बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान चौकीदारों और दफेदारों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा ऐसा उठा कि सदन में तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे का माहौल बन गया। बात इतनी बढ़ी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish) और राजद विधायक भाई वीरेंद्र के बीच खुली नोकझोंक देखने को मिली।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में पटना में अपनी मांगों को लेकर चौकीदार और दफेदार सड़कों पर उतरे थे। उनका कहना था कि वे लंबे समय से वेतन, सेवा शर्तों और सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसे विपक्ष ने “अनावश्यक लाठीचार्ज” बताया।
इसी मुद्दे को लेकर विधानसभा में विपक्ष ने सरकार को घेरा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध जताया और जवाब की मांग की।
सदन में क्यों बढ़ी तल्खी?
बहस के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish) ने कहा कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका इशारा इस ओर था कि प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ रहे थे।
लेकिन भाई वीरेंद्र ने सरकार के इस पक्ष को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर लाठी क्यों चली? इसी बात पर दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जिसने माहौल और गर्म कर दिया।
RJD का हमला, सरकार का बचाव
मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने इसे कर्मचारियों की आवाज दबाने की कोशिश बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार समय रहते संवाद करती, तो नौबत लाठीचार्ज तक नहीं पहुंचती।
वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। सरकार का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर जनता को भ्रमित कर रहा है।
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