देश में गरीबी और रोजगार को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने वर्ल्ड बैंक की नई रिपोर्ट के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर आए हैं। वहीं, पिछले 6 साल में देश में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या में 13.4 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।
PM Modi ने इसे देश की बदलती आर्थिक तस्वीर बताया। उनका कहना है कि गरीबी कम करना सरकार के लिए केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है। इस रिपोर्ट में गरीबी के स्तर में गिरावट के साथ रोजगार, महिलाओं की भागीदारी और आर्थिक असमानता से जुड़े कई अहम आंकड़े भी सामने आए हैं।
12 साल में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर
वर्ल्ड बैंक की अक्टूबर 2026 की ‘India Poverty and Equity Brief’ रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011 से 2023 के बीच भारत में गरीबी के स्तर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, 4.20 डॉलर प्रतिदिन (2021 PPP) वाली गरीबी रेखा के आधार पर गरीब आबादी का अनुपात 2011 में 57.7 प्रतिशत था, जो 2023 में घटकर 16.1 प्रतिशत रह गया। इस दौरान करीब 49.6 करोड़ लोग इस गरीबी रेखा से ऊपर आए।
वहीं, अत्यधिक गरीबी के मामले में भी सुधार देखने को मिला। 3 डॉलर प्रतिदिन वाले मानक के आधार पर अत्यधिक गरीबी का स्तर 27.1 प्रतिशत से घटकर 2.6 प्रतिशत पर पहुंच गया।
ये आंकड़े बताते हैं कि बीते एक दशक में देश के करोड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति में बदलाव आया है।
6 साल में 13.4 करोड़ रोजगार बढ़े
गरीबी के साथ रोजगार के मोर्चे पर भी रिपोर्ट में अच्छी खबर सामने आई है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या करीब 13.4 करोड़ बढ़ी।
खास बात यह है कि इस दौरान ग्रामीण महिलाओं की कामकाज में भागीदारी बढ़ी है। बड़ी संख्या में महिलाएं रोजगार से जुड़ीं और परिवार की आमदनी में योगदान देने लगीं।
रोजगार के ये आंकड़े देश की अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलाव को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, रोजगार की संख्या के साथ उसकी गुणवत्ता और मिलने वाली वास्तविक आमदनी पर ध्यान देना भी जरूरी है।
Economic Inequality में भी आई कमी
रिपोर्ट में आर्थिक असमानता यानी Economic Inequality को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।
भारत का Gini Index 20 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 23.0 पर पहुंच गया है। यह इंडेक्स किसी देश में आय के वितरण में असमानता को मापने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका कम होना आमतौर पर आय के अंतर में कमी का संकेत है।
हालांकि, देश में अमीर और गरीब के बीच कमाई का अंतर अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में सबसे ज्यादा कमाने वाले 10 प्रतिशत कामगारों की औसत कमाई सबसे कम कमाने वाले 10 प्रतिशत कामगारों से करीब 13 गुना अधिक थी।
ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से बदली तस्वीर
रोजगार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को इस रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू माना गया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के कामकाज से जुड़ने से परिवारों की आर्थिक स्थिति को सहारा मिला है।
जब परिवार में एक से ज्यादा सदस्य कमाई करने लगते हैं, तो घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरतों को पूरा करना थोड़ा आसान हो जाता है।
रिपोर्ट में ग्रामीण और शहरी परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के संकेत भी दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हुई प्रगति से गांवों और शहरों के बीच का अंतर कम होने की बात सामने आई है।
देश की 99% आबादी तक पहुंची बिजली
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में बुनियादी सुविधाओं का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत की करीब 99 प्रतिशत आबादी तक बिजली की पहुंच हो चुकी थी।
बिजली की बेहतर सुविधा से ग्रामीण इलाकों में घरेलू कामकाज, शिक्षा और छोटे कारोबार को मदद मिली है। इसके अलावा, खाद्य सब्सिडी और दूसरी सरकारी सहायता योजनाओं ने भी गरीब परिवारों के खर्च का बोझ कम करने में भूमिका निभाई है।
गरीबी कम करने में इन सरकारी योजनाओं का योगदान
सरकार की ओर से गरीबी कम करने के प्रयासों में कई योजनाओं का उल्लेख किया जाता रहा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना: जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराना।
- प्रधानमंत्री आवास योजना: गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने में मदद।
- आयुष्मान भारत योजना: पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देना।
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: पात्र परिवारों को LPG कनेक्शन की सुविधा।
- वित्तीय समावेशन: बैंकिंग सेवाओं और सरकारी लाभों को सीधे लोगों तक पहुंचाना।
इन योजनाओं के साथ रोजगार और घरेलू खपत में बढ़ोतरी को भी गरीबी कम होने के प्रमुख कारणों में गिना गया है।
2028 तक और कम हो सकती है गरीबी
वर्ल्ड बैंक के अनुमान के मुताबिक, 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी रेखा के आधार पर भारत में गरीबी का स्तर 2026 में 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकता है।
हालांकि, यह अनुमान है। भविष्य में रोजगार, आमदनी और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर इसमें बदलाव संभव है।
रोजगार और कमाई को लेकर अभी भी कई चुनौतियां
गरीबी में गिरावट और रोजगार में बढ़ोतरी के बावजूद देश के सामने कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं।
- युवाओं के लिए बेहतर और स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाना।
- महिलाओं को सुरक्षित और बेहतर वेतन वाले काम उपलब्ध कराना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए साधन तैयार करना।
- अलग-अलग राज्यों के बीच आर्थिक अंतर कम करना।
- कामगारों की वास्तविक आमदनी और सामाजिक सुरक्षा में सुधार करना।
इसलिए केवल रोजगार की संख्या बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। लोगों को ऐसा काम मिलना भी जरूरी है, जिससे वे अपने परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी कर सकें।
PM Modi ने गरीबी में गिरावट को बताया बड़ी उपलब्धि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के आंकड़े साझा करते हुए गरीबी में आई गिरावट को देश के लिए महत्वपूर्ण बदलाव बताया। उन्होंने कांग्रेस के पुराने ‘गरीबी हटाओ’ नारे पर भी निशाना साधा और कहा कि गरीबी खत्म करना उनकी सरकार के लिए केवल नारा नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता है।
वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए रोजगार, घरेलू खपत और सरकारी योजनाओं की भूमिका पर जोर दिया।
आगे क्या होगा?
भारत में गरीबी घटने और रोजगार बढ़ने के आंकड़े निश्चित रूप से चर्चा का विषय हैं। 12 साल में 49.6 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से ऊपर आना और 6 साल में 13.4 करोड़ रोजगार बढ़ना देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी बड़ी जानकारी है।
लेकिन आम परिवार के लिए असली बदलाव तब महसूस होगा, जब नौकरी के साथ अच्छी आमदनी, महंगाई से राहत और बेहतर जीवन स्तर भी मिले। आने वाले वर्षों में सरकार के सामने इसी आर्थिक सुधार को लगातार आगे बढ़ाने की चुनौती रहेगी।
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