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Ajit Pawar

Ajit Pawar Death Sunetra Pawar को Deputy CM बनाने की NCP की मांग

महाराष्ट्र की राजनीति में अचानक उठी हलचल का केंद्र अब Ajit Pawar की मौत बन गया है। उनके निधन ने NCP (Nationalist Congress Party) और महाराष्ट्र सरकार में नई चुनौतियाँ पैदा कर दी हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने Sunetra Pawar को Deputy CM बनाने और Ajit Pawar के विभागों पर नियंत्रण बनाए रखने की मांग उठाई है। आइए जानें, इस घटनाक्रम का पूरा ब्यौरा। Sunetra Pawar को Deputy CM बनाने की मांग अजित पवार की अचानक मौत के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने CM Devendra Fadnavis से मुलाकात की और उनकी पत्नी Sunetra Pawar को Deputy Chief Minister पद पर नियुक्त करने की मांग की। Ajit Pawar के विभागों पर NCP का दावा अजित पवार के निधन के बाद, NCP नेताओं ने मुख्यमंत्री Fadnavis से मुलाकात कर उनके विभागों पर कंट्रोल बनाए रखने का दावा पेश किया। NCP के दो गुटों का विलय और भविष्य की रणनीति एनसीपी लंबे समय से दो गुटों में बंटी हुई है – शरद पवार गुट और अजित पवार गुट।Ajit Pawar के निधन से पहले दोनों गुटों के विलय की चर्चा चल रही थी और अब यह मामला और गंभीर हो गया है। राजनीतिक संतुलन और जनता के लिए असर अजित पवार की अचानक मौत से Maharashtra politics में नेतृत्व का संकट और कुर्सियों की लड़ाई सामने आई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कुवैत

कुवैत से दिल्ली आ रही IndiGo Flight में Bomb Threat Ahmedabad Airport पर उतारा गया विमान

कुवैत से दिल्ली आ रही IndiGo Airlines की अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब विमान के अंदर बम और हाईजैक की धमकी वाला नोट मिला। हैरानी की बात यह रही कि यह धमकी टिशू पेपर पर हाथ से लिखी गई थी। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पायलट ने तुरंत विमान को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई। कैसे सामने आई धमकी? फ्लाइट जब कुवैत से दिल्ली की ओर अपने निर्धारित रूट पर थी, तभी केबिन के अंदर एक संदिग्ध नोट मिला। इस नोट में विमान को हाईजैक करने और बम से उड़ाने की बात लिखी थी। जैसे ही यह जानकारी क्रू मेंबर्स तक पहुंची, पायलट ने बिना देरी किए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को अलर्ट किया। Ahmedabad Airport पर High Alert सुरक्षा कारणों से विमान को दिल्ली की बजाय सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अहमदाबाद की ओर डायवर्ट किया गया। फ्लाइट ने सुबह करीब 6:40 बजे सुरक्षित लैंडिंग की। रनवे पर पहले से ही CISF, बम स्क्वॉड, फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमें तैनात थीं। यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया विमान में मौजूद करीब 180 यात्रियों और सभी क्रू मेंबर्स को पूरी सावधानी के साथ बाहर निकाला गया। किसी भी यात्री के घायल होने या घबराहट की कोई सूचना नहीं है। यात्रियों ने भी राहत की सांस ली कि स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। विमान की गहन जांच लैंडिंग के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने विमान, कार्गो एरिया और यात्रियों के सामान की पूरी तरह से तलाशी ली। डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते की मदद से हर हिस्से की जांच की गई। शुरुआती जांच में कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, हालांकि जांच अभी जारी है। नोट किसने लिखा? जांच जारी सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि एजेंसियों का कहना है कि जब तक पूरी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक हर एंगल से मामले को देखा जा रहा है।
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Bengaluru

Bengaluru Airport बम धमकी Passenger Arrested, IndiGo Flight Delayed

बेंगलुरु के Kempegowda International Airport (KIA) पर बुधवार सुबह एक यात्री द्वारा दी गई बम धमकी ने हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट कर दिया। यात्री ने कहा कि उसके बैग में “दो छोटे बम (two small bombs)” हैं। इस झूठी धमकी की वजह से IndiGo की उड़ान 6E‑586 Ahmedabad के लिए देरी से रवाना हुई और पूरे हवाई अड्डे में सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई। घटना का विवरण सुबह लगभग 8 बजे, 52 वर्षीय Abu Aqeel Azhar Chad ने इंडिगो विमान की सुरक्षा जांच के दौरान कहा कि उसके पास बम हैं। यह बयान सुनते ही CISF और एयरपोर्ट सुरक्षा टीम सक्रिय हो गई। यात्रियों को विमान से उतार कर विमान और सामान की पूरी तलाशी ली गई। आरोपी की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई पुलिस ने Abu Aqeel Azhar Chad को तुरंत हिरासत में लिया। आरोपी ने पूछताछ में कहा कि उसने यह बात सुरक्षा जांच से परेशान होकर मज़ाक में कह दी थी। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 125 और 353 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यात्रियों और एयरपोर्ट पर असर हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Winter

Severe Winter in North India कश्मीर से राजस्थान तक सर्दी का कहर

उत्तर भारत में सर्दी और कोहरे का डबल अटैक उत्तर भारत इस समय भीषण ठंड (Winter) और घने कोहरे की चपेट में है। पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी राज्यों तक मौसम का मिजाज लगातार सख्त होता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में ठंड ने आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। सड़कों पर आवाजाही से लेकर कामकाज और स्वास्थ्य तक, हर स्तर पर सर्दी का असर साफ नजर आ रहा है। Sonmarg में रिकॉर्ड तोड़ ठंड, माइनस 11.2 डिग्री तक गिरा पारा जम्मू-कश्मीर के मशहूर पर्यटन स्थल सोनमर्ग (Sonmarg) में तापमान गिरकर –11.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। कड़ाके की शीतलहर के कारण झीलें और जलस्रोत जम गए हैं। कई इलाकों में पानी की पाइपलाइनें फ्रीज हो रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि, भारी ठंड के बावजूद बर्फ से ढके पहाड़ पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। प्रशासन ने मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। राजस्थान-MP में घना कोहरा, सड़क हादसों में 7 लोगों की मौत मैदानी राज्यों में स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम हो गई है। सुबह और रात के समय हाईवे और मुख्य सड़कों पर वाहन चलाना खतरनाक साबित हो रहा है। अलग-अलग जगहों पर हुए सड़क हादसों में 7 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन और पुलिस लगातार अलर्ट जारी कर रही है और ड्राइवरों से धीमी गति और सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। हरियाणा-पंजाब में तापमान 4°C से नीचे हरियाणा और पंजाब में भी ठंड का प्रकोप तेज हो गया है। दोनों राज्यों के 5 शहरों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। ठंडी हवाओं और कोहरे की वजह से सुबह की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है, जबकि ट्रेनें और बसें देरी से चल रही हैं। किसानों के लिए भी यह मौसम चुनौती बनता जा रहा है। मौसम विभाग की चेतावनी और जरूरी सावधानी मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों तक उत्तर भारत में ठंड और कोहरे से राहत मिलने की उम्मीद कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को खास सतर्कता बरतनी चाहिए। गर्म कपड़े पहनना, कोहरे में यात्रा से बचना और मौसम अपडेट पर नजर रखना बेहद जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शंकराचार्य

Prayagraj शंकराचार्य विवाद सुलह की ओर, प्रशासन देगा लिखित माफी!

प्रयागराज माघ मेला विवाद अब समाधान की ओर बढ़ता दिख रहा है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज प्रशासन के बीच चल रहा तनाव जल्द खत्म हो सकता है। ताज़ा घटनाक्रम में संकेत मिले हैं कि प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य से औपचारिक माफी मांगने को तैयार है, ताकि धार्मिक परंपरा और सम्मान को लेकर बना विवाद समाप्त किया जा सके। कैसे शुरू हुआ Shankaracharya–Prayagraj Controversy पूरा मामला 18 जनवरी, मौनी अमावस्या का है। उस दिन शंकराचार्य की परंपरागत पालकी को संगम नोज तक ले जाने से प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर रोक दिया। इसे शंकराचार्य ने अपमानजनक बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद वे माघ मेले क्षेत्र में लगातार 10 दिन तक धरने पर बैठे रहे, लेकिन समाधान न निकलने पर बिना संगम स्नान किए प्रयागराज छोड़कर चले गए। यह घटना साधु-संत समाज और धार्मिक संगठनों में भी चर्चा का विषय बन गई। प्रशासन की पहल: Lucknow से पहुंचे बड़े अधिकारी विवाद को बढ़ता देख लखनऊ से दो वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शंकराचार्य से मिलने वाराणसी पहुंचे। बातचीत के दौरान अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) को शंकराचार्य को पूरे सम्मान, परंपरा और सुरक्षा के साथ संगम स्नान कराया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इसी बातचीत में प्रशासन की ओर से माफी मांगने का प्रस्ताव भी सामने आया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की 2 शर्तें हालांकि शंकराचार्य ने साफ कर दिया है कि सुलह तभी संभव है जब उनकी दो शर्तें पूरी हों— क्या खत्म होगा विवाद? अब गेंद प्रशासन के पाले में है। माना जा रहा है कि धार्मिक भावनाओं और परंपराओं को देखते हुए प्रशासन शंकराचार्य की शर्तों पर सहमति जता सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह मामला सिर्फ एक विवाद का अंत नहीं होगा, बल्कि धार्मिक नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय की मिसाल भी बनेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UGC

Supreme Court ने लगाया UGC 2026 Rules पर रोक Higher Education में भारत की Unity जरूरी

भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने University Grants Commission (UGC) के नए 2026 Rules को स्थगित (stay) कर दिया है। इसका मतलब है कि ये नए नियम अभी लागू नहीं होंगे और पहले से मौजूद पुराने नियम ही फिलहाल मान्य रहेंगे। यह निर्णय शिक्षा जगत में काफी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि नए नियमों का मकसद था Higher Education Institutions में समानता (Equity) और भेदभाव रोकना। UGC के नए नियम क्या थे? नए नियमों के तहत: लेकिन ये नियम कुछ हद तक controversial साबित हुए। सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी रोक? मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि नियम में भेदभाव की परिभाषा केवल SC/ST/OBC तक सीमित है, जिससे General Category के लोगों को सुरक्षा नहीं मिलती। CJI ने यह भी कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में भारत की Unity और Samrasata झलकनी चाहिए, यानी शिक्षा का उद्देश्य कभी विभाजन पैदा नहीं करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने नियमों को vague और misuse के लिए सक्षम बताया। इसका मतलब है कि नियमों की भाषा इतनी अस्पष्ट थी कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता था। अब क्या होगा? अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय की गई है। छात्रों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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प्रेम बाईसा

साध्वी प्रेम बाईसा Suspicious Death इंस्टाग्राम पोस्ट ने बढ़ाई विवाद की आग

जोधपुर के चर्चित कथावाचक और साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत (suspicious death) ने पूरे राजस्थान में हलचल मचा दी है। उनके निधन के बाद सामने आया इंस्टाग्राम पोस्ट (Instagram post), जिसमें उन्होंने लिखा “दुनिया को अलविदा… न्याय की मांग”, ने मामले को और भी पेचीदा बना दिया है। मौत कैसे हुई? साध्वी प्रेम बाईसा को जोधपुर के आरती नगर आश्रम में अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में उन्हें ब्रेन डैड घोषित किया गया। उनके निधन की परिस्थितियाँ अभी संदिग्ध (suspicious circumstances) मानी जा रही हैं। इंस्टाग्राम पोस्ट का खुलासा उनकी मौत के कुछ घंटे बाद इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा किया गया। इसमें उन्होंने लिखा कि उन्होंने जीवन सनातन धर्म के प्रचार में समर्पित किया और अब दुनिया को अलविदा कह रही हैं, साथ ही कहा कि न्याय उन्हें जीवन में नहीं, शायद मौत के बाद मिलेगा। यह पोस्ट कई लोगों के लिए शॉकिंग (shocking) थी, क्योंकि यह उनकी मृत्यु की पुष्टि होने के बाद प्रकाशित हुई थी। पिछला विवाद और मानसिक दबाव पिछले साल साध्वी प्रेम बाईसा एक वायरल वीडियो विवाद में भी फंसी थीं। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो वायरल हुआ था और उन्होंने दावा किया कि उन्हें ब्लैकमेल किया गया। उन्होंने इसे मानसिक प्रताड़ना और बदनाम करने की साजिश बताया। राजनीतिक और समाजिक प्रतिक्रिया साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के बाद नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल समेत कई नेताओं ने उच्च स्तरीय जांच (high-level inquiry) की मांग की। समाज और उनके समर्थकों ने भी सच्चाई और न्याय की पुकार लगाई है। मामला क्यों विवादित है? पुलिस और प्रशासन अब मामले की पूरी जांच (full investigation) कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह आत्महत्या (suicide) है या इसके पीछे कोई और साजिश (conspiracy) है। साध्वी प्रेम बाईसा का निधन न सिर्फ धार्मिक और समाजिक दृष्टि से चौंकाने वाला है, बल्कि उनके इंस्टाग्राम पोस्ट ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं। न्याय की मांग तेज़ है और पूरी जांच के बाद ही सच्चाई (truth) सामने आएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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हिमाचल

उत्तर भारत Weather Alert हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बर्फबारी, बारिश का अलर्ट

उत्तर भारत (North India) में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) में भारी Snowfall और Blizzard की वजह से जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं राजस्थान (Rajasthan), उत्तर प्रदेश (UP) और बिहार (Bihar) में बारिश की संभावना को लेकर लोगों में सतर्कता बढ़ गई है। हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी से बिगड़े हालात हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बर्फबारी और बारिश के चलते सड़कें पूरी तरह बंद हो गई हैं। राज्यभर में 889 से ज्यादा सड़कें बंद हैं, जिनमें चार राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में लाहौल-स्पीति, शिमला, कुल्लू, मंडी, चंबा और किन्नौर हैं। बर्फबारी के कारण हजारों बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित है और प्रशासन सड़कें खोलने और बिजली बहाल करने में जुटा हुआ है। उत्तराखंड में 4 फीट तक बर्फ उत्तराखंड (Uttarakhand) के पहाड़ी इलाकों में भी इस बार भारी Blizzard आया है। गढ़वाल और कुमाऊं के ऊपरी क्षेत्रों में सड़कों पर 3 से 4 फीट तक बर्फ जमी हुई है। बर्फ के चलते यातायात ठप हो गया है और कई गांव बर्फ की चादर में ढक गए हैं। प्रशासन ने लोगों से ऊंचाई वाले इलाकों की यात्रा टालने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। राजस्थान, यूपी और बिहार में बारिश का अलर्ट उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों में मौसम विभाग ने Rain Alert जारी किया है। IMD का अपडेट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों तक पहाड़ी इलाकों में Snowfall और Rain जारी रहने की संभावना जताई है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की सलाह मानने की हिदायत दी गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

India Reform Express Mode में Budget से पहले PM Modi ने दिए बड़े संकेत

संसद का बजट सत्र 2026 शुरू होते ही देश की आर्थिक दिशा को लेकर माहौल गर्म हो गया है। बजट से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सरकार की आगे की रणनीति की झलक साफ दिखा दी है। पीएम मोदी ने कहा —“अब हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं।” इस एक लाइन में सरकार की सोच, गति और इरादे तीनों साफ झलकते हैं। PM Modi का Reform Message क्या बताता है? बजट सत्र की पूर्व संध्या पर मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि उनकी सरकार की पहचान रही है —Reform, Perform और Transform।अब यह प्रक्रिया किसी धीमी ट्रेन की तरह नहीं, बल्कि एक्सप्रेस स्पीड से आगे बढ़ रही है। इस बयान को सीधे तौर पर Budget 2026 से जोड़कर देखा जा रहा है। संकेत साफ है कि आने वाला बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं होगा, बल्कि सिस्टम सुधार, निवेश बढ़ाने और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने पर फोकस करेगा। Viksit Bharat 2047 की राह PM Modi ने अपने संबोधन में विकसित भारत 2047 का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल अपनी ज़रूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के लिए भी एक भरोसेमंद विकास मॉडल बन रहा है। उनके मुताबिक, भारत का विकास मॉडल मानव-केंद्रित है, जहां फैसले सिर्फ GDP नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे हैं। Global Opportunities पर सरकार की नजर प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को भी एक बड़ा अवसर बताया। इससे भारतीय उद्योगों, MSME सेक्टर और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि भारत अब केवल सस्ता उत्पादन करने वाला देश नहीं, बल्कि गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा के दम पर आगे बढ़ने को तैयार है। Budget 2026 से क्या उम्मीदें? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। आर्थिक सर्वे पहले ही पेश किया जा चुका है, जिसमें मजबूत विकास दर और स्थिर अर्थव्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बजट में: Opposition vs Government: सत्र रहेगा गर्म बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने कई सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। ऐसे में संसद के भीतर बहस तेज रहने के आसार हैं, लेकिन सरकार का फोकस साफ है — रिफॉर्म की रफ्तार बनाए रखना। PM Modi का “रिफॉर्म एक्सप्रेस” वाला बयान सिर्फ एक राजनीतिक लाइन नहीं है, बल्कि Budget 2026 की दिशा का संकेत है। सरकार यह साफ करना चाहती है कि भारत अब ठहरने वाला नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था अब तेज़, निर्णायक और भविष्य-केंद्रित फैसलों की पटरी पर दौड़ रही है — और अगला बड़ा स्टेशन है बजट 2026। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ajit Pawar

Ajit Pawar बारामती में अंतिम विदाई परिवार संग पहुंचे अमित शाह, नितिन गडकरी और BJP अध्यक्ष

बारामती में वरिष्ठ राजनेता अजित पवार (Ajit Pawar) के अंतिम संस्कार की रस्में भावुक माहौल के बीच जारी हैं। अपने लोकप्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए पवार परिवार के साथ-साथ हजारों समर्थक और शुभचिंतक बारामती पहुंचे। हर आंख नम थी और हर चेहरा शोक में डूबा नजर आया। अजित पवार को राजकीय सम्मान (State Honours) के साथ अंतिम विदाई दी जा रही है। अंतिम संस्कार स्थल पर सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों तक, हर वर्ग में उनके निधन को लेकर गहरा दुख देखा गया। Ajit Pawar Funeral में देश के बड़े नेता हुए शामिल अंतिम संस्कार में केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों से कई दिग्गज नेता शामिल हुए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बारामती पहुंचकर अजित पवार को श्रद्धांजलि दी। महाराष्ट्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और विधायक भी इस दौरान मौजूद रहे। नेताओं ने अजित पवार के राजनीतिक जीवन, प्रशासनिक अनुभव और जनता से उनके गहरे जुड़ाव को याद किया। कई नेताओं ने कहा कि अजित पवार सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े हुए नेता थे, जिन्होंने दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति को दिशा दी। आंध्र प्रदेश से भी पहुंचे मंत्री नारा लोकेश अजित पवार के अंतिम संस्कार में आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्री नारा लोकेश भी शामिल हुए। उन्होंने पवार परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और इसे देश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। अन्य राज्यों से आए प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने अजित पवार के राष्ट्रीय स्तर के प्रभाव को साफ तौर पर दिखाया। शोक में डूबी बारामती, कड़े सुरक्षा इंतजाम बारामती और आसपास के इलाकों में शोक का माहौल है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ट्रैफिक व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। लोग शांतिपूर्वक कतारों में खड़े होकर अपने प्रिय नेता को अंतिम दर्शन कर रहे हैं। अजित पवार का जाना सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। बारामती आज अपने नेता को नम आंखों से अलविदा कह रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में 175 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अटैचमेंट खत्म, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

स्वास्थ्य विभाग में मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे 175 डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा करने के बाद ही उन्हें अक्टूबर महीने का वेतन मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश CMHO के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को उसी दिन कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना होगा। इसकी जानकारी CMHO कार्यालय को भी उपलब्ध करानी होगी। वेतन आहरण केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही अक्टूबर का वेतन जारी किया जाए। इससे कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होगा। अटैचमेंट जारी मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने आदेश के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी अटैचमेंट पर काम करता पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का पालन कराने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं को भेजा गया आदेश यह आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, देपालपुर, मानपुर, सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों, महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भेजा गया है। आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
लालकृष्ण आडवाणी

LK Advani Hospitalised ICU में भर्ती लालकृष्ण आडवाणी की सेहत कैसी? जानें ताजा अपडेट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सेहत को लेकर 17 अक्टूबर को ताजा जानकारी सामने आई है। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण (Chest Infection) की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। परिवार और समर्थकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है। डॉक्टर उनकी सेहत से जुड़ी जरूरी जांच कर रहे हैं और इलाज जारी है। LK Advani Health Update: अस्पताल में क्या चल रहा है इलाज? लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी सेहत में आगे कितना सुधार हुआ है और अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं लालकृष्ण आडवाणी लालकृष्ण आडवाणी को इससे पहले मई 2026 में भी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। दिसंबर 2024 में भी उन्हें अपोलो अस्पताल की ICU में रखा गया था। उस समय डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज किया था। जून और जुलाई 2024 में भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बढ़ती उम्र को देखते हुए उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा समय में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। PM Modi ने हाल ही में की थी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी के अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की थी। आडवाणी लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि उनकी सेहत से जुड़ी खबर पर राजनीतिक जगत और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है। राम रथ यात्रा से उपप्रधानमंत्री तक का सफर लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। वह भारतीय जनता पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2002 से 2004 तक वह भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। देश की राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। LK Advani अब अगले हेल्थ अपडेट का इंतजार लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 17 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और सीने में संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। अब सभी की नजर अस्पताल की ओर से जारी होने वाले अगले हेल्थ अपडेट पर है। उनकी सेहत में सुधार, इलाज की स्थिति और डिस्चार्ज को लेकर नई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि लालकृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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