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Winter

Severe Winter in North India कश्मीर से राजस्थान तक सर्दी का कहर

उत्तर भारत में सर्दी और कोहरे का डबल अटैक उत्तर भारत इस समय भीषण ठंड (Winter) और घने कोहरे की चपेट में है। पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी राज्यों तक मौसम का मिजाज लगातार सख्त होता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में ठंड ने आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। सड़कों पर आवाजाही से लेकर कामकाज और स्वास्थ्य तक, हर स्तर पर सर्दी का असर साफ नजर आ रहा है। Sonmarg में रिकॉर्ड तोड़ ठंड, माइनस 11.2 डिग्री तक गिरा पारा जम्मू-कश्मीर के मशहूर पर्यटन स्थल सोनमर्ग (Sonmarg) में तापमान गिरकर –11.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। कड़ाके की शीतलहर के कारण झीलें और जलस्रोत जम गए हैं। कई इलाकों में पानी की पाइपलाइनें फ्रीज हो रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि, भारी ठंड के बावजूद बर्फ से ढके पहाड़ पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। प्रशासन ने मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। राजस्थान-MP में घना कोहरा, सड़क हादसों में 7 लोगों की मौत मैदानी राज्यों में स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम हो गई है। सुबह और रात के समय हाईवे और मुख्य सड़कों पर वाहन चलाना खतरनाक साबित हो रहा है। अलग-अलग जगहों पर हुए सड़क हादसों में 7 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन और पुलिस लगातार अलर्ट जारी कर रही है और ड्राइवरों से धीमी गति और सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। हरियाणा-पंजाब में तापमान 4°C से नीचे हरियाणा और पंजाब में भी ठंड का प्रकोप तेज हो गया है। दोनों राज्यों के 5 शहरों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। ठंडी हवाओं और कोहरे की वजह से सुबह की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है, जबकि ट्रेनें और बसें देरी से चल रही हैं। किसानों के लिए भी यह मौसम चुनौती बनता जा रहा है। मौसम विभाग की चेतावनी और जरूरी सावधानी मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों तक उत्तर भारत में ठंड और कोहरे से राहत मिलने की उम्मीद कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को खास सतर्कता बरतनी चाहिए। गर्म कपड़े पहनना, कोहरे में यात्रा से बचना और मौसम अपडेट पर नजर रखना बेहद जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शंकराचार्य

Prayagraj शंकराचार्य विवाद सुलह की ओर, प्रशासन देगा लिखित माफी!

प्रयागराज माघ मेला विवाद अब समाधान की ओर बढ़ता दिख रहा है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज प्रशासन के बीच चल रहा तनाव जल्द खत्म हो सकता है। ताज़ा घटनाक्रम में संकेत मिले हैं कि प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य से औपचारिक माफी मांगने को तैयार है, ताकि धार्मिक परंपरा और सम्मान को लेकर बना विवाद समाप्त किया जा सके। कैसे शुरू हुआ Shankaracharya–Prayagraj Controversy पूरा मामला 18 जनवरी, मौनी अमावस्या का है। उस दिन शंकराचार्य की परंपरागत पालकी को संगम नोज तक ले जाने से प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर रोक दिया। इसे शंकराचार्य ने अपमानजनक बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद वे माघ मेले क्षेत्र में लगातार 10 दिन तक धरने पर बैठे रहे, लेकिन समाधान न निकलने पर बिना संगम स्नान किए प्रयागराज छोड़कर चले गए। यह घटना साधु-संत समाज और धार्मिक संगठनों में भी चर्चा का विषय बन गई। प्रशासन की पहल: Lucknow से पहुंचे बड़े अधिकारी विवाद को बढ़ता देख लखनऊ से दो वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शंकराचार्य से मिलने वाराणसी पहुंचे। बातचीत के दौरान अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) को शंकराचार्य को पूरे सम्मान, परंपरा और सुरक्षा के साथ संगम स्नान कराया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इसी बातचीत में प्रशासन की ओर से माफी मांगने का प्रस्ताव भी सामने आया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की 2 शर्तें हालांकि शंकराचार्य ने साफ कर दिया है कि सुलह तभी संभव है जब उनकी दो शर्तें पूरी हों— क्या खत्म होगा विवाद? अब गेंद प्रशासन के पाले में है। माना जा रहा है कि धार्मिक भावनाओं और परंपराओं को देखते हुए प्रशासन शंकराचार्य की शर्तों पर सहमति जता सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह मामला सिर्फ एक विवाद का अंत नहीं होगा, बल्कि धार्मिक नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय की मिसाल भी बनेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UGC

Supreme Court ने लगाया UGC 2026 Rules पर रोक Higher Education में भारत की Unity जरूरी

भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने University Grants Commission (UGC) के नए 2026 Rules को स्थगित (stay) कर दिया है। इसका मतलब है कि ये नए नियम अभी लागू नहीं होंगे और पहले से मौजूद पुराने नियम ही फिलहाल मान्य रहेंगे। यह निर्णय शिक्षा जगत में काफी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि नए नियमों का मकसद था Higher Education Institutions में समानता (Equity) और भेदभाव रोकना। UGC के नए नियम क्या थे? नए नियमों के तहत: लेकिन ये नियम कुछ हद तक controversial साबित हुए। सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी रोक? मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि नियम में भेदभाव की परिभाषा केवल SC/ST/OBC तक सीमित है, जिससे General Category के लोगों को सुरक्षा नहीं मिलती। CJI ने यह भी कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में भारत की Unity और Samrasata झलकनी चाहिए, यानी शिक्षा का उद्देश्य कभी विभाजन पैदा नहीं करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने नियमों को vague और misuse के लिए सक्षम बताया। इसका मतलब है कि नियमों की भाषा इतनी अस्पष्ट थी कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता था। अब क्या होगा? अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय की गई है। छात्रों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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प्रेम बाईसा

साध्वी प्रेम बाईसा Suspicious Death इंस्टाग्राम पोस्ट ने बढ़ाई विवाद की आग

जोधपुर के चर्चित कथावाचक और साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत (suspicious death) ने पूरे राजस्थान में हलचल मचा दी है। उनके निधन के बाद सामने आया इंस्टाग्राम पोस्ट (Instagram post), जिसमें उन्होंने लिखा “दुनिया को अलविदा… न्याय की मांग”, ने मामले को और भी पेचीदा बना दिया है। मौत कैसे हुई? साध्वी प्रेम बाईसा को जोधपुर के आरती नगर आश्रम में अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में उन्हें ब्रेन डैड घोषित किया गया। उनके निधन की परिस्थितियाँ अभी संदिग्ध (suspicious circumstances) मानी जा रही हैं। इंस्टाग्राम पोस्ट का खुलासा उनकी मौत के कुछ घंटे बाद इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा किया गया। इसमें उन्होंने लिखा कि उन्होंने जीवन सनातन धर्म के प्रचार में समर्पित किया और अब दुनिया को अलविदा कह रही हैं, साथ ही कहा कि न्याय उन्हें जीवन में नहीं, शायद मौत के बाद मिलेगा। यह पोस्ट कई लोगों के लिए शॉकिंग (shocking) थी, क्योंकि यह उनकी मृत्यु की पुष्टि होने के बाद प्रकाशित हुई थी। पिछला विवाद और मानसिक दबाव पिछले साल साध्वी प्रेम बाईसा एक वायरल वीडियो विवाद में भी फंसी थीं। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो वायरल हुआ था और उन्होंने दावा किया कि उन्हें ब्लैकमेल किया गया। उन्होंने इसे मानसिक प्रताड़ना और बदनाम करने की साजिश बताया। राजनीतिक और समाजिक प्रतिक्रिया साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के बाद नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल समेत कई नेताओं ने उच्च स्तरीय जांच (high-level inquiry) की मांग की। समाज और उनके समर्थकों ने भी सच्चाई और न्याय की पुकार लगाई है। मामला क्यों विवादित है? पुलिस और प्रशासन अब मामले की पूरी जांच (full investigation) कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह आत्महत्या (suicide) है या इसके पीछे कोई और साजिश (conspiracy) है। साध्वी प्रेम बाईसा का निधन न सिर्फ धार्मिक और समाजिक दृष्टि से चौंकाने वाला है, बल्कि उनके इंस्टाग्राम पोस्ट ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं। न्याय की मांग तेज़ है और पूरी जांच के बाद ही सच्चाई (truth) सामने आएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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हिमाचल

उत्तर भारत Weather Alert हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बर्फबारी, बारिश का अलर्ट

उत्तर भारत (North India) में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) में भारी Snowfall और Blizzard की वजह से जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं राजस्थान (Rajasthan), उत्तर प्रदेश (UP) और बिहार (Bihar) में बारिश की संभावना को लेकर लोगों में सतर्कता बढ़ गई है। हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी से बिगड़े हालात हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बर्फबारी और बारिश के चलते सड़कें पूरी तरह बंद हो गई हैं। राज्यभर में 889 से ज्यादा सड़कें बंद हैं, जिनमें चार राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में लाहौल-स्पीति, शिमला, कुल्लू, मंडी, चंबा और किन्नौर हैं। बर्फबारी के कारण हजारों बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित है और प्रशासन सड़कें खोलने और बिजली बहाल करने में जुटा हुआ है। उत्तराखंड में 4 फीट तक बर्फ उत्तराखंड (Uttarakhand) के पहाड़ी इलाकों में भी इस बार भारी Blizzard आया है। गढ़वाल और कुमाऊं के ऊपरी क्षेत्रों में सड़कों पर 3 से 4 फीट तक बर्फ जमी हुई है। बर्फ के चलते यातायात ठप हो गया है और कई गांव बर्फ की चादर में ढक गए हैं। प्रशासन ने लोगों से ऊंचाई वाले इलाकों की यात्रा टालने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। राजस्थान, यूपी और बिहार में बारिश का अलर्ट उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों में मौसम विभाग ने Rain Alert जारी किया है। IMD का अपडेट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों तक पहाड़ी इलाकों में Snowfall और Rain जारी रहने की संभावना जताई है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की सलाह मानने की हिदायत दी गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

India Reform Express Mode में Budget से पहले PM Modi ने दिए बड़े संकेत

संसद का बजट सत्र 2026 शुरू होते ही देश की आर्थिक दिशा को लेकर माहौल गर्म हो गया है। बजट से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सरकार की आगे की रणनीति की झलक साफ दिखा दी है। पीएम मोदी ने कहा —“अब हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं।” इस एक लाइन में सरकार की सोच, गति और इरादे तीनों साफ झलकते हैं। PM Modi का Reform Message क्या बताता है? बजट सत्र की पूर्व संध्या पर मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि उनकी सरकार की पहचान रही है —Reform, Perform और Transform।अब यह प्रक्रिया किसी धीमी ट्रेन की तरह नहीं, बल्कि एक्सप्रेस स्पीड से आगे बढ़ रही है। इस बयान को सीधे तौर पर Budget 2026 से जोड़कर देखा जा रहा है। संकेत साफ है कि आने वाला बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं होगा, बल्कि सिस्टम सुधार, निवेश बढ़ाने और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने पर फोकस करेगा। Viksit Bharat 2047 की राह PM Modi ने अपने संबोधन में विकसित भारत 2047 का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल अपनी ज़रूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के लिए भी एक भरोसेमंद विकास मॉडल बन रहा है। उनके मुताबिक, भारत का विकास मॉडल मानव-केंद्रित है, जहां फैसले सिर्फ GDP नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे हैं। Global Opportunities पर सरकार की नजर प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को भी एक बड़ा अवसर बताया। इससे भारतीय उद्योगों, MSME सेक्टर और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि भारत अब केवल सस्ता उत्पादन करने वाला देश नहीं, बल्कि गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा के दम पर आगे बढ़ने को तैयार है। Budget 2026 से क्या उम्मीदें? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। आर्थिक सर्वे पहले ही पेश किया जा चुका है, जिसमें मजबूत विकास दर और स्थिर अर्थव्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बजट में: Opposition vs Government: सत्र रहेगा गर्म बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने कई सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। ऐसे में संसद के भीतर बहस तेज रहने के आसार हैं, लेकिन सरकार का फोकस साफ है — रिफॉर्म की रफ्तार बनाए रखना। PM Modi का “रिफॉर्म एक्सप्रेस” वाला बयान सिर्फ एक राजनीतिक लाइन नहीं है, बल्कि Budget 2026 की दिशा का संकेत है। सरकार यह साफ करना चाहती है कि भारत अब ठहरने वाला नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था अब तेज़, निर्णायक और भविष्य-केंद्रित फैसलों की पटरी पर दौड़ रही है — और अगला बड़ा स्टेशन है बजट 2026। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ajit Pawar

Ajit Pawar बारामती में अंतिम विदाई परिवार संग पहुंचे अमित शाह, नितिन गडकरी और BJP अध्यक्ष

बारामती में वरिष्ठ राजनेता अजित पवार (Ajit Pawar) के अंतिम संस्कार की रस्में भावुक माहौल के बीच जारी हैं। अपने लोकप्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए पवार परिवार के साथ-साथ हजारों समर्थक और शुभचिंतक बारामती पहुंचे। हर आंख नम थी और हर चेहरा शोक में डूबा नजर आया। अजित पवार को राजकीय सम्मान (State Honours) के साथ अंतिम विदाई दी जा रही है। अंतिम संस्कार स्थल पर सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों तक, हर वर्ग में उनके निधन को लेकर गहरा दुख देखा गया। Ajit Pawar Funeral में देश के बड़े नेता हुए शामिल अंतिम संस्कार में केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों से कई दिग्गज नेता शामिल हुए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बारामती पहुंचकर अजित पवार को श्रद्धांजलि दी। महाराष्ट्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और विधायक भी इस दौरान मौजूद रहे। नेताओं ने अजित पवार के राजनीतिक जीवन, प्रशासनिक अनुभव और जनता से उनके गहरे जुड़ाव को याद किया। कई नेताओं ने कहा कि अजित पवार सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े हुए नेता थे, जिन्होंने दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति को दिशा दी। आंध्र प्रदेश से भी पहुंचे मंत्री नारा लोकेश अजित पवार के अंतिम संस्कार में आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्री नारा लोकेश भी शामिल हुए। उन्होंने पवार परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और इसे देश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। अन्य राज्यों से आए प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने अजित पवार के राष्ट्रीय स्तर के प्रभाव को साफ तौर पर दिखाया। शोक में डूबी बारामती, कड़े सुरक्षा इंतजाम बारामती और आसपास के इलाकों में शोक का माहौल है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ट्रैफिक व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। लोग शांतिपूर्वक कतारों में खड़े होकर अपने प्रिय नेता को अंतिम दर्शन कर रहे हैं। अजित पवार का जाना सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। बारामती आज अपने नेता को नम आंखों से अलविदा कह रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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EU

India-EU Free Trade Agreement भारतीय Industries को मिलेगा फायदा

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लंबे समय से चली आ रही बातचीत के बाद ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसे विशेषज्ञ अक्सर “सभी समझौतों की माँ” भी कहते हैं। यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों के बाजार और विश्व GDP के लगभग 25% हिस्से को कवर करता है। इस समझौते से भारत और यूरोप के बीच अधिकतर सामान पर शुल्क कम या खत्म हो जाएगा। इसका मतलब है कि भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय मार्केट तक पहुंच आसान होगी, और यूरोपीय कंपनियों के लिए भी भारत में व्यापार करना सरल होगा। कौन से सेक्टर होंगे सबसे ज्यादा फायदे में? अमेरिकी प्रशासन की राय ट्रंप प्रशासन के समय के अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर ने कहा कि यह समझौता भारत के लिए काफी लाभकारी साबित होगा। उन्होंने बताया कि भारत को यूरोप में व्यापार का बेहतर अवसर और कुछ मामलों में वर्कर वीज़ा जैसी सुविधाएँ भी मिल सकती हैं। ग्रीयर ने यह भी कहा कि अमेरिका के हाल के वर्षों के प्रोटेक्शनिस्ट टैरिफ और घरेलू उत्पादन प्रोत्साहन की नीतियों के चलते, भारत ने EU के साथ व्यापार बढ़ाने की दिशा चुनी। क्यों है यह समझौता खास? पिछले कुछ सालों में अमेरिका ने भारत से जुड़े कई मामलों में 25% तक टैरिफ लगाए, जिससे भारत ने यूरोप के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना जरूरी समझा। इस समझौते से भारत को न केवल निर्यात में फायदा, बल्कि वैश्विक व्यापार में अधिक विकल्प और रणनीतिक ताकत भी मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत और यूरोप के संबंधों को नए आयाम देगा और अमेरिका की प्रोटेक्शनिस्ट नीतियों के बीच भारत की जीत साबित होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Parliament

Parliament में ‘कानून वापस लो’ के नारे राष्ट्रपति के अभिभाषण में उठी बहस

संसद (Parliament) में राष्ट्रपति के अभिभाषण (Speech) के दौरान हंगामा मच गया। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में देश के विकास, सामाजिक सुधार और नई नीतियों का जिक्र किया। लेकिन जैसे ही VB–जी राम जी कानून का नाम आया, विपक्षी सदस्य जोर-जोर से नारे लगाने लगे। ‘कानून वापस लो’ के नारे गूंजे सदन में सदन में “कानून वापस लो” के नारे गूंजने लगे और हंगामा इतना बढ़ गया कि कुछ समय के लिए कार्यवाही रोकनी पड़ी। विपक्ष ने कानून के खिलाफ अपनी असहमति व्यक्त की, जबकि सत्तापक्ष ने सदन में शांति बनाए रखने की कोशिश की। राजनीतिक विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में विधायी और राजनीतिक बहसों (Legislative & Political Debates) में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, राष्ट्रपति ने अपने भाषण में देश की प्रगति और सामाजिक सुधार पर जोर देना जारी रखा। संसद में गहराते मतभेद इस घटना ने यह दिखा दिया कि संसद में संवैधानिक मुद्दों (Constitutional Issues) और कानूनों (Laws) पर राजनीतिक मतभेद कितने गहरे हैं। आगामी सत्रों में ऐसे मुद्दे फिर से बहस और हंगामे को जन्म दे सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शंकराचार्य

Magh Mela प्रशासन से नाराज़ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने छोड़ा माघ मेला

प्रयागराज माघ मेला 2026 में बड़ा घटनाक्रम प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला बीच में ही छोड़ दिया। उनके इस फैसले ने संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच गहरी चर्चा छेड़ दी है। मौनी अमावस्या पर संगम स्नान नहीं हो सका मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर शंकराचार्य संगम स्नान के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी पालकी को पुलिस और मेला प्रशासन ने रोक दिया। प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण का हवाला देते हुए उन्हें संगम तट तक जाने की अनुमति नहीं दी। प्रशासनिक रोक से आहत हुए शंकराचार्य इस घटना से व्यथित होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उसी दिन संगम स्नान करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि संगम स्नान केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आस्था, सम्मान और परंपरा से जुड़ा विषय है। धरने पर बैठे, संत सम्मान का मुद्दा उठाया स्नान न होने के बाद शंकराचार्य ने मेला क्षेत्र में अपने शिविर के बाहर धरना शुरू किया। उन्होंने प्रशासन पर संत समाज की गरिमा की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि यह मामला व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादाओं से जुड़ा है। कोई समाधान नहीं, माघ मेला छोड़ने का फैसला कई दिनों तक चले विरोध और बातचीत के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो शंकराचार्य ने माघ मेला छोड़ने का निर्णय ले लिया। भारी मन से प्रयागराज से विदाई मेला छोड़ते समय उन्होंने कहा,“मैं श्रद्धा लेकर यहां आया था, लेकिन बिना संगम स्नान किए लौट रहा हूं। ऐसी स्थिति की मैंने कभी कल्पना नहीं की थी।”उनके शब्दों में पीड़ा और निराशा साफ झलक रही थी। संत समाज और प्रशासन के बीच बढ़ी दूरी इस पूरे घटनाक्रम ने माघ मेला प्रशासन और संत समाज के संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई संत संगठनों ने इस पर नाराज़गी जताई है, वहीं सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। माघ मेला व्यवस्था पर उठे सवाल हालांकि प्रशासन का कहना है कि व्यवस्था सामान्य है, लेकिन शंकराचार्य के माघ मेला छोड़ने की घटना ने संतों के सम्मान, धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Air India Flight Update: सऊदी अरब जाने वालों की बढ़ी परेशानी, Riyadh-Jeddah-Dammam की Flights रद्द

Saudi Arabia जाने की तैयारी कर रहे भारतीय यात्रियों के लिए हवाई यात्रा से जुड़ी परेशानी बढ़ गई है। क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात के बीच एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों के शेड्यूल में बदलाव किया है। Air India की रियाद, जेद्दा और दम्माम जाने वाली उड़ानों को लेकर भी यात्रियों को अपडेट का इंतजार है। जिन लोगों ने आने वाले दिनों में टिकट बुक कराया है, उन्हें एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति जरूर जांच लेनी चाहिए। उड़ानों के रद्द होने या शेड्यूल बदलने से नौकरी, कारोबार और परिवार से मिलने के लिए सऊदी अरब जाने वाले यात्रियों की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में टिकट और यात्रा से जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार रखने के साथ एयरलाइन की आधिकारिक सूचना पर नजर रखना भी जरूरी है। Air India Flights Cancelled: किन शहरों पर पड़ा असर? Air India की उड़ानों से जुड़ी रिपोर्टों में रियाद, जेद्दा और दम्माम का जिक्र किया गया है। ये सऊदी अरब के प्रमुख शहर हैं, जहां भारत से बड़ी संख्या में यात्री आते-जाते हैं। उड़ानों के संचालन में बदलाव होने से यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख आगे बढ़ानी पड़ सकती है या वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, Air India ने पहले 17 अक्टूबर 2026 तक कुछ उड़ानें रद्द रखने की जानकारी दी थी। हालांकि, 20 अक्टूबर तक सभी उड़ानें रद्द रहने के दावे की ताजा आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। यात्रियों को अपनी फ्लाइट की तारीख के अनुसार एयरलाइन से जानकारी लेनी चाहिए। सऊदी अरब जाने वाले यात्रियों की बढ़ी चिंता सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। इसके अलावा, कारोबार, पारिवारिक मुलाकात और अन्य जरूरी कामों से भी लोग वहां की यात्रा करते हैं। ऐसे में अचानक उड़ानें रद्द होने या समय बदलने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिन यात्रियों की यात्रा पहले से तय है, उन्हें टिकट की स्थिति के साथ होटल बुकिंग, कनेक्टिंग फ्लाइट और अन्य व्यवस्थाओं की भी जांच कर लेनी चाहिए। खासकर दूसरी फ्लाइट से आगे की यात्रा करने वालों को समय रहते अपनी एयरलाइन से संपर्क करना चाहिए। आखिर क्यों प्रभावित हो रही हैं Flights? क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण एयरलाइंस को अपने उड़ान कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों और विमान के क्रू की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, किसी विशेष उड़ान को रद्द करने की वजह और उसकी अवधि की पुष्टि संबंधित एयरलाइन की आधिकारिक सूचना से ही की जानी चाहिए। Flight Cancel होने पर क्या करें? अगर आपकी Air India की फ्लाइट रद्द हो गई है या उसके समय में बदलाव हुआ है, तो घबराने के बजाय ये कदम उठाएं: यात्रियों के लिए जरूरी सलाह सऊदी अरब जाने वाले यात्रियों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि वे किसी पुरानी खबर के आधार पर अपनी यात्रा का फैसला न लें। उड़ानों की स्थिति में बदलाव हो सकता है और अलग-अलग एयरलाइंस की समयसीमा भी अलग हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kamchatka

Kamchatka में Earthquake: रूस में फिर कांपी धरती, पिछले साल सुनामी ने मचाई थी तबाही

रूस (Russia) के कामचटका (Kamchatka) प्रायद्वीप में 7.0 तीव्रता के भूकंप की खबर ने एक बार फिर इस क्षेत्र को चर्चा में ला दिया है। यह इलाका पहले भी बड़े भूकंप और सुनामी का सामना कर चुका है। साल 2025 में यहां के पास आए 8.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद समुद्र में उठी लहरों ने तटीय इलाकों को प्रभावित किया था। ऐसे में ताजा भूकंप के बाद लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कहीं इसका असर समुद्र और आसपास के क्षेत्रों पर तो नहीं पड़ेगा। Kamchatka Earthquake: रूस में कहां आया भूकंप? 16 अक्टूबर 2026 को रूस के कामचटका क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इसका केंद्र कामचटका के पूर्वी तट के पास था। भूकंप की गहराई करीब 140 से 148 किलोमीटर बताई गई है। भूकंप के बाद सबसे अहम सवाल सुनामी के खतरे को लेकर था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सुनामी चेतावनी केंद्र ने इस भूकंप के कारण सुनामी का खतरा नहीं बताया। घटना से जुड़े नुकसान और अन्य प्रभावों की विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक अपडेट पर नजर रखना जरूरी है। 2025 में आए Earthquake ने मचाई थी तबाही कामचटका का नाम सामने आते ही पिछले साल की बड़ी प्राकृतिक आपदा याद आती है। 29 जुलाई 2025 को रूस के कामचटका तट के पास 8.8 तीव्रता का भूकंप आया था। यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली दर्ज भूकंपों में से एक था। इस भूकंप के बाद प्रशांत महासागर में सुनामी की लहरें उठीं। रूस के तटीय इलाकों और उत्तरी कुरिल द्वीप समूह में समुद्र का पानी तेजी से आगे बढ़ा। कुछ जगहों पर लहरों ने तटीय बस्तियों और इमारतों को नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में सुनामी अलर्ट जारी किए गए थे। सुनामी की लहरों ने तटीय इलाकों को किया था प्रभावित 2025 में आए भूकंप के बाद समुद्र में उठी ऊंची लहरों ने तटीय क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी थी। कुछ इलाकों में समुद्र का पानी बस्तियों तक पहुंच गया और संपत्ति को नुकसान हुआ। इस घटना ने दिखाया कि समुद्र के नीचे आने वाला शक्तिशाली भूकंप केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर स्थित तटों पर भी असर डाल सकता है। हालांकि, 2025 की सुनामी और अक्टूबर 2026 में आए ताजा भूकंप को अलग-अलग घटनाओं के रूप में समझना चाहिए। दोनों के बीच सीधे संबंध की पुष्टि करने वाली जानकारी उपलब्ध नहीं है। बार-बार भूकंप क्यों आते हैं कामचटका में? रूस का कामचटका प्रायद्वीप प्रशांत महासागर के चारों ओर फैले Ring of Fire का हिस्सा है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार हलचल के कारण भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां होती रहती हैं। प्रशांत प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे खिसकती है। इस प्रक्रिया में जमीन के भीतर तनाव जमा होता है और जब यह तनाव अचानक निकलता है, तो भूकंप आता है। इसी भूगर्भीय गतिविधि के कारण कामचटका में शक्तिशाली भूकंप आने की आशंका बनी रहती है। क्या ताजा भूकंप से सुनामी का खतरा है? 16 अक्टूबर 2026 को आए 7.0 तीव्रता के भूकंप के संबंध में शुरुआती जानकारी में सुनामी का खतरा नहीं बताया गया। यह राहत की बात है, क्योंकि 2025 में इसी क्षेत्र के पास आए बड़े भूकंप के बाद समुद्र में उठी लहरों ने कई तटीय इलाकों को प्रभावित किया था। फिलहाल ताजा घटना से जुड़े नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आने का इंतजार है। विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप के प्रभाव का आकलन उसकी तीव्रता के साथ-साथ गहराई, केंद्र की स्थिति और आसपास की भूगर्भीय परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। कामचटका में आए इस भूकंप ने एक बार फिर याद दिलाया है कि प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से यह क्षेत्र कितना संवेदनशील है। फिलहाल सुनामी का खतरा नहीं होना राहत की खबर है, लेकिन आगे की आधिकारिक जानकारी पर नजर रखना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

CJP Tiranga March: दिल्ली में हाई अलर्ट, कनॉट प्लेस में धारा 163 लागू

राजधानी दिल्ली में 16 अक्टूबर को CJP के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है। वहीं, प्रशासन ने सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखने का फैसला लिया है। मार्च के मद्देनजर धारा 163 लागू होने और ट्रैफिक डायवर्जन की वजह से लोगों को आने-जाने में परेशानी हो सकती है। CJP के इस कार्यक्रम को लेकर दिल्ली में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज है। पार्टी की ओर से अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा मार्च का ऐलान किया गया है। दूसरी ओर, पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए सतर्क है। CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर बढ़ी हलचल अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की थी। पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए अपने नेताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध दर्ज कराना चाहती है। आरोप है कि उसके नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ कार्रवाई की गई। पार्टी ने इस मामले को लेकर विरोध जताया है। हालांकि, गिरफ्तारी से जुड़े आरोपों और प्रशासन के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है। Connaught Place में धारा 163 लागू, सुरक्षा बढ़ाई गई प्रस्तावित मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हैं। इन आदेशों का उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और किसी संभावित तनाव को रोकना है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि वे प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने से बचें और मौके पर तैनात अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें। 16 और 17 अक्टूबर को बंद रहेगा Central Park कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखने का फैसला लिया गया है। यह वही स्थान है, जहां CJP ने तिरंगा मार्च आयोजित करने की अपील की थी। पार्क बंद रहने और आसपास सुरक्षा बढ़ने से कनॉट प्लेस आने वाले लोगों को अपनी योजना में बदलाव करना पड़ सकता है। खासकर बाजार, दफ्तरों और आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जाने वाले लोगों को निकलने से पहले ताजा जानकारी देख लेनी चाहिए। Delhi Traffic Advisory: कई रास्तों पर डायवर्जन की तैयारी मार्च के कारण कनॉट प्लेस और मध्य दिल्ली के आसपास यातायात प्रभावित होने की आशंका है। ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार, जरूरत पड़ने पर कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया जा सकता है। दफ्तर जाने वाले लोगों, यात्रियों और कनॉट प्लेस आने वाले ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलें। संभव हो तो वैकल्पिक मार्ग चुनें और यात्रा से पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक अपडेट जरूर देख लें। गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन, प्रशासन की कानून-व्यवस्था पर नजर CJP का यह मार्च अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध से जुड़ा है। पार्टी तिरंगा लेकर प्रदर्शन करना चाहती है, जबकि प्रशासन का ध्यान सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने पर है। कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख कारोबारी और पर्यटन क्षेत्र है। ऐसे में सुरक्षा प्रतिबंधों और ट्रैफिक बदलावों का असर आम लोगों के साथ स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, मार्च को लेकर स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। लोगों के लिए बेहतर होगा कि वे अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय पुलिस और प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rajnath Singh

Rajnath Singh Statement: SIR विवाद पर विपक्ष को घेरा, Bangladesh मॉडल का जिक्र

देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भारत में बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का एजेंडा देश में अस्थिरता पैदा करना है। राजनाथ सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। इस मुद्दे पर बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर बीजेपी विरोध प्रदर्शनों के पीछे राजनीतिक मंशा होने का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को उठाने की बात कर रहा है। Rajnath Singh ने विपक्ष पर क्या कहा? रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बांग्लादेश में हुए घटनाक्रम की तर्ज पर भारत में भी सत्ता परिवर्तन का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की राजनीति से देश में तनाव और अस्थिरता बढ़ सकती है। राजनाथ सिंह के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। बीजेपी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्थिरता और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़कर देख रही है। हालांकि, विपक्ष के इरादों को लेकर लगाए गए ये आरोप राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। SIR विवाद को लेकर क्यों आमने-सामने हैं BJP और Opposition? SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष जांच और पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलतियों को दूर करना है। लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव से जुड़े मामलों में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। दूसरी तरफ, बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष SIR के मुद्दे को राजनीतिक आंदोलन का रूप देकर सरकार और चुनावी संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी खींचतान के कारण यह मामला अब संसद और चुनावी प्रक्रिया से आगे बढ़कर सड़क पर भी चर्चा का विषय बन गया है। Rahul Gandhi और विरोध प्रदर्शनों पर भी सियासत तेज SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की भूमिका भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी हुई है। बीजेपी लगातार विपक्ष के आंदोलन के उद्देश्य पर सवाल उठा रही है। वहीं, विपक्ष का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है। मतदाता सूची में किसी भी तरह की कथित अनियमितता को सामने लाना और उसका समाधान मांगना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा किस तरह आगे बढ़ती है और राजनीतिक दल अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखते हैं। ‘Regime Change’ बयान से बढ़ा विवाद राजनीतिक बहस में ‘Regime Change’ यानी सत्ता परिवर्तन का मुद्दा भी चर्चा में है। इस शब्द को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कुछ विपक्षी नेता सरकार बदलने के लिए देश में बड़े आंदोलन की जमीन तैयार करना चाहते हैं। दूसरी ओर, सरकार बदलने की मांग करना अपने आप में लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा है। असली सवाल यह है कि विरोध किस उद्देश्य से किया जा रहा है और उसके समर्थन में क्या प्रमाण मौजूद हैं। इसी वजह से इस विवाद को केवल राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर समझने के बजाय संबंधित नेताओं के बयानों, घटनाक्रम और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर देखना जरूरी है। आगे क्या होगा? Rajnath Singh के बयान ने SIR विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बीजेपी और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है। फिलहाल, मतदाता सूची की प्रक्रिया, चुनावी पारदर्शिता और विरोध प्रदर्शनों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित मुद्दों पर चुनाव आयोग और अदालतों में क्या कार्रवाई होती है तथा राजनीतिक दल अपने दावों को किस तरह सामने रखते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मां कात्यायनी

Navratri 2026: छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा, जानें महिषासुर वध की कथा और मंत्र

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी दुर्गा का यह स्वरूप शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी को महिषासुर का वध करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है। मां कात्यायनी की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने देवी की कठोर आराधना की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया और कात्यायनी कहलायीं। मान्यता है कि देवी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः। भोग: मां को शहद अर्पित करने की परंपरा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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