भोपाल।
देशभर के मेडिकल कॉलेजों को फर्जी तरीके से मान्यता दिलवाने के मामले में CBI ने बड़ा खुलासा किया है। इस घोटाले में रावतपुरा सरकार उर्फ रविशंकर महाराज, इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन सुरेश भदौरिया, और पूर्व UGC चेयरमैन व DAVV के पूर्व कुलपति डीपी सिंह को आरोपी बनाया गया है। CBI की एफआईआर में इस बात का जिक्र है कि कॉलेजों को मान्यता दिलाने और उसका रिन्यूअल कराने के बदले मोटी रिश्वत वसूली जा रही थी।
भारी रिश्वत लेकर दिलवाई जा रही थी मान्यता
CBI के मुताबिक, सुरेश भदौरिया की गहरी पैठ स्वास्थ्य मंत्रालय में थी। वह कॉलेजों को नियमों को ताक पर रखकर फर्जी मान्यता दिलवाता था। इसके बदले 3 से 5 करोड़ तक की रिश्वत वसूल की जाती थी। यही नहीं, निरीक्षण के दौरान कॉलेज में अस्थायी डॉक्टरों को स्थायी दिखाने के लिए फर्जी बायोमेट्रिक अटेंडेंस का भी सहारा लिया गया।
पूर्व UGC प्रमुख डीपी सिंह की संदिग्ध भूमिका
एफआईआर में डीपी सिंह का नाम भी शामिल किया गया है। वह पहले DAVV और BHU के कुलपति रह चुके हैं और अप्रैल 2024 से TISS (टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज) के चांसलर हैं। आरोप है कि उन्होंने रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज को NMC की पॉजिटिव रिपोर्ट दिलवाने में मदद की। CBI अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
सिस्टम के अंदर से मिल रही थी जानकारी
CBI ने स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी चंदन कुमार को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि वह सुरेश भदौरिया को NMC निरीक्षण से जुड़ी गोपनीय जानकारियाँ—जैसे टीम कब आएगी, कौन-कौन सदस्य होंगे—पहले ही लीक कर देता था। मामला दर्ज होते ही भदौरिया फरार हो गया है।
रावतपुरा सरकार कॉलेज से शुरू हुई थी जांच
CBI की जांच रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज से शुरू हुई थी, जहां से यह पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में पता चला कि देशभर में 40 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज इस रैकेट में शामिल हैं। इंडेक्स मेडिकल कॉलेज का नाम भी इसी कड़ी में सामने आया।
दलाल नेटवर्क और साठगांठ
इस पूरे मामले में एक संगठित दलाल नेटवर्क सक्रिय था। भदौरिया और रविशंकर महाराज दोनों भिंड जिले के लहार क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने मिलकर पूरे देश में मेडिकल, डेंटल, फार्मेसी और मैनेजमेंट कॉलेजों को मालवांचल यूनिवर्सिटी से जोड़कर एक जाल बिछाया। भदौरिया खुद यूनिवर्सिटी और मयंक वेलफेयर सोसायटी का संचालन करते हैं।
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