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Weather Alert: Cyclone Arnab का असर, ओडिशा में बाढ़-लैंडस्लाइड; Andhra में फिर भारी बारिश

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देशभर में मौसम (Weather) का मिजाज तेजी से बदल रहा है। कहीं बारिश और ओलावृष्टि लोगों की परेशानी बढ़ा रही है, तो कहीं बर्फबारी से ठंड ने दस्तक दे दी है। चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) के असर से राजस्थान में ओले गिरे हैं, उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हुई है और ओडिशा में भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बन गई है। ओडिशा में इस प्राकृतिक आपदा के चलते एक 9 महीने के बच्चे समेत तीन लोगों की जान चली गई।

इस बीच आंध्र प्रदेश के लिए मौसम विभाग ने एक और मौसमी सिस्टम को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के आसपास बन रहा नया Low Pressure Area आने वाले दिनों में बारिश का कारण बन सकता है। ऐसे में नवंबर की शुरुआत में भी कई राज्यों को खराब मौसम का सामना करना पड़ सकता है।

Odisha Flood: बाढ़ और Landslide से बिगड़े हालात, 3 की मौत

चक्रवात अर्नब के प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश हुई। गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों में लगातार बारिश के कारण कई जगह बाढ़ जैसे हालात बन गए। नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांवों में पानी भर गया और कई इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आईं।

कंधमाल जिले में भूस्खलन की चपेट में आने से एक दंपती और उनके 9 महीने के बच्चे की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

प्रशासन के अनुसार, 23 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नौसेना और तटरक्षक बल की मदद से जरूरतमंद लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।

गंजाम जिले के कई गांवों में बाढ़ का पानी भरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत टीमों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

Rajasthan Weather: बारिश के साथ गिरे ओले, किसानों की बढ़ी चिंता

राजस्थान के कुछ इलाकों में मौसम अचानक बदल गया। बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से तापमान में गिरावट आई है। लोगों को जहां गर्मी से राहत मिली, वहीं किसानों की चिंता बढ़ गई है।

ओले गिरने से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। मौसम में इस बदलाव के कारण ग्रामीण इलाकों में भी सतर्कता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देने की जरूरत है।

Uttarakhand Snowfall: पहाड़ों पर बर्फबारी, ठंड का असर बढ़ा

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई है। पहाड़ों पर बर्फ की सफेद चादर दिखाई देने लगी है। वहीं, निचले इलाकों में बारिश और ठंडी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

बर्फबारी के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम का मिजाज बदल गया है। यात्रा करने वाले लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि खराब मौसम का असर सड़क यातायात पर भी पड़ सकता है।

Andhra Pradesh Weather: आंध्र प्रदेश में फिर भारी बारिश का खतरा

चक्रवात अर्नब के कमजोर पड़ने के बाद भी आंध्र प्रदेश में मौसम को लेकर चिंता बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी हिस्से और अंडमान सागर के आसपास एक नया निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) विकसित हो रहा है।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिस्टम आगे मजबूत होकर डिप्रेशन में बदल सकता है। इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। इसका असर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है।

नवंबर की शुरुआत में तटीय आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि, इस नए सिस्टम के चक्रवात बनने की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

MP, Bihar और Chhattisgarh में भी Rain Alert

चक्रवात अर्नब और बदलते मौसम सिस्टम का असर मध्य भारत और पूर्वी भारत के राज्यों में भी देखने को मिल सकता है।

  • मध्य प्रदेश: पूर्वी हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की संभावना है।
  • छत्तीसगढ़: कुछ इलाकों में बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है।
  • बिहार: कई जिलों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।
  • उत्तर प्रदेश: पूर्वी यूपी के कुछ हिस्सों में मौसम बदलने के संकेत हैं।
  • झारखंड: बारिश और तेज हवाओं से जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, हर जिले में मौसम की स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी। इसलिए लोगों को अपने क्षेत्र के मौसम का ताजा पूर्वानुमान जरूर देखना चाहिए।

Odisha में राहत-बचाव अभियान जारी, प्रशासन अलर्ट

ओडिशा में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है, ताकि आवागमन जल्द सामान्य हो सके।

Weather Update: अगले कुछ दिन इन राज्यों के लिए अहम

चक्रवात अर्नब कमजोर जरूर पड़ गया है, लेकिन इसके बाद भी कई राज्यों में मौसम की चुनौतियां बनी हुई हैं। ओडिशा में बाढ़ और भूस्खलन से लोग परेशान हैं, राजस्थान में ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ाई है और उत्तराखंड में बर्फबारी के कारण ठंड तेज हो गई है।

दूसरी ओर, बंगाल की खाड़ी में नया Low Pressure Area विकसित होने से आंध्र प्रदेश में फिर भारी बारिश की आशंका है। ऐसे में नवंबर की शुरुआत में मौसम का रुख कैसा रहेगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

लोगों के लिए जरूरी सलाह: बारिश और बाढ़ प्रभावित इलाकों में निचले स्थानों पर जाने से बचें। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा से पहले सड़क और मौसम की स्थिति की जानकारी लें। आंधी, बिजली और भारी बारिश के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें और IMD की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें।

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INDIA Bloc

INDIA Bloc Protest: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज जनमहाभियोग, कल Delhi में Vote Bachao Rally

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और कथित Vote Chori के मुद्दे पर INDIA Bloc ने अब विरोध प्रदर्शन को तेज करने की तैयारी कर ली है। विपक्षी दल 31 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इसके अगले दिन यानी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली निकाली जाएगी। हालांकि, इस रैली से पहले दिल्ली के कारोबारियों ने कांग्रेस नेतृत्व से कार्यक्रम टालने की अपील की है। व्यापारिक संगठनों को आशंका है कि दिवाली से ठीक पहले लाखों लोगों की भीड़ और वाहनों की आवाजाही से दिल्ली के प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब इस राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर विपक्ष और व्यापारिक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है। आज 31 अक्टूबर को CEC के खिलाफ होगा जनमहाभियोग कार्यक्रम INDIA ब्लॉक ने पहले 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन दिल्ली में बारिश के कारण इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। अब यह कार्यक्रम 31 अक्टूबर को दोपहर 3:30 से 4 बजे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास, 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कर सकती हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रस्ताव पेश किया जाएगा, जबकि राहुल गांधी समापन संबोधन देंगे। इसमें INDIA ब्लॉक के कई दलों के नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। विपक्ष का कहना है कि इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग के कामकाज और CEC के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जनता के सामने रखा जाएगा। यहां एक बात समझना जरूरी है कि जनमहाभियोग कोई आधिकारिक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यह विपक्ष की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक सार्वजनिक सुनवाई है। इससे CEC को सीधे पद से नहीं हटाया जा सकता। SIR और Vote Chori पर क्यों आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के नाम पर बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलतियों को दूर करना है। आयोग के अनुसार, मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान करना इस प्रक्रिया का हिस्सा है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। INDIA ब्लॉक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत बता रहा है। संसद में CEC को हटाने का नोटिस भी हो चुका है खारिज ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग विपक्ष पहले भी संसद में उठा चुका है। 12 मार्च को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में CEC को हटाने से संबंधित नोटिस दिए थे। इन नोटिसों पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे। हालांकि, 6 अप्रैल को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन नोटिसों को खारिज कर दिया था। इसके बाद विपक्ष ने इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का फैसला किया। इसी रणनीति के तहत अब सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होगी Vote Bachao Rally जनमहाभियोग कार्यक्रम के अगले दिन यानी 1 नवंबर को INDIA ब्लॉक दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करेगा। इस अभियान को ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ नाम दिया गया है। राहुल गांधी ने आम लोगों, युवाओं, छात्रों और सामाजिक संगठनों से इस रैली में शामिल होने की अपील की है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि मताधिकार और चुनावी व्यवस्था में भरोसे से जुड़ी है। कांग्रेस के मुताबिक, रैली के तहत मिंटो रोड और कनॉट प्लेस जंक्शन से मार्च निकालने की योजना है, जो रामलीला मैदान पहुंचकर समाप्त होगा। इसमें INDIA ब्लॉक के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में रैली के लिए शर्तों के साथ अनुमति दी है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं। दिल्ली के कारोबारियों ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र रैली से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने अपनी चिंता जाहिर की है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने की मांग की है। कारोबारियों का कहना है कि दिवाली से पहले दिल्ली के बाजारों में खरीदारी और माल की सप्लाई बढ़ जाती है। ऐसे समय में बड़ी रैली होने से ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या और बाजारों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। CTI का अनुमान है कि रैली के कारण दिल्ली के करीब 20 प्रमुख बाजारों में 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित होने का जोखिम है। यह आंकड़ा व्यापारिक संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। CTI ने सोनिया गांधी के सामने दो सुझाव रखे हैं: कारोबारियों का कहना है कि वे राजनीतिक कार्यक्रम के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन त्योहार से ठीक पहले इसके समय और जगह को लेकर उन्हें परेशानी हो सकती है। राहुल गांधी ने कारोबारियों की अपील पर क्या कहा? राहुल गांधी पहले भी कारोबारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटा दें, तो विपक्ष का विरोध 30 सेकंड में खत्म हो सकता है। व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष उनकी परेशानियों को समझता है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं, 31 अक्टूबर...
Hormuz

Hormuz Attack: जहाज पर चिपकाया विस्फोटक, धमाके से Engine Room में लगी आग; 27 भारतीय सुरक्षित

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज (Hormuz) जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से एक और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर MT LOUISE 1 को निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि एक छोटी नाव के जरिए जहाज के बाहरी हिस्से पर विस्फोटक उपकरण लगाए गए थे। धमाका होते ही जहाज के इंजन रूम में आग लग गई। इस दौरान टैंकर पर 27 भारतीय नाविक भी मौजूद थे। राहत की बात यह रही कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। यह घटना 30 अक्टूबर को ओमान के पास हुई। हमले के बाद जहाज में कुछ समय के लिए कामकाज प्रभावित हुआ, लेकिन चालक दल ने आग पर काबू पा लिया। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। MT LOUISE 1 पर कैसे हुआ हमला? समुद्री सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एक छोटी नाव टैंकर के करीब पहुंची थी। इसके बाद जहाज के बाहरी हिस्से पर दो लिंपेट माइंस (Limpet Mines) लगाए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ समय बाद हुए धमाकों से जहाज के इंजन रूम में आग लग गई। घटना के बाद चालक दल ने स्थिति संभाली और आग बुझाने में सफलता हासिल की। शुरुआती जानकारी के अनुसार, टैंकर की यात्रा भी दोबारा शुरू हो गई। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के मुताबिक, यह घटना ओमान के खासाब (Khasab) से करीब 25 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में हुई। फिलहाल इस हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। क्या होती हैं Limpet Mines? लिंपेट माइंस छोटे विस्फोटक उपकरण होते हैं, जिन्हें जहाज के बाहरी हिस्से पर लगाया जा सकता है। इस तरह के उपकरणों को लेकर समुद्री सुरक्षा एजेंसियां गंभीर चिंता जता रही हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इस घटना के बाद होर्मुज से गुजरने वाले दूसरे जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। एक दिन पहले MT ARZANAH पर भी हुआ था हमला होर्मुज में तनाव का मामला सिर्फ एक जहाज तक सीमित नहीं है। MT LOUISE 1 पर हमले से एक दिन पहले यानी 29 अक्टूबर को MT ARZANAH नाम के एक अन्य तेल टैंकर को भी निशाना बनाया गया था। लाइबेरिया के झंडे वाले इस जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला होने की जानकारी सामने आई थी। उस समय जहाज पर दो भारतीय नागरिक मौजूद थे। राहत की बात यह रही कि वे दोनों भी सुरक्षित बच गए। इस तरह 29 और 30 अक्टूबर को हुई दोनों घटनाओं में कुल 29 भारतीय नाविक जहाजों पर मौजूद थे। केंद्र सरकार के मुताबिक, सभी भारतीय सुरक्षित हैं। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सरकार का बयान केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दोनों घटनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि MT ARZANAH और MT LOUISE 1 पर मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। सरकार की ओर से जहाजों की प्रबंधन कंपनियों के साथ संपर्क बनाए रखने और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर नजर रखने की बात कही गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में क्यों बढ़ रहा है तनाव? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचते हैं। यह रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसलिए यहां होने वाली किसी भी सैन्य या समुद्री घटना का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहता। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बाद इस इलाके में जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। हाल के दिनों में कई व्यापारिक जहाजों से जुड़ी घटनाएं सामने आई हैं। 30 अक्टूबर को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नेवी (IRGC) ने भी दावा किया था कि होर्मुज में समुद्री रास्तों से गुजरने की कोशिश के दौरान चार तेल टैंकरों में आग और विस्फोट हुए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज का यह मामला? भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और समुद्री परिवहन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा भारतीय नागरिक बड़ी संख्या में विदेशी व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं। ऐसे में जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों की खबरें उनके परिवारों के लिए भी चिंता बढ़ाने वाली हैं। फिलहाल भारत के लिए राहत की बात यह है कि दोनों जहाजों पर मौजूद सभी 29 भारतीय सुरक्षित हैं। हालांकि, होर्मुज में लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर सतर्कता बनाए रखना जरूरी है। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की स्थिति पर भारत समेत दुनिया के कई देशों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Weather

Weather Alert: Cyclone Arnab का असर, ओडिशा में बाढ़-लैंडस्लाइड; Andhra में फिर भारी बारिश

देशभर में मौसम (Weather) का मिजाज तेजी से बदल रहा है। कहीं बारिश और ओलावृष्टि लोगों की परेशानी बढ़ा रही है, तो कहीं बर्फबारी से ठंड ने दस्तक दे दी है। चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) के असर से राजस्थान में ओले गिरे हैं, उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हुई है और ओडिशा में भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बन गई है। ओडिशा में इस प्राकृतिक आपदा के चलते एक 9 महीने के बच्चे समेत तीन लोगों की जान चली गई। इस बीच आंध्र प्रदेश के लिए मौसम विभाग ने एक और मौसमी सिस्टम को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के आसपास बन रहा नया Low Pressure Area आने वाले दिनों में बारिश का कारण बन सकता है। ऐसे में नवंबर की शुरुआत में भी कई राज्यों को खराब मौसम का सामना करना पड़ सकता है। Odisha Flood: बाढ़ और Landslide से बिगड़े हालात, 3 की मौत चक्रवात अर्नब के प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश हुई। गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों में लगातार बारिश के कारण कई जगह बाढ़ जैसे हालात बन गए। नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांवों में पानी भर गया और कई इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आईं। कंधमाल जिले में भूस्खलन की चपेट में आने से एक दंपती और उनके 9 महीने के बच्चे की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। प्रशासन के अनुसार, 23 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नौसेना और तटरक्षक बल की मदद से जरूरतमंद लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। गंजाम जिले के कई गांवों में बाढ़ का पानी भरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत टीमों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। Rajasthan Weather: बारिश के साथ गिरे ओले, किसानों की बढ़ी चिंता राजस्थान के कुछ इलाकों में मौसम अचानक बदल गया। बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से तापमान में गिरावट आई है। लोगों को जहां गर्मी से राहत मिली, वहीं किसानों की चिंता बढ़ गई है। ओले गिरने से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। मौसम में इस बदलाव के कारण ग्रामीण इलाकों में भी सतर्कता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देने की जरूरत है। Uttarakhand Snowfall: पहाड़ों पर बर्फबारी, ठंड का असर बढ़ा उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई है। पहाड़ों पर बर्फ की सफेद चादर दिखाई देने लगी है। वहीं, निचले इलाकों में बारिश और ठंडी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। बर्फबारी के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम का मिजाज बदल गया है। यात्रा करने वाले लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि खराब मौसम का असर सड़क यातायात पर भी पड़ सकता है। Andhra Pradesh Weather: आंध्र प्रदेश में फिर भारी बारिश का खतरा चक्रवात अर्नब के कमजोर पड़ने के बाद भी आंध्र प्रदेश में मौसम को लेकर चिंता बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी हिस्से और अंडमान सागर के आसपास एक नया निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) विकसित हो रहा है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिस्टम आगे मजबूत होकर डिप्रेशन में बदल सकता है। इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। इसका असर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है। नवंबर की शुरुआत में तटीय आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि, इस नए सिस्टम के चक्रवात बनने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। MP, Bihar और Chhattisgarh में भी Rain Alert चक्रवात अर्नब और बदलते मौसम सिस्टम का असर मध्य भारत और पूर्वी भारत के राज्यों में भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, हर जिले में मौसम की स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी। इसलिए लोगों को अपने क्षेत्र के मौसम का ताजा पूर्वानुमान जरूर देखना चाहिए। Odisha में राहत-बचाव अभियान जारी, प्रशासन अलर्ट ओडिशा में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है, ताकि आवागमन जल्द सामान्य हो सके। Weather Update: अगले कुछ दिन इन राज्यों के लिए अहम चक्रवात अर्नब कमजोर जरूर पड़ गया है, लेकिन इसके बाद भी कई राज्यों में मौसम की चुनौतियां बनी हुई हैं। ओडिशा में बाढ़ और भूस्खलन से लोग परेशान हैं, राजस्थान में ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ाई है और उत्तराखंड में बर्फबारी के कारण ठंड तेज हो गई है। दूसरी ओर, बंगाल की खाड़ी में नया Low Pressure Area विकसित होने से आंध्र प्रदेश में फिर भारी बारिश की आशंका है। ऐसे में नवंबर की शुरुआत में मौसम का रुख कैसा रहेगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। लोगों के लिए जरूरी सलाह: बारिश और बाढ़ प्रभावित इलाकों में निचले स्थानों पर जाने से बचें। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा से पहले सड़क और मौसम की स्थिति की जानकारी लें। आंधी, बिजली और भारी बारिश के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें और IMD की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Israel Election 2026: चुनाव में विदेशी दखल का शक, जांच करेगी Mossad; Netanyahu की बढ़ी मुश्किलें

इजराइल (Israel) में आम चुनाव के नतीजे आने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उनके गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिला। इसी बीच चुनाव में विदेशी दखल और पैसों के इस्तेमाल को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) भी जांच में शामिल हो गई है। मोसाद, घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट (Shin Bet) के साथ मिलकर यह पता लगाएगी कि क्या विदेशी देशों या संगठनों ने इजराइल के चुनाव को प्रभावित करने के लिए फंडिंग की थी। इस मामले में कतर और तुर्किये का नाम सामने आया है। हालांकि, दोनों देशों ने किसी भी तरह के हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। वहीं, इजराइल के चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि इस जांच से चुनाव के आधिकारिक नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। Mossad और Shin Bet को क्यों सौंपी गई जांच? इजराइल के केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के जज नोआम सोहल्बर्ग ने विदेशी हस्तक्षेप की आशंका सामने आने के बाद शिन बेट को जांच के निर्देश दिए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसी को चुनाव से पहले ही कुछ संदिग्ध विदेशी गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी मिली थी। आशंका है कि विदेशी फंडिंग के जरिए अरब समुदाय के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई हो सकती है। अब मोसाद को भी इस जांच में शामिल किया गया है। वह खासतौर पर विदेशी देशों से जुड़े पहलुओं और संभावित फंडिंग नेटवर्क की पड़ताल में मदद करेगी। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि पैसा कहां से आया, किन माध्यमों से भेजा गया और क्या इसका इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया गया था। फिलहाल जांच पूरी नहीं हुई है और आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। Qatar और Turkey का नाम क्यों आया? विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों में कतर का नाम प्रमुखता से सामने आया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कतर से जुड़ी संभावित फंडिंग के जरिए इजराइल के अरब समुदाय में मतदान बढ़ाने की कोशिश की गई हो सकती है। इसके अलावा तुर्किये की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या इन देशों से जुड़े किसी नेटवर्क ने चुनाव के दौरान पैसे का इस्तेमाल किया था। हालांकि, कतर और तुर्किये दोनों ने आरोपों को खारिज किया है। इसलिए फिलहाल इन दावों को जांच के विषय के रूप में ही देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग का बड़ा बयान, बोले- नतीजों पर नहीं होगा असर विदेशी हस्तक्षेप की जांच शुरू होने के बाद इजराइल में चुनाव की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे थे। इस पर केंद्रीय चुनाव आयोग के कार्यवाहक महानिदेशक डीन लिवने ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि चुनाव कानूनी प्रक्रिया के तहत कराए गए थे और मतदान केंद्रों पर वोटिंग की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी इंतजाम किए गए थे। आयोग ने यह भी साफ किया कि जांच किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं है। इसका मकसद सिर्फ विदेशी हस्तक्षेप और संभावित गैरकानूनी गतिविधियों की सच्चाई सामने लाना है। शिन बेट ने भी जांच को सीमित दायरे में बताया है। एजेंसी के मुताबिक, किसी पूरे समुदाय पर सवाल नहीं उठाया जा रहा है और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ ही कार्रवाई होगी। Netanyahu की Likud सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से दूर इजराइल की 120 सदस्यीय संसद को नेसेट कहा जाता है। यहां सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। चुनाव के अंतिम नतीजों में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिलीं। इसके साथ ही वह सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन उनके समर्थन वाले गठबंधन को कुल 53 सीटें ही मिल सकीं। वहीं, गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिलीं। अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने मिलकर 19 सीटें हासिल कीं। इस तरह किसी भी खेमे के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। अब सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच समर्थन और गठबंधन को लेकर बातचीत अहम होगी। 77.9% मतदान, अरब पार्टियों को मिलीं 19 सीटें इस चुनाव में 77.9 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव आयोग के अनुसार, कुल 57,16,665 वोटों की गिनती हुई। अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल कीं। इस प्रदर्शन के बाद सरकार गठन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, नेतन्याहू और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेदों के कारण आगे की राह आसान नहीं दिख रही है। दोनों खेमों को बहुमत के लिए दूसरे दलों का समर्थन जुटाना होगा। 4 नवंबर को राष्ट्रपति को सौंपे जाएंगे आधिकारिक नतीजे चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, प्रमाणित चुनाव परिणाम 4 नवंबर 2026 को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को सौंपे जाएंगे। इसके बाद राष्ट्रपति राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे और सरकार बनाने के लिए उपयुक्त उम्मीदवार को आमंत्रित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। नई नेसेट का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को निर्धारित है। ऐसे में आने वाले दिनों में गठबंधन की बातचीत पर सभी की नजर रहेगी। अब इजराइल की राजनीति में आगे क्या होगा? इजराइल के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, मोसाद और शिन बेट की जांच में विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोपों की सच्चाई सामने लाना। दूसरी, संसद में 61 सीटों का समर्थन जुटाकर नई सरकार बनाना। नेतन्याहू की पार्टी सबसे बड़ी होने के बावजूद बहुमत से दूर है। वहीं विपक्षी दलों के सामने भी अलग-अलग राजनीतिक दलों को साथ लाने की चुनौती है। फिलहाल चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि जांच से आधिकारिक नतीजे प्रभावित नहीं होंगे। अब देखना होगा कि जांच में क्या खुलासे होते हैं और इजराइल में अगली सरकार किस गठबंधन के सहारे बनती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

रायपुर में नशीली कैप्सूल बेचने वाले 3 दोषियों को सजा, दो को 20-20 साल का सश्रम कारावास

रायपुर। नशीली कैप्सूल की तस्करी और बिक्री के मामले में विशेष NDPS कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10 से 20 साल तक के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दो आरोपियों को 20-20 साल और एक आरोपी को 10 साल की सजा दी है। तीनों पर कुल 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। फैसला विशेष न्यायाधीश (NDPS एक्ट) श्रीमती किरण थवाईत ने सुनाया। मामले की जानकारी सरकारी वकील भुवन लाल साहू ने दी। पारस नगर ब्रिज के पास ग्राहक तलाश रहा था मुख्य आरोपी अभियोजन के मुताबिक, 19 मई 2025 को देवेंद्र नगर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि पारस नगर ब्रिज के पास एक व्यक्ति सफेद झिल्ली में प्रतिबंधित नशीली कैप्सूल रखकर बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इसे रोज़नामचा में दर्ज किया और वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद दो स्वतंत्र गवाह सचिन बेहरा और तुलेश यादव को साथ लेकर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। घेराबंदी कर मुखबिर के बताए हुलिए के आधार पर संदेही को पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसने अपना नाम संजय उर्फ सोनू सूर्यवंशी बताया। 152 कैप्सूल जब्त, बिना स्ट्रिप वजन 91.2 ग्राम पुलिस ने तलाशी से पहले आरोपी को NDPS एक्ट की धारा 50 के तहत नोटिस दिया। इसके बाद उसके पास रखी सफेद कार्टननुमा झिल्ली की तलाशी ली गई, जिसमें नशीली कैप्सूल मिलीं। इलेक्ट्रॉनिक तराजू से वजन करने पर 19 पत्तों में 8-8 कैप्सूल यानी कुल 152 कैप्सूल मिले। इनका स्ट्रिप सहित वजन 119 ग्राम और बिना स्ट्रिप वजन 91.2 ग्राम था। पुलिस ने कैप्सूल जब्त कर सीलबंद कीं और संजय उर्फ सोनू को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ देवेंद्र नगर थाने में मामला दर्ज किया गया। आरोपी के मेमोरेंडम से ओडिशा तक पहुंची पुलिस जांच के दौरान पुलिस ने संजय उर्फ सोनू का मेमोरेंडम कथन दर्ज किया। इसके आधार पर पुलिस टीम ओडिशा के केसिंगा पहुंची। यहां से पूर्णचंद साहू और वासुदेव पाण्डेय उर्फ बाबू को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने पूर्णचंद साहू के कब्जे से 816 और 936 नग प्रतिबंधित कैप्सूल, जबकि वासुदेव पाण्डेय के कब्जे से 48 नग कैप्सूल जब्त की थीं। इसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई। कोर्ट ने किस आरोपी को कितनी सजा सुनाई? विशेष न्यायाधीश ने तीनों आरोपियों को NDPS एक्ट की अलग-अलग धाराओं में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। इस तरह मामले में दो आरोपियों को 20-20 साल और एक आरोपी को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। तीनों पर कुल 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

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