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Israel Election 2026: चुनाव में विदेशी दखल का शक, जांच करेगी Mossad; Netanyahu की बढ़ी मुश्किलें

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इजराइल (Israel) में आम चुनाव के नतीजे आने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उनके गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिला। इसी बीच चुनाव में विदेशी दखल और पैसों के इस्तेमाल को लेकर एक नया विवाद सामने आया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) भी जांच में शामिल हो गई है। मोसाद, घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट (Shin Bet) के साथ मिलकर यह पता लगाएगी कि क्या विदेशी देशों या संगठनों ने इजराइल के चुनाव को प्रभावित करने के लिए फंडिंग की थी।

इस मामले में कतर और तुर्किये का नाम सामने आया है। हालांकि, दोनों देशों ने किसी भी तरह के हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। वहीं, इजराइल के चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि इस जांच से चुनाव के आधिकारिक नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

Mossad और Shin Bet को क्यों सौंपी गई जांच?

इजराइल के केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के जज नोआम सोहल्बर्ग ने विदेशी हस्तक्षेप की आशंका सामने आने के बाद शिन बेट को जांच के निर्देश दिए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसी को चुनाव से पहले ही कुछ संदिग्ध विदेशी गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी मिली थी। आशंका है कि विदेशी फंडिंग के जरिए अरब समुदाय के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई हो सकती है।

अब मोसाद को भी इस जांच में शामिल किया गया है। वह खासतौर पर विदेशी देशों से जुड़े पहलुओं और संभावित फंडिंग नेटवर्क की पड़ताल में मदद करेगी।

जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि पैसा कहां से आया, किन माध्यमों से भेजा गया और क्या इसका इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया गया था। फिलहाल जांच पूरी नहीं हुई है और आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।

Qatar और Turkey का नाम क्यों आया?

विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों में कतर का नाम प्रमुखता से सामने आया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कतर से जुड़ी संभावित फंडिंग के जरिए इजराइल के अरब समुदाय में मतदान बढ़ाने की कोशिश की गई हो सकती है।

इसके अलावा तुर्किये की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या इन देशों से जुड़े किसी नेटवर्क ने चुनाव के दौरान पैसे का इस्तेमाल किया था।

हालांकि, कतर और तुर्किये दोनों ने आरोपों को खारिज किया है। इसलिए फिलहाल इन दावों को जांच के विषय के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

चुनाव आयोग का बड़ा बयान, बोले- नतीजों पर नहीं होगा असर

विदेशी हस्तक्षेप की जांच शुरू होने के बाद इजराइल में चुनाव की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे थे। इस पर केंद्रीय चुनाव आयोग के कार्यवाहक महानिदेशक डीन लिवने ने स्थिति स्पष्ट की।

उन्होंने कहा कि चुनाव कानूनी प्रक्रिया के तहत कराए गए थे और मतदान केंद्रों पर वोटिंग की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी इंतजाम किए गए थे।

आयोग ने यह भी साफ किया कि जांच किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं है। इसका मकसद सिर्फ विदेशी हस्तक्षेप और संभावित गैरकानूनी गतिविधियों की सच्चाई सामने लाना है।

शिन बेट ने भी जांच को सीमित दायरे में बताया है। एजेंसी के मुताबिक, किसी पूरे समुदाय पर सवाल नहीं उठाया जा रहा है और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ ही कार्रवाई होगी।

Netanyahu की Likud सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से दूर

इजराइल की 120 सदस्यीय संसद को नेसेट कहा जाता है। यहां सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है।

चुनाव के अंतिम नतीजों में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिलीं। इसके साथ ही वह सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन उनके समर्थन वाले गठबंधन को कुल 53 सीटें ही मिल सकीं।

वहीं, गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिलीं। अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने मिलकर 19 सीटें हासिल कीं।

इस तरह किसी भी खेमे के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। अब सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच समर्थन और गठबंधन को लेकर बातचीत अहम होगी।

77.9% मतदान, अरब पार्टियों को मिलीं 19 सीटें

इस चुनाव में 77.9 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव आयोग के अनुसार, कुल 57,16,665 वोटों की गिनती हुई।

अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल कीं। इस प्रदर्शन के बाद सरकार गठन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि, नेतन्याहू और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेदों के कारण आगे की राह आसान नहीं दिख रही है। दोनों खेमों को बहुमत के लिए दूसरे दलों का समर्थन जुटाना होगा।

4 नवंबर को राष्ट्रपति को सौंपे जाएंगे आधिकारिक नतीजे

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, प्रमाणित चुनाव परिणाम 4 नवंबर 2026 को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को सौंपे जाएंगे।

इसके बाद राष्ट्रपति राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे और सरकार बनाने के लिए उपयुक्त उम्मीदवार को आमंत्रित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।

नई नेसेट का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को निर्धारित है। ऐसे में आने वाले दिनों में गठबंधन की बातचीत पर सभी की नजर रहेगी।

अब इजराइल की राजनीति में आगे क्या होगा?

इजराइल के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, मोसाद और शिन बेट की जांच में विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोपों की सच्चाई सामने लाना। दूसरी, संसद में 61 सीटों का समर्थन जुटाकर नई सरकार बनाना।

नेतन्याहू की पार्टी सबसे बड़ी होने के बावजूद बहुमत से दूर है। वहीं विपक्षी दलों के सामने भी अलग-अलग राजनीतिक दलों को साथ लाने की चुनौती है।

फिलहाल चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि जांच से आधिकारिक नतीजे प्रभावित नहीं होंगे। अब देखना होगा कि जांच में क्या खुलासे होते हैं और इजराइल में अगली सरकार किस गठबंधन के सहारे बनती है।

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Delhi-Varanasi Bullet Train

Delhi-Varanasi Bullet Train: यूपी के इन शहरों से गुजरेगी हाई-स्पीड ट्रेन, जानें पूरा Route

उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए आने वाले समय में रेल यात्रा काफी आसान और तेज हो सकती है। दिल्ली से वाराणसी के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन (Delhi-Varanasi Bullet Train) कॉरिडोर को लेकर रेलवे की तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद दिल्ली से वाराणसी पहुंचने में करीब 3 घंटे 50 मिनट लगने का अनुमान है। यानी जिस सफर में अभी काफी समय खर्च होता है, वह भविष्य में कुछ ही घंटों में पूरा हो सकेगा। केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी समेत देश में सात नए High-Speed Rail Corridors विकसित करने की घोषणा की थी। इस योजना का मकसद बड़े शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना और यात्रियों को तेज रेल सुविधा देना है। Delhi-Varanasi Bullet Train Project पर क्या है नया अपडेट? दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को लेकर रेलवे स्तर पर तकनीकी तैयारियां और डिजाइन से जुड़े काम आगे बढ़ाए जा रहे हैं। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने जून 2026 में दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर के सिविल स्ट्रक्चर डिजाइन के लिए कंसल्टेंसी बिड आमंत्रित की थी। इसमें स्टेशन, सुरंग, शाफ्ट और अन्य जरूरी निर्माण संरचनाओं के डिजाइन से जुड़ा काम शामिल है। प्रस्तावित कॉरिडोर को 320 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के हिसाब से तैयार करने की योजना है। हालांकि, अभी इस परियोजना की अंतिम सरकारी मंजूरी और निर्माण की समयसीमा स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसे निर्माण शुरू होने वाला प्रोजेक्ट मानना जल्दबाजी होगी। दिल्ली से वाराणसी तक सिर्फ 3 घंटे 50 मिनट में पूरा होगा सफर इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी रफ्तार होगी। रेलवे मंत्रालय की बजट संबंधी जानकारी के अनुसार, दिल्ली से वाराणसी तक की यात्रा लगभग 3 घंटे 50 मिनट में पूरी हो सकेगी। इससे नौकरी, कारोबार, पढ़ाई और धार्मिक यात्रा के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच आने-जाने वाले लोगों को काफी सुविधा मिल सकती है। प्रस्तावित हाई-स्पीड नेटवर्क से दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ने की योजना है। यूपी के इन शहरों को मिल सकती है Bullet Train की सुविधा प्रस्तावित रूट में उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहर शामिल किए जाने की चर्चा है। इनमें दिल्ली, नोएडा, जेवर, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और वाराणसी जैसे स्थान शामिल हैं। इसके अलावा अयोध्या को भी लिंक लाइन के माध्यम से जोड़ने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, इन सभी स्थानों पर स्टेशन बनने की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक रूट और स्टेशन की जानकारी आधिकारिक मंजूरी के बाद ही सामने आएगी। Varanasi से Patna होते हुए Siliguri तक भी जाएगी Bullet Train इस योजना का दूसरा अहम हिस्सा वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित रूट वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक जाएगा। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस कॉरिडोर पर वाराणसी से सिलीगुड़ी तक का सफर लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरा हो सकता है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ व्यापार और क्षेत्रीय आवागमन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। 320 KM की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को आधुनिक तकनीक के आधार पर विकसित करने की योजना है। डिजाइन संबंधी दस्तावेजों में 320 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति और 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति का उल्लेख किया गया है। इसके लिए आधुनिक ट्रैक, एलिवेटेड सेक्शन, सुरंग और विशेष रेलवे स्टेशनों का निर्माण करना होगा। जेवर में भूमिगत स्टेशन का डिजाइन भी प्रस्तावित है। सात नए Bullet Train Corridors की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने के लिए सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर घोषित किए गए हैं। इनमें शामिल हैं: इन कॉरिडोर का उद्देश्य देश के प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक और धार्मिक शहरों के बीच यात्रा को आसान बनाना है। Bullet Train शुरू होने से यूपी को क्या होगा फायदा? दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का असर सिर्फ रेल यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा। इसके शुरू होने से उत्तर प्रदेश में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। कब शुरू होगी Delhi-Varanasi Bullet Train? फिलहाल यात्रियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली से वाराणसी के बीच बुलेट ट्रेन कब दौड़ेगी। अभी तक इस कॉरिडोर के लिए अंतिम निर्माण मंजूरी और व्यावसायिक संचालन की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है। रेलवे के सामने DPR, तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता, फंडिंग, जमीन और निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण चरण हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही परियोजना की समयसीमा स्पष्ट हो पाएगी। कुल मिलाकर, दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के लिए भविष्य की एक बड़ी रेल कनेक्टिविटी योजना है। अगर यह योजना तय स्वरूप में पूरी होती है, तो दिल्ली से काशी तक का सफर पहले के मुकाबले काफी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। अब लोगों की नजर इस प्रोजेक्ट की अंतिम मंजूरी और निर्माण से जुड़ी अगली घोषणा पर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Omar Abdullah

Omar Abdullah: नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ी नाराजगी, 24 विधायकों ने खोला मोर्चा

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इन दिनों नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर सबकुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है। उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) के मंत्रिमंडल विस्तार के कुछ ही दिनों बाद पार्टी के करीब 24 विधायकों के एकजुट होने की खबर सामने आई है। नाराज विधायक सरकार के कामकाज और मंत्रियों के चयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनकी मांग है कि मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाया जाए और मंत्रिमंडल में भी बदलाव किया जाए। श्रीनगर में हुई विधायकों की बैठक के बाद अब सभी की नजर पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर है। नाराज विधायक उनसे मुलाकात कर अपनी शिकायतें और मांगें रखने की तैयारी में हैं। इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में नई चर्चा शुरू कर दी है। 24 विधायकों ने मिलकर की बैठक, पार्टी नेतृत्व से नाराजगी शुक्रवार, 30 अक्टूबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने श्रीनगर में विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर बैठक की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में 18 विधायक व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए, जबकि छह विधायकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना समर्थन दिया। बैठक में विधायकों ने पार्टी के अंदर फैसले लेने के तरीके और सरकार में उनकी भूमिका को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि मंत्रियों और दूसरे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करते समय वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की राय भी ली जानी चाहिए। विधायकों का मानना है कि पार्टी के अंदर बातचीत और सामूहिक फैसलों को ज्यादा महत्व मिलना चाहिए। हालांकि, पार्टी की ओर से इसे बगावत मानने से इनकार किया गया है। CM के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग नाराज विधायकों की सबसे बड़ी मांग मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी को उनके पद से हटाने की है। कुछ विधायकों का आरोप है कि सरकार और पार्टी से जुड़े फैसलों में कुछ लोगों का जरूरत से ज्यादा प्रभाव है। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को लेकर भी नाराजगी सामने आई है। विधायकों के एक समूह ने पुराने मंत्रियों की जगह नए चेहरों को मौका देने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं: 27 अक्टूबर को हुआ था Cabinet Expansion दरअसल, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 27 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इस दौरान चार नए नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। नए मंत्रियों में अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू शामिल हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर स्थित लोक भवन में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस फेरबदल के दौरान निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर किया गया था। कैबिनेट विस्तार के बाद कुछ वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की नाराजगी की खबरें सामने आईं। माना जा रहा है कि मंत्रियों के चयन और पार्टी के भीतर सलाह-मशविरे की कमी को लेकर असंतोष बढ़ा है। Mubarak Gul को महासचिव पद से हटाया गया पार्टी के अंदर चल रही हलचल के बीच फारूक अब्दुल्ला ने एक संगठनात्मक बदलाव भी किया। उन्होंने वरिष्ठ नेता मुबारक गुल को महासचिव पद से हटा दिया। उनकी जगह अली मोहम्मद सागर को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई। मुबारक गुल नेशनल कॉन्फ्रेंस के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वह छह बार विधायक रह चुके हैं। कैबिनेट विस्तार में उन्हें जगह नहीं मिलने के बाद उनकी नाराजगी की खबरें भी सामने आई थीं। उनके समर्थकों ने भी उन्हें मंत्री बनाए जाने की मांग उठाई थी। ऐसे में महासचिव पद से हटाए जाने के फैसले को पार्टी के मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। Aga Ruhullah Mehdi ने भी पार्टी छोड़ने का किया ऐलान नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक और मुश्किल श्रीनगर के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी के बयान से बढ़ गई है। उन्होंने पार्टी और लोकसभा सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया है। रुहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व पर चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक बंदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के अधिकारों जैसे मुद्दों पर सरकार को और प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए था। उनके इस फैसले ने पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इस्तीफे के ऐलान और उसके औपचारिक रूप से स्वीकार होने के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है। National Conference ने बगावत की खबरों को नकारा विधायकों की नाराजगी की खबरों के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पार्टी में बगावत होने की बात को खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विधायकों की बैठक को विद्रोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि संगठन के अंदर अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होना सामान्य बात है। विधायक अपनी समस्याएं और सुझाव नेतृत्व के सामने रख सकते हैं। इस तरह पार्टी के भीतर एक तरफ बदलाव की मांग उठ रही है, तो दूसरी तरफ नेतृत्व इसे आंतरिक बातचीत का हिस्सा बता रहा है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में NC की स्थिति जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 विधायक हैं। पार्टी ने कांग्रेस और अन्य समर्थक विधायकों के सहयोग से सरकार बनाई है। ऐसे में पार्टी के भीतर 24 विधायकों के एकजुट होने की खबर को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, फिलहाल सरकार के बहुमत को लेकर कोई आधिकारिक संकट सामने नहीं आया है। अब Farooq Abdullah के फैसले पर टिकी नजरें जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर चल रही नाराजगी अब पार्टी नेतृत्व के लिए अहम मुद्दा बन गई है। कैबिनेट विस्तार के बाद शुरू हुई असंतोष की चर्चा, मुबारक गुल को पद से हटाए जाने और आगा रुहुल्लाह के इस्तीफे के ऐलान ने राजनीतिक माहौल को और चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि फारूक अब्दुल्ला नाराज विधायकों की मांगों पर क्या फैसला लेते हैं और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल में दोबारा बदलाव करते हैं या नहीं। फिलहाल पार्टी के भीतर बातचीत और नेतृत्व के अगले कदम पर सबकी नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Punjab Election

Punjab Election 2027: AAP की 40 Candidates List जारी, CM भगवंत मान फिर Dhuri से लड़ेंगे चुनाव

Punjab Election 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने चुनाव से पहले ही अपनी तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में सबसे खास बात यह है कि पार्टी ने अपने सभी मौजूदा विधायकों पर दोबारा भरोसा जताया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान एक बार फिर धूरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। वहीं, जेल में बंद कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को भी टिकट दिया गया है। AAP की इस घोषणा के बाद पंजाब की राजनीति में चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी ने शुरुआती सूची में पुराने चेहरों को प्राथमिकता दी है। अब बाकी सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का इंतजार किया जा रहा है। AAP ने 40 Candidates की पहली List जारी की आम आदमी पार्टी ने 31 अक्टूबर 2026 को अपने 40 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया। उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की बैठक हुई थी। इसमें अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय फीडबैक और विधायकों के कामकाज को आधार बनाने की बात कही है। सभी 40 नाम मौजूदा विधायकों के होने से साफ है कि शुरुआती सूची में पार्टी ने अपने पुराने चेहरों को ही आगे रखा है। CM भगवंत मान फिर Dhuri से लड़ेंगे चुनाव मुख्यमंत्री भगवंत मान एक बार फिर धूरी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की थी। अब 2027 के चुनाव के लिए पार्टी ने उन्हें दोबारा धूरी से उम्मीदवार बनाया है। भगवंत मान की उम्मीदवारी को लेकर पहले से ही चर्चा थी। अब पार्टी की आधिकारिक घोषणा के बाद धूरी सीट पर चुनावी मुकाबले की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। जेल में बंद Sanjeev Arora को भी मिला Ticket AAP की पहली उम्मीदवार सूची में सबसे ज्यादा चर्चा मंत्री संजीव अरोड़ा के नाम की हो रही है। पार्टी ने उन्हें लुधियाना वेस्ट विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। संजीव अरोड़ा को मई 2026 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। वह गुरुग्राम की भोंडसी जेल में बंद हैं। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया है। संजीव अरोड़ा ने 2025 में लुधियाना वेस्ट सीट पर हुए उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। उनकी गिरफ्तारी को लेकर AAP ने राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप लगाए हैं। वहीं, ED की कार्रवाई जांच से जुड़ी है। अब उनके टिकट के बाद लुधियाना वेस्ट सीट भी चर्चा में आ गई है। इन प्रमुख नेताओं को भी मिला टिकट AAP की पहली सूची में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को कोटकपूरा से उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा कुलदीप सिंह धालीवाल, कुलवंत सिंह, डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर और कई अन्य मौजूदा विधायकों को भी टिकट मिला है। पार्टी की सूची में अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इनमें माझा, दोआबा और मालवा क्षेत्र की सीटें शामिल हैं। AAP की 40 उम्मीदवारों की List पार्टी की ओर से घोषित प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं: 2027 Election से पहले AAP की तैयारी तेज पंजाब में कुल 117 विधानसभा सीटें हैं और 2027 में इन पर चुनाव होना है। AAP ने चुनाव से पहले उम्मीदवारों की सूची जारी करके अपने चुनावी अभियान को गति दे दी है। अब पार्टी के सामने अपने मौजूदा विधायकों के कामकाज को जनता के सामने रखने और अगले कार्यकाल के लिए अपना एजेंडा पेश करने की चुनौती होगी। वहीं, विपक्षी दल भी सरकार के कामकाज, रोजगार, किसानों, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर सवाल उठा सकते हैं। फिलहाल AAP की पहली सूची में 40 नाम सामने आ चुके हैं। अब बाकी 77 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा और कांग्रेस, भाजपा व शिरोमणि अकाली दल की चुनावी रणनीति पर सभी की नजर रहेगी। अब आगे क्या? पंजाब चुनाव 2027 में मुकाबला किन मुद्दों पर होगा और दूसरी पार्टियां किसे उम्मीदवार बनाएंगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल भगवंत मान की धूरी से उम्मीदवारी और संजीव अरोड़ा को टिकट देने का फैसला AAP की पहली सूची के सबसे चर्चित पहलू बने हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ekta Nagar Development: PM मोदी ने दी बड़ी सौगात, Hotel से Eco Trail तक कई नए आकर्षण तैयार

गुजरात के एकतानगर (केवड़िया) में अब पर्यटकों को घूमने के लिए पहले से ज्यादा विकल्प मिलने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2026 को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर यहां ₹426.71 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं में IRCTC होटल, एकता क्रूज, रेनफॉरेस्ट, इको ट्रेल और नर्मदा घाट के विकास जैसे कई बड़े काम शामिल हैं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के लिए मशहूर एकतानगर को पर्यटन के लिहाज से और आकर्षक बनाने की तैयारी है। सरकार का जोर सिर्फ नए पर्यटन स्थल बनाने पर नहीं, बल्कि पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने, साफ-सफाई सुधारने और आसपास के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी है। ₹426.71 करोड़ की 31 परियोजनाओं से बदलेगी एकतानगर की तस्वीर एकतानगर में कुल 31 परियोजनाओं पर ₹426.71 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। इनमें 23 परियोजनाओं का उद्घाटन या लोकार्पण किया गया है, जबकि आठ नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है। इनका बजट इस प्रकार है: इन योजनाओं के पूरा होने से एकतानगर में पर्यटन के साथ परिवहन, स्वच्छता और दूसरी जरूरी सुविधाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। IRCTC Hotel और Ekta Cruise होंगे पर्यटकों के लिए खास आकर्षण इस बार की विकास योजनाओं में कुछ ऐसे प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिनका इंतजार पर्यटकों को लंबे समय से था। इन सुविधाओं के बाद एकतानगर आने वाले लोगों के पास स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अलावा भी घूमने और समय बिताने के कई विकल्प होंगे। 12 एकड़ में बना Rainforest, 132 Glass Panels वाला Skywalk खास एकतानगर का रेनफॉरेस्ट इस विकास योजना के सबसे आकर्षक प्रोजेक्ट्स में से एक है। करीब 12 एकड़ में फैले इस परिसर को प्राकृतिक वर्षावन जैसा अनुभव देने के लिए तैयार किया गया है। यहां कृत्रिम बारिश की व्यवस्था, रेन-गन टावर, झरने, बबल फाउंटेन और कई तरह के पेड़-पौधे देखने को मिलेंगे। इसका 132 ग्लास पैनल वाला गोलाकार ग्लास स्काईवॉक भी खास आकर्षण है। इस स्काईवॉक से पर्यटक आसपास फैली हरियाली और पूरे परिसर का नजारा देख सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दौरे के दौरान रेनफॉरेस्ट के साथ वामन वृक्ष वाटिका का भी जायजा लिया। Narmada Ghat से Water Treatment Plant तक, मिलेंगी बेहतर सुविधाएं एकतानगर में सिर्फ घूमने-फिरने की जगहों पर ही काम नहीं किया जा रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बुनियादी सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जा रहा है। इसमें नर्मदा घाट का अपग्रेडेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में फसाड लाइटिंग जैसे काम शामिल हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बसों, ट्रैवलेटर, सड़कों के विकास और रेलवे स्टेशन से विजिटर सेंटर तक वॉक-वे जैसी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है। इनका उद्देश्य पर्यटकों की आवाजाही को आसान बनाना और क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित बनाना है। 8 नई परियोजनाओं का भी शिलान्यास, Road Development पर जोर प्रधानमंत्री ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आठ नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इन पर करीब ₹118.88 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इनमें गोरा-भद्रा रोड डेवलपमेंट, स्मार्ट जीरो वेस्ट मैनेजमेंट, खलवानी इको टूरिज्म और कैक्टस-बटरफ्लाई गार्डन का विकास प्रमुख है। गोरा-भद्रा रोड के विकास पर करीब ₹59.32 करोड़ और स्मार्ट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट पर लगभग ₹36.58 करोड़ खर्च किए जाने हैं। वहीं, खलवानी इको टूरिज्म और कैक्टस-बटरफ्लाई गार्डन से क्षेत्र में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना है। Bharat Parv 2026 में दिखेगी भारत की संस्कृति और परंपरा एकतानगर में 30 अक्टूबर से भारत पर्व 2026 का आयोजन भी शुरू हो चुका है, जो 15 नवंबर तक चलेगा। इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों की संस्कृति, लोककला, पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प और पर्यटन स्थलों की झलक देखने को मिल रही है। इसके साथ एकता प्रकाश पर्व के तहत पूरे परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। वैली ऑफ फ्लावर्स रोड और ग्लो टनल जैसे आकर्षण भी पर्यटकों के लिए तैयार किए गए हैं। सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचकर सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह और एकता परेड का आयोजन किया गया। परेड में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राज्य पुलिस बलों और विभिन्न केंद्रीय पुलिस संगठनों की टुकड़ियों ने हिस्सा लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और झांकियों के जरिए देश की एकता और विविधता का संदेश भी दिया गया। एकतानगर में पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार एकतानगर में शुरू की गई ये परियोजनाएं सिर्फ नए पर्यटन स्थल जोड़ने तक सीमित नहीं हैं। इनका मकसद यहां आने वाले लोगों को ठहरने, घूमने और स्थानीय सुविधाओं का बेहतर अनुभव देना भी है। IRCTC होटल, एकता क्रूज, रेनफॉरेस्ट और इको ट्रेल जैसे आकर्षण जुड़ने से पर्यटकों के पास अब ज्यादा विकल्प होंगे। साथ ही सड़क, पानी, स्वच्छता और परिवहन से जुड़े काम क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अब आने वाले समय में इन परियोजनाओं का असर एकतानगर के पर्यटन और स्थानीय रोजगार के अवसरों पर कितना पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

INDIA Bloc Protest: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज जनमहाभियोग, कल Delhi में Vote Bachao Rally

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और कथित Vote Chori के मुद्दे पर INDIA Bloc ने अब विरोध प्रदर्शन को तेज करने की तैयारी कर ली है। विपक्षी दल 31 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इसके अगले दिन यानी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली निकाली जाएगी। हालांकि, इस रैली से पहले दिल्ली के कारोबारियों ने कांग्रेस नेतृत्व से कार्यक्रम टालने की अपील की है। व्यापारिक संगठनों को आशंका है कि दिवाली से ठीक पहले लाखों लोगों की भीड़ और वाहनों की आवाजाही से दिल्ली के प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब इस राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर विपक्ष और व्यापारिक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है। आज 31 अक्टूबर को CEC के खिलाफ होगा जनमहाभियोग कार्यक्रम INDIA ब्लॉक ने पहले 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन दिल्ली में बारिश के कारण इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। अब यह कार्यक्रम 31 अक्टूबर को दोपहर 3:30 से 4 बजे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास, 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कर सकती हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रस्ताव पेश किया जाएगा, जबकि राहुल गांधी समापन संबोधन देंगे। इसमें INDIA ब्लॉक के कई दलों के नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। विपक्ष का कहना है कि इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग के कामकाज और CEC के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जनता के सामने रखा जाएगा। यहां एक बात समझना जरूरी है कि जनमहाभियोग कोई आधिकारिक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यह विपक्ष की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक सार्वजनिक सुनवाई है। इससे CEC को सीधे पद से नहीं हटाया जा सकता। SIR और Vote Chori पर क्यों आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के नाम पर बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलतियों को दूर करना है। आयोग के अनुसार, मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान करना इस प्रक्रिया का हिस्सा है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। INDIA ब्लॉक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत बता रहा है। संसद में CEC को हटाने का नोटिस भी हो चुका है खारिज ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग विपक्ष पहले भी संसद में उठा चुका है। 12 मार्च को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में CEC को हटाने से संबंधित नोटिस दिए थे। इन नोटिसों पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे। हालांकि, 6 अप्रैल को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन नोटिसों को खारिज कर दिया था। इसके बाद विपक्ष ने इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का फैसला किया। इसी रणनीति के तहत अब सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होगी Vote Bachao Rally जनमहाभियोग कार्यक्रम के अगले दिन यानी 1 नवंबर को INDIA ब्लॉक दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करेगा। इस अभियान को ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ नाम दिया गया है। राहुल गांधी ने आम लोगों, युवाओं, छात्रों और सामाजिक संगठनों से इस रैली में शामिल होने की अपील की है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि मताधिकार और चुनावी व्यवस्था में भरोसे से जुड़ी है। कांग्रेस के मुताबिक, रैली के तहत मिंटो रोड और कनॉट प्लेस जंक्शन से मार्च निकालने की योजना है, जो रामलीला मैदान पहुंचकर समाप्त होगा। इसमें INDIA ब्लॉक के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में रैली के लिए शर्तों के साथ अनुमति दी है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं। दिल्ली के कारोबारियों ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र रैली से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने अपनी चिंता जाहिर की है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने की मांग की है। कारोबारियों का कहना है कि दिवाली से पहले दिल्ली के बाजारों में खरीदारी और माल की सप्लाई बढ़ जाती है। ऐसे समय में बड़ी रैली होने से ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या और बाजारों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। CTI का अनुमान है कि रैली के कारण दिल्ली के करीब 20 प्रमुख बाजारों में 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित होने का जोखिम है। यह आंकड़ा व्यापारिक संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। CTI ने सोनिया गांधी के सामने दो सुझाव रखे हैं: कारोबारियों का कहना है कि वे राजनीतिक कार्यक्रम के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन त्योहार से ठीक पहले इसके समय और जगह को लेकर उन्हें परेशानी हो सकती है। राहुल गांधी ने कारोबारियों की अपील पर क्या कहा? राहुल गांधी पहले भी कारोबारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटा दें, तो विपक्ष का विरोध 30 सेकंड में खत्म हो सकता है। व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष उनकी परेशानियों को समझता है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं, 31 अक्टूबर...

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