रायपुर। नशीली कैप्सूल की तस्करी और बिक्री के मामले में विशेष NDPS कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10 से 20 साल तक के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दो आरोपियों को 20-20 साल और एक आरोपी को 10 साल की सजा दी है। तीनों पर कुल 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। फैसला विशेष न्यायाधीश (NDPS एक्ट) श्रीमती किरण थवाईत ने सुनाया। मामले की जानकारी सरकारी वकील भुवन लाल साहू ने दी।
पारस नगर ब्रिज के पास ग्राहक तलाश रहा था मुख्य आरोपी
अभियोजन के मुताबिक, 19 मई 2025 को देवेंद्र नगर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि पारस नगर ब्रिज के पास एक व्यक्ति सफेद झिल्ली में प्रतिबंधित नशीली कैप्सूल रखकर बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहा है।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इसे रोज़नामचा में दर्ज किया और वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद दो स्वतंत्र गवाह सचिन बेहरा और तुलेश यादव को साथ लेकर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। घेराबंदी कर मुखबिर के बताए हुलिए के आधार पर संदेही को पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसने अपना नाम संजय उर्फ सोनू सूर्यवंशी बताया।
152 कैप्सूल जब्त, बिना स्ट्रिप वजन 91.2 ग्राम
पुलिस ने तलाशी से पहले आरोपी को NDPS एक्ट की धारा 50 के तहत नोटिस दिया। इसके बाद उसके पास रखी सफेद कार्टननुमा झिल्ली की तलाशी ली गई, जिसमें नशीली कैप्सूल मिलीं।
इलेक्ट्रॉनिक तराजू से वजन करने पर 19 पत्तों में 8-8 कैप्सूल यानी कुल 152 कैप्सूल मिले। इनका स्ट्रिप सहित वजन 119 ग्राम और बिना स्ट्रिप वजन 91.2 ग्राम था। पुलिस ने कैप्सूल जब्त कर सीलबंद कीं और संजय उर्फ सोनू को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ देवेंद्र नगर थाने में मामला दर्ज किया गया।
आरोपी के मेमोरेंडम से ओडिशा तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान पुलिस ने संजय उर्फ सोनू का मेमोरेंडम कथन दर्ज किया। इसके आधार पर पुलिस टीम ओडिशा के केसिंगा पहुंची। यहां से पूर्णचंद साहू और वासुदेव पाण्डेय उर्फ बाबू को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने पूर्णचंद साहू के कब्जे से 816 और 936 नग प्रतिबंधित कैप्सूल, जबकि वासुदेव पाण्डेय के कब्जे से 48 नग कैप्सूल जब्त की थीं। इसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
कोर्ट ने किस आरोपी को कितनी सजा सुनाई?
विशेष न्यायाधीश ने तीनों आरोपियों को NDPS एक्ट की अलग-अलग धाराओं में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
- संजय उर्फ सोनू सूर्यवंशी: धारा 22(B) में 10 साल का सश्रम कारावास और 1 लाख रुपए जुर्माना। धारा 29 सहपठित 22(C) में 20 साल का सश्रम कारावास और 2 लाख रुपए जुर्माना।
- पूर्णचंद साहू: धारा 22(C) में 20 साल का सश्रम कारावास और 2 लाख रुपए जुर्माना।
- वासुदेव पाण्डेय उर्फ बाबू: धारा 22(B) में 10 साल का सश्रम कारावास और 1 लाख रुपए जुर्माना। धारा 29 सहपठित 22(C) में 20 साल का सश्रम कारावास और 2 लाख रुपए जुर्माना।
इस तरह मामले में दो आरोपियों को 20-20 साल और एक आरोपी को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। तीनों पर कुल 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।







































