। ये आंकड़े बताते हैं कि बीते एक दशक में देश के करोड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति में बदलाव आया है। 6 साल में 13.4 करोड़ रोजगार बढ़े गरीबी के साथ रोजगार के मोर्चे पर भी रिपोर्ट में अच्छी खबर सामने आई है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या करीब 13.4 करोड़ बढ़ी। खास बात यह है कि इस दौरान ग्रामीण महिलाओं की कामकाज में भागीदारी बढ़ी है। बड़ी संख्या में महिलाएं रोजगार से जुड़ीं और परिवार की आमदनी में योगदान देने लगीं। रोजगार के ये आंकड़े देश की अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलाव को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, रोजगार की संख्या के साथ उसकी गुणवत्ता और मिलने वाली वास्तविक आमदनी पर ध्यान देना भी जरूरी है। Economic Inequality में भी आई कमी रिपोर्ट में आर्थिक असमानता यानी Economic Inequality को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। भारत का Gini Index 20 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 23.0 पर पहुंच गया है। यह इंडेक्स किसी देश में आय के वितरण में असमानता को मापने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका कम होना आमतौर पर आय के अंतर में कमी का संकेत है। हालांकि, देश में अमीर और गरीब के बीच कमाई का अंतर अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में सबसे ज्यादा कमाने वाले 10 प्रतिशत कामगारों की औसत कमाई सबसे कम कमाने वाले 10 प्रतिशत कामगारों से करीब 13 गुना अधिक थी। ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से बदली तस्वीर रोजगार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को इस रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू माना गया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के कामकाज से जुड़ने से परिवारों की आर्थिक स्थिति को सहारा मिला है। जब परिवार में एक से ज्यादा सदस्य कमाई करने लगते हैं, तो घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरतों को पूरा करना थोड़ा आसान हो जाता है। रिपोर्ट में ग्रामीण और शहरी परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के संकेत भी दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हुई प्रगति से गांवों और शहरों के बीच का अंतर कम होने की बात सामने आई है। देश की 99% आबादी तक पहुंची बिजली वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में बुनियादी सुविधाओं का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत की करीब 99 प्रतिशत आबादी तक बिजली की पहुंच हो चुकी थी। बिजली की बेहतर सुविधा से ग्रामीण इलाकों में घरेलू कामकाज, शिक्षा और छोटे कारोबार को मदद मिली है। इसके अलावा, खाद्य सब्सिडी और दूसरी सरकारी सहायता योजनाओं ने भी गरीब परिवारों के खर्च का बोझ कम करने में भूमिका निभाई है। गरीबी कम करने में इन सरकारी योजनाओं का योगदान सरकार की ओर से गरीबी कम करने के प्रयासों में कई योजनाओं का उल्लेख किया जाता रहा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इन योजनाओं के साथ रोजगार और घरेलू खपत में बढ़ोतरी को भी गरीबी कम होने के प्रमुख कारणों में गिना गया है। 2028 तक और कम हो सकती है गरीबी वर्ल्ड बैंक के अनुमान के मुताबिक, 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी रेखा के आधार पर भारत में गरीबी का स्तर 2026 में 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकता है। हालांकि, यह अनुमान है। भविष्य में रोजगार, आमदनी और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर इसमें बदलाव संभव है। रोजगार और कमाई को लेकर अभी भी कई चुनौतियां गरीबी में गिरावट और रोजगार में बढ़ोतरी के बावजूद देश के सामने कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। इसलिए केवल रोजगार की संख्या बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। लोगों को ऐसा काम मिलना भी जरूरी है, जिससे वे अपने परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी कर सकें। PM Modi ने गरीबी में गिरावट को बताया बड़ी उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के आंकड़े साझा करते हुए गरीबी में आई गिरावट को देश के लिए महत्वपूर्ण बदलाव बताया। उन्होंने कांग्रेस के पुराने ‘गरीबी हटाओ’ नारे पर भी निशाना साधा और कहा कि गरीबी खत्म करना उनकी सरकार के लिए केवल नारा नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता है। वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए रोजगार, घरेलू खपत और सरकारी योजनाओं की भूमिका पर जोर दिया। आगे क्या होगा? भारत में गरीबी घटने और रोजगार बढ़ने के आंकड़े निश्चित रूप से चर्चा का विषय हैं। 12 साल में 49.6 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से ऊपर आना और 6 साल में 13.4 करोड़ रोजगार बढ़ना देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी बड़ी जानकारी है। लेकिन आम परिवार के लिए असली बदलाव तब महसूस होगा, जब नौकरी के साथ अच्छी आमदनी, महंगाई से राहत और बेहतर जीवन स्तर भी मिले। आने वाले वर्षों में सरकार...

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