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Supreme Court का आदेश Delhi-NCR से हटेंगे Stray Dogs, 8 हफ्ते में सभी जाएंगे Shelters

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दिल्ली-NCR में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर Supreme Court ने सख्त रुख अपनाते हुए सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने दिल्ली सरकार, MCD, NDMC और NCR के सभी प्रशासनिक निकायों को आदेश दिया है कि तुरंत सभी Stray Dogs को सड़कों और कॉलोनियों से हटाकर Shelters में शिफ्ट किया जाए।

8 Weeks में पूरा होगा Stray Dogs Removal ऑपरेशन

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि 8 हफ्तों के भीतर यह अभियान पूरा हो। पकड़े गए सभी कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाएगा और किसी भी हालत में उन्हें दोबारा सड़कों या रिहायशी इलाकों में नहीं छोड़ा जाएगा। शेल्टर में पर्याप्त स्टाफ, Sterilization और Vaccination की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। शुरुआती चरण में लगभग 5,000 कुत्तों के लिए व्यवस्था होगी।

Interference पर होगी Legal Action

कोर्ट ने साफ चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया में बाधा डालने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। यह आदेश Public Safety को ध्यान में रखते हुए दिया गया है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को Dog Bite और Rabies के खतरे से बचाने के लिए।

Animal Birth Control Rules को बताया “Absurd”

मौजूदा Animal Birth Control (ABC) Rules, 2023, जिसमें कुत्तों को नसबंदी के बाद वापस छोड़ने का प्रावधान है, पर कोर्ट ने सवाल उठाया और मौजूदा हालात में इसे “Absurd” और अप्रासंगिक बताया।

2,000 Dog Bite Cases रोज़ाना

दिल्ली में हर दिन करीब 2,000 Dog Bite Cases सामने आ रहे हैं। हाल में कई गंभीर हमले और Rabies से मौत की घटनाओं ने खतरे की घंटी बजा दी है। कोर्ट ने कहा कि अब प्रशासन को “तुरंत और निर्णायक कदम” उठाने होंगे।

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Yukta

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Punjab

Punjab Employees Protest खत्म: DA, OPS समेत लंबित मांगों पर सरकार से Agreement

Punjab में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत के बाद आंदोलन खत्म करने पर सहमति बन गई है। हड़ताल खत्म होने के साथ ही सरकारी दफ्तरों में कामकाज सामान्य होने की उम्मीद है। कर्मचारी लंबे समय से DA (Dearness Allowance) की लंबित किस्तों, वेतन से जुड़े बकाये और दूसरी सेवा संबंधी मांगों को लेकर सरकार के सामने अपनी बात रख रहे थे। इसी को लेकर कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया था। सरकार और कर्मचारियों के बीच बनी सहमति हड़ताल के दौरान कर्मचारियों और सरकार के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। कर्मचारियों की ओर से लगातार अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। वहीं सरकार ने भी ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों को लेकर सख्त रुख अपनाया था। बातचीत के बाद सरकार की ओर से कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए Show Cause Notice और कार्रवाई से जुड़े कदम वापस लेने पर सहमति बनी। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल खत्म करने का फैसला किया। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि आंदोलन खत्म जरूर किया गया है, लेकिन उनकी सभी मांगों का अंतिम समाधान अभी बाकी है। इन मुद्दों को लेकर सरकार के साथ आगे भी बातचीत जारी रहेगी। DA की मांग सबसे अहम पंजाब के सरकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में महंगाई भत्ते यानी DA की लंबित किस्तों का भुगतान शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से DA की कई किस्तें बकाया हैं, जिसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। इसके साथ ही वेतन और भत्तों के बकाये का भुगतान भी कर्मचारी संगठनों की प्राथमिक मांगों में शामिल है। कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार इन मामलों में जल्द स्पष्ट फैसला ले। Old Pension Scheme और दूसरी मांगें भी शामिल DA के अलावा कर्मचारी Old Pension Scheme (OPS), ACP योजना, वेतन विसंगतियों को दूर करने और विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को भी उठा रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इन मांगों पर सरकार के साथ लंबे समय से चर्चा चल रही है। अब हड़ताल खत्म होने के बाद उम्मीद है कि बातचीत के जरिए इन मामलों का समाधान निकलेगा। ‘No Work, No Pay’ को लेकर भी था विवाद हड़ताल के दौरान सरकार की ओर से ‘No Work, No Pay’ को लेकर सख्त रुख अपनाया गया था। यानी जो कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहेंगे, उनके वेतन को लेकर कार्रवाई की जा सकती थी। इस फैसले के बाद कर्मचारियों और सरकार के बीच विवाद और बढ़ गया था। बाद में दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आए और कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को वापस लेने की दिशा में सहमति बनी। अब मुख्यमंत्री से बातचीत पर नजर हड़ताल खत्म होने के बाद अब कर्मचारियों की नजर सरकार के साथ होने वाली अगली बातचीत पर है। कर्मचारी संगठन DA, OPS और बाकी लंबित मांगों को मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने रखेंगे। फिलहाल आंदोलन खत्म होने से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकारी विभागों में रुका हुआ काम फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। हालांकि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर अंतिम फैसला आगामी बैठकों और सरकार के निर्णय के बाद ही साफ होगा। Punjab Employees Strike: आगे क्या? हड़ताल खत्म होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि DA की लंबित किस्तों, OPS और अन्य मांगों पर सरकार कब तक फैसला लेती है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि आंदोलन खत्म करने के बाद सरकार बातचीत को आगे बढ़ाएगी और लंबे समय से लंबित मुद्दों का कोई व्यावहारिक समाधान निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

RTE पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा हर स्कूल का पूरा डेटा

रायपुर: छत्तीसगढ़ में राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत बच्चों के प्रवेश और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। नए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कार्यभार संभालने के पहले ही दिन RTE से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार से छत्तीसगढ़ के हर स्कूल से जुड़ा RTE का पूरा डेटा भी मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। RTE की धारा 12(1)(c) पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब सीवी भगवंत राव, विकास तिवारी समेत 13 अन्य लोगों ने RTE के क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की हैं। इन मामलों पर लगातार सुनवाई चल रही है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि RTE अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए फिलहाल कौन सी SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू है। हर स्कूल की आरक्षित और खाली सीटों का देना होगा ब्योरा हाईकोर्ट ने सरकार को एक विस्तृत चार्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें छत्तीसगढ़ के हर स्कूल में RTE के तहत आरक्षित कुल सीटों की संख्या बतानी होगी। इसके साथ ही सरकार को यह जानकारी भी देनी होगी कि प्रत्येक स्कूल में RTE के तहत कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया है और कितनी सीटें अभी खाली हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह हलफनामा और जरूरी चार्ट राज्य सरकार के किसी सक्षम अधिकारी के माध्यम से तीन सप्ताह के भीतर पेश किया जाए। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील ने अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को निर्धारित करने का अनुरोध किया। सरकार की ओर से कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि तब तक हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन कर लिया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से 7 दिन पहले हलफनामा दाखिल किया जाए। साथ ही इसकी एक प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। पहले ही दिन RTE मामले पर दिखाई गंभीरता चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने कार्यभार संभालने के पहले दिन डिवीजन बेंच में जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के साथ कई मामलों की सुनवाई की। इसी दौरान RTE से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई हुई। स्कूली बच्चों के प्रवेश और RTE कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने विस्तृत जानकारी मांगते हुए सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अब सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले हलफनामे और स्कूलवार डेटा पर अगली सुनवाई में कोर्ट की नजर रहेगी।
Iran

Iran Missile Attack: 5 Tankers पर US Action के बाद जॉर्डन में US Base पर मिसाइल हमला

America और Iran के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना की कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े पांच Oil Tankers को निशाना बनाया, जिसके बाद ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने के पास करीब 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में पहले से बने तनाव को और बढ़ा दिया है। खासकर Strait of Hormuz में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है। अमेरिका ने 5 ईरानी Oil Tankers को बनाया निशाना अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि जहाज पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया, लेकिन अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने खतरे को नाकाम कर दिया। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े पांच Oil Tankers के खिलाफ कार्रवाई की। अमेरिका का दावा है कि इन जहाजों का इस्तेमाल ईरान के IRGC और उससे जुड़े नेटवर्क के लिए आर्थिक गतिविधियों में किया जा रहा था। अमेरिकी कार्रवाई से पहले जहाजों पर मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई है। ईरान का जवाब, US Military Base पर 20 मिसाइलें अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने देर नहीं की और जवाबी हमला किया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन के Al-Azraq क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन के अधिकारियों के मुताबिक, करीब 20 मिसाइलें दागी गईं। इनमें से 18 को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोक लिया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस हमले में अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। Strait of Hormuz पर भी बढ़ा दबाव इस पूरे घटनाक्रम में Strait of Hormuz सबसे अहम जगह बनकर सामने आया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने यहां से गुजर रहे कई जहाजों को निशाना बनाया। हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल है। दुनिया के बड़े हिस्से का Oil Supply इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो इसका असर International Oil Market पर पड़ सकता है। Crude Oil की कीमतों पर नजर अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। बाजार की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई तो Supply Chain पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर आगे चलकर भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल और दूसरी पेट्रोलियम आधारित चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। Middle East में Conflict बढ़ने का खतरा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा। जॉर्डन और हॉर्मुज जैसे इलाकों में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से पूरे Middle East में Conflict फैलने की आशंका बनी हुई है। ईरान समर्थित संगठनों की गतिविधियों ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर दुनिया की नजर रहेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कोई कदम उठाएंगे या फिर सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर के साउथ तोड़ा में निगम की रिमूवल कार्रवाई के दौरान हंगामा, एडिशनल DCP को युवक ने दिया धक्का

इंदौर: शहर के साउथ तोड़ा इलाके में बुधवार को नगर निगम की रिमूवल कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हो गया। कार्रवाई का विरोध कर रही भीड़ को हटाने के दौरान पीछे मौजूद एक युवक ने एडिशनल DCP दिशेष अग्रवाल को धक्का दे दिया। धक्का लगने से उनका संतुलन बिगड़ गया और वे जमीन पर गिर पड़े। घटना के तुरंत बाद पुलिस जवानों ने युवक को पकड़ लिया। पुलिस ने मौके से कुल 6 लोगों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। 100 से ज्यादा निगमकर्मी और भारी पुलिस बल रहा तैनात नगर निगम की टीम बुधवार को साउथ तोड़ा में अवैध निर्माण हटाने पहुंची थी। कार्रवाई के लिए 100 से ज्यादा निगमकर्मी, 3 पोकलेन और 6 जेसीबी मशीनें मौके पर पहुंची थीं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 80 से ज्यादा पुलिस जवान और अधिकारी तैनात किए गए थे। निगम के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान 50 शेड और 6 मकानों के अवैध हिस्से हटाए गए। सामान बाहर निकालने को लेकर महिलाओं से हुआ विवाद कार्रवाई के दौरान कुछ महिलाएं पुलिसकर्मियों से अपना सामान बाहर निकालने को लेकर बहस करने लगीं। महिलाओं का कहना था कि नोटिस में उन्हें सुबह 9 बजे तक का समय दिया गया था। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ता गया और मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। इस दौरान कई लोग अपने मोबाइल फोन से कार्रवाई का वीडियो बनाने लगे। भीड़ को पीछे हटाने के दौरान DCP को धक्का स्थिति बिगड़ती देख एडिशनल DCP दिशेष अग्रवाल मौके पर पहुंचे और भीड़ को पीछे हटाने का प्रयास करने लगे। इसी दौरान उनके पीछे खड़े एक युवक ने उन्हें धक्का दे दिया। अचानक धक्का लगने से उनका संतुलन बिगड़ा और वे जमीन पर गिर गए। पुलिस ने तत्काल युवक को पकड़ लिया। उसके साथ मौजूद एक अन्य युवक समेत कुछ लोगों को भी पुलिस ने अभिरक्षा में लिया। 6 लोगों पर होगी कार्रवाई एडिशनल DCP दिशेष अग्रवाल ने बताया कि रिमूवल कार्रवाई के दौरान कुल 6 लोगों को अभिरक्षा में लिया गया है। सभी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के लिए 80 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। पहले जारी किए गए थे नोटिस नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, रिमूवल कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। कार्रवाई के दौरान निगम की टीम ने टेप से नपती कर अवैध निर्माणों को चिन्हित किया और इसके बाद उन्हें हटाया। झोन-11 के झोनल अधिकारी गीतेश तिवारी के मुताबिक, साउथ तोड़ा में 50 शेड और कुछ मकानों के अवैध हिस्से हटाए गए हैं। क्षेत्र में आने वाले दिनों में सड़क निर्माण और चौड़ीकरण का काम प्रस्तावित है। इसी के चलते यह कार्रवाई की गई।
CJP

CJP Protest में Student को Notice, CJI भड़के- ‘हमने Action नहीं लेने को कहा था’

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एक छात्र को CJP प्रदर्शन से जोड़कर नोटिस जारी किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। CJI ने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई नहीं करने को कहा था, तो फिर मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी कैसे कर दिया? सुनवाई के दौरान CJI का रुख काफी सख्त नजर आया। उन्होंने पूछा कि “मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई?” अदालत ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद छात्रों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती। Student को क्यों भेजा गया था Notice? पूरा मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के लॉ स्टूडेंट अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 4 सितंबर को छात्र को BNSS की संबंधित धाराओं के तहत नोटिस जारी किया था। नोटिस में छात्र से शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानती मुचलके देने को कहा गया था। प्रशासन की ओर से इसे एहतियाती कार्रवाई बताया गया। पुलिस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि छात्र विश्वविद्यालय के अन्य विद्यार्थियों के बीच कथित तौर पर सरकार विरोधी बातें फैला रहा था और उन्हें CJP के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा था। छात्र ने Police के आरोपों को नकारा दूसरी तरफ, छात्र अक्षत त्रिपाठी ने पुलिस के इन आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि वह काफी समय से विश्वविद्यालय नहीं गए थे और उनकी पढ़ाई ऑनलाइन चल रही थी। छात्र के मुताबिक, जिस समय प्रदर्शन हुआ, उस दौरान वह प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट में काम कर रहे थे। ऐसे में उन पर विश्वविद्यालय के छात्रों को प्रदर्शन के लिए उकसाने का आरोप लगाना सही नहीं है। Notice वापस लेने के बाद भी Supreme Court नाराज मामला सामने आने के बाद पुलिस ने नोटिस वापस ले लिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सवाल उठा कि अगर अदालत ने छात्रों के खिलाफ coercive action से बचने का निर्देश दिया था, तो फिर ऐसा नोटिस जारी ही क्यों किया गया। यही बात सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के तेवरों की बड़ी वजह बनी। अदालत ने मामले से जुड़े दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नोटिस किस आधार पर जारी किया गया था। Supreme Court के पुराने Order का भी जिक्र इस मामले की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट का पहले दिया गया आदेश भी अहम है। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने 1 सितंबर 2026 को CJP प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज FIRs को रद्द कर दिया था। हालांकि, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के संबंध में अलग स्थिति रखी गई थी। इसके बाद छात्रों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया गया। अदालत ने इसी संदर्भ में नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर सवाल उठाए। अब आगे क्या होगा? फिलहाल सुप्रीम कोर्ट पूरे मामले के तथ्यों को देख रहा है। अदालत ने नोटिस और उससे जुड़े दस्तावेज पेश करने को कहा है। आगे की सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि मजिस्ट्रेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद किस आधार पर छात्र को नोटिस भेजा था। यह मामला सिर्फ एक छात्र को नोटिस देने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए students के protest rights, प्रशासनिक powers और Supreme Court के orders के पालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल सबकी नजर अगली सुनवाई पर है, जहां यह साफ हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट इस कार्रवाई को लेकर आगे क्या रुख अपनाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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