नई दिल्ली। देश की सबसे वैल्युएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) आज, 30 अक्टूबर को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करेगी। ऑयल रिफाइनिंग मार्जिन में तेजी और जियो के यूजर्स व ARPU में बढ़ोतरी के दम पर कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहने का अनुमान है। ब्लूमबर्ग का अनुमान: ₹21,368 करोड़ रह सकता है मुनाफा ब्लूमबर्ग कंसेंसस एस्टिमेट्स के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज सितंबर तिमाही में ₹21,368 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज कर सकती है। यह पिछली तिमाही (अप्रैल-जून) के ₹20,946 करोड़ से ज्यादा है, हालांकि पिछले साल की समान तिमाही के ₹22,092 करोड़ के मुकाबले थोड़ा कम है। एनालिस्ट्स के अनुसार, कंपनी के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस का कमाई में बड़ा योगदान रह सकता है। वहीं, डिजिटल सर्विसेज यानी जियो से ग्रोथ को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। ब्रोकरेज हाउस ने EBITDA में बढ़ोतरी का जताया अनुमान अलग-अलग ब्रोकरेज हाउस ने रिलायंस के प्रदर्शन को लेकर अनुमान जारी किए हैं। O2C बिजनेस: रिफाइनिंग मार्जिन से मिल सकता है सहारा ग्लोबल मार्केट में पेट्रोलियम उत्पादों की सीमित सप्लाई और खाड़ी देशों में तनाव के कारण रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत बने रहने का अनुमान है। प्रभुदास लीलाधर के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सितंबर में क्रूड की कीमतों में उछाल आया। इससे दूसरी तिमाही में ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 91.4 डॉलर प्रति बैरल रहा। डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के रिफाइनिंग क्रैक्स भी ऊंचे स्तर पर रहे। कोटक सिक्योरिटीज का अनुमान है कि O2C EBITDA में सालाना आधार पर 47% की बढ़ोतरी हो सकती है। इसमें कंपनी की SEZ रिफाइनरी का बड़ा योगदान रहने की उम्मीद है, जिसे विंडफॉल टैक्स से छूट मिली हुई है। इसके अलावा अमेरिका से मिलने वाला सस्ता एथेन-बेस्ड पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और रुपए की कमजोरी भी मार्जिन को सहारा दे सकती है। नुवामा के मुताबिक, O2C EBITDA में सालाना आधार पर 38% की बढ़ोतरी संभव है। हालांकि, बढ़े हुए फ्रेट चार्ज और ऑपरेशनल एडजस्टमेंट का असर प्रदर्शन पर पड़ सकता है। जियो: ARPU और यूजर्स की बढ़ोतरी पर नजर रिलायंस जियो की कमाई में लगातार बढ़ोतरी बने रहने का अनुमान है। ब्रोकरेज हाउस ने जियो के ARPU और सब्सक्राइबर बेस को लेकर ये अनुमान दिए हैं। रिलायंस रिटेल: रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद, मार्जिन पर दबाव रिटेल सेगमेंट में रेवेन्यू बढ़ने का अनुमान है, लेकिन मार्जिन पर दबाव रह सकता है। ऑयल एंड गैस बिजनेस में सुस्ती की आशंका प्रोडक्शन में गिरावट के कारण कंपनी का अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस बिजनेस दबाव में रह सकता है। कोटक सिक्योरिटीज ने इस सेगमेंट के EBITDA में सालाना आधार पर 7.2% और नुवामा ने 6% की गिरावट का अनुमान जताया है। नतीजों के साथ इन 5 बातों पर रहेगी निवेशकों की नजर कंपनी के तिमाही नतीजों के अलावा निवेशक इन अहम पहलुओं पर भी ध्यान देंगे: इस साल अब तक 26% गिरा रिलायंस का शेयर तिमाही नतीजों से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 0.3% गिरकर ₹1,163 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। बीते 5 दिनों में शेयर 2%, एक महीने में 3% और 6 महीने में 19% गिर चुका है। इस साल 1 जनवरी से अब तक शेयर में 26% की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, एक साल में इसकी कीमत 22% नीचे आई है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹15.74 लाख करोड़ है। भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर कंपनियों में शामिल है रिलायंस रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनियों में शामिल है। कंपनी हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन, पेट्रोलियम रिफाइनिंग और मार्केटिंग, पेट्रोकेमिकल्स, एडवांस मटेरियल और कंपोजिट, रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल सर्विसेज और रिटेल जैसे क्षेत्रों में कारोबार करती है। क्या होता है ARPU? ARPU का पूरा नाम ‘एवरेज रेवेन्यू पर यूजर’ है। यह टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन का एक प्रमुख पैमाना है। इससे पता चलता है कि कंपनी औसतन एक ग्राहक से हर महीने कितना रेवेन्यू कमाती है। क्या होते हैं रिफाइनिंग क्रैक्स? कच्चे तेल को रिफाइन करके पेट्रोल, डीजल और ATF जैसे उत्पाद बनाने के बाद मिलने वाले ग्रॉस मार्जिन को रिफाइनिंग क्रैक स्प्रेड कहा जाता है। इससे रिफाइनरी की कमाई और मुनाफे का अंदाजा लगाने में मदद मिलती है। नोट: इस खबर में दिए गए मुनाफे और EBITDA के आंकड़े ब्रोकरेज हाउस और एनालिस्ट्स के अनुमान हैं। ये कंपनी के आधिकारिक तिमाही नतीजे नहीं हैं।