भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लंबे समय से चली आ रही बातचीत के बाद ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसे विशेषज्ञ अक्सर “सभी समझौतों की माँ” भी कहते हैं। यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों के बाजार और विश्व GDP के लगभग 25% हिस्से को कवर करता है।
इस समझौते से भारत और यूरोप के बीच अधिकतर सामान पर शुल्क कम या खत्म हो जाएगा। इसका मतलब है कि भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय मार्केट तक पहुंच आसान होगी, और यूरोपीय कंपनियों के लिए भी भारत में व्यापार करना सरल होगा।
कौन से सेक्टर होंगे सबसे ज्यादा फायदे में?
- भारत की ओर: वस्त्र, चमड़ा, हस्तशिल्प, फुटवियर, समुद्री उत्पाद
- यूरोप की ओर: शराब, ऑटोमोबाइल, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स
अमेरिकी प्रशासन की राय
ट्रंप प्रशासन के समय के अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर ने कहा कि यह समझौता भारत के लिए काफी लाभकारी साबित होगा। उन्होंने बताया कि भारत को यूरोप में व्यापार का बेहतर अवसर और कुछ मामलों में वर्कर वीज़ा जैसी सुविधाएँ भी मिल सकती हैं।
ग्रीयर ने यह भी कहा कि अमेरिका के हाल के वर्षों के प्रोटेक्शनिस्ट टैरिफ और घरेलू उत्पादन प्रोत्साहन की नीतियों के चलते, भारत ने EU के साथ व्यापार बढ़ाने की दिशा चुनी।
क्यों है यह समझौता खास?
पिछले कुछ सालों में अमेरिका ने भारत से जुड़े कई मामलों में 25% तक टैरिफ लगाए, जिससे भारत ने यूरोप के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना जरूरी समझा। इस समझौते से भारत को न केवल निर्यात में फायदा, बल्कि वैश्विक व्यापार में अधिक विकल्प और रणनीतिक ताकत भी मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत और यूरोप के संबंधों को नए आयाम देगा और अमेरिका की प्रोटेक्शनिस्ट नीतियों के बीच भारत की जीत साबित होगा।
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