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Trump Tariff on India: भारत पर 100% टैरिफ का खतरा टला, रूस से Diesel Deal के बाद बड़ा फैसला

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Trump ने भारत पर 100% तक टैरिफ (Tariff) लगाए जाने की आशंका को फिलहाल टाल दिया है। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता खोलने वाले कानून के अहम प्रावधानों को ट्रम्प ने रोक दिया है। 17 अक्टूबर 2026 को सामने आए इस फैसले से भारत और चीन जैसे देशों को राहत मिली है, जो रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदते हैं।

इस फैसले की खास बात यह है कि अमेरिका ने रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर समझौता करने के कुछ ही दिनों बाद यह कदम उठाया है। एक तरफ ट्रम्प प्रशासन रूस पर आर्थिक दबाव बनाने की नीति से जुड़ा कानून रोक रहा है, तो दूसरी तरफ ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इस घटनाक्रम ने अमेरिका की रूस नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Trump ने 100% Tariff वाले कानून पर क्यों लगाई रोक?

अमेरिका में रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम से कानून लाया गया था। इसका उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक क्षमता पर दबाव बढ़ाना था।

इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। भारत और चीन जैसे देश भी इसकी जद में आ सकते थे।

हालांकि, कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित के आधार पर प्रतिबंधों और शुल्कों से छूट देने का अधिकार दिया गया था। ट्रम्प ने इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए 16 अक्टूबर को कार्यकारी आदेश जारी किया। इसके बाद 17 अक्टूबर को इस फैसले की जानकारी सामने आई।

ट्रम्प ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल इन प्रावधानों को लागू न करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। यह रोक स्थायी नहीं है। भविष्य में अमेरिकी प्रशासन जरूरत के मुताबिक इन उपायों को फिर से लागू करने का फैसला ले सकता है।

Russia Diesel Deal के बाद बदला अमेरिकी रुख

ट्रम्प का यह फैसला रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर हुए समझौते के कुछ दिनों बाद आया है। 9 अक्टूबर को ट्रम्प ने कहा था कि रूस तत्काल 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल अमेरिका और वैश्विक बाजारों में भेजने पर सहमत हुआ है।

इस समझौते का उद्देश्य बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में मदद करना बताया गया। अमेरिका में डीजल की महंगाई का असर किसानों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और माल ढुलाई जैसे क्षेत्रों पर पड़ता है।

हालांकि, रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाने के फैसले की अमेरिका में आलोचना भी हुई। कुछ सांसदों ने चिंता जताई कि रूसी ऊर्जा से जुड़े प्रतिबंधों में राहत देने से रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि अमेरिका यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर दबाव बनाने की बात करता रहा है।

यही वजह है कि रूस से डीजल खरीदने का समझौता और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ रोकने का फैसला अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

भारत को 100% Tariff से कितनी राहत मिली?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। रूस भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में रूसी तेल की खरीद के कारण भारत पर अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने की आशंका बनी हुई थी।

अगर अमेरिका भारत से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाता, तो भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते थे। इससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा में परेशानी होती और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर भी दबाव बढ़ सकता था।

ट्रम्प के ताजा फैसले से रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत के खिलाफ इस कानून के तहत तत्काल टैरिफ लगाए जाने का खतरा फिलहाल कम हो गया है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत को अमेरिका के सभी टैरिफ से छूट मिल गई है। यह फैसला रूस से संबंधित कानून के खास प्रावधानों पर रोक लगाने से जुड़ा है। अमेरिका की दूसरी व्यापार नीतियां और भारत पर लागू अन्य शुल्क अलग विषय हैं।

भारत ने अमेरिका के सामने क्या पक्ष रखा था?

रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच पहले भी मतभेद सामने आए हैं। भारत का कहना रहा है कि ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले देश की जरूरतों, कीमतों और आपूर्ति की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।

17 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों को उम्मीद थी कि अमेरिका नए कानून के तहत भारत पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा। भारत ने वॉशिंगटन के सामने अपनी चिंताएं भी रखी थीं।

अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने भी इससे पहले कहा था कि ट्रम्प इस मामले पर जल्द फैसला लेंगे। अब अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश से भारत पर तत्काल अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की आशंका कम हुई है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इसलिए आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाली चर्चा भी महत्वपूर्ण होगी।

Trump के फैसले पर अमेरिका में क्यों उठे सवाल?

ट्रम्प के फैसले का अमेरिका में कुछ रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों ने विरोध किया है। आलोचकों का कहना है कि रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए बनाया गया कानून लागू होने से पहले ही रोक देने से यूक्रेन को समर्थन देने की अमेरिकी नीति पर सवाल खड़े होते हैं।

कुछ सांसदों ने रूस से डीजल खरीदने के समझौते पर भी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि रूसी ऊर्जा की बिक्री से मिलने वाला पैसा रूस की युद्ध संबंधी गतिविधियों को मदद पहुंचा सकता है।

दूसरी ओर, ट्रम्प प्रशासन का जोर अमेरिकी राष्ट्रीय हित, ऊर्जा आपूर्ति और घरेलू ईंधन की कीमतों पर है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि रूस पर दबाव बनाए रखने की नीति और अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

India-US Trade Relations पर क्या होगा असर?

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत पर 100% तक टैरिफ लगाए जाने की आशंका से कारोबारी अनिश्चितता बढ़ सकती थी।

फिलहाल ट्रम्प के फैसले से रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर तत्काल टकराव की आशंका कम हुई है। इससे दोनों देशों को व्यापार वार्ता आगे बढ़ाने के लिए कुछ राहत मिल सकती है।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तुरंत पूरा हो जाएगा या भारत पर लागू सभी अमेरिकी टैरिफ कम कर दिए जाएंगे। आगे की स्थिति दोनों देशों की बातचीत और अमेरिकी प्रशासन के अगले कदमों पर निर्भर करेगी।

आगे क्या होगा?

ट्रम्प ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देने वाले कानून के अहम प्रावधानों को फिलहाल रोक दिया है। इस फैसले से भारत को तत्काल राहत मिली है, लेकिन भविष्य में अमेरिकी नीति बदलने की संभावना बनी हुई है।

रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि अमेरिका रूस से जुड़े प्रतिबंधों पर क्या रुख अपनाता है और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है।

फिलहाल भारत के लिए राहत की बात यह है कि रूसी तेल खरीदने के मुद्दे पर 100% टैरिफ का तत्काल खतरा टल गया है। हालांकि, इसे स्थायी छूट मानना सही नहीं होगा।

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Abhijeet Dipke

Delhi तिरंगा मार्च से पहले Abhijeet Dipke पर पुलिस कार्रवाई, नेहा बोरा को मिली रिहाई

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रायपुर में 13 पुलिसकर्मियों का सम्मान, नवजात को बचाने से लेकर मोबाइल लुटेरे को पकड़ने तक की कार्रवाई

यातायात व्यवस्था संभालने के साथ अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले 13 पुलिसकर्मियों को पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने सम्मानित किया। इन पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी के दौरान लावारिस नवजात को अस्पताल पहुंचाया, मोबाइल छीनकर भागने वाले आरोपी को पकड़ा और चाकू लहराकर लोगों को डराने वाले ई-रिक्शा चालक को भी गिरफ्तार कराया। सम्मानित पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार दिया गया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि यातायात व्यवस्था संभालना पुलिस की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही ड्यूटी के दौरान अपराध या संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर तत्काल कार्रवाई करना भी जरूरी है। बिना नंबर की बाइक रोकी, मोबाइल छीनने का आरोपी पकड़ा 14 अक्टूबर को बंजारी मंदिर के पास यातायात पुलिस ने बिना नंबर प्लेट की बाइक को रोका। इस दौरान धनीराम चंद्रा ने बाइक चालक पर मोबाइल और 700 रुपये छीनने का आरोप लगाया। तलाशी के दौरान पुलिस को मोबाइल मिला, जिसके बाद आरोपी करण पाल को पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई में प्रधान आरक्षक विजय मार्कण्डेय समेत पांच पुलिसकर्मी शामिल थे। उर्स मेले में चाकू लहराने वाला ई-रिक्शा चालक पकड़ा 8 अक्टूबर को एवरग्रीन चौक पर उर्स मेले के दौरान ड्यूटी कर रहे आरक्षक ललित कुमार साहू ने चाकू लहराकर लोगों को डराने वाले ई-रिक्शा चालक को पीछा कर पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी को ई-रिक्शा समेत गोलबाजार पुलिस के हवाले कर दिया गया। नकली शराब की सूचना पर जांच, मिला चोरी का मोबाइल 14 अक्टूबर को पंडरी शराब दुकान के पास नकली शराब बेचने की सूचना मिलने पर यातायात पुलिस ने एक संदिग्ध को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके पास मोबाइल मिला। जांच में मोबाइल चोरी का होने की जानकारी सामने आई। इस कार्रवाई में निरीक्षक अमित पद्मशाली, प्रधान आरक्षक श्रीकांत मिश्रा और आरक्षक रमेंद्र वर्मा शामिल थे। नवजात को छोड़कर भाग रहे व्यक्ति को पकड़ा 13 अक्टूबर को राजेंद्र नगर अंडरब्रिज के पास मदर टेरेसा मिशनरीज के गेट पर एक नवजात को छोड़कर भाग रहे गोंदिया निवासी रफीक शेख को यातायात पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिसकर्मियों ने नवजात को नवकार अस्पताल पहुंचाया और आरोपी को टिकरापारा थाने के सुपुर्द कर दिया। इस कार्रवाई में निरीक्षक गोविंद यादव, प्रधान आरक्षक कुलेश्वर राजपूत और आरक्षक सुनील क्षत्रीय, गोपाल सिंह राजपूत व विजय सेन शामिल थे। पुलिस कमिश्नर ने बढ़ाया पुलिसकर्मियों का उत्साह इन सभी मामलों में तत्परता दिखाने वाले कुल 13 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि पुलिसकर्मियों की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

SECL दीपका खदान प्रभावितों की मांगों पर बोर्ड लेगा फैसला, 500 रजिस्ट्री धारकों के मुआवजे का मामला अटका

छत्तीसगढ़ के हरदीबाजार में SECL की दीपका खदान विस्तार परियोजना से प्रभावित भू-विस्थापितों ने अधिग्रहित जमीन की खरीदी-बिक्री के बाद बने मकानों के मुआवजे में कटौती का मुद्दा उठाया है। प्रभावितों ने मांग की है कि 500 रजिस्ट्री धारकों को भी 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजा दिया जाए। इस मामले में अंतिम निर्णय SECL कोल कंपनी का बोर्ड लेगा। एरिया प्रबंधन ने बोर्ड के अधिकारियों से चर्चा कराने का आश्वासन दिया है। मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से 16 अक्टूबर को प्रस्तावित CMD कार्यालय के घेराव आंदोलन की तैयारी चल रही थी। हालांकि, SECL प्रबंधन के साथ करीब चार घंटे चली त्रिपक्षीय वार्ता में सकारात्मक चर्चा के बाद भू-विस्थापितों ने फिलहाल आंदोलन टाल दिया है। अन्य मांगों पर भी प्रबंधन ने निर्णय के लिए समय मांगा है। विधायक की मौजूदगी में हुई त्रिपक्षीय वार्ता खदान प्रभावितों और SECL प्रबंधन के बीच पाली SDM रोहित सिंह की मौजूदगी में बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने की। 16 अक्टूबर को प्रस्तावित CMD कार्यालय के घेराव की सूचना मिलने के बाद एरिया प्रबंधन ने वार्ता बुलाई थी। SECL दीपका सभागार में हुई बैठक में भू-विस्थापितों ने अपनी मांगें अधिकारियों के सामने रखीं। इससे पहले 21 सितंबर को CMD मुख्यालय में भी मांगों पर चर्चा हुई थी, लेकिन प्रभावितों के मुताबिक उस समय कोई ठोस जवाब नहीं मिला। इसके बाद आंदोलन की चेतावनी दिए जाने पर प्रबंधन दो बार समय मांग चुका था। बैठक में ग्राम पंचायत हरदीबाजार के सरपंच लोकेश्वर कंवर ने भू-विस्थापितों के हित से जुड़े छह बिंदु रखे। सभी मुद्दों पर क्रमवार चर्चा की गई। उपसरपंच रेखा जायसवाल ने बहू के नाम पर नापी किए गए मकानों के लिए भी 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजा देने की मांग उठाई। प्रबंधन ने इस विषय पर चर्चा के बाद सकारात्मक निर्णय लेने का भरोसा दिलाया। 1800 मकानों को छह महीने में हटाने पर सहमति बैठक में हरदीबाजार के विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जानकारी के मुताबिक, प्रभावितों ने बसाहट नहीं लेने पर सहमति जताई है। छह महीने के भीतर नापी किए गए करीब 1800 मकानों को तोड़कर दूसरी जगह बसने वाले प्रभावितों को बसाहट के एवज में 15 लाख रुपये अतिरिक्त देने की बात सामने आई है। वहीं, SECL में नियमित रोजगार के लिए 52 डिसमिल जमीन का कटऑफ तय किया गया है। यानी इससे कम जमीन के मालिकाना हक वाले प्रभावितों को कंपनी में नियमित रोजगार नहीं मिलेगा। इसके अलावा, हरदीबाजार की 212 एकड़ जमीन का अधिग्रहण SECL नहीं कर रही है। कंपनी ने इसकी वजह संबंधित जमीन पर कोयला उपलब्ध नहीं होना बताई है। 2004 और 2010 में दो चरणों में हुआ था अधिग्रहण दीपका खदान के विस्तार के लिए हरदीबाजार गांव की जमीन का अधिग्रहण वर्ष 2004 और 2010 में दो चरणों में किया गया था। आरोप है कि अधिग्रहण के बाद भी तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री के जरिए जमीन की खरीदी-बिक्री होती रही और इसके बाद वहां मकान भी बनाए गए। SECL ने 26 अगस्त 2024 को अंतिम ड्रोन सर्वे कराया था। कंपनी के प्रावधानों के मुताबिक, इस सर्वे से पहले बने मकानों के लिए सोलेशियम सहित मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि ड्रोन सर्वे के बाद बने मकानों के लिए 40 प्रतिशत सिंगल मुआवजे का प्रावधान बताया गया है। इसी अंतर के कारण अधिग्रहण के बाद जमीन खरीदने वाले रजिस्ट्री धारक 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रभावितों का कहना है कि 26 अगस्त 2024 के अंतिम ड्रोन सर्वे को मकानों के मुआवजे के लिए कटऑफ माना जाना चाहिए। अब SECL बोर्ड के फैसले पर टिकी नजर बैठक में SECL के जीएम शरद तिवारी, गेवरा जीएम अशोक कुमार और CMD मुख्यालय के लैंड एक्विजिशन एंड रिहैबिलिटेशन (L&R) विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा ग्राम पंचायत रेंकी के सरपंच तीजराम उर्रे, उपसरपंच शिव यादव, पूर्व जनपद सदस्य अनिल टंडन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश जायसवाल और अन्य लोग शामिल हुए। फिलहाल 500 रजिस्ट्री धारकों के मुआवजे पर अंतिम फैसला SECL बोर्ड को लेना है। अन्य मांगों पर भी प्रबंधन ने समय मांगा है। ऐसे में भू-विस्थापितों को अब कंपनी के अगले निर्णय का इंतजार है।

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