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Rohit Sharma World Cup Plan: रोहित के World Cup प्लान पर सस्पेंस, Agarkar-BCCI की चुप्पी से बढ़े सवाल

Rohit Sharma World Cup Plan: रोहित के World Cup प्लान पर सस्पेंस, Agarkar-BCCI की चुप्पी से बढ़े सवाल

Rohit Sharma World Cup Plan: भारतीय क्रिकेट में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर हो रही है। सवाल यह है कि क्या ‘हिटमैन’ 2027 में होने वाले ODI World Cup में टीम इंडिया का हिस्सा होंगे? इस सवाल का साफ जवाब अभी तक सामने नहीं आया है। रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है और अब उनका फोकस ODI क्रिकेट पर है। लेकिन 2027 World Cup की टीम में उनकी जगह को लेकर चयनकर्ताओं और BCCI की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालिया रिपोर्टों में भी कहा गया है कि रोहित के World Cup भविष्य पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। रोहित के World Cup प्लान पर क्यों उठ रहे सवाल? रोहित की उम्र और उनकी फिटनेस को देखते हुए 2027 तक उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बने रहना बड़ा सवाल माना जा रहा है। दूसरी ओर, ODI क्रिकेट में उनका अनुभव और प्रदर्शन टीम के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा है। यही वजह है कि क्रिकेट फैंस जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट उन्हें अगले World Cup की तैयारी का हिस्सा मान रहा है या युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। Ajit Agarkar और BCCI की चुप्पी से बढ़ा सस्पेंस चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर और BCCI की ओर से रोहित के 2027 World Cup को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, चयनकर्ताओं की तरफ से भविष्य को लेकर स्पष्टता की जरूरत महसूस की जा रही है। यही चुप्पी अब क्रिकेट जगत में सवाल खड़े कर रही है। अगर रोहित टीम की योजना में हैं तो क्या उन्हें लंबे समय का भरोसा दिया जाएगा? और अगर नहीं हैं, तो टीम इंडिया का अगला ODI ओपनिंग प्लान क्या होगा? क्या रोहित को सीरीज-दर-सीरीज मौका मिलेगा? रोहित के भविष्य को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या उन्हें हर सीरीज में प्रदर्शन और फिटनेस के आधार पर परखा जाएगा। कुछ चर्चाओं में चयनकर्ताओं और BCCI से ज्यादा स्पष्ट रोडमैप देने की मांग सामने आई है।
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Dhanbad Land Subsidence: बाघमारा में जमीन धंसी, सांसद ढुल्लू महतो का ग्रामीणों ने किया विरोध

Dhanbad Land Subsidence: बाघमारा में जमीन धंसी, सांसद ढुल्लू महतो का ग्रामीणों ने किया विरोध

झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा इलाके में भू-धंसान की घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। छाताबाद में अचानक जमीन धंसने से कई घर प्रभावित हुए और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद लोग अपने घरों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद धनबाद सांसद ढुल्लू महतो मौके का जायजा लेने पहुंचे। लेकिन उनके पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं वहां जुट गईं और सांसद का विरोध शुरू कर दिया। भू-धंसान के बाद इलाके में दहशत छाताबाद में जमीन अचानक धंसने लगी। स्थिति इतनी गंभीर थी कि कई घर इसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया। रिपोर्ट के अनुसार, जब जमीन धंस रही थी, उस समय एक बुजुर्ग महिला और एक युवती घर के अंदर फंस गई थीं। स्थानीय युवाओं ने जोखिम उठाकर दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस प्रयास की मौके पर मौजूद लोगों ने सराहना की। सांसद के सामने ग्रामीणों ने जताई नाराजगी भू-धंसान स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे सांसद ढुल्लू महतो को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से भू-धंसान का खतरा बना हुआ है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। विरोध के दौरान ग्रामीणों ने अपनी परेशानियां और नाराजगी सांसद के सामने रखी। हालांकि, बाद में मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति को शांत कराया। प्रभावित परिवारों से मिले सांसद विरोध के बाद सांसद ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों से बातचीत की। उन्होंने इलाके की स्थिति को गंभीर बताया और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही।
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Vaibhav Suryavanshi News: उम्र पर सवाल उठाने वालों पर भड़के Brett Lee, बोले- 'ये लड़का कमाल है'

Vaibhav Suryavanshi News: उम्र पर सवाल उठाने वालों पर भड़के Brett Lee, बोले- ‘ये लड़का कमाल है’

भारतीय क्रिकेट के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अपनी शानदार बल्लेबाजी को लेकर लगातार चर्चा में हैं। कम उम्र में उनके प्रदर्शन ने क्रिकेट जगत के कई दिग्गजों को प्रभावित किया है। हालांकि, उनकी उम्र को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। अब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज Brett Lee ने वैभव का समर्थन करते हुए आलोचकों को जवाब दिया है। ब्रेट ली ने युवा बल्लेबाज की प्रतिभा की तारीफ करते हुए कहा कि वैभव एक शानदार खिलाड़ी हैं और उन्हें उनके खेल के लिए पहचाना जाना चाहिए। वैभव की उम्र पर उठते रहे हैं सवाल वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। इसी वजह से उनके प्रदर्शन के साथ-साथ उनकी उम्र भी चर्चा का विषय बनती रही है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनकी उम्र को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, वैभव की उम्र से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं और उनके क्रिकेट करियर में कम उम्र में मिली सफलता ने सभी का ध्यान खींचा है। Brett Lee ने किया वैभव का समर्थन ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने वैभव की प्रतिभा पर भरोसा जताया। उन्होंने युवा खिलाड़ी के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि यह लड़का कमाल का है। ब्रेट ली की बात का सीधा संदेश यही था कि किसी युवा खिलाड़ी की प्रतिभा को उम्र से जोड़कर देखने के बजाय उसके प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए। कम उम्र में बड़े मंच पर बनाई पहचान वैभव सूर्यवंशी ने छोटी उम्र में ही क्रिकेट के बड़े मंच पर अपनी जगह बनाई है। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास और आक्रामक अंदाज देखने को मिलता है। यही वजह है कि क्रिकेट के कई पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ उन्हें भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ सितारा मान रहे हैं।
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Jharkhand Student Protest: 50% मांगें मानी गईं, फिर भी जारी रहेगा आंदोलन; JPSC-PT पर सहमति, JSSC-CGL पर अटका मामला

Jharkhand Student Protest: 50% मांगें मानी गईं, फिर भी जारी रहेगा आंदोलन; JPSC-PT पर सहमति, JSSC-CGL पर अटका मामला

रांची: झारखंड में छात्रों का आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। सरकार के साथ हुई बातचीत में छात्रों की करीब 50 प्रतिशत मांगों पर सहमति बनने की बात सामने आई है। JPSC-PT को रद्द करने की मांग पर सहमति बनी, लेकिन JSSC-CGL को लेकर सरकार और छात्रों के बीच बात नहीं बन सकी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी क्रम में छात्रों ने कल विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। JPSC-PT रद्द करने पर बनी सहमति सरकार और आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में JPSC-PT को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी। छात्रों की ओर से परीक्षा रद्द करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। इस मांग पर सरकार की सहमति को छात्रों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि, बाकी मांगों को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हुई है। JSSC-CGL पर नहीं बनी बात छात्रों की एक बड़ी मांग JSSC-CGL परीक्षा से भी जुड़ी है। बातचीत के दौरान इस मुद्दे पर सरकार और छात्रों के बीच सहमति नहीं बन सकी। यही वजह है कि छात्रों ने आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि केवल कुछ मांगें मान लिए जाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। 50 प्रतिशत मांगों पर सहमति का दावा छात्र संगठनों के मुताबिक, सरकार ने उनकी करीब 50 प्रतिशत मांगें मान ली हैं। इसके बावजूद कई अहम मुद्दे अभी बाकी हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक सभी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और लिखित समाधान नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। कल विधानसभा घेराव की तैयारी आंदोलन के अगले चरण में छात्रों ने विधानसभा घेराव का कार्यक्रम तय किया है। इसके लिए अलग-अलग जिलों से छात्रों के पहुंचने की बात कही जा रही है। छात्रों के विधानसभा घेराव के ऐलान के बाद प्रशासन के सामने भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी।
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पिता के गांव पहुंचे तेज प्रताप यादव, ठाठ-बाट छोड़ निकाला गन्ने का जूस, साइकिल से की गली-मोहल्ले की सैर! https://www.aajtak.in/entertainment/ott/story/tej-pratap-yadav-visits-lalu-prasad-yadav-village-made-sugarcane-juice-cycle-ride-used-handpump-tmovf-dskc-2618314-2026-08-09

Tej Pratap Yadav News: पिता के गांव पहुंचे तेज प्रताप, साइकिल से की सैरपिता के गांव पहुंचे

बिहार की राजनीति में अपने अलग अंदाज के लिए चर्चा में रहने वाले तेज प्रताप यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका अंदाज किसी राजनीतिक बयान की वजह से नहीं, बल्कि गांव में बिताए सादगी भरे पलों को लेकर चर्चा में है। तेज प्रताप यादव अपने पिता और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संस्थापक लालू प्रसाद यादव के गांव पहुंचे। यहां उन्होंने आम लोगों के बीच काफी सहज अंदाज में समय बिताया। इस दौरान उन्होंने खुद गन्ने का जूस निकाला और साइकिल से गांव की गलियों में घूमते नजर आए। गांव पहुंचते ही बदला अंदाज शहर की राजनीतिक हलचल और व्यस्त कार्यक्रमों से अलग तेज प्रताप यादव गांव में बिल्कुल देसी अंदाज में दिखाई दिए। उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और गांव की रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से महसूस किया। गन्ने का जूस निकालते हुए उनका वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी चर्चा में हैं। उनके इस अंदाज को देखकर वहां मौजूद लोग भी काफी उत्साहित नजर आए। साइकिल से गांव की गलियों में घूमे तेज प्रताप ने गांव में सिर्फ लोगों से मुलाकात ही नहीं की, बल्कि साइकिल लेकर गली-मोहल्लों की सैर भी की। उनका यह अंदाज लोगों को काफी पसंद आया। साइकिल से घूमते हुए उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और आसपास का माहौल देखा। इस दौरान कई लोग उनके साथ तस्वीरें लेते हुए भी नजर आए। राजनीति से अलग दिखी गांव की तस्वीर तेज प्रताप यादव अक्सर अपने अलग अंदाज और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में रहते हैं। लेकिन इस बार उनका गांव वाला अंदाज राजनीति से हटकर नजर आया। गांव में गन्ने का जूस निकालना और साइकिल से घूमना उनके समर्थकों के लिए भी खास पल रहा। सोशल मीडिया पर लोग उनके इस सादगी भरे अंदाज की चर्चा कर रहे हैं।
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Famous Forts in India: भारत की शान हैं ये 10 ऐतिहासिक किले, इस 15 अगस्त बनाएं घूमने का प्लान

Famous Forts in India: भारत की शान हैं ये 10 ऐतिहासिक किले, इस 15 अगस्त बनाएं घूमने का प्लान

15 अगस्त यानी Independence Day आने वाला है। अगर इस बार छुट्टी में कुछ अलग देखने और घूमने का मन है, तो भारत के ऐतिहासिक किलों का सफर एक शानदार विकल्प हो सकता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद ये किले सिर्फ पत्थरों से बनी इमारतें नहीं हैं, बल्कि भारत के इतिहास, संस्कृति और वीरता की कहानी भी बताते हैं। राजस्थान से लेकर दिल्ली, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश तक कई ऐसे शानदार किले हैं, जहां घूमने के साथ आपको देश के गौरवशाली अतीत को करीब से समझने का मौका मिलता है। आइए जानते हैं भारत के 10 प्रसिद्ध किलों के बारे में, जिन्हें आप इस Independence Day पर अपनी travel list में शामिल कर सकते हैं। 1. लाल किला, दिल्ली दिल्ली का लाल किला भारत के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। मुगल बादशाह शाहजहां ने इसका निर्माण कराया था। हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री यहीं से देश को संबोधित करते हैं। लाल किले की भव्य दीवारें और ऐतिहासिक महत्व इसे Independence Day पर घूमने के लिए खास जगह बनाते हैं। 2. आमेर किला, राजस्थान जयपुर के पास स्थित आमेर किला अपनी खूबसूरत वास्तुकला और राजसी अंदाज के लिए मशहूर है। पहाड़ी पर बना यह किला दूर से ही बेहद शानदार दिखाई देता है। किले के अंदर महल, आंगन और नक्काशीदार दीवारें राजस्थान के शाही इतिहास की झलक दिखाती हैं। 3. मेहरानगढ़ किला, जोधपुर जोधपुर का मेहरानगढ़ किला राजस्थान के सबसे शानदार किलों में गिना जाता है। ऊंची पहाड़ी पर बना यह किला जोधपुर शहर का खूबसूरत नजारा भी दिखाता है। इतिहास और architecture पसंद करने वाले लोगों के लिए यह जगह काफी खास है। 4. चित्तौड़गढ़ किला, राजस्थान चित्तौड़गढ़ किला राजस्थान के इतिहास और वीरता की याद दिलाता है। यह विशाल किला कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है। किले में विजय स्तंभ सहित कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। अगर आपको इतिहास से जुड़ी जगहें पसंद हैं तो यहां जाना यादगार हो सकता है। 5. ग्वालियर किला, मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश का ग्वालियर किला देश के प्रमुख ऐतिहासिक किलों में शामिल है। पहाड़ी पर बने इस किले की विशाल दीवारें और शानदार वास्तुकला पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। किले का इतिहास कई राजवंशों से जुड़ा रहा है, इसलिए यहां घूमना इतिहास को करीब से जानने का अच्छा अनुभव हो सकता है। 6. आगरा किला, उत्तर प्रदेश ताजमहल के शहर आगरा में स्थित आगरा किला भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। लाल बलुआ पत्थर से बना यह किला मुगल वास्तुकला का शानदार उदाहरण है। अगर आप Independence Day पर आगरा घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इस ऐतिहासिक किले को अपनी यात्रा में जरूर शामिल कर सकते हैं। 7. रायगढ़ किला, महाराष्ट्र महाराष्ट्र का रायगढ़ किला छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। पहाड़ी इलाके में स्थित यह किला इतिहास और प्रकृति दोनों का अनुभव देता है। यहां पहुंचकर आपको मराठा इतिहास की कई महत्वपूर्ण यादों से रूबरू होने का मौका मिलता है। 8. गोलकुंडा किला, हैदराबाद हैदराबाद का गोलकुंडा किला अपनी मजबूत दीवारों और शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है। किले की बनावट और उससे जुड़ी ऐतिहासिक कहानियां इसे खास बनाती हैं। हैदराबाद घूमने जाएं तो गोलकुंडा फोर्ट आपकी travel list में जरूर होना चाहिए। 9. सिंधुदुर्ग किला, महाराष्ट्र समुद्र के बीच बने सिंधुदुर्ग किले की खूबसूरती इसे बाकी किलों से अलग बनाती है। यह किला मराठा इतिहास से जुड़ा हुआ है और समुद्र के बीच इसकी लोकेशन बेहद आकर्षक है। अगर आपको history के साथ समुद्र का नजारा भी पसंद है, तो यह जगह आपके लिए बेहतरीन हो सकती है। 10. जैसलमेर किला, राजस्थान राजस्थान का जैसलमेर किला अपनी सुनहरी रंगत के कारण ‘Golden Fort’ के नाम से भी जाना जाता है। रेगिस्तान के बीच बना यह किला जैसलमेर की पहचान है।
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Rahul Gandhi Prayagraj Visit: किरेन रिजिजू का तंज- 'बड़ी गलती कर दी, रांची जाना चाहिए था'

Rahul Gandhi Prayagraj Visit: किरेन रिजिजू का तंज- ‘बड़ी गलती कर दी, रांची जाना चाहिए था’

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के प्रयागराज दौरे को लेकर अब सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें प्रयागराज की जगह रांची जाना चाहिए था। रिजिजू ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की। राहुल गांधी के प्रयागराज दौरे पर रिजिजू का कटाक्ष राहुल गांधी रविवार को प्रयागराज पहुंचे थे, जहां उन्होंने छात्रों से जुड़े एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसी दौरे को लेकर किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। रिजिजू ने लिखा कि राहुल गांधी को प्रयागराज के बजाय रांची जाना चाहिए था। उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि राहुल गांधी ने बड़ी गलती कर दी है, लेकिन गलतियां इंसान से होती हैं। क्यों रांची का जिक्र कर रहे हैं रिजिजू? रिजिजू की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब झारखंड में छात्रों से जुड़ा आंदोलन भी चर्चा में है। इसी वजह से उन्होंने राहुल गांधी के प्रयागराज दौरे को रांची से जोड़ते हुए राजनीतिक निशाना साधा। राहुल गांधी का प्रयागराज कार्यक्रम छात्रों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था। वहीं, रिजिजू के बयान ने इस पूरे मामले को राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बना दिया है। सोशल मीडिया पर शुरू हुई सियासी बहस किरेन रिजिजू की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के प्रयागराज दौरे को लेकर चर्चा तेज हो गई। सत्ता पक्ष और विपक्ष के समर्थक अपने-अपने तरीके से इस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। दरअसल, राहुल गांधी का छात्रों के बीच पहुंचना और उनसे जुड़े मुद्दों पर बात करना पहले से ही राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा था। अब रिजिजू की टिप्पणी के बाद इस दौरे पर सियासी बयानबाजी और बढ़ गई है।
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Mangal Rahu Yuti 2026: 18 सितंबर तक मंगल-राहु का प्रभाव, इन 4 राशियों को मिल सकता है धन लाभ

Mangal Rahu Yuti 2026: 18 सितंबर तक मंगल-राहु का प्रभाव, इन 4 राशियों को मिल सकता है धन लाभ

ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की चाल का असर सभी राशियों पर अलग-अलग देखने को मिलता है। इस समय मंगल और राहु की स्थिति को लेकर काफी चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि 18 सितंबर 2026 तक मंगल और राहु का प्रभाव कुछ राशियों के लिए आर्थिक मामलों में अच्छा रह सकता है। ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, साहस, जमीन-जायदाद और आत्मविश्वास का कारक माना जाता है, जबकि राहु को अचानक होने वाले बदलाव, महत्वाकांक्षा और अप्रत्याशित घटनाओं से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में दोनों ग्रहों का प्रभाव कुछ लोगों के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है। हालांकि, यह ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित अनुमान है। इसका असर हर व्यक्ति की कुंडली के अनुसार अलग हो सकता है। किन 4 राशियों को मिल सकता है फायदा? 1. मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक रूप से कुछ बेहतर रह सकता है। रुके हुए काम आगे बढ़ने की संभावना है। नौकरी या कारोबार से जुड़े लोगों को कोई नया अवसर मिल सकता है। अचानक किसी स्रोत से धन मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है। अगर आप लंबे समय से किसी निवेश या प्रॉपर्टी से जुड़े फैसले के बारे में सोच रहे हैं तो जल्दबाजी से बचना बेहतर रहेगा। 2. मिथुन राशि मिथुन राशि वालों के लिए मंगल-राहु का प्रभाव कामकाज में नई ऊर्जा ला सकता है। नौकरी करने वाले लोगों को नई जिम्मेदारी या बेहतर अवसर मिल सकता है। कारोबार करने वालों को भी किसी नए प्रोजेक्ट या डील से फायदा मिलने की संभावना बन सकती है। इस दौरान मेहनत के साथ सही फैसले लेना आपके लिए महत्वपूर्ण रहेगा। 3. सिंह राशि सिंह राशि के जातकों के लिए आने वाला समय आर्थिक मामलों में सकारात्मक हो सकता है। अचानक कोई अच्छी खबर मिल सकती है। आय के नए रास्ते खुलने की संभावना है और पुराने प्रयासों का फायदा भी मिल सकता है। परिवार में किसी जरूरी काम के लिए खर्च हो सकता है, इसलिए पैसों से जुड़े मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। 4. धनु राशि धनु राशि वालों के लिए मंगल और राहु का प्रभाव करियर और आर्थिक स्थिति में बदलाव ला सकता है। नौकरी या कारोबार में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। कुछ लोगों को अचानक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना भी बताई जा रही है।
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Bihar News: थाने की चारदीवारी से गायब हुआ 18 चक्का Truck, थानाध्यक्ष बोले- मुझे कोई जानकारी नहीं

Bihar News: थाने की चारदीवारी से गायब हुआ 18 चक्का Truck, थानाध्यक्ष बोले- मुझे कोई जानकारी नहीं

बिहार: बिहार से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जिस 18 चक्का ट्रक को पुलिस थाने की चारदीवारी के अंदर सुरक्षित रखा गया था, वही अचानक गायब हो गया। मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब ट्रक के गायब होने को लेकर थानाध्यक्ष से सवाल किया गया तो उन्होंने इस मामले में जानकारी होने से इनकार कर दिया। अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर थाने की निगरानी में खड़ा इतना बड़ा ट्रक वहां से कैसे गायब हो गया? थाने से कैसे गायब हुआ ट्रक? जानकारी के मुताबिक, 18 चक्का ट्रक पुलिस थाने की चारदीवारी के अंदर खड़ा था। यह जगह आम तौर पर पुलिस की निगरानी में रहती है। इसके बावजूद ट्रक के वहां से गायब होने की खबर ने लोगों को हैरान कर दिया है। मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर थाने की चारदीवारी के अंदर खड़ा भारी-भरकम ट्रक सुरक्षित नहीं है, तो पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। थानाध्यक्ष ने क्या कहा? जब इस मामले में थानाध्यक्ष से जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें ट्रक के गायब होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। थानाध्यक्ष के इस जवाब के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है। अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि ट्रक आखिर कब और किस तरह थाने से बाहर गया। पुलिस की निगरानी पर उठे सवाल 18 चक्का ट्रक कोई छोटी चीज नहीं है। उसे थाने की चारदीवारी से बाहर ले जाने के लिए वाहन को गेट से निकालना पड़ा होगा। ऐसे में यह सवाल अहम है कि ट्रक को बाहर ले जाते समय किसी ने देखा क्यों नहीं? स्थानीय लोगों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। लोग पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहे हैं। जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई फिलहाल ट्रक के गायब होने की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि ट्रक थाने में कब तक मौजूद था, उसे वहां किस वजह से रखा गया था और वह किस समय थाने से बाहर गया। इस घटना ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और गायब हुए 18 चक्का ट्रक का पता कब तक लगाया जाता है।
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Reservation पर रार: Creamy Layer को लेकर मायावती का RSS पर निशाना, बोलीं- बात करना ही गलत

Reservation पर रार: Creamy Layer को लेकर मायावती का RSS पर निशाना, बोलीं- बात करना ही गलत

आरक्षण के मुद्दे पर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने की चर्चा का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण सिर्फ आर्थिक स्थिति के आधार पर तय होने वाला विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध सामाजिक भेदभाव और पिछड़ेपन से भी है। मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण से जुड़े बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मुद्दा बेहद संवेदनशील है और इस पर किसी भी तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए। मायावती ने क्रीमी लेयर पर क्या कहा? मायावती के मुताबिक SC और ST समुदायों के लिए आरक्षण का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं है। उन्होंने इसे सामाजिक बदलाव, सम्मान और समान अवसर से जोड़कर बताया। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति या परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होने के बावजूद जाति आधारित भेदभाव की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती। इसलिए SC/ST आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ की व्यवस्था लागू करने की बात उचित नहीं है। आरक्षण को लेकर क्यों बढ़ी बहस? आरक्षण को लेकर ‘क्रीमी लेयर’ का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। फिलहाल केंद्र सरकार के अनुसार क्रीमी लेयर का प्रावधान OBC आरक्षण में लागू है, जबकि SC/ST के लिए इसे उसी तरह लागू नहीं किया गया है। इसी वजह से SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर को लेकर कोई भी बयान राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन जाता है। मायावती ने RSS को दी नसीहत मायावती ने आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी को लेकर RSS पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आरक्षण सामाजिक न्याय से जुड़ा संवैधानिक विषय है और इसे लेकर समाज में भ्रम या असंतोष पैदा करने वाले बयानों से बचना चाहिए।
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Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

Teachers Day 2026: PM Modi ने Award-Winning Teachers से की बात, Public Speaking पर भी हुई चर्चा

शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि बच्चों के अंदर आत्मविश्वास और बेहतर सोच भी पैदा करते हैं। Teachers’ Day से पहले PM Modi ने National Teachers’ Award 2026 के लिए चुने गए शिक्षकों और educators से मुलाकात की। इस दौरान पढ़ाई के तरीकों से लेकर बच्चों की बदलती आदतों तक कई मुद्दों पर बातचीत हुई। मुलाकात के दौरान माहौल काफी सहज नजर आया। प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से उनके अनुभव जानने के साथ यह भी समझने की कोशिश की कि वे बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए किस तरह के नए तरीके अपना रहे हैं। PM Modi ने पूछा- Public से कैसे करें बात? बातचीत के दौरान Public Speaking और लोगों के सामने अपनी बात रखने का मुद्दा भी सामने आया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बारे में सवाल किया तो एक महिला Teacher ने सीधा जवाब दिया कि लोगों के सामने प्रभावी तरीके से बात करने के लिए सबसे जरूरी चीज Confidence यानी आत्मविश्वास है। उनकी यह बात छोटी जरूर थी, लेकिन Public Speaking को लेकर एक बड़ा संदेश देती है। किसी भी मंच पर अपनी बात रखने के लिए केवल जानकारी होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे भरोसे और स्पष्टता के साथ सामने रखना भी जरूरी है। Teachers ने PM Modi को बताए अपने Innovative Ideas प्रधानमंत्री मोदी ने Award-winning Teachers से उनके Teaching Experience और Classroom में अपनाए जा रहे नए प्रयोगों के बारे में भी जाना। शिक्षकों ने बताया कि वे बच्चों के लिए पढ़ाई को आसान और दिलचस्प बनाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आज के समय में सिर्फ किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित पढ़ाई बच्चों को हमेशा आकर्षित नहीं करती। ऐसे में कई शिक्षक Technology, Practical Activities और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े उदाहरणों की मदद से विषयों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। बच्चों में Screen Addiction को लेकर भी चर्चा PM Modi ने बच्चों में बढ़ते Screen Time और Digital Addiction को लेकर भी शिक्षकों से चर्चा की। उन्होंने बच्चों को खेल, Physical Activities और रचनात्मक कामों से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही युवा छात्रों में नशे की समस्या को लेकर शिक्षकों को सतर्क रहने की बात भी कही गई। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को केवल Classroom तक सीमित नहीं माना। बच्चों के व्यवहार, उनकी आदतों और मानसिक-सामाजिक विकास में भी शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 5 सितंबर को 48 Teachers को National Award Teachers’ Day के मौके पर 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 48 स्कूल शिक्षकों को National Teachers’ Awards प्रदान करेंगी। इन शिक्षकों का चयन देशभर से एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए किया गया है। National Teachers’ Awards का मकसद ऐसे शिक्षकों को पहचान और सम्मान देना है, जिन्होंने पढ़ाई को बेहतर बनाने के साथ विद्यार्थियों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यह पुरस्कार हर साल Teachers’ Day पर शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करने के लिए दिए जाते हैं। PM Modi की Teachers से मुलाकात का संदेश प्रधानमंत्री और शिक्षकों की इस मुलाकात में एक बात साफ तौर पर सामने आई—एक अच्छा Teacher सिर्फ पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि बच्चों को जीवन के लिए तैयार करता है। चाहे Public Speaking में Confidence की बात हो या Classroom में नए Teaching Methods अपनाने की, बदलते समय के साथ शिक्षकों की भूमिका भी लगातार व्यापक हो रही है। Teachers’ Day से पहले हुई यह मुलाकात इसी बदलाव और शिक्षकों के योगदान को रेखांकित करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ujjain

Ujjain में बनेगी Malakhamb Academy, 111 करोड़ के Project से खिलाड़ियों को मिलेंगी World-Class सुविधाएं

मध्यप्रदेश के मलखंब खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश सरकार Ujjain में एक ऐसी Malakhamb और Gymnastics Academy विकसित करने की तैयारी में है, जहां खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण के साथ आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के प्रयासों से तैयार किए गए प्रस्ताव के मुताबिक, करीब 20 एकड़ जमीन पर इस अकादमी को विकसित किया जाएगा। अकादमी में खिलाड़ियों के लिए खेल अधोसंरचना, हॉस्टल, आधुनिक उपकरण, फिटनेस सेंटर, फिजियोथेरेपी और खेल विज्ञान से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका मकसद प्रदेश की युवा मलखंब प्रतिभाओं को कम उम्र से ही बेहतर ट्रेनिंग देकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करना है। 111 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रस्ताव प्रस्तावित मलखंब एवं जिम्नास्टिक अकादमी के निर्माण पर करीब 86 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक अकादमी के संचालन के लिए लगभग 25.33 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इस तरह निर्माण और संचालन को मिलाकर परियोजना की कुल प्रस्तावित लागत करीब 111.33 करोड़ रुपये बताई गई है। खिलाड़ियों को सिर्फ Training नहीं, पूरी सुविधा मिलेगी इस अकादमी की खास बात यह होगी कि खिलाड़ियों को केवल मलखंब की ट्रेनिंग तक सीमित सुविधाएं नहीं मिलेंगी। यहां हॉस्टल, आधुनिक खेल उपकरण, फिटनेस, फिजियोथेरेपी और Sports Science आधारित प्रशिक्षण की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। सरकार का जोर ऐसे Training Environment पर है, जहां खिलाड़ियों की तकनीक के साथ उनकी फिटनेस और खेल प्रदर्शन पर भी लगातार काम किया जा सके। 70 खिलाड़ियों को मिलेगा मौका प्रस्ताव के अनुसार अकादमी में कुल 70 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें: शामिल होंगे। यानी कुल 50 खिलाड़ी बोर्डिंग और 20 खिलाड़ी डे-बोर्डिंग व्यवस्था में रहेंगे। खिलाड़ियों का चयन Talent Search के माध्यम से किए जाने का प्रस्ताव है। Academy शुरू होने से पहले उज्जैन में शुरू होगी Training स्थायी अकादमी की इमारत तैयार होने में समय लगने के दौरान भी खिलाड़ियों की ट्रेनिंग को रोका नहीं जाएगा। वर्ष 2026-27 और 2027-28 में अकादमी को राजमाता खेल परिसर, तानाखेड़ा, उज्जैन में डे-बोर्डिंग मॉडल पर संचालित करने का प्रस्ताव है। इस शुरुआती चरण में कुल 40 खिलाड़ियों को प्रवेश देने की योजना है। इनमें 30 बालक और 10 बालिकाएं शामिल होंगी। उज्जैन से बाहर के चयनित खिलाड़ियों के लिए विभाग की ओर से आवास की व्यवस्था करने का भी प्रस्ताव है। Expert Coaches के साथ Sports Science पर रहेगा फोकस नई अकादमी में खिलाड़ियों को आधुनिक और उच्च तकनीकी प्रशिक्षण देने की तैयारी है। इसके लिए उच्च तकनीकी सलाहकार और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की सेवाएं अनुबंध के आधार पर लेने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। डे-बोर्डिंग व्यवस्था में खिलाड़ियों को प्रशिक्षकों के साथ फिजियोथेरेपिस्ट और मसाजर की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट और दो मसाजर—एक महिला तथा एक पुरुष—का प्रावधान प्रस्तावित है। मंत्री विश्वास सारंग बोले- प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के मुताबिक मध्यप्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि इन खिलाड़ियों को सही समय पर आधुनिक सुविधाएं, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और बेहतर अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि मलखंब मध्यप्रदेश की गौरवशाली खेल परंपरा का हिस्सा है और प्रदेश के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की है। प्रस्तावित अकादमी के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती उम्र से वैज्ञानिक और तकनीकी प्रशिक्षण देने पर जोर रहेगा। मंत्री के अनुसार लक्ष्य यह है कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। Khelo India में MP के Malakhamb खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन मलखंब अकादमी की जरूरत इसलिए भी महसूस की गई क्योंकि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है। Khelo India Youth Games 2025, बिहार में मध्यप्रदेश के मलखंब खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते। इनमें 7 Gold, 2 Silver और 1 Bronze Medal शामिल रहे। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि प्रदेश में मलखंब की प्रतिभाओं की मजबूत नींव मौजूद है। अब नई अकादमी के जरिए इन खिलाड़ियों को लगातार और बेहतर प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया जा रहा है। उज्जैन बन सकता है Malakhamb Talent Hub अकादमी के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, उज्जैन को देने का प्रस्ताव है। शुरुआत में विभाग में उपलब्ध स्टाफ के जरिए अकादमी की दैनिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। उज्जैन जिले के लिए कुल 12 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें संभागीय खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, लेखापाल, सहायक ग्रेड-2, सहायक ग्रेड-3 और भृत्य के पद शामिल हैं। खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद उज्जैन में प्रस्तावित Malakhamb Academy सिर्फ एक नई खेल सुविधा नहीं, बल्कि प्रदेश की युवा प्रतिभाओं के लिए आगे बढ़ने का बड़ा रास्ता बन सकती है। अभी जहां खिलाड़ी अलग-अलग स्थानों पर प्रशिक्षण लेते हैं, वहीं भविष्य में उन्हें एक ही जगह पर ट्रेनिंग, फिटनेस, आवास और Sports Science जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। अगर प्रस्तावित योजना अपने स्वरूप में आगे बढ़ती है, तो उज्जैन आने वाले समय में मध्यप्रदेश की मलखंब प्रतिभाओं की नई नर्सरी और प्रमुख Training Hub के रूप में अपनी पहचान बना सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India-Belgium

India-Belgium Partnership: जोरावर Tank बना नई दोस्ती की पहचान, कई अहम MoU पर सहमति

India-Belgium के रिश्तों में गुरुवार को एक अहम पड़ाव जुड़ गया। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर भारत दौरे पर पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बातचीत के बाद दोनों देशों ने Defence, Clean Energy, Critical Minerals, Semiconductor, Maritime Cooperation और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद कहा कि भारत और बेल्जियम के संबंध अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश अब Defence और Clean Energy जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी तेजी से साथ आ रहे हैं। इसी दौरान पीएम मोदी ने जोरावर Tank का भी जिक्र किया। जोरावर Tank ने बढ़ाया Defence Cooperation भारत के लिए पहाड़ी और कठिन इलाकों में इस्तेमाल होने वाला हल्का जोरावर टैंक Defence Sector का अहम प्रोजेक्ट है। पीएम मोदी ने भारत-बेल्जियम सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश आधुनिक रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में साथ काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच Military Exchanges और Training Cooperation बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इससे भारतीय और बेल्जियम की सेनाओं के बीच संपर्क और अनुभव साझा करने के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि, जोरावर टैंक को लेकर इसे सीधे तौर पर कोई अलग Tank Purchase Deal कहना सही नहीं होगा। इस प्रोजेक्ट का उल्लेख दोनों देशों के बढ़ते Defence और Technology Cooperation के उदाहरण के तौर पर किया गया है। Clean Energy में भी नई Partnership Defence के साथ-साथ Green Energy भारत-बेल्जियम सहयोग का एक और बड़ा क्षेत्र बनकर सामने आया है। दोनों देशों ने Renewable Energy के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता किया है। पीएम मोदी ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में विकसित हो रहे Green Ammonia Project का भी जिक्र किया। भारत की बढ़ती Clean Energy जरूरतों और बेल्जियम की तकनीकी क्षमता को देखते हुए यह Partnership आने वाले समय में काफी अहम हो सकती है। Critical Minerals और Semiconductor पर नजर आज की Technology Economy में Critical Minerals और Semiconductor की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत और बेल्जियम ने इन क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देश Critical Minerals की Processing और Recycling में मिलकर काम करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। वहीं Semiconductor Sector में बेल्जियम की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के बड़े Manufacturing Ecosystem को जोड़ने पर जोर दिया गया है। खास तौर पर बेल्जियम के प्रसिद्ध Research Institute IMEC और भारत के Semiconductor Ecosystem के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 5 साल में Double हो सकता है Bilateral Trade बैठक में आर्थिक रिश्तों को लेकर भी बड़ा लक्ष्य सामने आया। भारत और बेल्जियम अगले पांच वर्षों में Bilateral Trade को दोगुना करने की दिशा में काम करेंगे। भारत और बेल्जियम के बीच व्यापार में Diamond Industry की लंबे समय से बड़ी भूमिका रही है। बेल्जियम का एंटवर्प शहर दुनिया के प्रमुख Diamond Trading Hubs में शामिल है और यहां भारतीय कारोबारियों की भी मजबूत मौजूदगी है। अब दोनों देश इस पुराने व्यापारिक रिश्ते को Defence, Technology, Energy और Critical Minerals जैसे नए क्षेत्रों से जोड़ना चाहते हैं। Maritime और Startup Sector में भी बढ़ेगा सहयोग भारत और बेल्जियम के बीच सहयोग का दायरा केवल Defence और Trade तक नहीं रहेगा। दोनों देशों ने Maritime Sector में Capacity Building और Startups के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इसके अलावा Cybercrime से मुकाबला, Diplomatic Training और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौते किए गए हैं। दोनों देश Migration and Mobility Partnership Agreement को जल्द पूरा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच छात्रों, Professionals और लोगों के आवागमन से जुड़े अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। Terrorism पर भारत-बेल्जियम का एक सुर बैठक में आतंकवाद और दुनिया में चल रहे विभिन्न संघर्षों पर भी चर्चा हुई। भारत और बेल्जियम ने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश Dialogue और Diplomacy के जरिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखते हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत और बेल्जियम के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। भारत-बेल्जियम रिश्तों की पुरानी कहानी पीएम मोदी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों का भी जिक्र किया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बेल्जियम में भारतीय सैनिकों के योगदान और बलिदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और बेल्जियम के संबंध काफी पुराने हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। एंटवर्प के मेयर के तौर पर उनका भारत और भारतीय समुदाय से पहले भी संपर्क रहा है। अब Diamond Trade से आगे बढ़ रही दोस्ती भारत और बेल्जियम की दोस्ती की पहचान लंबे समय तक Diamond Trade से जुड़ी रही है। लेकिन बदलती दुनिया में दोनों देशों के रिश्ते अब एक बड़े दायरे में फैल रहे हैं। जोरावर Tank से Defence Cooperation, Green Energy से Critical Minerals और Semiconductor से Bilateral Trade तक, भारत और बेल्जियम कई नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। पीएम मोदी और बार्ट डी वेवर की बैठक को इसी बदलती Partnership की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में अगर इन समझौतों और सहयोग योजनाओं को जमीन पर तेजी से उतारा जाता है, तो भारत-बेल्जियम संबंध आर्थिक रिश्तों से आगे बढ़कर एक मजबूत Strategic Partnership का रूप ले सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tibet

Nepal Flood के बीच बड़ा Earthquake: Tibet में 5.1 Magnitude के झटके, अब तक 1,273 लोगों की मौत

Nepal-Tibet Flood हिमालयी इलाके में पिछले एक हफ्ते से जारी तबाही के बीच गुरुवार को एक और झटका महसूस किया गया। चीन के तिब्बत (Tibet) क्षेत्र में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप ऐसे वक्त आया है, जब नेपाल और तिब्बत में भीषण Flood और Landslide के बाद हजारों लोग लापता हैं और राहत-बचाव अभियान लगातार चल रहा है। 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ ने देखते ही देखते कई इलाकों की तस्वीर बदल दी थी। घर, सड़कें, पुल और Hydropower Projects मलबे और पानी की चपेट में आ गए। अब तक इस आपदा में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 1,273 लोगों की मौत हो चुकी है। Tibet में 5.1 तीव्रता का Earthquake जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार गुरुवार को तिब्बत में 5.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर आया और इसका क्षेत्र नेपाल तथा भारत की सीमाओं के आसपास बताया गया है। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में इस भूकंप से बड़े पैमाने पर नए नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पहले से तबाह इलाके में इसके झटके ने लोगों और Rescue Teams की चिंता जरूर बढ़ा दी है। एक हफ्ते पहले आई बाढ़ ने मचाई थी भारी तबाही 26 अगस्त को Bhote Koshi River के आसपास अचानक आई बाढ़ ने नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। अधिकारियों और विशेषज्ञों के मुताबिक इस आपदा के पीछे ग्लेशियर और चट्टानों के खिसकने से पैदा हुआ भारी मलबा और पानी प्रमुख वजह रहा। बाढ़ का तेज बहाव अपने साथ मिट्टी, चट्टान और मलबा लेकर नीचे की ओर आया और रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों और पुलों को तबाह करता चला गया। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को बेहद असाधारण बताते हुए इसे ‘Himalayan Tsunami’ तक कहा है। तिब्बत की ओर Gyirong Port भी बुरी तरह प्रभावित हुआ था। संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचने से शुरुआती दौर में राहत सामग्री और भारी मशीनरी को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया। Nepal-Tibet Disaster में 1,273 लोगों की मौत 3 सितंबर तक सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नेपाल में 1,252 लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 4,216 लोग अब भी लापता हैं। वहीं चीन के तिब्बत क्षेत्र में 21 लोगों की मौत और 541 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह दोनों क्षेत्रों में मृतकों की संख्या 1,273 हो गई है। नेपाल में सबसे ज्यादा मौतें चितवन, नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम और नुवाकोट जैसे जिलों में दर्ज हुई हैं। कई शवों की पहचान अभी बाकी है, जिससे परिवारों की बेचैनी और बढ़ गई है। हजारों लोग अब भी Missing, Tunnel में फंसे लोगों की तलाश सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। नेपाल में हजारों लोगों के लापता होने के अलावा कई Hydropower Projects में काम करने वाले कर्मचारियों के भी फंसे होने की आशंका है। करीब 900 Hydropower workers के अब भी लापता होने की बात सामने आई है। कुछ लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका के चलते Rescue Teams भारी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाने में जुटी हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की Tunnel Rescue Teams नेपाली सेना के साथ मिलकर अभियान चला रही हैं। ड्रोन, भारी मशीनरी और अन्य राहत उपकरणों की मदद भी ली जा रही है। हजारों घर हुए तबाह, सामने बड़ी Rebuilding Challenge बाढ़ ने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली, बल्कि हजारों परिवारों से उनका घर और रोजी-रोटी भी छीन ली। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में करीब 7,500 घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और लगभग 20,000 घरों को दोबारा बनाने की जरूरत पड़ सकती है। सड़क और पुल टूटने के कारण कई इलाकों में राहत पहुंचाना अभी भी मुश्किल है। कुछ जगहों पर लोगों को नदी पार करने के लिए अस्थायी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। Rescue Operation के बीच नया भूकंप चिंता की वजह राहत और बचाव दल पहले ही बारिश, मलबे, तेज बहाव और अस्थिर पहाड़ी ढलानों से जूझ रहे हैं। ऐसे में तिब्बत में आया नया भूकंप हालात को और संवेदनशील बना सकता है। फिलहाल अधिकारियों की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है। नेपाल सरकार के मुताबिक Search and Rescue Operation अभी भी पूरी क्षमता के साथ जारी है। हिमालयी क्षेत्र की इस त्रासदी ने एक बार फिर दिखाया है कि पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदाएं कितनी तेजी से बड़े संकट में बदल सकती हैं। बाढ़ के बाद भूकंप के झटके ने प्रभावित लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, लेकिन Rescue Teams अब भी मलबे के बीच जिंदगी की तलाश में जुटी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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