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इंदौर के सांवेर में बड़ा हादसा: जर्जर मकान तोड़ते समय दूसरे घर की दीवार गिरी, 4 महिलाओं की मौत; 5 घायल

इंदौर/सांवेर। इंदौर के पास सांवेर में बुधवार शाम करीब 4 बजे जर्जर मकान तोड़ने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। पास के दूसरे मकान की पुरानी दीवार अचानक ढह गई, जिसके मलबे में दबने से चार महिलाओं की मौत हो गई। सभी मृतक महिलाओं के मजदूर होने की जानकारी सामने आई है। हादसे में पांच लोग घायल हुए हैं। मृतकों की पहचान चंदा बाई, सीमा बाई, सुशीला बाई और रीना बाई के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर परिषद की टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। जर्जर मकान तोड़ते समय ढही दूसरे घर की दीवार हादसा सांवेर के टशन चौराहे के पास हुआ। यहां एक जर्जर मकान को तोड़ने का काम चल रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, संबंधित इमारत ‘नेताजी’ के नाम से जानी जाती है। मकान तोड़ने के दौरान पास स्थित दूसरे मकान की पुरानी और जर्जर दीवार अचानक गिर गई। दीवार के मलबे में कई लोग दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। चार महिलाओं की मौत, 5 लोग घायल हादसे में चार महिलाओं की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर उपचार के लिए इंदौर रेफर किया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद मृतकों और घायलों के परिजन सिविल अस्पताल पहुंचे। अस्पताल परिसर में भी लोगों की भीड़ जमा हो गई। एक महीने पहले गिरा था मकान का छज्जा स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस मकान को तोड़ा जा रहा था, उसका छज्जा करीब एक महीने पहले गिर गया था। इसके बाद लोगों ने नगर परिषद को इसकी जानकारी दी थी। बताया जा रहा है कि मकान खाली करने के संबंध में मकान मालिक को नोटिस भी जारी किया गया था। स्थानीय लोगों ने नगर परिषद पर लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना के समय मकान मालिक के ठेकेदार के साथ मौके पर मौजूद होने की बात भी सामने आई है। मकान मालिक के नाम को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। मामले में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। शाम सवा छह बजे तक जारी रहा रेस्क्यू हादसे के बाद पुलिस और नगर परिषद की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। जेसीबी की मदद से मलबा हटाया गया और दबे लोगों की तलाश की गई। शाम सवा छह बजे तक घटनास्थल पर मलबा हटाने का काम जारी था। पुलिस ने मौके पर जमा लोगों को हटाकर राहत कार्य के लिए रास्ता साफ कराया। हादसे के कारणों और मकान की जर्जर स्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच की जा रही है।
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UPI शुल्क पर वित्त मंत्रालय की सफाई- किसी विदेशी दबाव में नहीं लिया फैसला, राहुल गांधी के आरोपों पर BJP का जवाब

नई दिल्ली। UPI के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लागू करने के फैसले को लेकर सियासी विवाद शुरू हो गया है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि UPI से जुड़े फैसले भारत की घरेलू जरूरतों के आधार पर स्वतंत्र रूप से लिए गए हैं। मंत्रालय ने विदेशी दबाव के आरोपों को खारिज किया है। मंत्रालय के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। हालांकि, यह शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। सरकार के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन इस शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR नए फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 से अधिक के निर्धारित मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन होगी। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई टैक्स नहीं है और इसे सरकार या NPCI द्वारा सीधे वसूल नहीं किया जाएगा। यह शुल्क पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रोवाइडर्स के बीच वितरित किया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांजैक्शन पूरी तरह नि:शुल्क रहेंगे। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और छोटे व्यापारियों से जुड़े शून्य-MDR प्रावधानों के तहत आने वाले लेन-देन भी शुल्क मुक्त रहेंगे। राहुल गांधी ने फैसले पर उठाए सवाल इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने UPI पर शुल्क लागू करने के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि इस फैसले से अमेरिका को फायदा होगा। उन्होंने सरकार से फैसले को वापस लेने की मांग की। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि राहुल गांधी को हर जगह अमेरिका का भूत दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा कि UPI शुल्क ग्राहकों से लेने की कोई सिफारिश नहीं की गई है। वहीं, वित्त मंत्रालय ने दोहराया कि UPI से जुड़े फैसले देश की घरेलू जरूरतों और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल UPI के नए शुल्क नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। याचिका में अदालत से नए नियम को रद्द करने की मांग की गई है। हालांकि, नियमों की न्यायिक समीक्षा और याचिका पर आगे की कार्रवाई का विवरण अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगा। नितिन कामथ ने ब्रोकिंग सेक्टर को लेकर जताई चिंता जिरोधा के फाउंडर और CEO नितिन कामथ ने UPI MDR के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि UPI का इस्तेमाल बड़े स्तर पर हो रहा है, इसलिए MDR की जरूरत पर चर्चा हो सकती है। लेकिन इन्वेस्टिंग और ब्रोकिंग जैसे क्षेत्रों में मौजूदा शुल्क व्यवस्था व्यावहारिक नहीं लगती। उन्होंने मर्चेंट और ब्रोकर के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि कोई ग्राहक ₹20,000 का सामान खरीदता है तो भुगतान सीधे मर्चेंट के कारोबार से जुड़ा होता है। दूसरी ओर, कोई ग्राहक ₹2 लाख अपने ट्रेडिंग अकाउंट में जमा कर सकता है, लेकिन उस दिन कोई शेयर नहीं खरीद सकता। ऐसे मामले में ब्रोकर को तत्काल ट्रेडिंग रेवेन्यू नहीं मिलता, लेकिन UPI भुगतान से जुड़ा MDR खर्च उसके ऊपर आ सकता है। कामथ ने इसी अंतर को लेकर चिंता जताई है। विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा AAP आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि UPI शुल्क का असर आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इससे छोटे कारोबारियों का डिजिटल कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। RJD RJD नेता तेजस्वी यादव ने UPI के जरिए बड़े पैमाने पर होने वाले भुगतान का जिक्र करते हुए शुल्क लगाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने इसे महंगाई और जनता की आर्थिक परेशानियों से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा। NCP (SP) NCP (SP) की राष्ट्रीय प्रवक्ता सीमा मलिक ने कहा कि सरकार ने पहले लोगों को डिजिटल भुगतान की आदत डलवाई और अब शुल्क लगाने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने UPI के व्यापक इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए इस फैसले पर सवाल उठाए। आवश्यक सेवाओं और पूंजी बाजार के लिए अलग शुल्क वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण के अनुसार, कुछ आवश्यक क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होगा। इसमें रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्र शामिल हैं। वहीं, म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े पूंजी बाजार ट्रांजैक्शन पर 0.02 प्रतिशत MDR का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी। UPI को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी प्रोत्साहन योजना सरकार ने UPI को बढ़ावा देने और छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। इसके तहत छोटे व्यापारियों को किए जाने वाले निर्धारित कम मूल्य के UPI पेमेंट पर इंसेंटिव का प्रावधान रहा है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि नया फ्रेमवर्क UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने, डिजिटल भुगतान के विस्तार और साइबर सुरक्षा जैसी जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
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NSUI ने ABVP कार्यालय पहुंचकर राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का दिया न्योता

भोपाल: भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को भोपाल स्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यालय पहुंचकर पदाधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आगामी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रममें शामिल होने के लिए आमंत्रण दिया। यह कार्यक्रम 19 सितंबर को इंदौर में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। इसमें मध्यप्रदेश के छात्र-छात्राओं और युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संवाद और चर्चा की जाएगी। छात्र संगठनों के बीच संवाद पर जोर NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि छात्र और युवा वर्ग से जुड़े मुद्दे किसी एक संगठन या विचारधारा तक सीमित नहीं हैं। ये प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि छात्र संगठनों के बीच संवाद और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा लोकतांत्रिक छात्र राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिक्षा, रोजगार और छात्र अधिकारों पर होगी चर्चा रवि परमार के अनुसार, ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं की आवाज को प्रमुखता से सामने लाना है। कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, छात्रवृत्ति, विश्वविद्यालयों में सुविधाओं, छात्र अधिकारों और युवाओं से जुड़े अन्य विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवाद के माध्यम से छात्र-युवा वर्ग की समस्याओं और अपेक्षाओं को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। ABVP पदाधिकारियों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील NSUI जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने ABVP पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने संगठन के छात्र प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के साथ कार्यक्रम में शामिल हों। उन्होंने कहा कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर सभी संगठन अपनी बात रखें, ताकि विद्यार्थियों से संबंधित विषयों पर व्यापक चर्चा हो सके। तोमर के मुताबिक, अलग-अलग छात्र संगठनों के विचार सामने आने से छात्रों की वास्तविक समस्याओं को समझने और उन पर संवाद आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। ये पदाधिकारी रहे मौजूद इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष अमित हाटिया, आर्यन मंडलोई, लकी चौबे, धीरज वर्मा और टीआईटी कॉलेज अध्यक्ष हर्ष पटेल सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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WPL 2027 का शेड्यूल जारी, 14 जनवरी से शुरू होगा सीजन; IPL मिनी ऑक्शन तीन साल बाद भारत लौटेगा

स्पोर्ट्स डेस्क। विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) का पांचवां सीजन 14 जनवरी से 7 फरवरी 2027 तक खेला जाएगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। पांच फ्रेंचाइजी वाली इस लीग का ऑक्शन 28 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा, जबकि खिलाड़ियों को रिटेन करने की आखिरी तारीख 28 सितंबर तय की गई है। इसके साथ ही इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का मिनी ऑक्शन भी तीन साल बाद भारत में आयोजित किया जा सकता है। हालांकि, इसकी तारीख और वेन्यू अभी तय नहीं किए गए हैं। मंगलवार को हुई IPL गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इस संबंध में फैसला लिया गया। तीन साल बाद भारत लौटेगा IPL मिनी ऑक्शन 2023 में कोच्चि में ऑक्शन आयोजित होने के बाद लगातार तीन साल तक IPL की नीलामी भारत के बाहर हुई। 2024 में दुबई, 2025 में जेद्दा और 2026 में अबू धाबी में ऑक्शन आयोजित किया गया था। अब BCCI ने मिनी ऑक्शन को दोबारा भारत में कराने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि, ऑक्शन की तारीख और शहर को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। होटल और लॉजिस्टिक व्यवस्था पर रहेगा जोर ऑक्शन का वेन्यू तय करते समय BCCI फ्रेंचाइजियों और उनके प्रतिनिधिमंडल के ठहरने की व्यवस्था को प्राथमिकता देगा। अक्टूबर से दिसंबर के बीच भारत में वेडिंग सीजन होने के कारण पांच सितारा होटलों में पर्याप्त कमरे उपलब्ध होना भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। BCCI को ऑक्शन के लिए लगभग दो रातों के लिए 100 से अधिक कमरों की जरूरत होती है। ऐसे में होटल की उपलब्धता और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर शहर का चयन किया जाएगा। विदेश में ऑक्शन कराने से फ्रेंचाइजियों को परेशानी IPL ऑक्शन को भारत वापस लाने के फैसले में फ्रेंचाइजियों के फीडबैक की भी भूमिका रही है। टीमों ने अपने प्रतिनिधिमंडल को विदेश ले जाने से जुड़ी लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल परेशानियों का मुद्दा उठाया था। पिछले साल अबू धाबी में हुए ऑक्शन के दौरान भी टीमों की ओर से ऐसी चिंताएं सामने आई थीं। इसके बाद IPL गवर्निंग काउंसिल ने इस साल के मिनी ऑक्शन के लिए भारत में संभावित वेन्यू तलाशने का निर्णय लिया। 2027 में मिनी और 2028 में मेगा ऑक्शन IPL 2027 में मिनी ऑक्शन आयोजित किया जाएगा। वहीं, 2028 में मेगा ऑक्शन होने की संभावना है। मेगा ऑक्शन को भारत के बाहर आयोजित करने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। मिनी ऑक्शन आमतौर पर दिसंबर में आयोजित किया जाता है, लेकिन 2027 के ऑक्शन की आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर अगले महीने फैसला IPL गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। BCCI ने सभी 10 फ्रेंचाइजियों से इस नियम को लेकर लिखित फीडबैक मांगा था। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर फ्रेंचाइजियां मौजूदा नियम के खिलाफ बताई जा रही हैं। कुछ टीमों का कहना है कि उन्होंने इम्पैक्ट प्लेयर नियम को ध्यान में रखकर अपनी स्क्वॉड तैयार की है। ऐसे में नियम को हटाने या बदलने का फैसला अगले साल तक टाला जा सकता है। करीब एक महीने बाद IPL गवर्निंग काउंसिल की दोबारा बैठक होगी। इसमें इम्पैक्ट प्लेयर नियम को जारी रखने, उसमें बदलाव करने या उसे पूरी तरह हटाने पर फैसला लिया जाएगा। इम्पैक्ट प्लेयर नियम क्या है? इम्पैक्ट प्लेयर नियम के तहत टीम मैच के दौरान एक अतिरिक्त खिलाड़ी का इस्तेमाल कर सकती है। इससे टीमों को बल्लेबाजी और गेंदबाजी के अलग-अलग संयोजन आजमाने का विकल्प मिलता है। नियम के समर्थकों का तर्क है कि इससे टीम की बल्लेबाजी मजबूत होती है और बड़े स्कोर वाले मुकाबले देखने को मिलते हैं। वहीं, विरोध करने वालों का मानना है कि अतिरिक्त खिलाड़ी की सुविधा से ऑलराउंडरों की भूमिका प्रभावित हो सकती है। WPL 2027 ऑक्शन की भी तैयारियां शुरू BCCI IPL के साथ-साथ WPL 2027 के ऑक्शन की तैयारियां भी कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, WPL का ऑक्शन 28 अक्टूबर को कोच्चि में आयोजित किया जा सकता है। WPL 2027 के मैचों के लिए मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम को प्रमुख वेन्यू के तौर पर तय किया गया है। इसके अलावा वडोदरा के कोटाम्बी स्टेडियम और वाराणसी के नए स्टेडियम को संभावित आयोजन स्थलों के रूप में देखा जा रहा है। वाराणसी के नए स्टेडियम का निरीक्षण करेगी BCCI टीम BCCI की क्रिकेट ऑपरेशंस टीम वाराणसी के नए स्टेडियम का निरीक्षण करेगी। टीम स्टेडियम की सुविधाओं और मैचों के आयोजन की तैयारियों का जायजा लेगी। यदि स्टेडियम जनवरी तक तैयार हो जाता है, तो WPL के कुछ मुकाबले यहां आयोजित किए जा सकते हैं। इससे पहले मैदान पर घरेलू या अभ्यास मैच कराने का विकल्प भी मौजूद रहेगा। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम को भी संभावित वेन्यू के रूप में चर्चा में रखा गया था। हालांकि, वहां स्थानीय अधिकारियों से कई अनुमतियां लेने की आवश्यकता होगी। ब्रेबॉर्न स्टेडियम में दो बार हो चुका है WPL फाइनल मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में WPL के पहले सीजन 2023 और 2025 के फाइनल खेले गए थे। पिछले सीजन में नई फ्लडलाइट्स लगाने के काम के कारण यहां मुकाबले आयोजित नहीं किए गए थे। 2026-27 रणजी ट्रॉफी में ब्रेबॉर्न रेलवे का घरेलू मैदान भी रहेगा। रेलवे यहां तीन मुकाबले खेलेगा। ब्रेबॉर्न और वडोदरा का कोटाम्बी स्टेडियम 14 से 28 फरवरी 2027 तक होने वाली छह टीमों की पहली ICC विमेंस चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी भी करेंगे। 2026 WPL का फाइनल कोटाम्बी में खेला गया था, जिसमें RCB ने दिल्ली कैपिटल्स को 6 विकेट से हराया था। आने वाले महीनों में BCCI का व्यस्त कार्यक्रम BCCI के लिए आने वाले महीने काफी व्यस्त रहने वाले हैं। इस दौरान IPL और WPL के ऑक्शन के साथ WPL 2027 और छह टीमों वाली विमेंस चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन की तैयारियां भी की जाएंगी।
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बिलासपुर कलेक्टर जनदर्शन में रोजगार और मुआवजे की मांग, फ्लाई ऐश से 8 एकड़ खेत बर्बाद होने की शिकायत

बिलासपुर। जिले में आयोजित कलेक्टर जनदर्शन के दौरान मजदूरी भुगतान, मुआवजा, रोजगार और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़ी कई शिकायतें सामने आईं। ग्रामीणों ने जिंदल पावर एंड स्टील कंपनी में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने, फ्लाई ऐश से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा दिलाने और सरकारी दस्तावेज जारी कराने की मांग रखी। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने लोगों की समस्याएं सुनीं और कई मामलों में संबंधित अधिकारियों को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिंदल कंपनी में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग ग्राम गोड़ाडीह के संतनु कुमार कुर्रे सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि जिंदल पावर एंड स्टील कंपनी में स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग को लेकर पहले भी प्रदर्शन किया जा चुका है। ग्रामीणों के अनुसार, कंपनी ने स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने का आश्वासन दिया था। हालांकि, अब तक बेरोजगार युवाओं को अपेक्षा के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों ने कंपनी के खिलाफ उचित कार्रवाई करते हुए स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। इस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी को आवेदन सौंपकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। फ्लाई ऐश से किसानों के खेतों में घुसी राखड़, 7-8 एकड़ फसल बर्बाद मस्तुरी तहसील क्षेत्र के सतीश पाल सहित कुछ किसानों ने फ्लाई ऐश से फसल बर्बाद होने की शिकायत की। किसानों ने बताया कि ग्राम पंचायत जयरामनगर खैरा बस्ती के कमल सोनी और दिलहरण यादव द्वारा चूना पत्थर की खदान में राखड़ की पटाई की गई थी। किसानों का आरोप है कि राखड़ का उचित रखरखाव नहीं किया गया। बारिश के दौरान फ्लाई ऐश बहकर उनके खेतों में पहुंच गई, जिससे धान की फसल को भारी नुकसान हुआ। किसानों के अनुसार, राखड़ भरने से करीब 7 से 8 एकड़ जमीन और फसल प्रभावित हुई है। इससे उनके सामने खेती करने का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने नुकसान का उचित मुआवजा देने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। राजस्व रिकॉर्ड में 9 नाम होने से धान बेचने में परेशानी मस्तुरी तहसील के ग्राम इटवा निवासी रामेश्वर यादव ने बताया कि उनकी पुश्तैनी जमीन राजस्व रिकॉर्ड में 9 लोगों के नाम दर्ज है। इसके कारण उनके नाम से एग्रीटेक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है और वह धान बेचने में असमर्थ हैं। कलेक्टर ने तहसीलदार मस्तुरी को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वहीं, रतनपुर तहसील के ग्राम सीस निवासी रामभाऊ डिक्सेना ने बारिश में मकान गिरने के बाद आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। नाली निर्माण की मजदूरी में गड़बड़ी का आरोप जनपद पंचायत तखतपुर के ग्राम पंचायत देवरीकला के ग्रामीणों ने वर्ष 2025-26 में कराए गए नाली निर्माण कार्य की मजदूरी के भुगतान में गड़बड़ी का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की मजदूरी का भुगतान सरपंच ने अपने और अपने परिचितों के नाम पर कर दिया। शिकायत पर कलेक्टर ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 6-7 महीने से चक्कर लगाने का आरोप सकरी तहसील के ग्राम समडील निवासी कुंजबिहारी अनंत ने शिकायत की कि उनकी बेटी अंजना कुमारी के विवाह प्रमाण पत्र और उनकी मां पूना बाई अनंत के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए ग्राम सचिव पिछले 6 से 7 महीनों से टालमटोल कर रहा है। उन्होंने दोनों प्रमाण पत्र जारी कराने की मांग की, ताकि संबंधित जरूरी कार्य पूरे किए जा सकें। सर्वेयर के काम का 18,730 रुपये भुगतान नहीं मिलने की शिकायत कोटा क्षेत्र के भारत सिंह ने सर्वेयर के काम के 18,730 रुपये का भुगतान नहीं मिलने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि भुगतान से संबंधित दस्तावेज तहसील कार्यालय में जमा किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक राशि का भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने कलेक्टर से लंबित भुगतान दिलाने की मांग की। जनदर्शन में सामने आई शिकायतों पर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
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बिलासपुर में पटाखों जैसी आवाज निकालने वाली बाइकों पर कार्रवाई, 8 बुलेट समेत 20 वाहन जब्त

बिलासपुर। शहर की सड़कों पर मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न के जरिए तेज आवाज निकालकर लोगों में दहशत फैलाने वाले बाइकर्स के खिलाफ यातायात पुलिस ने कार्रवाई की है। मंगलवार को चलाए गए अभियान में पुलिस ने 8 बुलेट सहित कुल 20 वाहनों को जब्त किया। सभी वाहनों के खिलाफ चालानी कार्रवाई कर प्रकरण न्यायालय भेजे जा रहे हैं। कई प्रमुख चौराहों पर चलाया गया जांच अभियान एएसपी ट्रैफिक रामगोपाल करियारे ने बताया कि सत्यम चौक, अग्रसेन चौक, पुराना बस स्टैंड, सीएमडी चौक, श्रीकांत वर्मा मार्ग, महिमा तिराहा और मैग्नेटो मॉल रोड सहित अन्य स्थानों पर वाहनों की जांच की गई। इस दौरान पुलिस को कई वाहनों में नियमों का उल्लंघन मिला। इनमें मॉडिफाइड साइलेंसर, बुलेट में प्रेशर हॉर्न, बिना नंबर प्लेट, नंबर प्लेट पर टेप लगाने और स्टाइलिश नंबर प्लेट लगाने वाले वाहन शामिल थे। जांच के दौरान 20 वाहनों को जब्त कर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस सभी मामलों को न्यायालय भेजने की प्रक्रिया में जुटी है। पटाखों जैसी आवाज से लोगों को होती है परेशानी यातायात पुलिस के अनुसार, मॉडिफाइड साइलेंसर से अचानक पटाखे जैसी तेज आवाज निकलती है। इससे ध्वनि प्रदूषण बढ़ने के साथ राहगीरों में डर और बेचैनी की स्थिति पैदा हो सकती है। पुलिस ने बताया कि तेज आवाज का बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों पर भी विपरीत असर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ऐसे वाहनों के खिलाफ लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। साइलेंसर बेचने वाली दुकानों पर भी होगी कार्रवाई एएसपी ट्रैफिक रामगोपाल करियारे ने बताया कि मॉडिफाइड साइलेंसर बेचने वाली दुकानों और एजेंसियों के खिलाफ पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है और उन्हें नोटिस दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे साइलेंसर की बिक्री की सूचना मिलने पर संबंधित दुकानदारों और एजेंसियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान डीएसपी शिवचरण परिहार और उनकी टीम द्वारा चलाया गया। पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे निर्धारित मानकों के विपरीत किसी भी तरह का मॉडिफिकेशन न कराएं और यातायात नियमों का पालन करें।
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उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन, 5 हजार से ज्यादा लोग जुटे; संतों ने कहा- प्रतिमा हटाई तो 50 हजार भक्त आएंगे

उज्जैन। सराफा बाजार स्थित खड़े हनुमान मंदिर को मार्ग चौड़ीकरण के दौरान यथास्थान बनाए रखने की मांग को लेकर बुधवार को सकल हिंदू समाज ने शक्ति प्रदर्शन किया। मंदिर से कंठाल चौराहे तक करीब एक किलोमीटर के क्षेत्र में हजारों श्रद्धालु जुटे। इस दौरान साधु-संतों ने भक्तों को मंदिर की प्रतिमा को उसी स्थान पर बनाए रखने और भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प दिलाया। आयोजन में 5 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। इनमें साधु-संतों के साथ महिलाएं और बच्चे भी मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और जय श्रीराम के जयकारे लगाए। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और प्रशासन की टीम तैनात रही। संतों ने दिलाई मंदिर को यथास्थान रखने की शपथ कार्यक्रम के दौरान संतों ने श्रद्धालुओं को खड़े हनुमान सरकार की प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित रखने की शपथ दिलाई। मंच से प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा गया कि प्रतिमा हटाने की कार्रवाई दिन में करके दिखाई जाए। संतों ने कहा कि यदि मांग नहीं मानी गई तो अगली बार बड़ी संख्या में भक्तों को एकत्र किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रतिमा को यथास्थान बनाए रखने और उसी स्थान पर भव्य मंदिर बनाने का संकल्प लिया गया। एसडीएम को सौंपा ज्ञापन सर्व समाज की ओर से एसडीएम एलेन गर्ग को बाबा महाकालेश्वर के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई कि मार्ग चौड़ीकरण के दौरान खड़े हनुमान मंदिर और प्रतिमा को किसी अन्य स्थान पर विस्थापित न किया जाए। समाज के लोगों ने कहा कि प्रतिमा के आसपास की कुछ संरचनाएं चौड़ीकरण के लिए हटाई जा चुकी हैं, लेकिन प्रतिमा को हटाने के प्रयास सफल नहीं हुए। श्रद्धालुओं ने इसी स्थान पर भव्य मंदिर निर्माण की मांग रखी। विहिप ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी विश्व हिंदू परिषद के महेश आंजना ने कहा कि पिछले 15 से 17 दिनों से खड़े हनुमानजी को हटाने की योजनाओं से जुड़ी जानकारी सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि समाज की मांग है कि प्रतिमा को किसी अन्य स्थान पर न ले जाया जाए। उन्होंने बताया कि बुधवार को हजारों लोग आस्था के समर्थन में जुटे हैं। मांग पूरी नहीं होने पर संतों के नेतृत्व में विहिप और बजरंग दल आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार करेंगे। उन्होंने अगली बार 50 हजार लोगों के जुटने की बात कही। पुजारी बोले- कार्रवाई करनी है तो दिन में करें महाकाल मंदिर के पुजारी महेश गुरु ने कहा कि खड़े हनुमान मंदिर को लेकर हिंदू समाज की भावनाएं प्रशासन तक पहुंचा दी गई हैं। उन्होंने मंदिर को यथास्थान बनाए रखने और प्रतिमा का सम्मान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन प्रतिमा हटाने का निर्णय लेता है तो कार्रवाई रात में नहीं, बल्कि दिन में की जाए। इस दौरान उन्होंने आंदोलनकारियों के विरोध और बलिदान की तैयारी से जुड़ी तीखी चेतावनी भी दी। एसडीएम ने कहा- मांग मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे ज्ञापन लेने के बाद एसडीएम एलेन गर्ग ने कहा कि बाबा महाकालेश्वर के नाम से ज्ञापन प्राप्त हुआ है। प्रशासन समाज की मांग को उचित माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित मंच तक पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसकी जानकारी लोगों को दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रही। आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
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ग्वालियर जिला न्यायालय में 19 सितंबर को लगेगा नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, पहले दिन 112 के ब्लड सैंपल

ग्वालियर जिला न्यायालय परिसर में न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष पहल की जा रही है। ‘उल्लास एक अभिनव प्रयास’ अभियान के तहत 19 सितंबर को नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर की तैयारियों के तहत मंगलवार, 15 सितंबर से ब्लड टेस्ट की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहले दिन 112 न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के रक्त के नमूने लिए गए। हाईकोर्ट के निर्देश पर आयोजित हो रहा शिविर यह स्वास्थ्य शिविर हाईकोर्ट जबलपुर के निर्देश पर आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के अध्यक्ष ललित किशोर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। स्वास्थ्य शिविर के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय का सहयोग लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वास्थ्य संबंधी जांच की सुविधा उपलब्ध कराना है। ब्लड सैंपल के साथ बनाई जा रही आभा आईडी शिविर की तैयारियों के दौरान न्यायालय परिसर में स्वास्थ्य जांच के लिए टीमें तैनात की गई हैं। ये टीमें न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के ब्लड सैंपल लेने के साथ उनकी आभा (ABHA) आईडी बनाने का काम भी कर रही हैं। 15 सितंबर से शुरू हुई इस प्रक्रिया में पहले दिन 112 लोगों के सैंपल लिए गए। आने वाले दिनों में अन्य न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों की भी स्वास्थ्य जांच की जाएगी। 19 सितंबर को होगा मुख्य स्वास्थ्य शिविर ब्लड टेस्ट और अन्य तैयारियों के बाद 19 सितंबर को जिला न्यायालय परिसर में मुख्य नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर में न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
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बिलासपुर लोक अदालत के फैसले पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, बिना समझौते ठेकेदार को मुआवजे से मुक्त करना गलत

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में लोक अदालत द्वारा बिना किसी आपसी समझौते के मुआवजे से जुड़े मामले को खत्म करने के फैसले को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोक अदालत को किसी मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाने का अधिकार नहीं है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की अदालत ने कहा कि लोक अदालत का अधिकार क्षेत्र दोनों पक्षों की आपसी सहमति और समझौते के आधार पर विवाद का निपटारा करने तक सीमित है। यदि पक्षों के बीच समझौता नहीं होता है, तो मामले को संबंधित अदालत में वापस भेजना जरूरी है। हाईकोर्ट ने राज्य विद्युत मंडल (CSPDCL) की याचिका स्वीकार करते हुए लेबर कोर्ट को मामले की दोबारा सुनवाई कर 5 महीने के भीतर कानून के अनुसार फैसला सुनाने का निर्देश दिया है। सहमति के बिना ठेकेदार को जिम्मेदारी से मुक्त करना गलत हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक मामले के सभी पक्षों के बीच आपसी सहमति नहीं बनती, तब तक लोक अदालत ठेकेदार को मुआवजा देने के दायित्व से मुक्त नहीं कर सकती। कोर्ट ने CSPDCL के खिलाफ पारित एकपक्षीय आदेश और लोक अदालत की ओर से 2014 में जारी अवार्ड को रद्द कर दिया। साथ ही लेबर कोर्ट को पूरे मामले की फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया। क्या है लोक अदालत का अधिकार क्षेत्र? लोक अदालत विवादों को आपसी सहमति और समझौते के जरिए सुलझाने का वैकल्पिक मंच है। इसे विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत वैधानिक दर्जा प्राप्त है। लोक अदालत का उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों या मुकदमा दायर होने से पहले के विवादों का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करना है। समझौता होने पर लोक अदालत का फैसला सिविल कोर्ट की डिक्री के समान माना जाता है और संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी होता है। सामान्य परिस्थितियों में इसके खिलाफ अपील का प्रावधान नहीं होता। हालांकि, यदि पक्षों के बीच समझौता नहीं होता है तो लोक अदालत को मामले के गुण-दोष पर फैसला सुनाने के बजाय उसे संबंधित कोर्ट में वापस भेजना होता है। 2012-13 में करंट की चपेट में आने से हुई थी युवक की मौत मामला CSPDCL से जुड़ा है। कंपनी ने बिजली मेंटेनेंस और अन्य कार्यों के लिए अभिनव तिवारी को ठेका दिया था। ठेकेदार ने छोटू उर्फ शत्रुहन नाम के युवक को काम पर रखा था। साल 2012-13 में काम के दौरान छोटू करंट की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद छोटू के माता-पिता ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत लेबर कोर्ट में दावा पेश किया। उन्होंने करीब 9 लाख 880 रुपएमुआवजे की मांग की थी। CSPDCL ने यह रकम कोर्ट में जमा कर दी थी। हालांकि, कंपनी का कहना था कि मुआवजा देने की वास्तविक जिम्मेदारी ठेकेदार अभिनव तिवारी की है और जमा की गई राशि ठेकेदार से वसूल की जानी चाहिए। वहीं, ठेकेदार ने छोटू को अपना कर्मचारी मानने से इनकार कर दिया और मुआवजा देने की जिम्मेदारी भी स्वीकार नहीं की। लोक अदालत में बिना समझौते के बंद कर दिया गया मामला CSPDCL और ठेकेदार के बीच विवाद लेबर कोर्ट में चल रहा था। इसी दौरान ठेकेदार ने मामला लोक अदालत में पेश किया। लोक अदालत में छोटू के परिजनों ने कहा कि मुआवजे की राशि पहले ही कोर्ट में जमा हो चुकी है, इसलिए वे मामले को मेरिट के आधार पर आगे नहीं बढ़ाना चाहते। इसके बाद 6 दिसंबर 2014 को लोक अदालत ने मामले को बंद कर दिया। साथ ही ठेकेदार को मुआवजा देने की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया। हालांकि, इस दौरान CSPDCL और ठेकेदार के बीच कोई आपसी समझौता नहीं हुआ था। CSPDCL ने हाईकोर्ट में दी चुनौती लोक अदालत के इस फैसले के खिलाफ CSPDCL ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने अपनी याचिका में कहा कि लोक अदालत ने उसका पक्ष सुने बिना एकपक्षीय आदेश जारी किया, जबकि मामले में पक्षकारों के बीच कोई समझौता भी नहीं हुआ था। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद CSPDCL की अपील स्वीकार कर ली और लोक अदालत के 2014 के अवार्ड को रद्द कर दिया। अब लेबर कोर्ट इस मामले की दोबारा सुनवाई करेगा और हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार 5 महीने के भीतर मामले का फैसला करना होगा।
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बिलासपुर में रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी से साइबर ठगी, ऐप डाउनलोड करते ही खाते से उड़ गए 90 हजार रुपए

बिलासपुर में रेलवे के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को वेतन और मेडिकल कार्ड से जुड़ी जानकारी लेना महंगा पड़ गया। साइबर ठग ने फोन कर पहले उनसे नौकरी और पेंशन से संबंधित जानकारी हासिल की। इसके बाद एक प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर मोबाइल में ऐप डाउनलोड कराया। ऐप इंस्टॉल करने के कुछ ही देर बाद उनके बैंक खाते से लगातार रकम कटने लगी। जब तक पीड़ित कुछ समझ पाते, खाते से करीब 90 हजार रुपए निकाले जा चुके थे। उन्होंने तत्काल बैंक से संपर्क कर खाता ब्लॉक कराया और तोरवा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। फोन पर ली वेतन और मेडिकल कार्ड की जानकारी घटना 11 सितंबर की सुबह की बताई जा रही है। रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी जी. भीमाराव के मोबाइल पर एक व्यक्ति ने फोन किया। कॉल करने वाले ने उनसे पूछा कि उनका वेतन बन रहा है या नहीं और मेडिकल कार्ड तैयार हुआ है या नहीं। बातचीत के दौरान आरोपी ने खुद को संबंधित प्रक्रिया से जुड़ा बताकर भीमाराव को एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा। पीड़ित ने आरोपी के बताए तरीके के अनुसार ऐप अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर लिया। ऐप डाउनलोड करते ही शुरू हुए ट्रांजेक्शन ऐप डाउनलोड करने के कुछ समय बाद भीमाराव के बैंक खाते से लगातार रकम कटने लगी। खाते की जांच करने पर उन्हें पता चला कि करीब 90 हजार रुपए निकाले जा चुके हैं। घटना का पता चलते ही उन्होंने बैंक से संपर्क किया और अपना खाता ब्लॉक करवाया। इसके बाद तोरवा थाने पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। साइबर ठगी का नया तरीका: पहले भरोसा, फिर ऐप साइबर ठग लोगों को विश्वास में लेने के लिए अक्सर खुद को बैंक, रेलवे, सरकारी विभाग, बीमा कंपनी या किसी अन्य संस्थान का कर्मचारी बताते हैं। ठग पहले पीड़ित से ऐसी सामान्य जानकारी हासिल करते हैं, जिससे उन्हें वास्तविक कर्मचारी होने का भरोसा हो जाए। इसके बाद वे KYC, पेंशन, वेतन, मेडिकल कार्ड या किसी अन्य प्रक्रिया को पूरा कराने के नाम पर मोबाइल में ऐप डाउनलोड करवाते हैं। अनजान ऐप के जरिए ठग मोबाइल या बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप डाउनलोड करना भारी पड़ सकता है। साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
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इंदौर में हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान की 46 अचल संपत्तियों का खुलासा, बाजार मूल्य 64 करोड़ रुपये से अधिक

इंदौर में पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (PTC) में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान के खिलाफ लोकायुक्त की आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच में नए खुलासे हुए हैं। लोकायुक्त के मुताबिक, 19 अक्टूबर तक की जांच में फिरोज खान, उनके परिवार, सहयोगियों और संबंधित फर्म के नाम पर कुल 46 अचल संपत्तियां खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। इन संपत्तियों की अनुमानित वर्तमान बाजार कीमत 64 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है, जबकि इनकी कुल गाइडलाइन कीमत करीब 17.19 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्तियों पर अब तक 18.79 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने की जानकारी मिली है। लोकायुक्त संपत्तियों के दस्तावेजों, खरीद में इस्तेमाल की गई राशि और संबंधित लोगों की भूमिका का सत्यापन कर रहा है। जांच अभी जारी है। रंगवासा से लसूड़िया मोरी तक जमीन खरीदने की जानकारी जांच के दौरान इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के ग्राम रंगवासा में कई कृषि भूमि की रजिस्ट्रियां सामने आई हैं। ये जमीनें वर्ष 2023 और 2024 में अलग-अलग तारीखों पर खरीदी गई थीं। इसके अलावा, जुलाई 2024 में लसूड़िया मोरी क्षेत्र में रेड कारपेट के पीछे 11.771 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदे जाने की जानकारी मिली है। इस जमीन का गाइडलाइन मूल्य करीब 3.85 करोड़ रुपये बताया गया है। लोकायुक्त के मुताबिक, इन जमीनों की खरीद स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर की गई। जांच में सामने आया है कि यह फर्म फिरोज खान की पत्नी हिना खान और इंदौर निवासी युवराज पंवार के संयुक्त नाम से संचालित है। एजेंसी फर्म से जुड़े दस्तावेजों और अन्य जानकारियों की भी जांच कर रही है। लोकायुक्त की जांच में अब तक सामने आए आंकड़े लोकायुक्त की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जांच में अब तक ये आंकड़े सामने आए हैं: ये आंकड़े जांच के दौरान अब तक जुटाई गई जानकारी पर आधारित हैं। संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व, खरीद के लिए इस्तेमाल की गई राशि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का सत्यापन किया जा रहा है। 14 अक्टूबर को कई ठिकानों पर हुई थी सर्चिंग लोकायुक्त ने 14 अक्टूबर को फिरोज खान के विभिन्न आवासों और अन्य ठिकानों पर सर्च कार्रवाई की थी। इसके बाद से जांच एजेंसी संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है। जांच में संपत्तियों की खरीद की तारीख, गाइडलाइन मूल्य और अनुमानित बाजार मूल्य का मिलान किया जा रहा है। आय के ज्ञात स्रोतों और संपत्तियों पर किए गए खर्च के बीच संभावित अंतर का आकलन जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है और मामले में आगे की जानकारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर सामने आएगी।

लाहौल-स्पीति में दर्दनाक सड़क हादसा: चंद्रभागा नदी के किनारे गिरी कार, 3 की मौत; चालक समेत 4 घायल

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के तिन्दी क्षेत्र में सोमवार शाम दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। शादी समारोह में शामिल होने जा रहे ग्रामीणों से भरी एक कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे चंद्रभागा नदी के किनारे जा गिरी। हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार चालक समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) उदयपुर पहुंचाया गया है। वीर मंदिर के पास मोड़ पर चालक ने खोया नियंत्रण पुलिस जिला मुख्यालय केलांग से मिली जानकारी के अनुसार, हादसा सोमवार शाम करीब 4 बजे हुआ। हरियाणा नंबर की i20 कार में सात लोग सवार होकर तिन्दी गांव से सलग्रां गांव में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। इनमें छह लोग सलग्रां गांव और एक व्यक्ति भुजुंड गांव का निवासी था। कार जब तिन्दी के समीप वीर मंदिर के पास एक मोड़ पर पहुंची, तो चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद कार सड़क से नीचे गहरी ढांक में गिरते हुए चंद्रभागा नदी के किनारे जा पहुंची। डीएसपी केलांग केडी शर्मा ने बताया कि पुलिस ने मामले में नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में चालक की लापरवाही हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। पुलिस और प्रशासन ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस चौकी तांदी, पुलिस थाना उदयपुर और स्थानीय प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। बचाव दल ने घायलों को निकालकर CHC उदयपुर पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। वहीं, तीनों मृतकों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी कार्रवाई के लिए CHC उदयपुर भेजे गए हैं। हादसे में जान गंवाने वालों के नाम पुलिस के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले तीनों लोग सलग्रां गांव के निवासी थे। चार लोग घायल, चालक भी शामिल हादसे में घायल चारों लोगों की पहचान इस प्रकार हुई है: घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: पंजाब सरकार की 3 महिला IAS अधिकारियों की कमेटी से बातचीत बेनतीजा, अंतिम संस्कार से इनकार

पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में परिवार और पंजाब सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है। परिजनों की मांगों पर बातचीत के लिए राज्य सरकार की ओर से गठित तीन महिला IAS अधिकारियों की कमेटी की पहली बैठक सोमवार को बेनतीजा रही। परिवार और एक्शन कमेटी ने साफ कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक झोटा का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा और धरना जारी रहेगा। सोमवार को तीनों महिला IAS अधिकारी झोटा के पिता भीम सिंह और पत्नी मनप्रीत कौर से मिलने पहुंचीं। इस दौरान परिवार की ओर से गठित एक्शन कमेटी के सदस्य भी मौजूद रहे। बैठक के बाद कमेटी के सदस्यों ने बताया कि सरकार की ओर से रखे गए प्रस्तावों पर सहमति नहीं बन सकी है। मांगपत्र सौंपा, CBI जांच की मांग पर अड़ा परिवार एक्शन कमेटी के सदस्यों के मुताबिक, सरकार की कमेटी को मांगपत्र सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना खत्म नहीं किया जाएगा और अंतिम संस्कार भी नहीं होगा। एक्शन कमेटी ने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को परिवार से मिलने आ रहे हैं। कमेटी की मांग है कि अमित शाह परिवार से मुलाकात के दौरान मामले की CBI जांच का ऐलान करें। AAP विधायकों को लानत पत्र देने पहुंचे समर्थक, पुलिस से धक्कामुक्की परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में सोमवार को इंसाफ कमेटी, किसान संगठनों और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के घरों पर लानत पत्र देने का अभियान चलाया। इस दौरान कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। लुधियाना में AAP विधायक अशोक पराशर पप्पी के घर की ओर जा रहे अकाली नेताओं को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया। नेताओं ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिसके बाद छह नेताओं को आगे जाने की अनुमति दी गई। वहीं, बठिंडा के तलवंडी साबो में विधायक प्रो. बलजिंदर कौर के घर के बाहर पुलिस और किसान व अकाली नेता आमने-सामने आ गए। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ते हुए विधायक की कोठी पर लानत पत्र चिपका दिया। मौड़ मंडी में धरने के दौरान अकाली नेताओं में बहस मौड़ मंडी में विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना के घर के बाहर चल रहे धरने के दौरान भी माहौल गरमा गया। यहां अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के हलका इंचार्ज और शिरोमणि अकाली दल (बादल) के एक कार्यकर्ता के बीच तीखी बहस हुई। बताया जा रहा है कि विवाद उस समय शुरू हुआ, जब लक्खा सिधाना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर बयान दे रहे थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पंजाब की अलग-अलग सरकारों के कामकाज, पूर्व अकाली सरकार के फैसलों और भाजपा के साथ गठबंधन जैसे मुद्दों पर बहस हुई। पिता बोले- पत्नी भी एक्शन कमेटी में होंगी शामिल परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने कहा कि अब उनकी बहू मनप्रीत कौर खुद एक्शन कमेटी में शामिल होंगी और मीडिया को भी संबोधित करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि एक्शन कमेटी के कुछ सदस्यों ने पहले अमित शाह के विरोध का ऐलान किया था। भीम सिंह के मुताबिक, यदि गृह मंत्री का विरोध किया जाता है, तो परिवार इसे अपने विरोध के रूप में देखेगा। फिलहाल परिवार अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। सरकार और एक्शन कमेटी के बीच बातचीत में सहमति नहीं बनने से मामले का समाधान निकलने का इंतजार जारी है।

दशहरे पर PM मोदी और अमित शाह होंगे शामिल, रामलीला स्थलों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

राजधानी दिल्ली में विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार दशहरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अलग-अलग रामलीला आयोजनों में शामिल होंगे। दोनों नेताओं के आगमन को देखते हुए आयोजन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी दिल्ली में इंद्रप्रस्थ रामलीला समिति के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं, अमित शाह लाल किला स्थित माधवदास पार्क में श्री धार्मिक रामलीला समिति के आयोजन में शिरकत करेंगे। दोनों नेता प्रतीकात्मक रूप से धनुष से बाण चलाकर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन करेंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर रहेंगी। आयोजन स्थलों पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। दर्शकों की संभावित भीड़ को देखते हुए आसपास की सड़कों पर यातायात प्रतिबंध और रूट डायवर्जन लागू किए जा सकते हैं। लोगों को आयोजन स्थलों पर जाने से पहले यातायात संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी लेने की सलाह दी गई है। डिजिटल आतिशबाजी और हाईटेक पुतले होंगे आकर्षण दिल्ली की प्रमुख रामलीला समितियों ने दशहरा उत्सव को भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां की हैं। इस बार डिजिटल आतिशबाजी, आधुनिक तकनीक से तैयार विशाल पुतले और भव्य मंचन दर्शकों के लिए खास आकर्षण होंगे। रामलीला आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन समितियां उत्सव को यादगार बनाने के साथ-साथ दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए भी तैयारियां कर रही हैं। Desh Har Pal वेबसाइट पर देश-दुनिया, राजनीति और त्योहारों से जुड़ी ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें।

दिल्ली में 6 नए बायोगैस प्लांट लगेंगे, CM रेखा गुप्ता ने किया गोयला डेयरी प्लांट का उद्घाटन

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को कैबिनेट मंत्री आशीष सूद के साथ गोयला डेयरी में 200 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले बायोगैस प्लांट का उद्घाटन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दिल्ली में 6 और बायोगैस प्लांट स्थापित करने की घोषणा की। साथ ही डेयरी कॉलोनियों में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य डेयरी से निकलने वाले गोबर का उचित निस्तारण करना, प्रदूषण कम करना और पशुपालकों को अतिरिक्त आय का अवसर देना है। रोज 200 टन गोबर से बनेगी कंप्रेस्ड बायोगैस मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि गोयला डेयरी में प्रतिदिन करीब 200 टन गोबर निकलता है। उचित निस्तारण नहीं होने पर इसके नालियों के माध्यम से यमुना तक पहुंचने का खतरा बना रहता है। नए बायोगैस प्लांट में गोबर से प्रतिदिन लगभग 14 हजार घन मीटर कच्ची बायोगैस और 5.6 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) तैयार की जाएगी। तैयार गैस की आपूर्ति पाइपलाइन के जरिए इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) को की जाएगी। कार्यक्रम में दिल्ली की महापौर प्रवेश वाही, उपमहापौर डॉ. मोनिका पंत और विधायक संदीप सहरावत सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। नांगली प्लांट में 55 हजार टन गोबर का निस्तारण मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में 200-200 टन प्रतिदिन क्षमता वाले तीन बायोगैस संयंत्र शुरू किए जा चुके हैं। सितंबर 2025 में शुरू हुए नांगली प्लांट में एक साल के भीतर करीब 55 हजार टन गोबर का निस्तारण किया गया। सरकार की योजना दिल्ली में ऐसे और संयंत्र स्थापित कर डेयरी क्षेत्रों में गोबर के प्रबंधन को बेहतर बनाने की है। इससे कचरे के रूप में जमा होने वाले गोबर का इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकेगा। पशुपालकों को गोबर के मिलेंगे 67 पैसे प्रति किलो इस परियोजना के तहत संबंधित एजेंसी डेयरी संचालकों से 67 पैसे प्रति किलो की दर से गोबर खरीदेगी। इससे पशुपालकों को गोबर से अतिरिक्त कमाई होगी और उसके निस्तारण की समस्या भी कम हो सकेगी। इसके अलावा, डेयरी कॉलोनियों में जल निकासी व्यवस्था सुधारने के लिए घोषित 50 करोड़ रुपये से स्थानीय स्तर पर सफाई और जलभराव से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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