इस्राइल (Israel) की सुरक्षा कैबिनेट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रस्ताव को मंज़ूरी देते हुए Gaza City Occupation Plan लागू करने का फैसला किया है। इस ऑपरेशन के तहत गाज़ा सिटी (Gaza City) के सभी फ़िलिस्तीनी नागरिकों (Palestinians) को जबरन हटाकर मध्य गाज़ा (Central Gaza) में बनाए गए अस्थायी कैंपों में भेजा जाएगा।
Famine और Hunger Crisis से हालात खराब
गाज़ा पहले से ही Food Shortage और भयंकर Famine का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और राहत एजेंसियों के मुताबिक, अब तक 193 लोगों की मौत भूख से हो चुकी है, जिनमें 96 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा करीब 12,000 बच्चे पाँच साल से कम उम्र के गंभीर कुपोषण (Severe Malnutrition) से पीड़ित हैं।
मानवीय संगठनों का कहना है कि मौजूदा हालात Humanitarian Disaster की ओर बढ़ रहे हैं और विस्थापन (Displacement) से स्थिति और भी बिगड़ेगी।
Israel में भी Plan का विरोध
इस्राइल के भीतर भी इस योजना को लेकर विरोध सामने आया है। इस्राइली सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ एयाल ज़ामीर (Eyal Zamir) ने चेतावनी दी कि यह ऑपरेशन गाज़ा में मौजूद लगभग 20 ज़िंदा बंधकों (Hostages) की जान को खतरे में डाल सकता है और युद्ध को लंबा खींच देगा।
बंधक परिवारों और कई पूर्व सुरक्षा अधिकारियों ने इस निर्णय की खुलकर आलोचना की है।
International Community की निंदा
अमेरिका (US), यूरोपीय देश (EU Nations) और कई ग्लोबल मानवीय संस्थाओं ने इस कदम की निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि यह International Law का उल्लंघन हो सकता है और गाज़ा में Mass Humanitarian Crisis को जन्म देगा।
Impact on Gaza
Gaza City पर कब्ज़ा न केवल सैन्य दृष्टि से बड़ा कदम है, बल्कि यह लाखों लोगों के जीवन पर गहरा असर डालेगा। पहले से घिरे और भूख से जूझ रहे लोगों के लिए यह विस्थापन एक और बड़ी त्रासदी साबित हो सकता है।
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