मध्यप्रदेश के पचमढ़ी में ट्रेनिंग पर आए देहरादून के एक आर्मी जवान की जंगली बायसन के हमले में मौत हो गई। 26 वर्षीय आकाश चौहान आर्मी एजुकेशन सेंटर में विदेशी भाषा का प्रशिक्षण ले रहे थे। गुरुवार शाम फुटबॉल ग्राउंड के पास बैठे आकाश पर पीछे से बायसन ने हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें आर्मी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
शुक्रवार को भोपाल के हमीदिया अस्पताल में फोरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में उनका पोस्टमॉर्टम किया गया। इसके बाद सेना के अधिकारियों ने शव परिजनों को सौंप दिया।
फुटबॉल ग्राउंड पर बैठे थे, पीछे से बायसन ने किया हमला
पचमढ़ी थाने के उप निरीक्षक शिवनाथ यादव के मुताबिक, आकाश चौहान गुरुवार शाम आर्मी एजुकेशन सेंटर के फुटबॉल मैदान के पास बैठे थे। इसी दौरान अचानक पीछे से आए जंगली बायसन ने उन पर हमला कर दिया।
बायसन का सींग आकाश की छाती के दाहिने हिस्से में लगा। साथी जवान उन्हें तत्काल आर्मी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
फेफड़े और लिवर को पहुंचा नुकसान
पचमढ़ी सिविल अस्पताल के डॉक्टर दिलीप शर्मा ने बताया कि वे भोपाल में हुए पोस्टमॉर्टम के दौरान मौजूद थे। बायसन का सींग जवान की छाती में दाईं ओर छठवीं और सातवीं पसली के पास लगा था। इससे उनके फेफड़े और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा।
17 कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात थे आकाश
आकाश चौहान भारतीय सेना की 17 कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात थे। वे मूल रूप से उत्तराखंड के देहरादून जिले के डोईवाला क्षेत्र स्थित शिमलास ग्रांट के रहने वाले थे।
आकाश आर्मी एजुकेशन सेंटर में विदेशी भाषा का प्रशिक्षण ले रहे थे। उनके निधन से पचमढ़ी में शोक का माहौल रहा। शुक्रवार सुबह आर्मी सेंटर में साथी जवानों ने उन्हें सैन्य सम्मान दिया।
रिहायशी इलाके में बायसन दिखने से लोगों की चिंता बढ़ी
स्थानीय लोगों के मुताबिक, दो दिन पहले रात में होटल खालसा और पटेल रोड के पास आधा दर्जन से ज्यादा बायसन दिखाई दिए थे। लोगों का कहना है कि वन विभाग को बायसन को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए कदम उठाने चाहिए, ताकि रिहायशी इलाकों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 6600 से अधिक बायसन होने का दावा
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसे यानी गौर की अच्छी संख्या है। पूर्व में हुई गणना के अनुसार, यहां इनकी संख्या 6600 से अधिक बताई गई है।
गौर बेहद ताकतवर वन्यजीव होते हैं। इनका वजन सामान्य तौर पर 400 से 1200 किलो तक हो सकता है। भारी शरीर के बावजूद ये काफी फुर्तीले होते हैं और पहाड़ी इलाकों में भी आसानी से चढ़ सकते हैं। ये आमतौर पर झुंड में रहते हैं, लेकिन खतरा महसूस होने या आक्रामक होने पर बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
आर्मी जवान की मौत के बाद पचमढ़ी में स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशिक्षण के लिए सतपुड़ा आने वाले जवानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
